॥ श्रीहरि:॥

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गीत-गोविंद (वर्ष-४, अंक-१०)

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गीत-गोविंद (वर्ष-४, अंक-८)

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गीत-गोविंद (वर्ष-४, अंक-७)

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Geet Govind (Year-4, Issue-4)

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Geet Govind (Year-4, Issue-5)

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  • प्रथम पृष्ठ
  • संपादकीय
  • यदि तुझे पा जाऊँ
  • सच्ची सलाह
  • निरभिमानी शिष्य
  • यह व्यापार
  • उसकी कीर्ति आज भी महक रही है!
  • गधेसे मनुष्य बनाना
  • नटखट बन्दर
  • नारदजीका कामविजय-विषयक अभिमानभंग
  • वृद्धावस्था
  • हमारा सम्बन्ध संसारसे नहीं है
  • एक अंग्रेज महानुभावकी महानता
  • महाराजा रणजीतसिंहकी उदारता
  • तप
  • बाबा! शेर बनकर गीदड़ क्यों बनते हो?
  • आनन्द कहाँ?
  • भगवान‍्का भोग
  • मनका इलाज—साधुकी समझदारी
  • चैतन्य-चरित्र
  • जैमिनीकृत महाभारतमें भक्तोंकी गाथा
  • अन्तिम पृष्ठ