इस पुस्तकमें श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका के ऋषिकेशमें स्थित वटवृक्ष तथा अन्य स्थानोंपर दिये हुए प्रवचनोंका संग्रह है। व्यवहार-सुधारकी जीवनमें कितनी आवश्यकता है, इसको कई ढंगसे इसमें समझाया गया है। इस प्रकारके सुधारके बिना ही भगवत्प्राप्तिमें विलम्ब हो रहा है। भगवान् की प्राप्तिमें क्या-क्या बाधाएँ हैं एवं वे किस प्रकार सुगमतासे शीघ्र दूर की जायँ, इन बातोंका विवेचन इन प्रवचनोंमें है। इनमेंसे कुछ प्रवचन स्वामी श्रीरामसुखदासजी तथा सेठजीके अन्तरंग सत्संगियोंके साथ प्रश्नोत्तर रूपमें भी हैं। इन प्रवचनोंकी गृहस्थ भाई-बहनोंके लिये बड़ी उपादेयता है। हमें आशा है, सभी भाई-बहन इस पुस्तकको पढ़कर लाभ उठायेंगे।