इस समय सारे संसारमें द्वेष, कलह और मार-काट मची हुई है। सभी लोग एक-दूसरेका विनाश करनेमें लगे हुए हैं, प्रकृति मानो पूर्णरूपसे क्षुब्ध हो रही है, किसीके जीवनमें सुख-शान्ति नहीं है, प्राणिमात्र विकल है। यह सब ईश्वरमें अविश्वास, सच्चे धर्मपर अनास्था और सदाचारके लोपका परिणाम है। इस भीषण स्थितिसे त्राण पाने और मानव-जीवनके प्रधान लक्ष्य भगवत्प्राप्तिके पुनीत पथपर लोगोंको अग्रसर करनेके लिये आवश्यकता है ईश्वरीय भावोंके पवित्र प्रचारकी। ऐसे आध्यात्मिक भाव सत्संगके बिना सहजमें नहीं मिल सकते। परन्तु सत्पुरुषोंका संग सब लोगोंको मिलना कठिन है। इसलिये सत्पुरुषोंकी वाणीका प्रचार किया जाता है, जिससे दूर-दूरके स्थानोंमें रहनेवाले लोग भी अनायास ही सत्संगका लाभ उठा सकें। प्रस्तुत पुस्तक में तत्त्व-चिन्तामणि के 'कल्याण' में प्रकाशित लेखों का संग्रह है। इन लेखोंमें अनुभव-सिद्ध तत्त्वोंका विवेचन और आदर्श सद्गुणोंका प्रदर्शन बड़े ही सुन्दर ढंगसे किया गया है। आसुरी दुर्गुणोंसे छूटकर अपनी ऐहिक और पारलौकिक उन्नति चाहनेवाले और मनुष्य-जीवनमें परम ध्येयकी प्राप्ति करनेकी इच्छा रखनेवाले प्रत्येक नर-नारीको इस ग्रन्थका अध्ययन और मनन करना चाहिये।