॥ श्रीहरि:॥

gstlogo
हिन्दीarrowdown
वैराग्य संदीपनी

हिन्दी/संस्कृत

प्रात:स्मरणीय गोस्वामी श्रीतुलसीदासजी महाराजका यह छोटा-सा ग्रन्थ ‘वैराग्य-संदीपनी’ है। इसमें कुल ६२ छन्द (दोहे-चौपाई-सोरठे) हैं। जिनमें तीन प्रकाश हैं। पहले ७ छन्दोंमें मंगलाचरण, भगवान् श्रीरामकी वन्दना, उनके स्वरूपका निरूपण और ‘वैराग्य-संदीपनी’ ग्रन्थकी प्रशंसा है। फिर २६ छन्दोंमें ‘संत-स्वभाव-वर्णनरूप’ प्रथम प्रकाश है। दूसरा प्रकाश ‘संत-महिमा-वर्णन’ ९ छन्दोंका और तीसरा ‘शान्ति-वर्णन’ २० छन्दोंका है। ग्रन्थ बहुत छोटा होनेपर भी बड़ा ही उपादेय है।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • मंगलाचरण और भगवत्स्वरूप-वर्णन
  • संत-स्वभाव-वर्णन
  • संत-महिमा-वर्णन
  • शान्ति-वर्णन
  • अन्तिम पृष्ठ

सम्बंधित ई-पुस्तकें

कवितावली

कवितावली

गीतावली

गीतावली

पार्वती मंगल

पार्वती मंगल

बरवै रामायण

बरवै रामायण

जानकी मंगल

जानकी मंगल