॥ श्रीहरि:॥

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उपनिषदों के चौदह रत्न

श्रद्धेय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • प्रार्थना
  • (१) ब्रह्म ही विजयी है
  • (२) अनोखा अतिथि
  • (३) आपद्धर्म
  • (४) गाड़ीवालेका ज्ञान
  • (५) गोसेवासे ब्रह्मज्ञान
  • (६) अग्निद्वारा उपदेश
  • (७) निरभिमानी शिष्य
  • (८) ‘तत्त्वमसि’
  • (९) एक सौ एक वर्षका ब्रह्मचर्य
  • (१०) तीन बार ‘द’
  • (११) परम धन
  • (१२) घोड़ेके सिरसे उपदेश
  • (१३) सर्वश्रेष्ठ ब्रह्मनिष्ठ
  • (१४) सद्‍गुरुकी शिक्षा
  • अन्तिम पृष्ठ

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