तत्त्वविचार मेरे सम्मान्य भाई श्रीज्वालाप्रसादजीके कुछ लेखोंका संग्रह है। मेरे ही आग्रहसे आपने प्राय: इन लेखोंको लिखा था। श्रीज्वालाप्रसादजी अपनेको लेखक नहीं मानते। और लेखककी हैसियतसे पाठकोंके सामने उपस्थित होनेमें अपनी अयोग्यता प्रकट करते हुए पाठकोंसे क्षमा चाहते हैं। यह बात सत्य भी है कि वे लेखक नहीं हैं, वे विचारशील पुरुष हैं और मेरे मतसे उनके सुन्दर विचारोंको पाकर कोई भी लेखक सुलेखक बन सकता है। पाठक इस पुस्तकमें लिखित विचारोंको पढ़कर लाभ उठावें ऐसी मेरी प्रार्थना है।