॥ श्रीहरि:॥

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सुन्दर समाज का निर्माण

श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • +
    प्रवचन—१
    • समाजकी जिम्मेवारी—बड़ोंपर
    • श्रेष्ठ गुण निरभिमानता
    • व्याख्यान देनेके अधिकारी
    • बड़प्पनका अभिमान
    • उपयोगकी महिमा
    • छोटे स्नेहके पात्र
    • बालकोंपर जिम्मेवारी
    • विद्यार्थियोंपर जिम्मेवारी
    • नमस्कारकी महिमा
    • सुधारका सुन्दर तरीका
    • माँ-बापकी सेवा
    • पढ़ाईका उद्देश्य
    • आज्ञा-पालनसे लाभ
  • +
    प्रवचन—२
    • विवाहका पवित्र उद्देश्य
    • मन भगवान‍्में कैसे लगे?
    • मन न लगनेमें कारण
    • भोगे हुए संस्कार कैसे नष्ट हों?
    • बुरे संस्कार क्यों पड़ते हैं?
    • बुरे संस्कार कैसे मिटें?
    • समता कैसे रहे?
    • समता स्वत:सिद्ध है
    • अपने-आपमें स्थित होना
  • +
    प्रवचन—३
    • परमात्मतत्त्वकी नित्यता
    • परमात्म-प्राप्तिमें खास बाधा
    • प्रत्येक परिस्थितिमें सम रहें
    • चिन्ता मिटानेके विषयमें एक कहानी
    • सुखी-दु:खी होनेमें कारण—मूर्खता
    • करनेमें सावधान होनेमें प्रसन्न
    • धनके लिये अन्याय मत करो
    • सती सुकलाकी कथा
    • संसारमें रहनेका तरीका
  • +
    प्रवचन—४
    • असली स्वतन्त्रता
    • स्वभाव सुधारनेका अवसर
    • सुख पहुँचानेका भाव
    • शुद्ध स्वभावकी आवश्यकता
    • शुद्ध स्वभाववालेका आदर
    • स्वभाव शुद्ध करनेका उपाय
  • +
    प्रवचन—५
    • मनुष्य-जीवनकी सार्थकता
    • वर्तमान पतनका कारण
    • मनुष्य-जीवनकी सफलता—किसमें?
    • तीन शक्तियाँ—जानना, करना और पाना
    • पापका फल—दु:ख-प्राप्ति
    • शीघ्र चेत करो ! मौत नजदीक आ रही है।
    • मानव-जीवनका खास काम
  • +
    प्रवचन—६
    • रुपयोंमें सुख नहीं
    • अनुभवका आदर करो
    • सत्संगसे शान्ति
    • परमात्मसुखमें स्वतन्त्रता
    • सर्वत्र परमात्मसुख
    • राजा भर्तृहरिकी कथा
    • सुख केवल भगवान‍्की ओर
  • +
    प्रवचन—७
    • श्रेष्ठ साधन—शरणागति
    • भगवान् पर जिम्मेवारी
    • कर्णकी कथा
    • असली धन—समयका सदुपयोग
    • केवल भगवान‍्का सहारा
    • महाभारत-युद्धकी घटना
  • अन्तिम पृष्ठ

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