महाकवि कालिदासके ‘स्तोत्रं कस्य न तुष्टये’ इस वचनके अनुसार विश्वमें ऐसा कोई भी प्राणी नहीं है, जो स्तुतिसे प्रसन्न न हो जाता हो। राजनीतिके ग्रन्थोंमें कहा गया है कि ‘साम’ या स्तुतिके द्वारा राक्षस आदि भयंकर सत्त्व भी वशीभूत हो जाते हैं। इसीलिये दण्ड, भेद, दान आदि नीतियोंमें ‘साम’ या स्तुति-प्रशंसाको ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अतएव वेदोंसे लेकर इतिहास, पुराण एवं काव्योंतकमें सर्वत्र सूक्त एवं स्तोत्र भरे पड़े हैं, जिनका संग्रह एक महासमुद्रके समान होगा। प्रस्तुत ग्रन्थमें केवल गणेश, शिव, शक्ति, विष्णु, राम, कृष्ण एवं सूर्य आदि प्रमुख देवताओंके प्रसिद्ध स्तोत्रोंका संग्रह किया गया है। अन्तमें प्रकीर्णस्तोत्रोंमें देवताओंके प्रात:स्मरण तथा कुछ ज्ञानप्रद आध्यात्मिक स्तोत्र भी दिये गये हैं तथा अकालमृत्यु-रोगादिसे रक्षा करनेवाला परम उपयोगी एवं अनुभूत मृत्युंजयस्तोत्र भी संलग्न कर दिया गया है। इन स्तोत्रोंके द्वारा आराधना किये जानेपर सभी देवता प्रसन्न होकर उपासकका परम कल्याण करते हैं। आशा है, पाठक-पाठिकाएँ इससे लाभ उठानेका प्रयास करेंगे।