॥ श्रीहरि:॥

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श्रीनारायणकवच

हिन्दी/संस्कृत

  श्रीनारायणकवच भगवान् श्रीविष्णुजी को समर्पित है। ‘कवच’ का अर्थ रक्षा का प्रतीक है। भय का अवसर उपस्थित होनेपर नारायणकवच धारण करके अपने शरीरकी रक्षा कर लेनी चाहिए। यह कवच श्रीमद्भागवत महापुराण के छठे स्कन्ध के आठवें अध्याय में वर्णित है।
  इस पाठ में भक्त भगवान् विष्णु का स्मरण करते हुए अपनी रक्षा हेतु विष्णु के सभी अवतारों से रक्षा मांगते है। जल में   भगवान् मत्स्य, थल में भगवान वामन अवतार, आकाश में त्रिविक्रम भगवान उन्हें रक्षा प्रदान करते है। पर्वत पर परशुरामजी, मार्गमें वाराह देव रक्षा करते है।
  इस नारायणकवच का नियमित पाठ करने साधक की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। श्रीशुकदेवजी कहते है— परीक्षित् जो पुरुष इस नारायणकवचको धारण करता है, उसके सामने सभी प्राणी आदरसे झुक जाते हैं और वह सब प्रकारके भयोंसे मुक्त हो जाता है। 
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