॥ श्रीहरि:॥

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सिद्धान्त एवं रहस्य की बातें

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • स्वाभाविक ध्यानकी महत्ता
  • महात्माके संगसे लाभ
  • महात्माओंकी कृतज्ञता
  • स्वार्थ-त्यागकी महिमा
  • नामजपका प्रभाव एवं रहस्य
  • निर्भरता तथा निष्कामता
  • भगवान‍्की लीलामें तत्त्व एवं रहस्य
  • निरन्तर ध्यानकी युक्ति
  • भरतजीका भगवान् राममें प्रेम
  • द्रष्टाके ध्यानसे स्वरूपकी प्राप्ति
  • भगवान‍्का तत्त्व-रहस्य
  • सिद्धान्त एवं रहस्यकी बातें
  • ध्यानकी विधि
  • वास्तविक सिद्धान्त
  • सगुण-साकार भगवान‍्का ध्यान
  • महात्मा और भगवान‍्की विशेषता
  • ज्ञातृत्वरहित चेतन
  • महात्माका अनुभव—‘‘परमात्मा है’’
  • श्रद्धासे विशेष लाभ
  • अहंता-ममता कैसे मिटे?
  • भगवान‍्की लीलाका तत्त्व-रहस्य
  • ज्ञाता, ज्ञान तथा ज्ञेयका विवेचन
  • भावका फल
  • भगवान‍्का साकार स्वरूप
  • राग-द्वेष मिटानेके उपाय
  • प्रकृति नित्य है अथवा सान्त
  • भरतजीका रामजीमें प्रेम
  • समर्पण
  • भाव-सुधारकी आवश्यकता
  • सार बातें
  • प्रश्नोत्तर
  • भगवान‍्के गुण-प्रभावादिका अनुभव
  • अन्तिम पृष्ठ

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