॥ श्रीहरि:॥

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श्रीमद‍्भागवतमहापुराण in Hindi with detailed हिन्दी व्याख्या,

हिन्दी/संस्कृत

श्रीमद‍्भागवत साक्षात् भगवान‍्का स्वरूप है। इसीसे भक्त-भागवतगण भगवद‍्भावनासे श्रद्धापूर्वक इसकी पूजा-आराधना किया करते हैं। भगवान् व्यास-सरीखे भगवत्स्वरूप महापुरुषको जिसकी रचनासे ही शान्ति मिली; जिसमें सकाम कर्म, निष्काम कर्म, साधनज्ञान, सिद्धज्ञान, साधनभक्ति, साध्यभक्ति, वैधी भक्ति, प्रेमा भक्ति, मर्यादामार्ग, अनुग्रहमार्ग, द्वैत, अद्वैत और द्वैताद्वैत आदि सभीका परम रहस्य बड़ी ही मधुरताके साथ भरा हुआ है, जो सारे मतभेदोंसे ऊपर उठा हुआ अथवा सभी मतभेदोंका समन्वय करनेवाला महान् ग्रन्थ है—उस भागवतकी महिमा क्या कही जाय। इसके प्रत्येक अंगसे भगवद‍्भावपूर्ण पारमहंस्य ज्ञान-सुधा-सरिताकी बाढ़ आ रही है—यस्मिन् पारमहंस्यमेकममलं ज्ञानं परं गीयते। भगवान‍्के मधुरतम प्रेम-रसका छलकता हुआ सागर है—श्रीमद‍्भागवत। इसीसे भावुक भक्तगण इसमें सदा अवगाहन करते हैं। परम मधुर भगवद् रससे भरा हुआ 'स्वादु-स्वादु पदे-पदे' ऐसा ग्रन्थ बस, यह एक ही है। इसकी कहीं तुलना नहीं है। विद्याका तो यह भण्डार ही है। विद्या भागवतावधि: प्रसिद्ध है। इस ‘परमहंससंहिता’ का यथार्थ आनन्द तो उन्हीं सौभाग्यशाली भक्तोंको किसी सीमातक मिल सकता है, जो हृदयकी सच्ची लगनके साथ श्रद्धा-भक्तिपूर्वक केवल ‘भगवत्प्रेमकी प्राप्ति’ के लिये ही इसका पारायण करते हैं। यों तो श्रीमद‍्भागवत आशीर्वादात्मक ग्रन्थ है, इसके पारायणसे लौकिक-पारलौकिक सभी प्रकारकी सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। इसमें कई प्रकारके अमोघ प्रयोगोंके उल्लेख हैं—जैसे ‘नारायण-कवच’ (स्क० ६ अ०८)-से समस्त विघ्नोंका नाश तथा विजय, आरोग्य और ऐश्वर्यकी प्राप्ति; ‘पुंसवन-व्रत’ (स्क० ६ अ० १९)-से समस्त कामनाओंकी पूर्ति; ‘गजेन्द्रस्तवन’ (स्क० ८ अ० ३)-से ऋणसे मुक्ति, शत्रुसे छुटकारा और दुर्भाग्यका नाश, ‘पयोव्रत’ (स्क० ८ अ० १६)-से मनोवांछित संतानकी प्राप्ति; ‘सप्ताहश्रवण’ या पारायणसे प्रेतत्वसे मुक्ति। इन सब साधनोंका भगवत्प्रेम या भगवत्प्राप्तिके लिये निष्कामभावसे प्रयोग किया जाय तो इनसे भगवत्प्राप्तिके पथमें बड़ी सहायता मिलती है। श्रीमद‍्भागवतके सेवनका यथार्थ आनन्द तो भगवत्प्रेमी पुरुषोंको ही प्राप्त होता है। जो लोग अपनी विद्या-बुद्धिका अभिमान छोड़कर और केवल भगवत्कृपाका आश्रय लेकर श्रीमद‍्भागवतका अध्ययन करते हैं, वे ही इसके भावोंको अपने-अपने अधिकारके अनुसार हृदयंगम कर सकते हैं। जो लोग अपनी विद्या-बुद्धिका अभिमान छोड़कर और केवल भगवत्कृपाका आश्रय लेकर श्रीमद‍्भागवतका अध्ययन करते हैं, वे ही इसके भावोंको अपने-अपने अधिकारके अनुसार हृदयंगम कर सकते हैं।
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      • गर्भमें परीक्षित् की रक्षा, कुन्तीके द्वारा भगवान‍्की स्तुति और युधिष्ठिरका शोक
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      • युधिष्ठिरादिका भीष्मजीके पास जाना और भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुए भीष्मजीका प्राणत्याग करना
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      • द्वारकामें श्रीकृष्णका राजोचित स्वागत
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-३९
    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • परीक्षित् का जन्म
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • विदुरजीके उपदेशसे धृतराष्ट्र और गान्धारीका वनमें जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
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      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
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      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
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      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
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      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • अपशकुन देखकर महाराज युधिष्ठिरका शंका करना और अर्जुनका द्वारकासे लौटना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • कृष्णविरहव्यथित पाण्डवोंका परीक्षित् को राज्य देकर स्वर्ग सिधारना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • परीक्षित् की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वीका संवाद
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • महाराज परीक्षित् द्वारा कलियुगका दमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
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      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • राजा परीक्षित् को शृंगी ऋषिका शाप
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-३२
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      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • परीक्षित् का अनशनव्रत और शुकदेवजीका आगमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
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      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-२२
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      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
  • +
    द्वितीय: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • ध्यान-विधि और भगवान‍्के विराट्स्वरूपका वर्णन
    • +
      ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
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      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • भगवान‍्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
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      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • कामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद‍्भक्तिके प्राधान्यका निरूपण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
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      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • राजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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      • श्लोक-११
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      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • सृष्टि-वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-१६
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      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • विराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • भगवान‍्के लीलावतारोंकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • राजा परीक्षित् के विविध प्रश्न
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • ब्रह्माजीका भगवद्धामदर्शन और भगवान‍्के द्वारा उन्हें चतु:श्लोकी भागवतका उपदेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • भागवतके दस लक्षण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
  • +
    तृतीय: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • उद्धव और विदुरकी भेंट
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • उद्धवजीद्वारा भगवान‍्की बाललीलाओंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • भगवान‍्के अन्य लीलाचरित्रोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • उद्धवजीसे विदा होकर विदुरजीका मैत्रेय ऋषिके पास जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • विदुरजीका प्रश्न और मैत्रेयजीका सृष्टिक्रमवर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
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      • श्लोक-३०
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      • श्लोक-३२
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      • श्लोक-३८
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      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
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      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • विराट् शरीरकी उत्पत्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
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      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • विदुरजीके प्रश्न
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
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      • श्लोक-२२
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • ब्रह्माजीकी उत्पत्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • ब्रह्माजीद्वारा भगवान‍्की स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • दस प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
    • +
      अथैकादशोऽध्याय:
      • मन्वन्तरादि कालविभागका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • सृष्टिका विस्तार
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • वाराह-अवतारकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
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      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • दितिका गर्भधारण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • जय-विजयको सनकादिका शाप
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
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      • श्लोक-५०
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • जय-विजयका वैकुण्ठसे पतन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-३७
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षका जन्म तथा हिरण्याक्षकी दिग्विजय
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • हिरण्याक्षके साथ वराहभगवान‍्का युद्ध
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-४
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      • श्लोक-२८
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • हिरण्याक्षवध
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-३८
    • +
      अथ विंशोऽध्याय:
      • ब्रह्माजीकी रची हुई अनेक प्रकारकी सृष्टिका वर्णन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
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      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
    • +
      अथैकविंशोऽध्याय:
      • कर्दमजीकी तपस्या और भगवान‍्का वरदान
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
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      • श्लोक-३८
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      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
    • +
      अथ द्वाविंशोऽध्याय:
      • देवहूतिके साथ कर्दम प्रजापतिका विवाह
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
    • +
      अथ त्रयोविंशोऽध्याय:
      • कर्दम और देवहूतिका विहार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
    • +
      अथ चतुर्विंशोऽध्याय:
      • श्रीकपिलदेवजीका जन्म
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
    • +
      अथ पञ्चविंशोऽध्याय:
      • देवहूतिका प्रश्न तथा भगवान् कपिलद्वारा भक्तियोगकी महिमाका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ षड‍‍्विंशोऽध्याय:
      • महदादि भिन्न-भिन्न तत्त्वोंकी उत्पत्तिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
      • श्लोक-६९
      • श्लोक-७०
      • श्लोक-७१
      • श्लोक-७२
    • +
      अथ सप्तविंशोऽध्याय:
      • प्रकृति-पुरुषके विवेकसे मोक्ष-प्राप्तिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
    • +
      अथाष्टाविंशोऽध्याय:
      • अष्टांगयोगकी विधि
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथैकोनत्रिंशोऽध्याय:
      • भक्तिका मर्म और कालकी महिमा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथ त्रिंशोऽध्याय:
      • देह-गेहमें आसक्त पुरुषोंकी अधोगतिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
    • +
      अथैकत्रिंशोऽध्याय:
      • मनुष्ययोनिको प्राप्त हुए जीवकी गतिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
    • +
      अथ द्वात्रिंशोऽध्याय:
      • धूममार्ग और अर्चिरादि मार्गसे जानेवालोंकी गतिका और भक्तियोगकी उत्कृष्टताका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
    • +
      अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्याय:
      • देवहूतिको तत्त्वज्ञान एवं मोक्षपदकी प्राप्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
  • +
    चतुर्थ: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • स्वायम्भुव मनुकी कन्याओंके वंशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • भगवान् शिव और दक्ष प्रजापतिका मनोमालिन्य
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • सतीका पिताके यहाँ यज्ञोत्सवमें जानेके लिये आग्रह करना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • सतीका अग्निप्रवेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • वीरभद्रकृत दक्षयज्ञविध्वंस और दक्षवध
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • ब्रह्मादि देवताओंका कैलास जाकर श्रीमहादेवजीको मनाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • दक्षयज्ञकी पूर्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • ध्रुवका वन-गमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
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      • श्लोक-७८
      • श्लोक-७९
      • श्लोक-८०
      • श्लोक-८१
      • श्लोक-८२
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • ध्रुवका वर पाकर घर लौटना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • उत्तमका मारा जाना, ध्रुवका यक्षोंके साथ युद्ध
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
    • +
      अथैकादशोऽध्याय:
      • स्वायम्भुव-मनुका ध्रुवजीको युद्ध बंद करनेके लिये समझाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • ध्रुवजीको कुबेरका वरदान और विष्णुलोककी प्राप्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • ध्रुववंशका वर्णन, राजा अंगका चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • राजा वेनकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • महाराज पृथुका आविर्भाव और राज्याभिषेक
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • वन्दीजनद्वारा महाराज पृथुकी स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • महाराज पृथुका पृथ्वीपर कुपित होना और पृथ्वीके द्वारा उनकी स्तुति करना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
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      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-१६
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      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२८
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • पृथ्वी-दोहन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • महाराज पृथुके सौ अश्वमेध यज्ञ
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
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      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-४२
    • +
      अथ विंशोऽध्याय:
      • महाराज पृथुकी यज्ञशालामें श्रीविष्णुभगवान‍्का प्रादुर्भाव
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    • +
      अथैकविंशोऽध्याय:
      • महाराज पृथुका अपनी प्रजाको उपदेश
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ द्वाविंशोऽध्याय:
      • महाराज पृथुको सनकादिका उपदेश
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ त्रयोविंशोऽध्याय:
      • राजा पृथुकी तपस्या और परलोकगमन
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ चतुर्विंशोऽध्याय:
      • पृथुकी वंशपरम्परा और प्रचेताओंको भगवान् रुद्रका उपदेश
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
      • श्लोक-६९
      • श्लोक-७०
      • श्लोक-७१
      • श्लोक-७२
      • श्लोक-७३
      • श्लोक-७४
      • श्लोक-७५
      • श्लोक-७६
      • श्लोक-७७
      • श्लोक-७८
      • श्लोक-७९
    • +
      अथ पञ्चविंशोऽध्याय:
      • पुरंजनोपाख्यानका प्रारम्भ
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
    • +
      अथ षड‍‍्विंशोऽध्याय:
      • राजा पुरंजनका शिकार खेलने वनमें जाना और रानीका कुपित होना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
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      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
    • +
      अथ सप्तविंशोऽध्याय:
      • पुरंजनपुरीपर चण्डवेगकी चढ़ाई तथा कालकन्याका चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
    • +
      अथाष्टाविंशोऽध्याय:
      • पुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
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      • श्लोक-३०
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      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
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      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
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      • श्लोक-४८
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      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
    • +
      अथैकोनत्रिंशोऽध्याय:
      • पुरंजनोपाख्यानका तात्पर्य
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२९
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      • श्लोक-७९
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      • श्लोक-८१
      • श्लोक-८२
      • श्लोक-८३
      • श्लोक-८४
      • श्लोक-८५
    • +
      अथ त्रिंशोऽध्याय:
      • प्रचेताओंको श्रीविष्णुभगवान‍्का वरदान
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-३०
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      • श्लोक-३३
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      • श्लोक-४१
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      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
    • +
      अथैकत्रिंशोऽध्याय:
      • प्रचेताओंको श्रीनारदजीका उपदेश और उनका परमपद-लाभ
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
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      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
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      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
  • +
    पञ्चम: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • प्रियव्रत-चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
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      • श्लोक-२८
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      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • आग्नीध्र-चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
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      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • राजा नाभिका चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
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      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • ऋषभदेवजीका राज्यशासन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • ऋषभजीका अपने पुत्रोंको उपदेश देना और स्वयं अवधूतवृत्ति ग्रहण करना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • ऋषभदेवजीका देहत्याग
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • भरतजीका मृगके मोहमें फँसकर मृगयोनिमें जन्म लेना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • भरतजीका ब्राह्मणकुलमें जन्म
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • जडभरत और राजा रहूगणकी भेंट
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
    • +
      अथैकादशोऽध्याय:
      • राजा रहूगणको भरतजीका उपदेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • रहूगणका प्रश्न और भरतजीका समाधान
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • भवाटवीका वर्णन और रहूगणका संशयनाश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • भवाटवीका स्पष्टीकरण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • भरतके वंशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • भूवनकोशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • गंगाजीका विवरण और भगवान् शंकरकृत संकर्षणदेवकी स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • भिन्न-भिन्न वर्षोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • किम्पुरुष और भारतवर्षका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
    • +
      अथ विंशोऽध्याय:
      • अन्य छः द्वीपों तथा लोकालोकपर्वतका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथैकविंशोऽध्याय:
      • सूर्यके रथ और उसकी गतिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
    • +
      अथ द्वाविंशोऽध्याय:
      • भिन्न-भिन्न ग्रहोंकी स्थिती और गतिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
    • +
      अथ त्रयोविंशोऽध्याय:
      • शिशुमारचक्रका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
    • +
      अथ चतुर्विंशोऽध्याय:
      • राहु आदिकी स्थिती, अतलादि नीचेके लोकोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
    • +
      अथ पञ्चविंशोऽध्याय:
      • श्रीसङ्कर्षणदेवका विवरण और स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
    • +
      अथ षड‍‍्विंशोऽध्याय:
      • नरकोंकी विभिन्न गतियोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
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      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
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      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
  • +
    षष्ठ: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • अजामिलोपाख्यानका प्रारम्भ
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
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      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२६
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      • श्लोक-४८
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      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • विष्णुदूतोंद्वारा भागवतधर्म-निरूपण और अजामिलका परमधामगमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • यम और यमदूतोंका संवाद
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
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    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • दक्षके द्वारा भगवान‍्की स्तुति और भगवान‍्का प्रादुर्भाव
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
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    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • श्रीनारदजीके उपदेशसे दक्षपुत्रोंकी विरक्ति तथा नारदजीको दक्षका शाप
      • श्लोक-१
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      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • दक्षप्रजापतिकी साठ कन्याओंके वंशका विवरण
      • श्लोक-१
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      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • बृहस्पतिजीके द्वारा देवताओंका त्याग और विश्वरूपका देवगुरुके रूपमें वरण
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-४०
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • नारायणकवचका उपदेश
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-४२
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • विश्वरूपका वध, वृत्रासुरद्वारा देवताओंकी हार और भगवान‍्की प्रेरणासे देवताओंका दधीचि ऋषिके पास जाना
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • देवताओंद्वारा दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे वज्र-निर्माण और वृत्रासुरकी सेनापर आक्रमण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
    • +
      अथैकादशोऽध्याय:
      • वृत्रासुरकी वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • वृत्रासुरका वध
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • इन्द्रपर ब्रह्महत्याका आक्रमण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
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      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • वृत्रासुरका पूर्वचरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • चित्रकेतुको अंगिरा और नारदजीका उपदेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • चित्रकेतुका वैराग्य तथा संकर्षणदेवके दर्शन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
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      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
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      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • चित्रकेतुको पार्वतीजीका शाप
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      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • अदिति और दितिकी सन्तानोंकी तथा मरुद‍्गणोंकी उत्पत्तिका वर्णन
      • श्लोक-१
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      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • पुंसवन-व्रतकी विधि
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    सप्तम: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • नारद-युधिष्ठिर-संवाद और जय-विजयकी कथा
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      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • हिरण्याक्षका वध होनेपर हिरण्यकशिपुका अपनी माता और कुटुम्बियोंको समझाना
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-६१
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • हिरण्यकशिपुकी तपस्या और वरप्राप्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • हिरण्यकशिपुके अत्याचार और प्रह्लादके गुणोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
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      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • हिरण्यकशिपुके द्वारा प्रह्लादजीके वधका प्रयत्न
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • प्रह्लादजीका असुर-बालकोंको उपदेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • प्रह्लादजीद्वारा माताके गर्भमें प्राप्त हुए नारदजीके उपदेशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
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      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
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      • श्लोक-२७
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      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
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      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • नृसिंहभगवान‍्का प्रादुर्भाव, हिरण्यकशिपुका वध एवं ब्रह्मादि देवताओंद्वारा भगवान‍्की स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
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      अथ नवमोऽध्याय:
      • प्रह्लादजीके द्वारा नृसिंहभगवान‍्की स्तुति
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-३
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      अथ दशमोऽध्याय:
      • प्रह्लादजीके राज्याभिषेक और त्रिपुरदहनकी कथा
      • श्लोक-१
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      अथैकादशोऽध्याय:
      • मानवधर्म, वर्णधर्म और स्त्रीधर्मका निरूपण
      • श्लोक-१
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      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • ब्रह्मचर्य और वानप्रस्थ आश्रमोंके नियम
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      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • यतिधर्मका निरूपण और अवधूत-प्रह्लाद-संवाद
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      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • गृहस्थसम्बन्धी सदाचार
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    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • गृहस्थोंके लिये मोक्षधर्मका वर्णन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-७९
      • श्लोक-८०
  • +
    अष्टम: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • मन्वन्तरोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • ग्राहके द्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • गजेन्द्रके द्वारा भगवान‍्की स्तुति और उसका संकटसे मुक्त होना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • गज और ग्राहका पूर्वचरित्र तथा उनका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाना और ब्रह्माकृत भगवान‍्की स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
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      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • देवताओं और दैत्योंका मिलकर समुद्रमन्थनके लिये उद्योग करना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • समुद्रमन्थनका आरम्भ और भगवान् शंकरका विषपान
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • समुद्रसे अमृतका प्रकट होना और भगवान‍्का मोहिनी-अवतार ग्रहण करना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • मोहिनीरूपसे भगवान‍्के द्वारा अमृत बाँटा जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • देवासुर-संग्राम
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
    • +
      अथैकादशोऽध्याय:
      • देवासुर-संग्रामकी समाप्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • मोहिनीरूपको देखकर महादेवजीका मोहित होना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • आगामी सात मन्वन्तरोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • मनु आदिके पृथक्-पृथक् कर्मोंका निरूपण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • राजा बलिकी स्वर्गपर विजय
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • कश्यपजीके द्वारा अदितिको पयोव्रतका उपदेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • भगवान‍्का प्रकट होकर अदितिको वर देना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • वामनभगवान‍्का प्रकट होकर राजा बलिकी यज्ञशालामें पधारना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • भगवान् वामनका बलिसे तीन पग पृथ्वी माँगना, बलिका वचन देना और शुक्राचार्यजीका उन्हें रोकना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
    • +
      अथ विंशोऽध्याय:
      • भगवान् वामनजीका विराट्‍रूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
    • +
      अथैकविंशोऽध्याय:
      • बलिका बाँधा जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
    • +
      अथ द्वाविंशोऽध्याय:
      • बलिके द्वारा भगवान‍्की स्तुति और भगवान‍्का उसपर प्रसन्न होना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ त्रयोविंशोऽध्याय:
      • बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
    • +
      अथ चतुर्विंशोऽध्याय:
      • भगवान‍्के मत्स्यावतारकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
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      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
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      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
  • +
    नवम: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • वैवस्वत मनुके पुत्र राजा सुद्युम्नकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • पृषध्र आदि मनुके पाँच पुत्रोंका वंश
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-३
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      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • महर्षि च्यवन और सुकन्याका चरित्र, राजा शर्यातिका वंश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
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      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
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      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • नाभाग और अम्बरीषकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-८
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      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
      • श्लोक-६९
      • श्लोक-७०
      • श्लोक-७१
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • दुर्वासाजीकी दु:खनिवृत्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • इक्ष्वाकुके वंशका वर्णन, मान्धाता और सौभरि ऋषिकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२७
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      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • राजा त्रिशङ्कु और हरिश्चन्द्रकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • सगर-चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
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    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • भगीरथ-चरित्र और गंगावतरण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
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    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • भगवान् श्रीरामकी लीलाओंका वर्णन
      • श्लोक-१
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      अथैकादशोऽध्याय:
      • भगवान् श्रीरामकी शेष लीलाओंका वर्णन
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • इक्ष्वाकुवंशके शेष राजाओंका वर्णन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-१६
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • राजा निमिके वंशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • चन्द्रवंशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
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      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • ऋचीक, जमदग्नि और परशुरामजीका चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
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      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • परशुरामजीके द्वारा क्षत्रियसंहार और विश्वामित्रजीके वंशकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
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      • श्लोक-३७
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • क्षत्रवृद्ध, रजि आदि राजाओंके वंशका वर्णन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • ययाति-चरित्र
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
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      • श्लोक-५१
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • ययातिका गृहत्याग
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    • +
      अथ विंशोऽध्याय:
      • पूरुके वंश, राजा दुष्यन्त और भरतके चरित्रका वर्णन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
    • +
      अथैकविंशोऽध्याय:
      • भरतवंशका वर्णन, राजा रन्तिदेवकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-१७
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      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
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      • श्लोक-२३
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      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ द्वाविंशोऽध्याय:
      • पांचाल, कौरव और मगधदेशीय राजाओंके वंशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
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      • श्लोक-३३
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      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
    • +
      अथ त्रयोविंशोऽध्याय:
      • अनु, द्रुह्यु, तुर्वसु और यदुके वंशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
    • +
      अथ चतुर्विंशोऽध्याय:
      • विदर्भके वंशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
  • +
    दशम: स्कन्ध:—पूर्वार्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • भगवान‍्के द्वारा पृथ्वीको आश्वासन, वसुदेव-देवकीका विवाह और कंसके द्वारा देवकीके छ: पुत्रोंकी हत्या
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
      • श्लोक-६९
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • भगवान‍्का गर्भ-प्रवेश और देवताओंद्वारा गर्भ-स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • भगवान् श्रीकृष्णका प्राकटॺ
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
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      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
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      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • कंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • गोकुलमें भगवान‍्का जन्ममहोत्सव
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • पूतना-उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • शकट-भंजन और तृणावर्त-उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • नामकरण-संस्कार और बाललीला
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • श्रीकृष्णका ऊखलसे बाँधा जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • यमार्जुनका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
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      • श्लोक-२९
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      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
    • +
      अथैकादशोऽध्याय:
      • गोकुलसे वृन्दावन जाना तथा वत्सासुर और बकासुरका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
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      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • अघासुरका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्यायः
      • ब्रह्माजीका मोह और उसका नाश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
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      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • ब्रह्माजीके द्वारा भगवान‍्की स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
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      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
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      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • धेनुकासुरका उद्धार और ग्वालबालोंको कालियनागके विषसे बचाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
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      • श्लोक-२२
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      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
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      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
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      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • कालियपर कृपा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
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      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३६
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      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
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      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • कालियके कालियदहमें आनेकी कथा तथा भगवान‍्का व्रजवासियोंको दावानलसे बचाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • प्रलम्बासुर-उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • गौओं और गोपोंको दावानलसे बचाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
    • +
      अथ विंशोऽध्याय:
      • वर्षा और शरद्ऋतुका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
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      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
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      • श्लोक-३२
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      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
    • +
      अथैकविंशोऽध्याय:
      • वेणुगीत
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
    • +
      अथ द्वाविंशोऽध्याय:
      • चीरहरण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
    • +
      अथ त्रयोविंशोऽध्याय:
      • यज्ञपत्नियोंपर कृपा
      • श्लोक-१
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      अथ चतुर्विंशोऽध्याय:
      • इन्द्रयज्ञ-निवारण
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      अथ पञ्चविंशोऽध्याय:
      • गोवर्धनधारण
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      अथ षड‍‍्विंशोऽध्याय:
      • नन्दबाबासे गोपोंकी श्रीकृष्णके प्रभावके विषयमें बातचीत
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ सप्तविंशोऽध्याय:
      • श्रीकृष्णका अभिषेक
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-२८
    • +
      अथाष्टाविंशोऽध्याय:
      • वरुणलोकसे नन्दजीको छुड़ाकर लाना
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    • +
      अथैकोनत्रिंशोऽध्याय:
      • रासलीलाका आरम्भ
      • श्लोक-१
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      अथ त्रिंशोऽध्याय:
      • श्रीकृष्णके विरहमें गोपियोंकी दशा
      • श्लोक-१
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    • +
      अथैकत्रिंशोऽध्याय:
      • गोपिकागीत
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ द्वात्रिंशोऽध्याय:
      • भगवान‍्का प्रकट होकर गोपियोंको सान्त्वना देना
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्याय:
      • महारास
      • श्लोक-१
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      अथ चतुस्त्रिंशोऽध्याय:
      • सुदर्शन और शंखचूडका उद्धार
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ पञ्चत्रिंशोऽध्याय:
      • युगलगीत
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-२६
    • +
      अथ षट्‍‍त्रिंशोऽध्याय:
      • अरिष्टासुरका उद्धार और कंसका श्रीअक्रूरजीको व्रजमें भेजना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-८
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      • श्लोक-१०
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      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
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      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
    • +
      अथ सप्तत्रिंशोऽध्याय:
      • केशी और व्योमासुरका उद्धार तथा नारदजीके द्वारा भगवान‍्की स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
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      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
    • +
      अथाष्टात्रिंशोऽध्याय:
      • अक्रूरजीकी व्रजयात्रा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
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      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • इति सञ्चिन्तयन् कृष्णं श्वफल्कतनयोऽध्वनि।
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
    • +
      अथैकोनचत्वारिंशोऽध्याय:
      • श्रीकृष्ण-बलरामका मथुरागमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
    • +
      अथ चत्वारिंशोऽध्याय:
      • अक्रूरजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
    • +
      अथैकचत्वारिंशोऽध्याय:
      • श्रीकृष्णका मथुराजीमें प्रवेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
    • +
      अथ द्विचत्वारिंशोऽध्याय:
      • कुब्जापर कृपा, धनुषभंग और कंसकी घबड़ाहट
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
    • +
      अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:
      • कुवलयापीडका उद्धार और अखाड़ेमें प्रवेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
    • +
      अथ चतुश्चत्वारिंशोऽध्याय:
      • चाणूर, मुष्टिक आदि पहलवानोंका तथा कंसका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
    • +
      अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्याय:
      • श्रीकृष्ण-बलरामका यज्ञोपवीत और गुरुकुलप्रवेश
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-९
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथ षट्चत्वारिंशोऽध्याय:
      • उद्धवजीकी व्रजयात्रा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
    • +
      अथ सप्तचत्वारिंशोऽध्याय:
      • उद्धव तथा गोपियोंकी बातचीत और भ्रमरगीत
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-९
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      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
      • श्लोक-६९
    • +
      अथाष्टचत्वारिंशोऽध्याय:
      • भगवान‍्का कुब्जा और अक्रूरजीके घर जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • अक्रूरजीका हस्तिनापुर जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
  • +
    दशम: स्कन्ध:—उत्तरार्ध:
    • +
      अथ पञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • जरासन्धसे युद्ध और द्वारकापुरीका निर्माण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
    • +
      अथैकपञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • कालयवनका भस्म होना, मुचुकुन्दकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
    • +
      अथ द्विपञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • द्वारकागमन, श्रीबलरामजीका विवाह तथा श्रीकृष्णके पास रुक्मिणीजीका सन्देशा लेकर ब्राह्मणका आना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • रुक्मिणीहरण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
    • +
      अथ चतु:पञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • शिशुपालके साथी राजाओंकी और रुक्मीकी हार तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-विवाह
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
    • +
      अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • प्रद्युम्नका जन्म और शम्बरासुरका वध
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
    • +
      अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • स्यमन्तकमणिकी कथा, जाम्बवती और सत्यभामाके साथ श्रीकृष्णका विवाह
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • स्यमन्तक-हरण, शतधन्वाका उद्धार और अक्रूरजीको फिरसे द्वारका बुलाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
    • +
      अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय:
      • भगवान् श्रीकृष्णके अन्यान्य विवाहोंकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
    • +
      अथैकोनषष्टितमोऽध्याय:
      • भौमासुरका उद्धार और सोलह हजार एक सौ राजकन्याओंके साथ भगवान‍्का विवाह
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथ षष्टितमोऽध्याय:
      • श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-संवाद
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
    • +
      अथैकषष्टितमोऽध्याय:
      • भगवान‍्की सन्ततिका वर्णन तथा अनिरुद्धके विवाहमें रुक्मीका मारा जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२८
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
    • +
      अथ द्विषष्टितमोऽध्याय:
      • ऊषा-अनिरुद्ध-मिलन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
    • +
      अथ त्रिषष्टितमोऽध्याय:
      • भगवान् श्रीकृष्णके साथ बाणासुरका युद्ध
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
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      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
    • +
      अथ चतु:षष्टितमोऽध्याय:
      • नृग राजाकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ पञ्चषष्टितमोऽध्याय:
      • श्रीबलरामजीका व्रजगमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
    • +
      अथ षट्षष्टितमोऽध्याय:
      • पौण्ड्रक और काशिराजका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
    • +
      अथ सप्तषष्टितमोऽध्याय:
      • द्विविदका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
    • +
      अथाष्टषष्टितमोऽध्याय:
      • कौरवोंपर बलरामजीका कोप और साम्बका विवाह
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-४०
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      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
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      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
    • +
      अथैकोनसप्ततितमोऽध्याय:
      • देवर्षि नारदजीका भगवान‍्की गृहचर्या देखना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
    • +
      अथ सप्ततितमोऽध्याय:
      • भगवान् श्रीकृष्णकी नित्यचर्या और उनके पास जरासन्धके कैदी राजाओंके दूतका आना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
    • +
      अथैकसप्ततितमोऽध्याय:
      • श्रीकृष्णभगवान‍्का इन्द्रप्रस्थ पधारना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथ द्विसप्ततितमोऽध्याय:
      • पाण्डवोंके राजसूययज्ञका आयोजन और जरासन्धका उद्धार
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
    • +
      अथ त्रिसप्ततितमोऽध्याय:
      • जरासन्धके जेलसे छूटे हुए राजाओंकी बिदाई और भगवान‍्का इन्द्रप्रस्थ लौट आना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
    • +
      अथ चतु:सप्ततितमोऽध्याय:
      • भगवान‍्की अग्रपूजा और शिशुपालका उद्धार
      • श्लोक-१
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      अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्याय:
      • राजसूय यज्ञकी पूर्ति और दुर्योधनका अपमान
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      अथ षट्सप्ततितमोऽध्याय:
      • शाल्वके साथ यादवोंका युद्ध
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      अथाष्टसप्ततितमोऽध्याय:
      • दन्तवक्त्र और विदूरथका उद्धार तथा तीर्थयात्रामें बलरामजीके हाथसे सूतजीका वध
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      • श्रीकृष्णके द्वारा सुदामाजीका स्वागत
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      • भगवान् श्रीकृष्ण-बलरामसे गोप-गोपियोंकी भेंट
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      अथ पञ्चाशीतितमोऽध्याय:
      • श्रीभगवान‍्के द्वारा वसुदेवजीको ब्रह्मज्ञानका उपदेश तथा देवकीजीके छ: पुत्रोंको लौटा लाना
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    • +
      अथ षडशीतितमोऽध्याय:
      • सुभद्राहरण और भगवान‍्का मिथिलापुरीमें राजा जनक और श्रुतदेव ब्राह्मणके घर एक ही साथ जाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
    • +
      अथ सप्ताशीतितमोऽध्याय:
      • वेदस्तुति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथाष्टाशीतितमोऽध्याय:
      • शिवजीका संकटमोचन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
    • +
      अथैकोननवतितमोऽध्याय:
      • भृगुजीके द्वारा त्रिदेवोंकी परीक्षा तथा भगवान‍्का मरे हुए ब्राह्मण-बालकोंको वापस लाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
    • +
      अथ नवतितमोऽध्याय:
      • भगवान् श्रीकृष्णके लीला-विहारका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
  • +
    एकादश: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • यदुवंशको ऋषियोंका शाप
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • वसुदेवजीके पास श्रीनारदजीका आना और उन्हें राजा जनक तथा नौ योगीश्वरोंका संवाद सुनाना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • माया, मायासे पार होनेके उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोगका निरूपण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • भगवान‍्के अवतारोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
    • +
      अथ पञ्चमोऽध्याय:
      • भक्तिहीन पुरुषोंकी गति और भगवान‍्की पूजाविधिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • देवताओंकी भगवान‍्से स्वधाम सिधारनेके लिये प्रार्थना तथा यादवोंको प्रभासक्षेत्र जानेकी तैयारी करते देखकर उद्धवका भगवान‍्के पास आना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथ सप्तमोऽध्याय:
      • अवधूतोपाख्यान—पृथ्वीसे लेकर कबूतरतक आठ गुरुओंकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
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      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-४०
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      • श्लोक-४२
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      • श्लोक-५२
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      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
      • श्लोक-६९
      • श्लोक-७०
      • श्लोक-७१
      • श्लोक-७२
      • श्लोक-७३
      • श्लोक-७४
    • +
      अथाष्टमोऽध्याय:
      • अवधूतोपाख्यान—अजगरसे लेकर पिंगलातक नौ गुरुओंकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ नवमोऽध्याय:
      • अवधूतोपाख्यान—कुररसे लेकर भृंगीतक सात गुरुओंकी कथा
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
    • +
      अथ दशमोऽध्याय:
      • लौकिक तथा पारलौकिक भोगोंकी असारताका निरूपण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
    • +
      अथैकादशोऽध्याय:
      • बद्ध, मुक्त और भक्तजनोंके लक्षण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
    • +
      अथ द्वादशोऽध्याय:
      • सत्संगकी महिमा और कर्म तथा कर्मत्यागकी विधि
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
    • +
      अथ त्रयोदशोऽध्याय:
      • हंसरूपसे सनकादिको दिये हुए उपदेशका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
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      • श्लोक-३०
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      • श्लोक-३२
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      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
    • +
      अथ चतुर्दशोऽध्याय:
      • भक्तियोगकी महिमा तथा ध्यानविधिका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
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      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
    • +
      अथ पञ्चदशोऽध्याय:
      • भिन्न-भिन्न सिद्धियोंके नाम और लक्षण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
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      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
    • +
      अथ षोडशोऽध्याय:
      • भगवान‍्की विभूतियोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
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      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथ सप्तदशोऽध्याय:
      • वर्णाश्रम-धर्म-निरूपण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
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      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
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      • श्लोक-२८
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      • श्लोक-३०
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      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
      • श्लोक-५१
      • श्लोक-५२
      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
    • +
      अथाष्टादशोऽध्याय:
      • वानप्रस्थ और संन्यासीके धर्म
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
    • +
      अथैकोनविंशोऽध्याय:
      • भक्ति, ज्ञान और यम-नियमादि साधनोंका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
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      • गुण-दोष-व्यवस्थाका स्वरूप और रहस्य
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      • तीनों गुणोंकी वृत्तियोंका निरूपण
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      अथ षड‍‍्विंशोऽध्याय:
      • पुरूरवाकी वैराग्योक्ति
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ सप्तविंशोऽध्याय:
      • क्रियायोगका वर्णन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
    • +
      अथाष्टाविंशोऽध्याय:
      • परमार्थनिरूपण
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
    • +
      अथैकोनत्रिंशोऽध्याय:
      • भागवतधर्मोंका निरूपण और उद्धवजीका बदरिकाश्रमगमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
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      • श्लोक-४९
    • +
      अथ त्रिंशोऽध्याय:
      • यदुकुलका संहार
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-३
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      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
      • श्लोक-४९
      • श्लोक-५०
    • +
      अथैकत्रिंशोऽध्याय:
      • श्रीभगवान‍्का स्वधामगमन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
  • +
    द्वादश: स्कन्ध:
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • कलियुगके राजवंशोंका वर्णन
      • श्लोक-१
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      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • कलियुगके धर्म
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      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • राज्य, युगधर्म और कलियुगके दोषोंसे बचनेका उपाय—नामसंकीर्तन
      • श्लोक-१
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      • श्लोक-५२
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • चार प्रकारके प्रलय
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      • श्लोक-४१
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      • श्रीशुकदेवजीका अन्तिम उपदेश
      • श्लोक-१
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    • +
      अथ षष्ठोऽध्याय:
      • परीक्षित् की परमगति, जनमेजय सर्पसत्र और वेदोंके शाखाभेद
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      • मार्कण्डेयजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति
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    • +
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      • विभिन्न पुराणोंकी श्लोक-संख्या और श्रीमद‍्भागवतकी महिमा
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      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
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      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
  • +
    श्रीमद‍्भागवतमाहात्म्यम्
    • +
      अथ प्रथमोऽध्याय:
      • परीक्षित् और वज्रनाभका समागम, शाण्डिल्यमुनिके मुखसे भगवान‍्की लीलाके रहस्य और व्रजभूमिके महत्त्वका वर्णन
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
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      • श्लोक-१२
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      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
    • +
      अथ द्वितीयोऽध्याय:
      • यमुना और श्रीकृष्णपत्नियोंका संवाद, कीर्तनोत्सवमें उद्धवजीका प्रकट होना
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
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      • श्लोक-१८
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      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
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      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
    • +
      अथ तृतीयोऽध्याय:
      • श्रीमद‍्भागवतकी परम्परा और उसका माहात्म्य, भागवतश्रवणसे श्रोताओंको भगवद्धामकी प्राप्ति
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
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      • श्लोक-८
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      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
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      • श्लोक-५३
      • श्लोक-५४
      • श्लोक-५५
      • श्लोक-५६
      • श्लोक-५७
      • श्लोक-५८
      • श्लोक-५९
      • श्लोक-६०
      • श्लोक-६१
      • श्लोक-६२
      • श्लोक-६३
      • श्लोक-६४
      • श्लोक-६५
      • श्लोक-६६
      • श्लोक-६७
      • श्लोक-६८
      • श्लोक-६९
      • श्लोक-७०
      • श्लोक-७१
      • श्लोक-७२
      • श्लोक-७३
      • श्लोक-७४
    • +
      अथ चतुर्थोऽध्याय:
      • श्रीमद‍्भागवतका स्वरूप, प्रमाण, श्रोता-वक्ताके लक्षण, श्रवणविधि और माहात्म्य
      • श्लोक-१
      • श्लोक-२
      • श्लोक-३
      • श्लोक-४
      • श्लोक-५
      • श्लोक-६
      • श्लोक-७
      • श्लोक-८
      • श्लोक-९
      • श्लोक-१०
      • श्लोक-११
      • श्लोक-१२
      • श्लोक-१३
      • श्लोक-१४
      • श्लोक-१५
      • श्लोक-१६
      • श्लोक-१७
      • श्लोक-१८
      • श्लोक-१९
      • श्लोक-२०
      • श्लोक-२१
      • श्लोक-२२
      • श्लोक-२३
      • श्लोक-२४
      • श्लोक-२५
      • श्लोक-२६
      • श्लोक-२७
      • श्लोक-२८
      • श्लोक-२९
      • श्लोक-३०
      • श्लोक-३१
      • श्लोक-३२
      • श्लोक-३३
      • श्लोक-३४
      • श्लोक-३५
      • श्लोक-३६
      • श्लोक-३७
      • श्लोक-३८
      • श्लोक-३९
      • श्लोक-४०
      • श्लोक-४१
      • श्लोक-४२
      • श्लोक-४३
      • श्लोक-४४
      • श्लोक-४५
      • श्लोक-४६
      • श्लोक-४७
      • श्लोक-४८
  • +
    श्रीमद‍्भागवत-पाठके विभिन्न प्रयोग१
    • +
      भागवत-महिमा
      • (१) निष्कामपारायण भगवत्प्रीत्यर्थ
      • (२) सप्ताहपारायण (सात दिनका)
      • (३) सप्ताहपारायण (सात दिनका)
      • (४) आरम्भ किये हुए कार्यमें विघ्ननाशके लिये
      • (५) सप्ताहपारायण (सात दिनका)
      • (६) सप्ताहपारायण (सात दिनका)
      • (७) सप्ताहपारायणके प्रयोग (सात दिनके)
      • (८) कैदसे छुड़ानेके लिये
      • (९) शत्रुपराजयके लिये
      • (१०) रोगमुक्तिके लिये
      • (११) पुत्र और स्त्रीप्राप्तिके लिये
      • (१२) निष्कण्टक राज्यके लिये
      • (१३) एकाहपारायण (एक दिनका)
      • (१४) द‍्व्यहपारायण (दो दिनका)
      • (१५) द‍्व्यहपारायण (दो दिनका)
      • (१६) द‍्व्यहपारायण (दो दिनका)
      • (१७) त्रॺहपारायण (तीन दिनका)
      • (१८) त्रॺहपारायण (तीन दिनका)
      • (२०) चतुरहपारायण (चार दिनका)
      • (२१) चतुरहपारायण (चार दिनका)
      • (२२) चतुरहपारायण (चार दिनका)
      • (२३) पंचाहपारायण (पाँच दिनका)
      • (२४) पंचाहपारायण (पाँच दिनका)
      • (२५) षडहपारायण (छ: दिनका)
      • (२६) षडहपारायण (छ: दिनका)
      • (२७) अष्टाहपारायण (आठ दिनका)
      • (२८) अष्टाहपारायण (आठ दिनका)
      • (२९) अष्टाहपारायण (आठ दिनका)
      • (३०) अष्टाहपारायण (आठ दिनका)
      • (३१) नवाहपारायण (नौ दिनका)
      • (३२) नवाहपारायण (नौ दिनका)
      • (३३) दशाहपारायण (दस दिनका)
      • (३४) एकादशाहपारायण (ग्यारह दिनका)
      • (३५) द्वादशाहपारायण (बारह दिनका)
      • (३६) त्रयोदशाहपारायण (तेरह दिनका)
      • (३७) चतुर्दशाहपारायण (चौदह दिनका)
      • (३८) पक्षपारायण (पंद्रह दिनका)
      • (३९) पंचदशाहपारायण (पंद्रह दिनका)
      • (४०) षोडशाहपारायण (सोलह दिनका)
      • (४१) सप्तदशाहपारायण (सत्रह दिनका)
      • (४२) अष्टादशाहपारायण (अठारह दिनका)
      • (४३) ऊनविंशत्यहपारायण (उन्नीस दिनका)
      • (४४) विंशाहपारायण (बीस दिनका)
      • (४५) एकविंशत्यहपारायण (इक्कीस दिनका)
      • (४६) द्वाविंशत्यहपारायण (बाईस दिनका)
      • (४७) त्रयोविंशत्यहपारायण (तेईस दिनका)
      • (४८) चतुर्विंशत्यहपारायण (चौबीस दिनका)
      • (४९) पंचविंशत्यहपारायण (पच्चीस दिनका)
      • (५०) षड‍‍्विंशत्यहपारायण (छब्बीस दिनका)
      • (५१) सप्तविंशत्यहपारायण (सत्ताईस दिनका)
      • (५२) अष्टाविंशत्यहपारायण (अट्ठाईस दिनका)
      • (५३) ऊनत्रिंशदहपारायण (उन्तीस दिनका)
      • (५४) मासपारायण (महीनेभरका)
      • (५५) मासपारायण (महीनेभरका)
      • (५६) मासपारायण (महीनेभरका)
      • (५७) ऋतुपारायण (दो महीनेका)
  • श्रीगोविन्ददामोदरस्तोत्रम्
  • श्रीमद‍्भागवतकी आरती
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