॥ श्रीहरि:॥

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श्रीवामनपुराण

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • अथ श्रीवामनपुराणम्
  • श्रीनारदजीका पुलस्त्य ऋषिसे वामनाश्रयी प्रश्न; शिवजीका लीलाचरित्र और जीमूतवाहन होना
  • शरदागम होनेपर शंकरजीका मन्दरपर्वतपर जाना और दक्षका यज्ञ
  • शंकरजीका ब्रह्महत्यासे छूटनेके लिये तीर्थोंमें भ्रमण; बदरिकाश्रममें नारायणकी स्तुति; वाराणसीमें ब्रह्महत्यासे मुक्ति एवं कपाली नाम पड़ना
  • विजयाकी मौसी सतीसे दक्ष-यज्ञकी वार्ता, सतीका प्राण-त्याग; शिवका क्रोध एवं उनके गणोंद्वारा दक्ष-यज्ञका विध्वंस
  • दक्ष-यज्ञका विध्वंस, देवताओंका प्रताड़न, शंकरके कालरूप और राश्यादिरूपोंमें स्वरूप-कथन
  • नर-नारायणकी उत्पत्ति, तपश्चर्या, बदरिकाश्रमकी वसन्तकी शोभा, काम-दाह और कामकी अनङ्गताका वर्णन
  • उर्वशीकी उत्पत्ति-कथा, प्रह्लाद-प्रसंग—नर-नारायणसे संवाद एवं युद्धोपक्रम
  • प्रह्लाद और नारायणका तुमुल युद्ध, भक्तिसे विजय
  • अन्धकासुरकी विजिगीषा, देवों और असुरोंके वाहनों एवं युद्धका वर्णन
  • अन्धकके साथ देवताओंका युद्ध और अन्धककी विजय
  • सुकेशिकी कथा, मगधारण्यमें ऋषियोंसे प्रश्न करना, ऋषियोंका धर्मोपदेश, देवादिके धर्म, भुवनकोश एवं इक्‍कीस नरकोंका वर्णन
  • सुकेशिका नरक देनेवाले कर्मोंके सम्बन्धमें प्रश्न, ऋषियोंका उत्तर और नरकोंका वर्णन
  • सुकेशिके प्रश्नके उत्तरमें ऋषियोंका जम्बू-द्वीपकी स्थिति और उनमें स्थित पर्वत तथा नदियोंका वर्णन
  • दशाङ्ग-धर्म, आश्रम-धर्म और सदाचार-स्वरूपका वर्णन
  • दैत्योंका धर्म एवं सदाचारका पालन, सुकेशीके नगरका उत्थान-पतन, वरुणा-असीकी महिमा, लोलार्क-प्रसंग
  • देवताओंका शयन-तिथियों और उनके अशूल्यशयन आदि व्रतों एवं शिव-पूजनका वर्णन
  • देवाङ्गोंसे तरुओंकी उत्पत्ति, अखण्डव्रत-विधान, विष्णु-पूजा, विष्णुपञ्जरस्तोत्र और महिषका प्रसङ्ग
  • महिषासुरका अतिचार, देवोंकी तेजोराशिसे भगवती कात्यायनीका प्रादुर्भाव, विन्ध्यप्रसंग, दुर्गाकी अवस्थिति
  • चण्ड-मुण्डद्वारा महिषासुरसे भगवती कात्यायनीके सौन्दर्यका वर्णन, महिषासुरका संदेश और युद्धोपक्रम
  • भगवती कात्यायनीका दैत्योंके साथ युद्ध; महिषासुर-वध एवं देवी का शिवजीके पादमूलमें लीन हो जाना
  • देवीके पुनराविर्भाव-सम्बन्धी प्रश्नोत्तर; कुरुक्षेत्रस्थ पृथूदकतीर्थका प्रसङ्ग; संवरण-तपतीका विवाह
  • कुरुकी कथा, कुरुक्षेत्रका निर्माण-प्रसङ्ग और पृथूदक तीर्थका माहात्म्य
  • वामन-चरितका उपक्रम, बलिका दैत्यराज्याधिपति होना और उनकी अतुल राज्य-लक्ष्मीका वर्णन
  • वामन-चरितके उपक्रममें देवताओंका कश्यपजीके साथ ब्रह्मलोकमें जाना
  • वामन-चरितके सन्दर्भमें ब्रह्माका उपदेश तथा तदनुसार देवोंका श्वेतद्वीपमें तपस्या करना
  • कश्यपद्वारा भगवान् वामनकी स्तुति
  • भगवान् नारायणसे देवों और कश्यपकी प्रार्थना, अदितिकी तपस्या और प्रभुसे प्रार्थना
  • अदितिकी प्रार्थनापर भगवान‍्का प्रकट होना तथा भगवान‍्का अदितिको वर देना
  • बलिका पितामह प्रह्लादसे प्रश्न, प्रह्लादका अदितिके गर्भमें वामनागमन एवं विष्णु-महिमाका कथन तथा स्तवन
  • बलिका प्रह्लादको संतुष्ट करना, अदितिके गर्भसे वामनका प्राकटॺ; ब्रह्माद्वारा स्तुति, वामनका बलिके यज्ञमें जाना
  • वामनद्वारा तीन पग भूमिकी याचना तथा विराट्‍‍रूपसे तीनों लोकोंको तीन पगमें नाप लेना और बलिका पातालमें जाना
  • सरस्वती नदीका वर्णन—उसका कुरुक्षेत्रमें प्रवाहित होना
  • सरस्वती नदीका कुरुक्षेत्रमें प्रवाहित होना और कुरुक्षेत्रमें निवास करने तथा तीर्थमें स्नान करनेका महत्त्व
  • कुरुक्षेत्रके सात प्रसिद्ध वनों, नौ नदियों एवं सम्पूर्ण तीर्थोंका माहात्म्य
  • कुरुक्षेत्रके तीर्थोंके माहात्म्य एवं क्रमका वर्णन
  • कुरुक्षेत्रके तीर्थोंके माहात्म्य एवं क्रमका अनुक्रान्त वर्णन
  • कुरुक्षेत्रके तीर्थोंके माहात्म्य और क्रमका पूर्वानुक्रान्त वर्णन
  • मङ्कणक-प्रसङ्ग, मङ्कणकका शिवस्तवन और उनकी अनुकूलता प्राप्ति
  • कुरुक्षेत्रके तीर्थोंका अनुक्रान्त वर्णन
  • वसिष्ठापवाह नामक तीर्थका उत्पत्ति-प्रसङ्ग
  • कुरुक्षेत्रके तीर्थों—शतसाहस्रिक, शतिक, रेणुका, ऋणमोचन, ओजस, संनिहति, प्राची सरस्वती, पञ्चवट, कुरुतीर्थ, अनरकतीर्थ, काम्यकवन आदिका वर्णन
  • काम्यकवन-तीर्थका प्रसङ्ग, सरस्वती नदीकी महिमा और तत्सम्बद्ध तीर्थोंका वर्णन
  • स्थाणुतीर्थ, स्थाणुवट और सांनिहत्य सरोवरके सम्बन्धमें प्रश्न और ब्रह्माके हवालेसे लोमहर्षणका उत्तर
  • ऋषियोंसहित ब्रह्माजीका शंकरजीकी शरणमें जाना और स्तवन; स्थाण्वीश्वरप्रसङ्ग और हस्तिरूप शंकरकी स्तुति एवं लिङ्गमें संनिधान
  • सांनिहितसर—स्थाणुतीर्थ, स्थाणुवट और स्थाणुलिङ्गका माहात्म्य-वर्णन
  • स्थाणुलिङ्गके समीप असंख्य लिङ्गोंकी स्थापना और उनके दर्शन-अर्चनका माहात्म्य
  • स्थाणुतीर्थके सन्दर्भमें राजा वेनका चरित्र, पृथु-जन्म और उनका अभिषेक, वेनके उद्धारके लिये पृथुका प्रयत्न और वेनकी शिव-स्तुति
  • वेन-कृत शिव-स्तुति एवं स्थाणुतीर्थका माहात्म्य, वेन आदिकी सुगतिका वर्णन
  • चार मुखोंकी उत्पत्ति-कथा, ब्रह्म-कृत शिवकी स्तुति और स्थाणुतीर्थका माहात्म्य
  • कुरुक्षेत्रके पृथूदकतीर्थके सन्दर्भमें अक्षय-तृतीयाके महत्त्वकी कथा
  • मेनाकी तीन कन्याओंका जन्म, कुटिला और रागिणीको शाप, उमाकी तपस्या, शिवद्वारा उमाकी परीक्षा एवं मन्दराचलपर गमन
  • शिवजीका महर्षियोंको स्मृतकर उन्हें हिमवान‍्के यहाँ भेजना, महर्षियोंका हिमवान‍्से शिवके लिये उमाकी याचना, हिमालयकी स्वीकृति और सप्तर्षियोंद्वारा शिवको स्वीकृति-सूचना
  • हिमालय-पुत्री उमाका भगवान् शिवके साथ विवाह और बालखिल्योंकी उत्पत्ति
  • भगवान् शिवके लिये मन्दिरपर विश्वकर्माद्वारा गृहनिर्माण, शिवका यज्ञकर्म करना, पार्वतीकी तपस्यासे ब्रह्माका वर देना, कौशिकीकी स्थापना, शिवके प्राङ्गणमें अग्नि-प्रवेश, देवोंकी प्रार्थना आदि और गजाननकी उत्पत्ति
  • इन्द्रद्वारा नमुचिका वध; शुम्भ-निशुम्भका वृत्तान्त, धूम्रलोचनका वध, देवीका चण्ड-मुण्डसे युद्ध और असुरसैन्यसहित चण्ड-मुण्डका विनाश
  • चण्डिकासे मातृकाओंकी उत्पत्ति, असुरोंसे उनका युद्ध, रक्तबीज-निशुम्भ-शुम्भ-वध, देवताओंके द्वारा देवीकी स्तुति, देवीद्वारा वरदान और भविष्यमें प्रादुर्भावका कथन
  • कार्तिकेयका जन्म, उनके छ: मुख और चतुर्मूर्ति होनेका हेतु, उनका सेनापति होना तथा उनका गण, मयूर, शक्ति और दण्डादिका पाना
  • सेनापतिपदपर नियुक्त कार्तिकेयके लिये ऋषियोंद्वारा स्वस्त्ययन, तारक-विजयके लिये प्रस्थान, पातालकेतुका वृत्तान्त, तारक महिषासुर-वध तथा सुचक्राक्षको वर
  • ऋतध्वजका पातालकेतुपर आक्रमण कर प्रहार करना, अन्धकका गौरीको प्राप्त करनेके लिये प्रयत्न करना
  • पुन: तेज:प्राप्तिके लिये शिवकी तपश्चर्या, केदारतीर्थकी उपलब्धि, शिवका सरस्वतीमें निमग्न होना, मुरासुरका प्रसंग और सनत्कुमारका प्रसंग
  • पुन्नाम नरकोंका वर्णन, पुत्र-शिष्यकी विशेषता एवं बारह प्रकारके पुत्रोंका वर्णन, सनत्कुमार-ब्रह्माका प्रसंग, चतुर्मूर्तिका वर्णन और मुरु-वध
  • शिवके अभिषेक और तप्त-कृच्छ्र-व्रतका उपदेश, हरि-हरके संयोगसे विष्णुके हृदयमें शिवकी संस्थिति, शुक्रको संजीवनी विद्याकी शिक्षा, मङ्कणकी कथा और सप्त सारस्वततीर्थका माहात्म्य
  • अन्धकासुरका प्रसङ्ग, दण्डकाख्यानका कथन, दण्डकका अरजासे चित्राङ्गदाका वृत्तान्त-कथन
  • चित्राङ्गदा-सन्दर्भ, विश्वकर्माका बन्दर होना, वेदवती आदिका उपाख्यान, जाबालिका बन्धन-मोचन
  • गालव-प्रसङ्ग, चित्राङ्गदा-वेदवती-वृत्तान्त, कन्याओंकी खोज, घृताची-वृत्तान्त, जाबालिकी जटाओंसे मुक्ति, विश्वकर्माकी शाप-मुक्ति, इन्द्रद्युम्नादिका सप्तगोदावरमें आना, शिव-स्तुति, सप्तगोदावरमें सम्मेलन, कन्याओंका विवाह
  • दण्डक-अरजाके प्रसङ्गमें शुक्रद्वारा दण्डकको शाप, प्रह्लादका अन्धकको उपदेश और अन्धक-शिव-सन्दर्भ
  • नन्दिद्वारा आहूत गणोंका वर्णन, उनसे हरि और हरका एकत्व प्रतिपादन, गणोंको सदाशिवका दर्शन और गणोंद्वारा मन्दरका भर जाना
  • भगवान् शंकरका अन्धकसे युद्धके लिये प्रस्थान, रुद्रगणोंका दानववर्गसे युद्ध और तुहुण्ड आदि दैत्योंका विनाश
  • शुक्रद्वारा संजीवनीका प्रयोग, नन्दि-दानव-युद्ध, शिवका शुक्रको उदरस्थ रखना, शुक्रकृत शिवस्तुति और विश्वदर्शन, प्रमथ-देवोंसे युद्धमें दैत्योंकी हार, शिव-वेशमें अन्धकका पार्वती हेतु विफल प्रयास, पुन: दैत्य-देव और इन्द्र-जम्भ-युद्ध, मातलिका जन्म और सारथ्य, दैत्योंका नाश, जम्भ-कुजम्भ-वध
  • अन्धकका शिव-शूलसे भेदन, भैरवादिकी उत्पत्ति, अन्धककृत शिवस्तुति, अन्धकका भृङ्गित्व, देवादिकोंका भेजना, अर्द्धकुसुमसे पार्वतीका प्राकटॺ और अन्धकद्वारा उनकी स्तुति
  • इन्द्रका मलयपर असुरोंसे युद्ध, उनका ‘पाकशासन’ और ‘गोत्रभिद्’ होनेका हेतु; मरुतोंकी उत्पत्तिकी कथा
  • स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत चाक्षुष-मन्वन्तरोंके मरुद्‍गणकी उत्पत्तिका वर्णन
  • बलि, मय-प्रभृति दैत्योंका देवताओंके साथ युद्ध, कालनेमिके साथ विष्णुभगवान् का युद्ध और कालनेमिका वध
  • बलि-बाणका देवताओंसे युद्ध, बलिकी विजय, प्रह्लादका स्वर्गमें आना, बलिको प्रह्लादका उपदेश
  • त्रैलोक्य-लक्ष्मीका बलिके यहाँ आना, श्वेत लक्ष्मी आदिकी उत्पत्ति, निधियोंका वर्णन, जयश्रीका बलिमें मिलना और बलिकी समृद्धिका वर्णन
  • प्रायश्चित्त-हेतु इन्द्रकी तपस्या, माताके आश्रममें आना, अदितिकी तपस्या और वासुदेवकी स्तुति, वासुदेवका अदितिके पुत्र बननेका आश्वासन और स्वतेजसे अदितिके गर्भमें प्रवेश
  • प्रह्लादसे अदितिके गर्भमें विष्णुके प्रविष्ट होनेकी बात जानकर बलिका विष्णुको दुर्वचन, प्रह्लादद्वारा बलिको शाप और अनुनय करनेपर उपदेश
  • प्रह्लादकी तीर्थयात्रा, धुन्धु और वामन-प्रसङ्ग, धुन्धुका यज्ञानुष्ठान, वामनका प्रादुर्भाव और उनके लिये दान देनेका धुन्धुका निश्चय, वामनका त्रिविक्रम होना और धुन्धुका वध
  • पुरूरवाको रूपकी प्राप्ति और उसी सन्दर्भमें प्रेत और वणिक‍्की भेंट तथा परस्पर वृत्तान्तका कहना एवं श्रवण-द्वादशीका माहात्म्य, गयामें श्राद्ध करनेसे प्रेत-योनिसे मुक्ति और पुरूरवाको सुरूपकी प्राप्ति
  • नक्षत्र-पुरुषके वर्णन-प्रसङ्गमें नक्षत्र-पुरुषकी पूजाका विधान और नक्षत्र-पुरुषके व्रतका माहात्म्य
  • प्रह्लादकी आनुक्रमिक तीर्थयात्राका वर्णन और जलोद्भवका आख्यान
  • चक्रदानके कथा-प्रसङ्गमें उपमन्यु तथा श्रीदामाका वृत्तान्त, शिवद्वारा विष्णुको चक्र देना, हरका विरूपाक्ष हो जाना और श्रीदाम-वध
  • प्रह्लादकी अनुक्रमागत तीर्थ-यात्रामें अनेक तीर्थोंका महत्त्व
  • प्रह्लादके तीर्थयात्रा-प्रसङ्गमें त्रिकूटगिरि स्थित सरोवरमें ग्राहद्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना, गजेन्द्रद्वारा विष्णुकी स्तुति, गज-ग्राहका उद्धार एवं ‘गजेन्द्रमोक्षणस्तोत्र’ की फलश्रुति
  • सारस्वतस्तोत्रके संदर्भमें विष्णुपञ्जरस्तोत्र, सारस्वतस्तव-कथन-प्रसङ्गमें राक्षस-वृत्तान्त, राक्षसग्रस्त मुनिकी अग्नि-प्रार्थना, सारस्वतस्तोत्र और मुनिद्वारा राक्षसको उपदेश
  • स्तोत्रोंके क्रममें पुलस्त्यजीद्वारा उपदिष्ट महेश्वर-कथित पापप्रशमनस्तोत्र
  • अगस्त्यद्वारा कथित पापप्रशमनस्तोत्र
  • बलिका कुरुक्षेत्रमें आना, वहाँके मुनियोंका पलायन, वामनका आविर्भाव, उनकी स्तुति, बलिके यज्ञमें जानेकी उत्कण्ठा और भरद्वाजसे स्वस्थानका कथन
  • वामनभगवान‍्का विविध स्थानोंमें निवास-वर्णन और कुरुजाङ्गलके लिये प्रस्थान करना
  • भगवान् वामनके आगमनसे पृथ्वीकी क्षुब्धता, बलि और शुक्रके संवाद-प्रसङ्गमें कोशकारकी कथा
  • वामनकी बलिके यज्ञमें जाकर उससे तीन पग भूमिकी याचना, वामनका विराट्‍‍रूप ग्रहण करना एवं त्रिविक्रमत्व, वामनका बलिबन्धन-विषयकप्रश्न, बलिको वर, बलिका पाताल और वामनका स्वर्ग-गमन
  • ब्रह्मलोकमें वामनभगवान‍्की पूजा, ब्रह्मकृत वामनकी स्तुति और वामनरूपमें विष्णुका स्वर्गमें निवास
  • बलिका पातालमें वास, सुदर्शनचक्रका वहाँ प्रवेश, बलिद्वारा सुदर्शनचक्रकी स्तुति, प्रह्लादद्वारा विष्णुभक्तिकी प्रशंसा
  • बलिका प्रह्लादसे प्रश्न, विष्णुकी पूजनादि-विधि, मासानुसार विविध दान-विधान, विष्णु-मन्दिर-निर्माण और विष्णुभक्त एवं वृद्धवाक्यकी महिमाका वर्णन
  • पुराण-वाचन, श्रावण-श्रवण और पठनकी फलश्रुति
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