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॥ श्रीहरि:॥
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ई – पुस्तकें
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/ ई – पुस्तकें
/ श्रीरामचरितमानस (सटीक)
श्रीरामचरितमानस (सटीक)
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हिन्दी/संस्कृत
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निवेदन
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पारायण-विधि
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मानस-वर्णानुक्रमणिका
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कै
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कृ/क्र
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ख
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खा
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खो
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ग
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गा
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गि
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गी
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गु
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गू
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गे
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गै
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गो
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गौ
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गृ
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ग्र
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ग्य
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घ
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घा
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घे
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घो
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च
•
चा
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चि
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चू
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चो
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चौ
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छ
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छा
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छि
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छी
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छु
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छू
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छे
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छो
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ज
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जा
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जि
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झा
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झू
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टे
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ठ
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ड
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डा
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डो
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ढ
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ढो
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ती
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तु
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ते
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तृ
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थ
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था
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थो
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द
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दा
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दि
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दी
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दु
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दू
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दे
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दै
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दो
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द्व
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ध
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धा
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धि
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धी
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धु
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धे
•
धो
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ध्व/ध्र
•
न
•
ना
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नि
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नी
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नू
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ने
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नै
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नो
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नौ
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नृ
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प
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पा
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पि
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पी
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पु
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पू
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पे
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पै
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पृ/प्र
•
फ
•
फि
•
फू
•
फे
•
फो
•
ब
•
बा
•
बि
•
बी
•
बु
•
बू
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बे
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बै
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बो
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ब्य
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ब्र/ बृ
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भ
•
भा
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भि
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भु
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भू
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भे
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भै
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भो
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भृ
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भ्र
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म
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मा
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मि
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मी
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मु
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मू
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मे
•
मै
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मो
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मृ
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य
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या
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यो
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र
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रा
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रि
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रु
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रू
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रे
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ल
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ला
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ली
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ले
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लै
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लो
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व
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वि
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श
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ष
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स
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सा
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सि
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सी
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सू
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से
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सै
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सो
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सौ
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स्य
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स्र
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स्व
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श्र
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श्रा
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श्री
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श्रु
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श्रो
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ह
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हा
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हि
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हु
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हे
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है
•
हो
•
हौं
•
हृ
•
त्र
•
त्रि
•
त्रे
+
बालकाण्ड
•
मंगलाचरण
•
(दोहा १) गुरु-वन्दना
•
(दोहा २-३) ब्राह्मण-संत-वन्दना
•
(दोहा ४) खल-वन्दना
•
(दोहा ५-७ क,ख) संत-असंत-वन्दना
•
(दोहा ७ ग,घ) रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
•
(दोहा ८-१३) तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
•
(दोहा १४ क,ख,ग) कवि-वन्दना
•
(दोहा १४घ,छ-१५) वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
•
(दोहा १६-१८) श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
•
(दोहा १९-२७) श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
•
मासपारायण, पहला विश्राम
•
(दोहा २८-३३) श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
•
(दोहा ३४) मानसनिर्माणकी तिथि
•
(दोहा ३५-४३ क) मानसका रूप और माहात्म्य
•
(दोहा ४३ख-४६) याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
•
(दोहा ४७-५५) सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
•
मासपारायण, दूसरा विश्राम
•
(दोहा ५६-५९) शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
•
(दोहा ६०-६२) सतीका दक्ष-यज्ञमें जाना
•
(दोहा ६३-६४) पतिके अपमानसे दु:खी होकर सतीका योगाग्निसे जल जाना, दक्ष-यज्ञ-विध्वंस
•
(दोहा ६५-७५) पार्वतीका जन्म और तपस्या
•
(दोहा ७६-७७) श्रीरामजीका शिवजीसे विवाहके लिये अनुरोध
•
(दोहा ७८-८२) सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
•
(दोहा ८३-८६) कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
•
(दोहा ८७) रतिको वरदान
•
(दोहा ८८-९०) देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
•
मासपारायण, तीसरा विश्राम
•
(दोहा ९१-९९) शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
•
(दोहा १००-१०५) शिवजीका विवाह
•
(दोहा १०६-१२०क) शिव-पार्वती-संवाद
•
नवाह्नपारायण, पहला विश्राम
•
मासपारायण, चौथा विश्राम
•
(दोहा १२०ख-१२६) अवतारके हेतु
•
(दोहा १२७-१२९) नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
•
(दोहा १३०-१४०) विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान् को शाप और नारदका मोह-भंग
•
(दोहा १४१-१५२) मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
•
मासपारायण, पाँचवाँ विश्राम
•
(दोहा १५३-१७४) प्रतापभानुकी कथा
•
(दोहा १७५-१८३) रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
•
मासपारायण, छठा विश्राम
•
(दोहा १८४-१८५) पृथ्वी और देवतादिकी करुण पुकार
•
(दोहा १८६-१८७) भगवान् का वरदान
•
(दोहा १८८-१८९) राजा दशरथका पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियोंका गर्भवती होना
•
(दोहा १९०-२०४) श्रीभगवान् का प्राकटॺ और बाललीलाका आनन्द
•
(दोहा २०५-२०८) विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
•
(दोहा २०९) विश्वामित्र-यज्ञकी रक्षा
•
(दोहा २१०-२११) अहल्या-उद्धार
•
मासपारायण, सातवाँ विश्राम
•
(दोहा २१२-२१४) श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका जनकपुरमें प्रवेश
•
(दोहा २१५-२१७) श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
•
(दोहा २१८-२२५) श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
•
(दोहा २२६-२३३) पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
•
(दोहा २३४-२३९) श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
•
मासपारायण, आठवाँ विश्राम
•
नवाह्नपारायण, दूसरा विश्राम
•
(दोहा २४०-२४५) श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
•
(दोहा २४६-२४८) श्रीसीताजीका यज्ञशालामें प्रवेश
•
(दोहा २४९-२५१) बन्दीजनोंद्वारा जनकप्रतिज्ञाकी घोषणा, राजाओंसे धनुष न उठना, जनककी निराशाजनक वाणी
•
(दोहा २५२-२५९) श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
•
(दोहा २६०-२६१) धनुषभंग
•
(दोहा २६२-२७०) जयमाल पहनाना
•
मासपारायण, नवाँ विश्राम
•
(दोहा २७१-२८५) श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
•
(दोहा २८६-३०४) दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
•
मासपारायण, दसवाँ विश्राम
•
(दोहा ३०५-३२१) बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
•
(दोहा ३२२-३४२) श्रीसीता-राम-विवाह
•
मासपारायण, ग्यारहवाँ विश्राम
•
(दोहा ३४३-३५९) बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
•
नवाह्नपारायण, तीसरा विश्राम
•
(दोहा ३६०) श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा
•
मासपारायण, बारहवाँ विश्राम
+
अयोध्याकाण्ड
•
मंगलाचरण
•
(दोहा १-११) रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
•
(दोहा १२-२१) सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
•
(दोहा २२-२४) कैकेयीका कोपभवनमें जाना
•
(दोहा २५-३९) दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
•
मासपारायण, तेरहवाँ विश्राम
•
(दोहा ४०-४२) श्रीराम-कैकेयी-संवाद
•
(दोहा ४३-५०) श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवधवासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
•
(दोहा ५१-६०) श्रीराम-कौसल्या-संवाद
•
मासपारायण, चौदहवाँ विश्राम
•
(दोहा ६१-६७) श्रीसीता-राम-संवाद
•
(दोहा ६८-६९) श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद
•
(दोहा ७०-७२) श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
•
(दोहा ७३-७५) श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
•
(दोहा ७६-७८) श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
•
(दोहा ७९-८६) श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
•
(दोहा८७-९१) श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
•
(दोहा ९२-९९) लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
•
मासपारायण, पंद्रहवाँ विश्राम
•
(दोहा १००-१०३) केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
•
(दोहा १०४-१०९) प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीर निवासियोंका प्रेम
•
(दोहा ११०) तापस-प्रकरण
•
(दोहा १११-१२३) यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
•
मासपारायण, सोलहवाँ विश्राम
•
नवाह्नपारायण, चौथा विश्राम
•
(दोहा १२४-१३१) श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
•
(दोहा १३२-१४२) चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
•
मासपारायण, सत्रहवाँ विश्राम
•
(दोहा १४३-१४७) सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
•
(दोहा १४८-१५५) दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
•
(दोहा १५६-१५८) मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
•
(दोहा १५९-१६२) श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
•
(दोहा १६३-१६८) भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
•
(दोहा १६९-१८४) वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
•
मासपारायण, अठारहवाँ विश्राम
•
(दोहा १८५-१८८) अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
•
(दोहा १८९-१९२) निषादकी शङ्का और सावधानी
•
(दोहा १९३-२०२) भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
•
(दोहा २०३-२११) भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
•
(दोहा २१२-२१६) भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
•
मासपारायण, उन्नीसवाँ विश्राम
•
(दोहा २१७-२१९) इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
•
(दोहा २२०-२२५) भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
•
(दोहा २२६-२३०) श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
•
(दोहा २३१-२३२) श्रीरामजीका लक्ष्मणजीको समझाना एवं भरतजीकी महिमा कहना
•
(दोहा २३३-२४८) भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
•
मासपारायण, बीसवाँ विश्राम
•
नवाह्नपारायण, पाँचवाँ विश्राम
•
(दोहा २४९-२५२) वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
•
(दोहा २५३-२५७) श्रीवसिष्ठजीका भाषण
•
(दोहा २५८-२७३) श्रीराम-भरतादिका संवाद
•
(दोहा २७४-२७९) जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
•
(दोहा २८०-२८६) कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
•
(दोहा २८७-२९०) जनक-सुनयना-संवाद,भरतजीकी महिमा
•
(दोहा २९१-२९५) जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
•
(दोहा २९६-३०८) श्रीराम-भरत-संवाद
•
(दोहा ३०९-३१२) भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
•
(दोहा ३१३-३२०) श्रीराम-भरत-संवाद, पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
•
(दोहा ३२१-३२६) भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
•
मासपारायण, इक्कीसवाँ विश्राम
+
अरण्यकाण्ड
•
मंगलाचरण
•
(दोहा १-२) जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
•
(दोहा ३-४) अत्रि-मिलन एवं स्तुति
•
(दोहा ५-६) श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
•
(दोहा ७-८) श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
•
(दोहा ९-१२) राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद
•
(दोहा १३-१६) रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
•
(दोहा १७-२०) शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
•
(दोहा २१-२३) शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्नि-प्रवेश और माया-सीता का प्राकटॺ
•
(दोहा २४-२७) मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
•
(दोहा २८) श्रीसीताहरण और श्रीसीताविलाप
•
(दोहा २९ क) जटायु-रावण-युद्ध
•
नवाह्नपारायण, छठा विश्राम
•
(दोहा २९ ख-३३) श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग, कबन्ध-उद्धार
•
(दोहा ३४-४०) शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
•
(दोहा ४१-४४) नारद-राम-संवाद
•
(दोहा ४५-४६) संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
•
मासपारायण, बाईसवाँ विश्राम
+
किष्किन्धाकाण्ड
•
मंगलाचरण
•
(दोहा १-३) श्रीरामजीसे हनुमान् जी का मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
•
(दोहा ४) सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
•
(दोहा ५-६) सुग्रीवका वैराग्य
•
(दोहा ७-१०) बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार, ताराका विलाप
•
(दोहा ११) ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
•
(दोहा १२-१५) वर्षा-ऋतु-वर्णन
•
(दोहा १६-१७) शरद्-ऋतु-वर्णन
•
(दोहा १८-१९) श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
•
(दोहा २०-२३) सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
•
(दोहा २४-२७) गुफामें तपस्विनीके दर्शन वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
•
(दोहा २८-३०) समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान् जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना श्रीरामगुणका माहात्म्य
+
सुन्दरकाण्ड
•
मंगलाचरण
•
(दोहा १-२) हनुमान् जी का लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
•
(दोहा ३-४) लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
•
(दोहा ५-७) हनुमान्-विभीषण-संवाद
•
(दोहा ८-१०) हनुमान् जी का अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
•
(दोहा ११) श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
•
(दोहा १२-१६) श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
•
(दोहा १७-१९) हनुमान् जी द्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान् जी को नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
•
(दोहा २०-२३) हनुमान्-रावण-संवाद
•
(दोहा २४-२५) लङ्का-दहन
•
(दोहा २६-२७) लङ्का जलानेके बाद हनुमान् जी का सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
•
(दोहा २८-३३) समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
•
(दोहा ३४-३५) श्रीरामजीका वानरोंकी सेनाके साथ चलकर समुद्रतटपर पहुँचना
•
(दोहा ३६) मन्दोदरी-रावण-संवाद
•
(दोहा ३७-४०) रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
•
(दोहा ४१-४९) विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
•
(दोहा ५०-५२) समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
•
(दोहा ५३-५६) दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजी का पत्र देना
•
(दोहा ५७-६०) समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती श्रीराम-गुणगानकी महिमा
•
मासपारायण, चौबीसवाँ विश्राम
+
लङ्काकाण्ड
•
मंगलाचरण
•
(दोहा १-३) नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
•
(दोहा ४) श्रीरामजीका सेनासहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वतपर निवास, रावणकी व्याकुलता
•
(दोहा ५-१०) रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
•
(दोहा ११-१२क) सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
•
नवाह्नपारायण, सातवाँ विश्राम
•
(दोहा १२ख-१३) श्रीरामजीके बाणसे रावणके मुकुट-छत्रादिका गिरना
•
(दोहा १४-१६) मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
•
(दोहा १७-३५क) अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
•
(दोहा ३५ख-३७) रावणको पुन: मन्दोदरीका समझाना
•
(दोहा ३८) अंगद-राम-संवाद
•
(दोहा ३९-४६) युद्धारम्भ
•
(दोहा ४७-४८) माल्यवान् का रावणको समझाना
•
मासपारायण, पचीसवाँ विश्राम
•
(दोहा ४९-५४) लक्ष्मण-मेघनाद-युद्ध, लक्ष्मणजीको शक्ति लगना
•
(दोहा ५५-५७) हनुमान् जी का सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
•
(दोहा ५८-६०) भरतजीके बाणसे हनुमान् का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
•
(दोहा ६१) श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान् जी का लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
•
(दोहा ६२-६४) रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
•
(दोहा ६५-७१) कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
•
(दोहा ७२-७४) मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
•
(दोहा ७५-७७) मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
•
(दोहा ७८-८१) रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
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(दोहा ८२) लक्ष्मण-रावण-युद्ध
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(दोहा ८३-८८) रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
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(दोहा ८९-९२) इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
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(दोहा ९३-९४) रावणका विभीषणपर शक्ति छोड़ना, रामजीका शक्तिको अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण-युद्ध
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(दोहा ९५-९६) रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
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(दोहा ९७-९८) घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
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मासपारायण, छब्बीसवाँ विश्राम
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(दोहा ९९) त्रिजटा-सीता-संवाद
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(दोहा १००-१०३) राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
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(दोहा १०४-१०५) मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
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(दोहा १०६) विभीषणका राज्याभिषेक
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(दोहा १०७-१०८) हनुमान् जी का सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
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(दोहा १०९-११५) देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
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(दोहा ११६) विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध
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(दोहा ११७) विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
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(दोहा ११८-१२१) पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीतारामजीका अवधके लिये प्रस्थान श्रीरामचरितकी महिमा
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दोहा
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मासपारायण, सत्ताईसवाँ विश्राम
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उत्तरकाण्ड
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मंगलाचरण
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(दोहा १-३) भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
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(दोहा ४-१०) श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
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नवाह्नपारायण, आठवाँ विश्राम
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(दोहा ११-१४) राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
•
(दोहा १५-२०) वानरोंकी और निषादकी विदाई
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(दोहा २१-२४) रामराज्यका वर्णन
•
(दोहा २५-३५) पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
•
(दोहा ३६-४२) हनुमान् जी के द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
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(दोहा ४३-४७) श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
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(दोहा ४८-४९) श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
•
(दोहा ५०-५१) नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
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(दोहा ५२-७३) शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
•
मासपारायण, अट्ठाईसवाँ विश्राम
•
(दोहा ७४-१०५क) काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
•
(दोहा १०५ख-१०७क) गुरुजीका अपमान एवं शिवजीके शापकी बात सुनना
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(दोहा १०७ख) रुद्राष्टक
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(दोहा १०८-१०९) गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
•
(दोहा ११०-११४क) काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
•
मासपारायण, उनतीसवाँ विश्राम
•
(दोहा ११४ख-१२०) ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
•
(दोहा १२१) गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
•
(दोहा १२२) भजन-महिमा
•
(दोहा १२३-१३०) रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
•
मासपारायण, तीसवाँ विश्राम
•
नवाह्नपारायण, नवाँ विश्राम
•
श्रीरामायणजीकी आरती
•
गोस्वामी तुलसीदासजीकी संक्षिप्त जीवनी
•
श्रीरामशलाका प्रश्नावली
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अंतिम पृष्ठ
सम्बंधित ई-पुस्तकें
सुख-शान्ति का मार्ग
परमार्थ की मन्दाकिनी
दिव्य सुख की सरिता
समाज सुधार
दीन-दु:खियों के प्रति कर्तव्य
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण
सुन्दरकाण्ड (सटीक)
सुन्दरकाण्ड (मूल)
श्रीरामचरितमानस (मूल)
गीता चिन्तन
अध्यात्मरामायण
सुखी बननेके उपाय
पद रत्नाकर
प्रार्थना
श्रीराधा माधव चिन्तन
साधन पथ
अमृत कण
श्री भगवन्नाम-चिन्तन
दाम्पत्य जीवन का आदर्श
ब्रह्मचर्य
मूल रामायण
श्रीराधा माधव रस सुधा (षोडश गीत)
सत्संग के बिखरे मोती
मानव जीवन का लक्ष्य
महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
तुलसी दल
किष्किन्धाकाण्ड (सटीक)
संत वाणी
मन को वश करने के कुछ उपाय
श्रीभगवन्नाम
श्री राम चिन्तन
दैनिक कल्याण सूत्र
मानस रहस्य
गोपी प्रेम
मानस शंका समाधान
भगवच्चर्चा (सभी छहों भाग एक साथ)
गो सेवा के चमत्कार
नैवेद्य
उपनिषदों के चौदह रत्न
प्रेम दर्शन (नारद भक्ति सूत्र की व्...
ईश्वर की सत्ता और महत्ता
स्त्री धर्म प्रश्नोत्तरी
सत्संग सुधा
पूर्ण समर्पण
नारी शिक्षा
साधकों का सहारा
भवरोग की रामबाण दवा
दु:ख क्यों होते हैं?
भगवान् सदा तुम्हारे साथ हैं
दु:ख में भगवत्कृपा
भगवच्चर्चा
कल्याण कुंज
भगवत्प्राप्ति एवं हिंदू संस्कृति
महाभाव कल्लोलिनी
कल्याणकारी आचरण
मधुर
विवाह में दहेज
शान्ति कैसे मिले?
सिनेमा – मनोरञ्जन या विनाश का साधन
व्यवहार और परमार्थ
मानव धर्म
लोक परलोक का सुधार
दिव्य सन्देश
सुखी बनो
गोवध भारत का कलंक
आनन्द की लहरें
मानव कल्याण के साधन
सफलता के शिखर की सीढ़ियाँ
आनन्द का स्वरूप
भगवान् की पूजा के पुष्प
वर्तमान शिक्षा
भगवच्चर्चा (भाग-५)
सुख-शान्ति का मार्ग
परमार्थ की मन्दाकिनी
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