॥ श्रीहरि:॥

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श्रीरामचरितमानस (सटीक) Free eBook

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • पारायण-विधि
  • +
    बालकाण्ड
    • मंगलाचरण
    • (दोहा १) गुरु-वन्दना
    • (दोहा २-३) ब्राह्मण-संत-वन्दना
    • (दोहा ४) खल-वन्दना
    • (दोहा ५-७ क,ख) संत-असंत-वन्दना
    • (दोहा ७ ग,घ) रामरूपसे जीवमात्रकी वन्दना
    • (दोहा ८-१३) तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
    • (दोहा १४ क,ख,ग) कवि-वन्दना
    • (दोहा १४घ,छ-१५) वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिकी वन्दना
    • (दोहा १६-१८) श्रीसीताराम-धाम-परिकर-वन्दना
    • (दोहा १९-२७) श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
    • मासपारायण, पहला विश्राम
    • (दोहा २८-३३) श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
    • (दोहा ३४) मानसनिर्माणकी तिथि
    • (दोहा ३५-४३ क) मानसका रूप और माहात्म्य
    • (दोहा ४३ख-४६) याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
    • (दोहा ४७-५५) सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
    • मासपारायण, दूसरा विश्राम
    • (दोहा ५६-५९) शिवजीद्वारा सतीका त्याग, शिवजीकी समाधि
    • (दोहा ६०-६२) सतीका दक्ष-यज्ञमें जाना
    • (दोहा ६३-६४) पतिके अपमानसे दु:खी होकर सतीका योगाग्निसे जल जाना, दक्ष-यज्ञ-विध्वंस
    • (दोहा ६५-७५) पार्वतीका जन्म और तपस्या
    • (दोहा ७६-७७) श्रीरामजीका शिवजीसे विवाहके लिये अनुरोध
    • (दोहा ७८-८२) सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
    • (दोहा ८३-८६) कामदेवका देवकार्यके लिये जाना और भस्म होना
    • (दोहा ८७) रतिको वरदान
    • (दोहा ८८-९०) देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
    • मासपारायण, तीसरा विश्राम
    • (दोहा ९१-९९) शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
    • (दोहा १००-१०५) शिवजीका विवाह
    • (दोहा १०६-१२०क) शिव-पार्वती-संवाद
    • नवाह्नपारायण, पहला विश्राम
    • मासपारायण, चौथा विश्राम
    • (दोहा १२०ख-१२६) अवतारके हेतु
    • (दोहा १२७-१२९) नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
    • (दोहा १३०-१४०) विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान् को शाप और नारदका मोह-भंग
    • (दोहा १४१-१५२) मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
    • मासपारायण, पाँचवाँ विश्राम
    • (दोहा १५३-१७४) प्रतापभानुकी कथा
    • (दोहा १७५-१८३) रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
    • मासपारायण, छठा विश्राम
    • (दोहा १८४-१८५) पृथ्वी और देवतादिकी करुण पुकार
    • (दोहा १८६-१८७) भगवान् का वरदान
    • (दोहा १८८-१८९) राजा दशरथका पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियोंका गर्भवती होना
    • (दोहा १९०-२०४) श्रीभगवान् का प्राकटॺ और बाललीलाका आनन्द
    • (दोहा २०५-२०८) विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
    • (दोहा २०९) विश्वामित्र-यज्ञकी रक्षा
    • (दोहा २१०-२११) अहल्या-उद्धार
    • मासपारायण, सातवाँ विश्राम
    • (दोहा २१२-२१४) श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका जनकपुरमें प्रवेश
    • (दोहा २१५-२१७) श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
    • (दोहा २१८-२२५) श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
    • (दोहा २२६-२३३) पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
    • (दोहा २३४-२३९) श्रीसीताजीका पार्वती-पूजन एवं वरदानप्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण-संवाद
    • मासपारायण, आठवाँ विश्राम
    • नवाह्नपारायण, दूसरा विश्राम
    • (दोहा २४०-२४५) श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
    • (दोहा २४६-२४८) श्रीसीताजीका यज्ञशालामें प्रवेश
    • (दोहा २४९-२५१) बन्दीजनोंद्वारा जनकप्रतिज्ञाकी घोषणा, राजाओंसे धनुष न उठना, जनककी निराशाजनक वाणी
    • (दोहा २५२-२५९) श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
    • (दोहा २६०-२६१) धनुषभंग
    • (दोहा २६२-२७०) जयमाल पहनाना
    • मासपारायण, नवाँ विश्राम
    • (दोहा २७१-२८५) श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
    • (दोहा २८६-३०४) दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
    • मासपारायण, दसवाँ विश्राम
    • (दोहा ३०५-३२१) बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
    • (दोहा ३२२-३४२) श्रीसीता-राम-विवाह
    • मासपारायण, ग्यारहवाँ विश्राम
    • (दोहा ३४३-३५९) बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
    • नवाह्नपारायण, तीसरा विश्राम
    • (दोहा ३६०) श्रीरामचरित सुनने-गानेकी महिमा
    • मासपारायण, बारहवाँ विश्राम
  • +
    अयोध्याकाण्ड
    • मंगलाचरण
    • (दोहा १-११) रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
    • (दोहा १२-२१) सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
    • (दोहा २२-२४) कैकेयीका कोपभवनमें जाना
    • (दोहा २५-३९) दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
    • मासपारायण, तेरहवाँ विश्राम
    • (दोहा ४०-४२) श्रीराम-कैकेयी-संवाद
    • (दोहा ४३-५०) श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवधवासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
    • (दोहा ५१-६०) श्रीराम-कौसल्या-संवाद
    • मासपारायण, चौदहवाँ विश्राम
    • (दोहा ६१-६७) श्रीसीता-राम-संवाद
    • (दोहा ६८-६९) श्रीराम-कौसल्या-सीता-संवाद
    • (दोहा ७०-७२) श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
    • (दोहा ७३-७५) श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद
    • (दोहा ७६-७८) श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
    • (दोहा ७९-८६) श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
    • (दोहा८७-९१) श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
    • (दोहा ९२-९९) लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
    • मासपारायण, पंद्रहवाँ विश्राम
    • (दोहा १००-१०३) केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
    • (दोहा १०४-१०९) प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीर निवासियोंका प्रेम
    • (दोहा ११०) तापस-प्रकरण
    • (दोहा १११-१२३) यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
    • मासपारायण, सोलहवाँ विश्राम
    • नवाह्नपारायण, चौथा विश्राम
    • (दोहा १२४-१३१) श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
    • (दोहा १३२-१४२) चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
    • मासपारायण, सत्रहवाँ विश्राम
    • (दोहा १४३-१४७) सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
    • (दोहा १४८-१५५) दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
    • (दोहा १५६-१५८) मुनि वसिष्ठका भरतजीको बुलानेके लिये दूत भेजना
    • (दोहा १५९-१६२) श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
    • (दोहा १६३-१६८) भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
    • (दोहा १६९-१८४) वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
    • मासपारायण, अठारहवाँ विश्राम
    • (दोहा १८५-१८८) अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
    • (दोहा १८९-१९२) निषादकी शङ्का और सावधानी
    • (दोहा १९३-२०२) भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
    • (दोहा २०३-२११) भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
    • (दोहा २१२-२१६) भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
    • मासपारायण, उन्नीसवाँ विश्राम
    • (दोहा २१७-२१९) इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
    • (दोहा २२०-२२५) भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
    • (दोहा २२६-२३०) श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
    • (दोहा २३१-२३२) श्रीरामजीका लक्ष्मणजीको समझाना एवं भरतजीकी महिमा कहना
    • (दोहा २३३-२४८) भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
    • मासपारायण, बीसवाँ विश्राम
    • नवाह्नपारायण, पाँचवाँ विश्राम
    • (दोहा २४९-२५२) वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
    • (दोहा २५३-२५७) श्रीवसिष्ठजीका भाषण
    • (दोहा २५८-२७३) श्रीराम-भरतादिका संवाद
    • (दोहा २७४-२७९) जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
    • (दोहा २८०-२८६) कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
    • (दोहा २८७-२९०) जनक-सुनयना-संवाद,भरतजीकी महिमा
    • (दोहा २९१-२९५) जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
    • (दोहा २९६-३०८) श्रीराम-भरत-संवाद
    • (दोहा ३०९-३१२) भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
    • (दोहा ३१३-३२०) श्रीराम-भरत-संवाद, पादुका-प्रदान, भरतजीकी विदाई
    • (दोहा ३२१-३२६) भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
    • मासपारायण, इक्‍कीसवाँ विश्राम
  • +
    अरण्यकाण्ड
    • मंगलाचरण
    • (दोहा १-२) जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
    • (दोहा ३-४) अत्रि-मिलन एवं स्तुति
    • (दोहा ५-६) श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
    • (दोहा ७-८) श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
    • (दोहा ९-१२) राक्षस-वधकी प्रतिज्ञा करना सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद
    • (दोहा १३-१६) रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
    • (दोहा १७-२०) शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
    • (दोहा २१-२३) शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्नि-प्रवेश और माया-सीता का प्राकटॺ
    • (दोहा २४-२७) मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
    • (दोहा २८) श्रीसीताहरण और श्रीसीताविलाप
    • (दोहा २९ क) जटायु-रावण-युद्ध
    • नवाह्नपारायण, छठा विश्राम
    • (दोहा २९ ख-३३) श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग, कबन्ध-उद्धार
    • (दोहा ३४-४०) शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
    • (दोहा ४१-४४) नारद-राम-संवाद
    • (दोहा ४५-४६) संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
    • मासपारायण, बाईसवाँ विश्राम
  • +
    किष्किन्धाकाण्ड
    • मंगलाचरण
    • (दोहा १-३) श्रीरामजीसे हनुमान् जी का मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
    • (दोहा ४) सुग्रीवका दु:ख सुनाना, बालिवधकी प्रतिज्ञा, श्रीरामजीका मित्र-लक्षण-वर्णन
    • (दोहा ५-६) सुग्रीवका वैराग्य
    • (दोहा ७-१०) बालि-सुग्रीव-युद्ध, बालि-उद्धार, ताराका विलाप
    • (दोहा ११) ताराको श्रीरामजी-द्वारा उपदेश और सुग्रीवका राज्याभिषेक तथा अंगदको युवराजपद
    • (दोहा १२-१५) वर्षा-ऋतु-वर्णन
    • (दोहा १६-१७) शरद्-ऋतु-वर्णन
    • (दोहा १८-१९) श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
    • (दोहा २०-२३) सुग्रीव-राम-संवाद और सीताजीकी खोजके लिये बंदरोंका प्रस्थान
    • (दोहा २४-२७) गुफामें तपस्विनीके दर्शन वानरोंका समुद्रतटपर आना, सम्पातीसे भेंट और बातचीत
    • (दोहा २८-३०) समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान् जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना श्रीरामगुणका माहात्म्य
  • +
    सुन्दरकाण्ड
    • मंगलाचरण
    • (दोहा १-२) हनुमान् जी का लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
    • (दोहा ३-४) लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
    • (दोहा ५-७) हनुमान्-विभीषण-संवाद
    • (दोहा ८-१०) हनुमान् जी का अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
    • (दोहा ११) श्रीसीता-त्रिजटा-संवाद
    • (दोहा १२-१६) श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
    • (दोहा १७-१९) हनुमान् जी द्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान् जी को नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
    • (दोहा २०-२३) हनुमान्-रावण-संवाद
    • (दोहा २४-२५) लङ्का-दहन
    • (दोहा २६-२७) लङ्का जलानेके बाद हनुमान् जी का सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
    • (दोहा २८-३३) समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
    • (दोहा ३४-३५) श्रीरामजीका वानरोंकी सेनाके साथ चलकर समुद्रतटपर पहुँचना
    • (दोहा ३६) मन्दोदरी-रावण-संवाद
    • (दोहा ३७-४०) रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
    • (दोहा ४१-४९) विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
    • (दोहा ५०-५२) समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
    • (दोहा ५३-५६) दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजी का पत्र देना
    • (दोहा ५७-६०) समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती श्रीराम-गुणगानकी महिमा
    • मासपारायण, चौबीसवाँ विश्राम
  • +
    लङ्काकाण्ड
    • मंगलाचरण
    • (दोहा १-३) नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
    • (दोहा ४) श्रीरामजीका सेनासहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वतपर निवास, रावणकी व्याकुलता
    • (दोहा ५-१०) रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
    • (दोहा ११-१२क) सुबेलपर श्रीरामजीकी झाँकी और चन्द्रोदयवर्णन
    • नवाह्नपारायण, सातवाँ विश्राम
    • (दोहा १२ख-१३) श्रीरामजीके बाणसे रावणके मुकुट-छत्रादिका गिरना
    • (दोहा १४-१६) मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
    • (दोहा १७-३५क) अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
    • (दोहा ३५ख-३७) रावणको पुन: मन्दोदरीका समझाना
    • (दोहा ३८) अंगद-राम-संवाद
    • (दोहा ३९-४६) युद्धारम्भ
    • (दोहा ४७-४८) माल्यवान् का रावणको समझाना
    • मासपारायण, पचीसवाँ विश्राम
    • (दोहा ४९-५४) लक्ष्मण-मेघनाद-युद्ध, लक्ष्मणजीको शक्ति लगना
    • (दोहा ५५-५७) हनुमान् जी का सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
    • (दोहा ५८-६०) भरतजीके बाणसे हनुमान् का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्-संवाद
    • (दोहा ६१) श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान् जी का लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
    • (दोहा ६२-६४) रावणका कुम्भकर्णको जगाना, कुम्भकर्णका रावणको उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण-संवाद
    • (दोहा ६५-७१) कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
    • (दोहा ७२-७४) मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
    • (दोहा ७५-७७) मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
    • (दोहा ७८-८१) रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
    • (दोहा ८२) लक्ष्मण-रावण-युद्ध
    • (दोहा ८३-८८) रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
    • (दोहा ८९-९२) इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
    • (दोहा ९३-९४) रावणका विभीषणपर शक्ति छोड़ना, रामजीका शक्तिको अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण-युद्ध
    • (दोहा ९५-९६) रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
    • (दोहा ९७-९८) घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
    • मासपारायण, छब्बीसवाँ विश्राम
    • (दोहा ९९) त्रिजटा-सीता-संवाद
    • (दोहा १००-१०३) राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
    • (दोहा १०४-१०५) मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
    • (दोहा १०६) विभीषणका राज्याभिषेक
    • (दोहा १०७-१०८) हनुमान् जी का सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
    • (दोहा १०९-११५) देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
    • (दोहा ११६) विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध
    • (दोहा ११७) विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
    • (दोहा ११८-१२१) पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीतारामजीका अवधके लिये प्रस्थान श्रीरामचरितकी महिमा
    • दोहा
    • मासपारायण, सत्ताईसवाँ विश्राम
  • +
    उत्तरकाण्ड
    • मंगलाचरण
    • (दोहा १-३) भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
    • (दोहा ४-१०) श्रीरामजीका स्वागत, भरत-मिलाप, सबका मिलनानन्द
    • नवाह्नपारायण, आठवाँ विश्राम
    • (दोहा ११-१४) राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
    • (दोहा १५-२०) वानरोंकी और निषादकी विदाई
    • (दोहा २१-२४) रामराज्यका वर्णन
    • (दोहा २५-३५) पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
    • (दोहा ३६-४२) हनुमान् जी के द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
    • (दोहा ४३-४७) श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
    • (दोहा ४८-४९) श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
    • (दोहा ५०-५१) नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
    • (दोहा ५२-७३) शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
    • मासपारायण, अट्ठाईसवाँ विश्राम
    • (दोहा ७४-१०५क) काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
    • (दोहा १०५ख-१०७क) गुरुजीका अपमान एवं शिवजीके शापकी बात सुनना
    • (दोहा १०७ख) रुद्राष्टक
    • (दोहा १०८-१०९) गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
    • (दोहा ११०-११४क) काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
    • मासपारायण, उनतीसवाँ विश्राम
    • (दोहा ११४ख-१२०) ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
    • (दोहा १२१) गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
    • (दोहा १२२) भजन-महिमा
    • (दोहा १२३-१३०) रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
    • मासपारायण, तीसवाँ विश्राम
    • नवाह्नपारायण, नवाँ विश्राम
  • श्रीरामायणजीकी आरती
  • गोस्वामी तुलसीदासजीकी संक्षिप्त जीवनी
  • श्रीरामशलाका प्रश्नावली
  • अंतिम पृष्ठ

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