॥ श्रीहरि:॥

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श्रीनरसिंहपुराण

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • श्रीनरसिंहपुराणका संक्षिप्त परिचय और निवेदन
  • प्रयागमें ऋषियोंका समागम; सूतजीके प्रति भरद्वाजजीका प्रश्न; सूतजीद्वारा कथारम्भ और सृष्टिक्रमका वर्णन
  • ब्रह्मा आदिकी आयु और कालका स्वरूप
  • ब्रह्माजीद्वारा लोकरचना और नौ प्रकारकी सृष्टियोंका निरूपण
  • अनुसर्गके स्रष्टा
  • रुद्र आदि सर्गों और अनुसर्गोंका वर्णन; दक्ष प्रजापतिकी कन्याओंकी संततिका विस्तार
  • अगस्त्य तथा वसिष्ठजीके मित्रावरुणके पुत्ररूपमें उत्पन्न होनेका प्रसङ्ग
  • मार्कण्डेयजीके द्वारा तपस्यापूर्वक श्रीहरिकी आराधना; ‘मृत्युञ्जय-स्तोत्र’ का पाठ और मृत्युपर विजय प्राप्त करना
  • मृत्यु और दूतोंको समझाते हुए यमका उन्हें वैष्णवोंके पास जानेसे रोकना; उनके मुँहसे श्रीहरिके नामकी महिमा सुनकर नरकस्थ जीवोंका भगवान‍्को नमस्कार करके श्रीविष्णुके धाममें जाना
  • यमाष्टक—यमराजका अपने दूतके प्रति उपदेश
  • मार्कण्डेयका विवाह कर वेदशिराको उत्पन्न करके प्रयागमें अक्षयवटके नीचे तप एवं भगवान‍्की स्तुति करना; फिर आकाशवाणीके अनुसार स्तुति करनेपर भगवान‍्का उन्हें आशीर्वाद एवं वरदान देना तथा मार्कण्डेयजीका क्षीरसागरमें जाकर पुन: उनका दर्शन करना
  • मार्कण्डेयजीद्वारा शेषशायी भगवान‍्का स्तवन
  • यम और यमीका संवाद*
  • पतिव्रताकी शक्ति; उसके साथ एक ब्रह्मचारीका संवाद; माताकी रक्षा परम धर्म है, इसका उपदेश
  • तीर्थसेवन और आराधनसे भगवान‍्की प्रसन्नता; ‘अनाश्रमी’ रहनेसे दोष तथा आश्रमधर्मके पालनसे भगवत्प्राप्तिका कथन
  • संसारवृक्षका वर्णन तथा इसे नष्ट करनेवाले ज्ञानकी महिमा
  • भगवान् विष्णुके ध्यानसे मोक्षकी प्राप्तिका प्रतिपादन
  • अष्टाक्षरमन्त्र और उसका माहात्म्य
  • भगवान् सूर्यद्वारा संज्ञाके गर्भसे मनु, यम और यमीकी, छायाके गर्भसे मनु, शनैश्चर एवं तपतीकी उत्पत्ति तथा अश्वारूपधारिणी संज्ञासे अश्विनीकुमारोंका प्रादुर्भाव
  • विश्वकर्माद्वारा १०८ नामोंसे भगवान् सूर्यका स्तवन
  • मारुतोंकी उत्पत्ति
  • सूर्यवंशका वर्णन
  • चन्द्रवंशका वर्णन
  • चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन
  • सूर्यवंश—राजा इक्ष्वाकुका भगवत्प्रेम; उनका भगवद्दर्शनके हेतु तपस्याके लिये प्रस्थान
  • इक्ष्वाकुकी तपस्या और ब्रह्माजीद्वारा विष्णुप्रतिमाकी प्राप्ति
  • इक्ष्वाकुकी संततिका वर्णन
  • चन्द्रवंशका वर्णन
  • शांतनुका चरित्र
  • शांतनुकी संततिका वर्णन
  • भूगोल तथा स्वर्गलोकका वर्णन
  • ध्रुव-चरित्र तथा ग्रह, नक्षत्र एवं पातालका संक्षिप्त वर्णन
  • सहस्रानीक चरित्र; श्री नरसी पूजनका महात्म्य
  • भगवान‍्के मन्दिरमें झाड़ू देने और उसको लीपनेका महान् फल—राजा जयध्वजकी कथा
  • भगवान् विष्णुके पूजनका फल
  • लक्षहोम और कोटिहोमकी विधि तथा फल
  • अवतार-कथाका उपक्रम
  • मत्स्यावतार तथा मधु-कैटभ-वध
  • कूर्मावतार; समुद्रमन्थन और मोहिनी-अवतार
  • वाराह-अवतार; हिरण्याक्षवध
  • नृसिंहावतार; हिरण्यकशिपुकी वरदान-प्राप्ति और उससे सताये हुए देवोंद्वारा भगवान‍्की स्तुति
  • प्रह्लादकी उत्पत्ति और उनकी हरि-भक्तिसे हिरण्यकशिपुकी उद्विग्नता
  • प्रह्लादपर हिरण्यकशिपुका कोप और प्रह्लादका वध करनेके लिये उसके द्वारा किये गये अनेक प्रयत्न
  • प्रह्लादजीका दैत्यपुत्रोंको उपदेश देना; हिरण्यकशिपुकी आज्ञासे प्रह्लादका समुद्रमें डाला जाना तथा वहीं उन्हें भगवान‍्का प्रत्यक्ष दर्शन होना
  • नृसिंहका प्रादुर्भाव और हिरण्यकशिपुका वध
  • वामन-अवतारकी कथा
  • परशुरामावतारकी कथा
  • श्रीरामावतारकी कथा—श्रीरामके जन्मसे लेकर विवाहतकके चरित्र
  • श्रीराम-वनवास; राजा दशरथका निधन तथा वनमें राम-भरतकी भेंट
  • श्रीरामका जयन्तको दण्ड देना; शरभङ्ग, सुतीक्ष्ण और अगस्त्यसे मिलना; शूर्पणखाका अनादर; सीताहरण; जटायुवध और शबरीको दर्शन देना
  • सुग्रीवसे मैत्री; वालिवध; सुग्रीवका प्रमाद और उसकी भर्त्सना; सीताकी खोज और हनुमान‍्का लङ्कागमन
  • हनुमान‍्जीका समुद्र पार करके लङ्कामें जाना, सीतासे भेंट और लङ्काका दहन करके श्रीरामको समाचार देना
  • श्रीराम आदिका समुद्रतटपर जाना; विभीषणकी शरणागति और उन्हें लङ्काके राज्यकी प्राप्ति; समुद्रका श्रीरामको मार्ग देना; पुलद्वारा समुद्र पार करके वानरसेनासहित श्रीरामका सुवेल पर्वतपर पड़ाव डालना; अङ्गदका प्रभाव; लक्ष्मणकी प्रेरणासे श्रीरामका अङ्गदकी प्रशंसा करना; अङ्गदके वीरोचित उद्‍गार और दौत्यकर्म; वानर वीरोंद्वारा राक्षसोंका संहार; रावणका श्रीरामके द्वारा युद्धमें पराजित होना, कुम्भकर्णका वध; अतिकाय आदि राक्षस वीरोंका मारा जाना; मेघनादका पराक्रम और वध; रावणकी शक्तिसे मूर्च्छित लक्ष्मणका हनुमान‍्जीके द्वारा पुनर्जीवन; राम-रावण-युद्ध; रावण-वध; देवताओंद्वारा श्रीरामकी स्तुति; सीताके साथ अयोध्यामें आनेपर श्रीरामका राज्याभिषेक और अन्तमें पुरवासियोंसहित उनका परमधामगमन
  • बलराम-श्रीकृष्ण-अवतारके चरित्र
  • कल्कि-चरित्र और कलि-धर्म
  • शुक्राचार्यको भगवान‍्की स्तुतिसे पुन: नेत्रकी प्राप्ति
  • विष्णुमूर्तिके स्थापनकी विधि
  • भक्तके लक्षण; हारीत-स्मृतिका आरम्भ; ब्राह्मणधर्मका वर्णन
  • क्षत्रियादि वर्णोंके धर्म और ब्रह्मचर्य तथा गृहस्थाश्रमके धर्मोंका वर्णन
  • वानप्रस्थ-धर्म
  • यतिधर्म
  • योगसार
  • श्रीविष्णुपूजनके वैदिक मन्त्र और स्थान
  • अष्टाक्षर-मन्त्रके प्रभावसे इन्द्रका स्त्रीयोनिसे उद्धार
  • भगवद्भजनकी श्रेष्ठता और भक्त पुण्डरीकका उपाख्यान
  • भगवत्सम्बन्धी तीर्थ और उन तीर्थोंसे सम्बन्ध रखनेवाले भगवान‍्के नाम
  • अन्यान्य तीर्थों तथा सह्याद्रि और आमलक ग्रामके तीर्थोंका माहात्म्य
  • मानसतीर्थ, व्रत तथा नरसिंहपुराणका माहात्म्य
  • नरसिंहपुराणके पठन और श्रवणका फल
  • अन्तिम पृष्ठ

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