•जनमेजयके प्रश्न, श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे वार्तालाप और वीरोंको बीड़ा उठानेका आदेश, प्रद्युम्नका बीड़ा उठाकर युद्धके लिये प्रस्थान, श्रीकृष्णका पुन: वीरोंसे बीड़ा उठानेके लिये कहना, वृषकेतुकी बीड़ा उठाकर प्रतिज्ञा और प्रद्युम्नके साथ युद्धके लिये प्रस्थान, प्रद्युम्नके प्रति अनुशाल्वके आक्षेपपूर्ण वचन, प्रद्युम्नकी मूर्च्छा, श्रीकृष्णका प्रद्युम्नपर पादप्रहार करके उनपर आक्षेप करना, भीमसेनका श्रीकृष्णको रोककर उनका उत्तर देना, प्रद्युम्नके साथ युद्धके लिये प्रस्थान एवं घोर युद्ध, वृषकेतुके साथ बातचीत और अनुशाल्वके प्रहारसे उसका मूर्च्छित होना, श्रीकृष्णका युद्धके लिये जाना, उन्हें देखकर उनके प्रति अनुशाल्वका कथन, अनुशाल्वके प्रहारसे घोड़ोंका रथ लेकर भाग जाना, श्रीकृष्णको न देखकर अनुशाल्वके खेदपूर्ण वचन, श्रीकृष्णका प्रकट होकर अनुशाल्वपर प्रहार करना, अनुशाल्वका उन बाणोंको काटकर श्रीकृष्णको मूर्च्छित कर देना, दारुकका रथ लेकर लौटना, सेनाका पलायन, श्रीकृष्णके प्रति सत्यभामाके कठोर वचन