॥ श्रीहरि:॥

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श्री गर्ग संहिता

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • श्रीगोविन्दस्तोत्रम्
  • श्रीगर्ग-संहिताका संक्षिप्त परिचय
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    गोलोकखण्ड
    • शौनक-गर्ग-संवाद; राजा बहुलाश्वके पूछनेपर नारदजीके द्वारा अवतार-भेदका निरूपण
    • ब्रह्मादि देवोंद्वारा गोलोकधामका दर्शन
    • भगवान‍् श्रीकृष्णके श्रीविग्रहमें श्रीविष्णु आदिका प्रवेश; देवताओंद्वारा भगवान‍्की स्तुति; भगवान‍्का अवतार लेनेका निश्चय; श्रीराधाकी चिन्ता और भगवान‍्का उन्हें सान्त्वना-प्रदान
    • नन्द आदिके लक्षण; गोपीयूथका परिचय; श्रुति आदिके गोपीभावकी प्राप्तिमें कारणभूत पूर्वप्राप्त वरदानोंका विवरण
    • भिन्न-भिन्न स्थानों तथा विभिन्न वर्गोंकी स्त्रियोंके गोपी होनेके कारण एवं अवतार-व्यवस्थाका वर्णन
    • कालनेमिके अंशसे उत्पन्न कंसके महान् बल-पराक्रम और दिग्विजयका वर्णन
    • कंसकी दिग्विजय—शम्बर, व्योमासुर, बाणासुर, वत्सासुर, कालयवन तथा देवताओंकी पराजय
    • सुचन्द्र और कलावतीके पूर्व-पुण्यका वर्णन, उन दोनोंका वृषभानु तथा कीर्तिके रूपमें अवतरण
    • गर्गजीकी आज्ञासे देवकका वसुदेवजीके साथ देवकीका विवाह करना; विदाईके समय आकाशवाणी सुनकर कंसका देवकीको मारनेके लिये उद्यत होना और वसुदेवजीकी शर्तपर उसे जीवित छोड़ना
    • कंसके अत्याचार; बलभद्रजीका अवतार तथा व्यासदेवद्वारा उनका स्तवन
    • भगवान‍्का वसुदेव-देवकीमें आवेश; देवताओंद्वारा उनका स्तवन; आविर्भावकाल; अवतार-विग्रहकी झाँकी; वसुदेव-देवकीकृत भगवत्-स्तवन; भगवान‍्द्वारा उनके पूर्वजन्मके वृत्तान्तवर्णनपूर्वक अपनेको नन्दभवनमें पहुँचानेका आदेश; कंसद्वारा नन्दकन्या योगमायासे कृष्णके प्राकटॺकी बात जानकर पश्चात्तापपूर्वक वसुदेव-देवकीको बन्धनमुक्त करना, क्षमा माँगना और दैत्योंको बाल-वधका आदेश देना
    • श्रीकृष्ण-जन्मोत्सवकी धूम; गोप-गोपियोंका उपायन लेकर आना; नन्द और यशोदा-रोहिणीद्वारा सबका यथावत् सत्कार; ब्रह्मादि देवताओंका भी श्रीकृष्णदर्शनके लिये आगमन
    • पूतनाका उद्धार
    • शकटभञ्जन; उत्कच और तृणावर्तका उद्धार; दोनोंके पूर्वजन्मोंका वर्णन
    • यशोदाद्वारा श्रीकृष्णके मुखमें सम्पूर्ण ब्रह्माण्डका दर्शन; नन्द और यशोदाके पूर्व-पुण्यका परिचय; गर्गाचार्यका नन्द-भवनमें जाकर बलराम और श्रीकृष्णके नामकरण-संस्कार करना तथा वृषभानुके यहाँ जाकर उन्हें श्रीराधा-कृष्णके नित्य-सम्बन्ध एवं माहात्म्यका ज्ञान कराना
    • भाण्डीर-वनमें नन्दजीके द्वारा श्रीराधाजीकी स्तुति; श्रीराधा और श्रीकृष्णका ब्रह्माजीके द्वारा विवाह; ब्रह्माजीके द्वारा श्रीकृष्णका स्तवन तथा नव-दम्पतिकी मधुर लीलाएँ
    • श्रीकृष्णकी बाल-लीलामें दधि-चोरीका वर्णन
    • नन्द, उपनन्द और वृषभानुओंका परिचय तथा श्रीकृष्णकी मृद्भक्षण-लीला
    • दामोदर कृष्णका उलूखल-बन्धन तथा उनके द्वारा यमलार्जुन-वृक्षोंका उद्धार
    • दुर्वासाद्वारा भगवान‍्की मायाका एवं गोलोकमें श्रीकृष्णका दर्शन तथा श्रीनन्दनन्दनस्तोत्र
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    श्रीवृन्दावनखण्ड
    • सन्नन्दका गोपोंको महावनसे वृन्दावनमें चलनेकी सम्मति देना और व्रजमण्डलके सर्वाधिक माहात्म्यका वर्णन करना
    • गिरिराज गोवर्धनकी उत्पत्ति तथा उसका व्रजमण्डलमें आगमन
    • श्रीयमुनाजीका गोलोकसे अवतरण और पुन: गोलोकधाममें प्रवेश
    • श्रीबलराम और श्रीकृष्णके द्वारा बछड़ोंका चराया जाना तथा वत्सासुरका उद्धार
    • वकासुरका उद्धार
    • अघासुरका उद्धार और उसके पूर्वजन्मका परिचय
    • ब्रह्माजीके द्वारा गौओं, गोवत्सों एवं गोप-बालकोंका हरण
    • ब्रह्माजीके द्वारा श्रीकृष्णके सर्वव्यापी विश्वात्मा स्वरूपका दर्शन
    • ब्रह्माजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी स्तुति
    • यशोदाजीकी चिन्ता; नन्दद्वारा आश्वासन तथा ब्राह्मणोंको विविध प्रकारके दान देना; श्रीबलराम तथा श्रीकृष्णका गोचारण
    • धेनुकासुरका उद्धार
    • श्रीकृष्णद्वारा कालियदमन तथा दावानल-पान
    • मुनिवर वेदशिरा और अश्वशिराका परस्परके शापसे क्रमश: कालियनाग और काकभुशुण्ड होना तथा शेषनागका भूमण्डलको धारण करना
    • कालियका गरुडके भयसे बचनेके लिये यमुना-जलमें निवासका रहस्य
    • श्रीराधाका गवाक्षमार्गसे श्रीकृष्णके रूपका दर्शन करके प्रेम-विह्वल होना; ललिताका श्रीकृष्णसे राधाकी दशाका वर्णन करना और उनकी आज्ञाके अनुसार लौटकर श्रीराधाको श्रीकृष्ण-प्रीत्यर्थ सत्कर्म करनेकी प्रेरणा देना
    • तुलसीका माहात्म्य, श्रीराधाद्वारा तुलसीसेवन-व्रतका अनुष्ठान तथा दिव्य तुलसीदेवीका प्रत्यक्ष प्रकट हो श्रीराधाको वरदान देना
    • श्रीकृष्णका गोपदेवीके रूपसे वृषभानु-भवनमें जाकर श्रीराधासे मिलना
    • श्रीकृष्णके द्वारा गोपदेवीरूपसे श्रीराधाके प्रेमकी परीक्षा तथा श्रीराधाको श्रीकृष्णका दर्शन
    • रासक्रीडाका वर्णन
    • श्रीराधा और श्रीकृष्णके परस्पर शृङ्गार-धारण, रास, जलविहार एवं वनविहारका वर्णन
    • गोपाङ्गनाओंके साथ श्रीकृष्णका वन-विहार, रास-क्रीड़ा; मानवती गोपियोंको छोड़कर श्रीराधाके साथ एकान्त-विहार तथा मानिनी श्रीराधाको भी छोड़कर उनका अन्तर्धान होना
    • गोपाङ्गनाओंद्वारा श्रीकृष्णका स्तवन; भगवान‍्का उनके बीचमें प्रकट होना; उनके पूछनेपर हंसमुनिके उद्धारकी कथा सुनाना तथा गोपियोंको क्षीरसागर-श्वेतद्वीपके नारायण-स्वरूपोंका दर्शन कराना
    • कंस और शङ्खचूडमें युद्ध तथा मैत्रीका वृत्तान्त; श्रीकृष्णद्वारा शङ्खचूडका वध
    • रास-विहार तथा आसुरि मुनिका उपाख्यान
    • शिव और आसुरिका गोपीरूपसे रासमण्डलमें श्रीकृष्णका दर्शन और स्तवन करना तथा उनके वरदानसे वृन्दावनमें नित्य-निवास पाना
    • श्रीकृष्णका विरजाके साथ विहार; श्रीराधाके भयसे विरजाका नदीरूप होना, उसके सात पुत्रोंका उसी शापसे सात समुद्र होना तथा राधाके शापसे श्रीदामाका अंशत: शङ्खचूड होना
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    गिरिराजखण्ड
    • श्रीकृष्णके द्वारा गोवर्धनपूजनका प्रस्ताव और उसकी विधिका वर्णन
    • गोपोंद्वारा गिरिराज-पूजनका महोत्सव
    • श्रीकृष्णका गोवर्धन पर्वतको उठाकर इन्द्रके द्वारा क्रोधपूर्वक करायी गयी घोर जलवृष्टिसे रक्षा करना
    • इन्द्रद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति तथा सुरभि और ऐरावतद्वारा उनका अभिषेक
    • गोपोंका श्रीकृष्णके विषयमें संदेहमूलक विवाद तथा श्रीनन्दराज एवं वृषभानुवरके द्वारा समाधान
    • गोपोंका वृषभानुवरके वैभवकी प्रशंसा करके नन्दनन्दनकी भगवत्ताका परीक्षण करनेके लिये उन्हें प्रेरित करना और वृषभानुवरका कन्याके विवाहके लिये वरको देनेके निमित्त बहुमूल्य एवं बहुसंख्यक मौक्तिक-हार भेजना तथा श्रीकृष्णकी कृपासे नन्दराजका वधूके लिये उनसे भी अधिक मौक्तिकराशि भेजना
    • गिरिराज गोवर्धनसम्बन्धी तीर्थोंका वर्णन
    • विभिन्न तीर्थोंमें गिरिराजके विभिन्न अङ्गोंकी स्थितिका वर्णन
    • गिरिराज गोवर्धनकी उत्पत्तिका वर्णन
    • गोवर्द्धन-शिलाके स्पर्शसे एक राक्षसका उद्धार तथा दिव्यरूपधारी उस सिद्धके मुखसे गोवर्द्धनकी महिमाका वर्णन
    • सिद्धके द्वारा अपने पूर्वजन्मके वृत्तान्तका वर्णन तथा गोलोकसे उतरे हुए विशाल रथपर आरूढ़ हो उसका श्रीकृष्णलोकमें गमन
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    माधुर्यखण्ड
    • श्रुतिरूपा गोपियोंका वृत्तान्त, उनका श्रीकृष्ण और दुर्वासामुनिकी बातोंमें संशय तथा श्रीकृष्णद्वारा उसका निराकरण
    • ऋषिरूपा गोपियोंका उपाख्यान—वङ्गदेशके मङ्गल-गोपकी कन्याओंका नन्दराजके व्रजमें आगमन तथा यमुनाजीके तटपर रासमण्डलमें प्रवेश
    • मैथिलीरूपा गोपियोंका आख्यान; चीरहरणलीला और वरदान-प्राप्ति
    • कोसलप्रान्तीय स्त्रियोंका व्रजमें गोपी होकर श्रीकृष्णके प्रति अनन्यभावसे प्रेम करना
    • अयोध्यावासिनी गोपियोंके आख्यानके प्रसङ्गमें राजा विमलकी संतानके लिये चिन्ता तथा महामुनि याज्ञवल्क्यद्वारा उन्हें बहुत-सी पुत्री होनेका विश्वास दिलाना
    • अयोध्यापुरवासिनी स्त्रियोंका राजा विमलके यहाँ पुत्रीरूपसे उत्पन्न होना; उनके विवाहके लिये राजाका मथुरामें श्रीकृष्णको देखनेके निमित्त दूत भेजना; वहाँ पता न लगनेपर भीष्मजीसे अवतार-रहस्य जानकर उनका श्रीकृष्णके पास दूत प्रेषित करना
    • राजा विमलका संदेश पाकर भगवान् श्रीकृष्णका उन्हें दर्शन और मोक्ष प्रदान करना तथा उनकी राजकुमारियोंको साथ लेकर व्रजमण्डलमें लौटना
    • यज्ञसीतास्वरूपा गोपियोंके पूछनेपर श्रीराधाका श्रीकृष्णकी प्रसन्नताके लिये एकादशी-व्रतका अनुष्ठान बताना और उसके विधि, नियम और माहात्म्यका वर्णन करना
    • पूर्वकालमें एकादशीका व्रत करके मनोवाञ्छित फल पानेवाले पुण्यात्माओंका परिचय तथा यज्ञसीतास्वरूपा गोपिकाओंको एकादशी-व्रतके प्रभावसे श्रीकृष्ण-सांनिध्यकी प्राप्ति
    • पुलिन्द-कन्यारूपिणी गोपियोंके सौभाग्यका वर्णन
    • लक्ष्मीजीकी सखियोंका वृषभानुओंके घरोंमें कन्यारूपसे उत्पन्न होकर माघ मासके व्रतसे श्रीकृष्णको रिझाना और पाना
    • दिव्यादिव्य, त्रिगुणवृत्तिमयी भूतल-गोपियोंका वर्णन तथा श्रीराधासहित गोपियोंकी श्रीकृष्णके साथ होली
    • देवाङ्गनास्वरूपा गोपियाँ
    • कौरव-सेनासे पीड़ित रंगोजि गोपका कंसकी सहायतासे व्रजमण्डलकी सीमापर निवास तथा उसकी पुत्रीरूपमें जालंधरी गोपियोंका प्राकटॺ
    • बर्हिष्मतीपुरी आदिकी वनिताओंका गोपीरूपमें प्राकटॺ तथा भगवान् के साथ उनका रासविलास; मांधाता और सौभरिके संवादमें यमुना-पञ्चाङ्गकी प्रस्तावना
    • श्रीयमुना-कवच
    • श्रीयमुनाका स्तोत्र
    • यमुनाजीके जप और पूजनके लिये पटल और पद्धतिका वर्णन
    • यमुना-सहस्रनाम
    • बलदेवजीके हाथसे प्रलम्बासुरका वध तथा उसके पूर्वजन्मका परिचय
    • दावानलसे गौओं और ग्वालोंका छुटकारा तथा विप्रपत्नियोंको श्रीकृष्णका दर्शन
    • श्रीकृष्णका नन्दराजको वरुणलोकसे ले आना और गोप-गोपियोंको वैकुण्ठधामका दर्शन कराना
    • अम्बिकावनमें अजगरसे नन्दराजकी रक्षा तथा सुदर्शन-नामक विद्याधरका उद्धार
    • अरिष्टासुर और व्योमासुरका वध तथा माधुर्यखण्डका उपसंहार
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    श्रीमथुराखण्ड
    • कंसका नारदजीके कथनानुसार बलराम और श्रीकृष्णको अपना शत्रु समझकर वसुदेव-देवकीको कैद करना, उन दोनों भाइयोंको मारनेकी व्यवस्थामें लगना तथा उन्हें मथुरा ले आनेके लिये अक्रूरजीको नन्दके व्रजमें जानेकी आज्ञा देना
    • केशीका वध
    • अक्रूरका नन्दग्राम-गमन, मार्गमें उनकी बलराम-श्रीकृष्णसे भेंट तथा उन्हींके साथ नन्द-भवनमें प्रवेश; श्रीकृष्णसे बातचीत और उनका मथुरा-गमनके लिये निश्चय, मथुरा-यात्राकी चर्चा सब ओर फैल जानेपर गोपियोंका विरहकी आशङ्कासे उद्विग्न हो उठना
    • श्रीकृष्णका गोपियोंके घरोंमें जाकर उन्हें सान्त्वना देना तथा मार्गमें रथ रोककर खड़ी हुई गोपाङ्गनाओंको समझाकर उनका मथुरापुरीकी ओर प्रस्थित होना
    • अक्रूरको भगवान् श्रीकृष्णके परब्रह्मस्वरूपका साक्षात्कार तथा उनकी स्तुति; श्रीकृष्णका ग्वालबालोंके साथ पुरी-दर्शनके लिये जाना, नागरी स्त्रियोंका उनपर मोहित होना तथा भगवान् के हाथसे एक रजकका उद्धार
    • सुदामा माली और कुब्जापर कृपा; धनुर्भङ्ग तथा मथुराकी स्त्रियोंपर श्रीकृष्णके मधुर-मोहन रूपका प्रभाव
    • मल्ल-क्रीड़ा-महोत्सवकी तैयारी; रङ्गद्वारपर कुवलयापीड़का वध तथा श्रीकृष्ण और बलरामका चाणूर और मुष्टिकके साथ मल्लयुद्धमें प्रवृत्त होना
    • चाणूर-मुष्टिक आदि मल्लोंका तथा कंस और उसके भाइयोंका वध
    • श्रीकृष्णद्वारा वसुदेव-देवकीकी बन्धनसे मुक्ति; श्रीकृष्ण और बलरामका गुरुकुलमें विद्याध्ययन तथा गुरुदक्षिणाके रूपमें गुरुके मरे हुए पुत्रको यमलोकसे लाकर लौटाना; श्रीअक्रूरको हस्तिनापुर भेजना तथा कुब्जाका मनोरथ पूर्ण करना
    • धोबी, दर्जी और सुदामा मालीके पूर्वजन्मका परिचय
    • कुब्जा और कुवलयापीडके पूर्वजन्मगत वृत्तान्तका वर्णन
    • चाणूर आदि मल्ल, कंसके छोटे भाइयों तथा पञ्चजन दैत्यके पूर्वजन्मगत वृत्तान्तका वर्णन
    • श्रीकृष्णकी आज्ञासे उद्धवका व्रजमें जाना और श्रीदामा आदि सखाओंका उनसे श्रीकृष्ण-विरहके दु:खका निवेदन
    • उद्धवका श्रीकृष्ण-सखाओंको आश्वासन; नन्द और यशोदासे बातचीत तथा उनकी प्रेम-लक्षणा-भक्तिसे चकित होकर उद्धवका उन्हें श्रीकृष्णके चरित्र सुनाना
    • गोपाङ्गनाओंके साथ उद्धवका कदलीवनमें जाना और वहाँ उनकी स्तुति करके श्रीकृष्णद्वारा भेजे गये पत्र अर्पित करना
    • उद्धवद्वारा श्रीराधा तथा गोपीजनोंको आश्वासन
    • श्रीकृष्णको स्मरण करके श्रीराधा तथा गोपियोंके करुण उद्‍गार
    • गोपियोंके उद्‍गार तथा उनसे विदा लेकर उद्धवका मथुराको लौटना
    • श्रीकृष्णका उद्धवके साथ व्रजमें प्रत्यागमन और यमुना-तटपर गौओंका उनके रथको चारों ओरसे घेर लेना; गोपोंके साथ उनकी भेंट; नन्दगाँवसे नन्दरायजी एवं यशोदाका गोपों एवं गोपियोंको लेकर गाजे-बाजेके साथ उनकी अगवानीके लिये निकलना तथा सबके साथ श्रीकृष्णका नन्दनगरमें प्रवेश
    • श्रीकृष्णका कदली-वनमें श्रीराधा और गोपियोंके साथ मिलन; रासोत्सव तथा उसी प्रसङ्गमें रोहिताचलपर महामुनि ऋभुका मोक्ष
    • श्रीकृष्णकी द्रवरूपताके प्रसङ्गमें नारदजीका उपाख्यान
    • नारदका अनेकलोकोंमें होते हुए गोलोकमें पहुँचकर भगवान‍् श्रीकृष्णके समक्ष अपनी कलाका प्रदर्शन करना तथा श्रीकृष्णका द्रवरूप होना
    • श्रीकृष्णका व्रजसे लौटकर मथुरामें आगमन
    • बलदेवजीके द्वारा कोल दैत्यका वध; उनकी गङ्गातटवर्ती तीर्थोंमें यात्रा; माण्डूकदेवको वरदान और भावी वृत्तान्तकी सूचना देना; फिर गङ्गाके अन्यान्य तीर्थोंमें स्नान-दान करके मथुरामें लौट जाना
    • मथुरापुरीका माहात्म्य एवं मथुराखण्डका उपसंहार
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    द्वारकाखण्ड
    • जरासंधका विशाल सेनाके साथ मथुरापर आक्रमण; श्रीकृष्ण और बलरामद्वारा उसकी सेनाका संहार; मगधराजकी पराजय तथा श्रीकृष्ण-बलरामका मथुरामें विजयी होकर लौटना
    • मथुरा पर जरासंध और कालयवनका आक्रमण; भगवान‍्का युद्ध छोड़कर एक गुफामें जाना और वहाँ गये हुए कालयवनको मुचुकुन्दके दृष्टिपातसे दग्ध कराना; मुचुकुन्दको वर देकर बदरकाश्रमकी ओर भेजना और स्वयं म्लेच्छ-सेनाका संहार करके जरासंधके सामनेसे भागकर श्रीकृष्ण-बलरामका प्रवर्षणगिरि होते हुए द्वारका पहुँचना और जरासंधका उस पर्वतको जलाकर मगधको लौट जाना
    • बलदेवजीका रेवतीके साथ विवाह
    • श्रीकृष्णको रुक्मिणीका संदेश; ब्राह्मणसहित श्रीकृष्णका कुण्डिनपुरमें आगमन; कन्या और वरके अपने-अपने घरोंमें मङ्गलाचार; शिशुपालके साथ आयी हुई बारातको विदर्भराजका ठहरनेके लिये स्थान देना
    • रुक्मिणीकी चिन्ता; ब्राह्मणद्वारा श्रीहरिके शुभागमनका समाचार पाकर प्रसन्नता; भीष्मकद्वारा बलराम और श्रीकृष्णका सत्कार; पुरवासियोंकी कामना; रुक्मिणीकी कुलदेवीके पूजनके लिये यात्रा, देवीसे प्रार्थना तथा सौभाग्यवती स्त्रियोंसे आशीर्वादकी प्राप्ति
    • श्रीकृष्णद्वारा रुक्मिणीका अपहरण तथा यादव-वीरोंके साथ युद्धमें विपक्षी राजाओंकी पराजय
    • श्रीकृष्णके हाथोंसे रुक्मीकी पराजय तथा द्वारकामें रुक्मिणी और श्रीकृष्णका विवाह
    • श्रीकृष्णका सोलह हजार एक सौ आठ रानियोंके साथ विवाह और उनकी संततिका वर्णन; प्रद्युम्नका प्राकटॺ तथा रति और रुक्म-पुत्रीके साथ उनका विवाह
    • द्वारकापुरीके पृथ्वीपर आनेका कारण; राजा आनर्तकी तपस्या और उनपर भगवान‍् श्रीकृष्णकी कृपा
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    दसवाँ अध्याय
    • द्वारकापुरी, गोमती और चक्रतीर्थका माहात्म्य; कुबेरके वैष्णवयज्ञमें दुर्वासामुनिद्वारा घण्टानाद और पार्श्वमौलिको शाप
    • गज और ग्राह बने हुए मन्त्रियोंका युद्ध और भगवान‍् विष्णुके द्वारा उनका उद्धार
    • महामुनि त्रितके शापसे कक्षीवान‍्का शङ्खरूप होकर सरोवरमें रहना और श्रीकृष्णके द्वारा उसका उद्धार होना; शङ्खोद्धार-तीर्थकी महिमा
    • प्रभास, सरस्वती, बोधपिप्पल और गोमती-सिन्धु-संगमका माहात्म्य
    • द्वारका क्षेत्रके समुद्र तथा रैवतक पर्वतका माहात्म्य
    • यज्ञतीर्थ, कपिटङ्कतीर्थ, नृगकूप, गोपीभूमि तथा गोपीचन्दनकी महिमा; द्वारकाकी मिट्टीके स्पर्शसे एक महान् पापीका उद्धार
    • सिद्धाश्रमकी महिमाके प्रसङ्गमें श्रीराधा और गोपाङ्गनाओंके साथ श्रीकृष्ण और उनकी सोलह हजार रानियोंका समागम
    • सिद्धाश्रममें श्रीराधा और श्रीकृष्णका मिलन; श्रीकृष्णकी रानियोंका श्रीराधाको अपने शिविरमें बुलाकर उनका सत्कार करना तथा श्रीहरिके द्वारा उनकी उत्कृष्ट प्रीतिका प्रकाशन
    • सिद्धाश्रममें व्रजाङ्गनाओं तथा सोलह सहस्र रानियोंके साथ श्यामसुन्दरकी रासक्रीड़ाका वर्णन तथा श्रीराधाके मुखसे वृन्दावनके रासकी उत्कृष्टताका प्रतिपादन
    • लीला-सरोवर, हरिमन्दिर, ज्ञानतीर्थ, कृष्ण-कुण्ड, बलभद्र-सरोवर, दानतीर्थ, गणपतितीर्थ और मायातीर्थ आदिका वर्णन
    • इन्द्रतीर्थ, ब्रह्मतीर्थ, सूर्यकुण्ड, नीललोहित-तीर्थ और सप्तसामुद्रक-तीर्थका माहात्म्य
    • तृतीय दुर्गके द्वार-देवताओंके दर्शन और पूजनकी महिमा तथा पिण्डारकतीर्थका माहात्म्य
    • सुदामा ब्राह्मणका उपाख्यान
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    विश्वजित् खण्ड
    • राजा मरुत्तका उपाख्यान
    • राजा उग्रसेनके राजसूय-यज्ञका उपक्रम; प्रद्युम्नका दिग्विजयके लिये बीड़ा उठाना और उनका विजयाभिषेक
    • प्रद्युम्नके नेतृत्वमें दिग्विजयके लिये प्रस्थित हुई यादवोंकी गजसेना, अश्वसेना तथा योद्धाओंका वर्णन
    • सेनासहित यादव-वीरोंकी दिग्विजयके लिये यात्रा
    • यादव-सेनाकी कच्छ और कलिङ्गदेशपर विजय
    • प्रद्युम्नका मरुधन्व देशके राजा गयको हराकर मालवनरेश तथा माहिष्मती पुरीके राजासे बिना युद्ध किये ही भेंट प्राप्त करना
    • गुजरात-नरेश ऋष्यपर विजय प्राप्त करके यादव-सेनाका चेदिदेशके स्वामी दमघोषके यहाँ जाना; राजाका यादवोंसे प्रेमपूर्ण बर्ताव करनेका निश्चय, किंतु शिशुपालका माता-पिताके विरुद्ध यादवोंसे युद्धका आग्रह
    • शिशुपालके मित्र द्युमान् तथा शक्तका वध
    • भानुके द्वारा रङ्ग-पिङ्गका वध; प्रद्युम्न और शिशुपालका भयंकर युद्ध तथा चेदिदेशपर प्रद्युम्नकी विजय
    • यादव-सेनाका कोङ्कण, कुटक, त्रिगर्त, केरल, तैलंग, महाराष्ट्र और कर्नाटक आदि देशोंपर विजय प्राप्तकर करूष देशमें जाना तथा वहाँ दन्तवक्रका घोर युद्ध
    • दन्तवक्रकी पराजय तथा करूष देशपर यादव-सेनाकी विजय
    • उशीनर आदि देशोंपर प्रद्युम्नकी विजय तथा उनकी जिज्ञासापर मुनिवर अगस्त्यद्वारा तत्त्वज्ञानका प्रतिपादन
    • शाल्व आदि देशों तथा द्विविद वानरपर प्रद्युम्नकी विजय; लङ्कासे विभीषणका आना और उन्हें भेंट समर्पित करना
    • सह्यपर्वतके निकट दत्तात्रेयका दर्शन और उपदेश तथा महेन्द्रपर्वतपर परशुरामजीके द्वारा यादवसेनाका सत्कार और श्रेष्ठ भक्तके स्वरूपका निरूपण
    • उड्डीश-डामर देशके राजा, वङ्गदेशके अधिपति वीरधन्वा तथा असमके नरेश पुण्ड्रपर यादव-सेनाकी विजय
    • मिथिलाके राजा धृतिद्वारा ब्रह्मचारीके रूपमें पधारे हुए प्रद्युम्नका पूजन; उन दोनोंका शुभ संवाद; प्रद्युम्नका राजाको प्रत्यक्ष दर्शन दे, उनसे पूजित हो शिविरमें जाना
    • मगधदेशपर यादवोंकी विजय तथा मगधराज जरासंधकी पराजय
    • गया, गोमती, सरयू एवं गङ्गाके तटवर्ती प्रदेश, काशी, प्रयाग एवं विन्ध्यदेशमें यादव-सेनाकी यात्रा; श्रीकृष्णके अठारह महारथीपुत्रोंका हस्तलाघव तथा विवाह; मथुरा, शूरसेन जनपदों एवं नन्द-गोकुलमें प्रद्युम्न आदिका समादर
    • यादव-सेनाका विस्तार; कौरवोंके पास उद्धवका दूतके रूपमें जाकर प्रद्युम्नका संदेश सुनाना; कौरवोंके कटु उत्तरसे रुष्ट यादवोंकी हस्तिनापुरपर चढ़ाई
    • कौरवोंकी सेनाका युद्धभूमिमें आना; दोनों ओरके सैनिकोंका तुमुल युद्ध और प्रद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी पराजय
    • कौरव तथा यादव वीरोंका घमासान युद्ध; बलराम और श्रीकृष्णका प्रकट होकर उनमें मेल कराना
    • अर्जुनसहित प्रद्युम्नका कालयवन-पुत्र चण्डको जीतकर भारतवर्षके बाहर पूर्वोत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान
    • यादव-सेनाका बाणासुरसे भेंट लेकर अलकापुरीको प्रस्थान तथा यादवों और यक्षोंका युद्ध
    • यादव-सेना और यक्ष-सेनाका घोर युद्ध
    • प्रद्युम्नका एक युक्तिके द्वारा गणेशजीको रणभूमिसे हटाकर गुह्यकसेनापर विजय प्राप्त करना और कुबेरका उनके लिये बहुत-सी भेंट-सामग्री देकर उनकी स्तुति करना; फिर प्राग्ज्योतिषपुरमें भेंट लेकर प्रद्युम्नका विरोधी वानर द्विविदको किष्किन्धामें फेंक देना
    • किम्पुरुषवर्षके रङ्गवल्लीपुरमें किम्पुरुषोंद्वारा हरिचरित्रका गान; वहाँके राजाद्वारा भेंट पाकर यादव-सेनाका आगे जाना; मार्गमें अजगररूपधारी शापभ्रष्ट गन्धर्वका उद्धार; वसन्ततिलका पुरीके राजा शृङ्गारतिलकको पराजित करके प्रद्युम्नका हरिवर्षके लिये प्रस्थान
    • प्रद्युम्नद्वारा गरुडास्त्रका प्रयोग होनेपर गीधोंके आक्रमणसे यादव-सेनाकी रक्षा; दशार्णदेशपर विजय तथा दशार्णमोचन तीर्थमें स्नान
    • उत्तरकुरुवर्षपर यादवोंकी विजय; वाराहीपुरीमें राजा गुणाकरद्वारा प्रद्युम्नका समादर
    • प्रद्युम्नकी हिरण्मयवर्षपर विजय; मधुमक्खियों और वानरोंके आक्रमणसे छुटकारा; राजा देवसखसे भेंटकी प्राप्ति तथा चन्द्रकान्ता नदीमें स्नान
    • रम्यकवर्षमें कलङ्क राक्षसपर विजय; नै:श्रेयसवन, मानवी नगरी तथा मानवगिरिका दर्शन; श्राद्धदेव मनुद्वारा प्रद्युम्नकी स्तुति
    • रम्यकवर्षमें मन्मथशालिनी पुरीके लोगोंद्वारा श्रीकृष्णलीलाका गान; प्रजापति व्यति संवत्सरद्वारा प्रद्युम्नका पूजन; कामवनमें प्रद्युम्नका अपने कामदेव-स्वरूपमें विलय
    • भद्राश्ववर्षमें भद्रश्रवाके द्वारा प्रद्युम्नका पूजन तथा स्तवन; यादव-सेनाकी चन्द्रावती-पुरीपर चढ़ाई; श्रीकृष्णकुमार वृकके द्वारा हिरण्याक्ष-पुत्र हृष्टका वध
    • संग्रामजित् के हाथसे भूत-संतापनका वध
    • अनिरुद्धके हाथसे वृक दैत्यका वध
    • साम्बद्वारा कालनाभ दैत्यका वध
    • दीप्तिमान‍्द्वारा महानाभका वध
    • श्रीकृष्ण-पुत्र भानुके हाथसे हरिश्मश्रु दैत्यका वध
    • प्रद्युम्न और शकुनिके घोर युद्धका वर्णन
    • शकुनिके मायामय अस्त्रोंका प्रद्युम्नद्वारा निवारण तथा उनके चलाये हुए श्रीकृष्णास्त्रसे युद्धस्थलमें भगवान‍् श्रीकृष्णका प्रादुर्भाव
    • शकुनिके जीवस्वरूप शुकका निधन
    • शकुनिका घोर युद्ध, सात बार मारे जानेपर भी उसका भूमिके स्पर्शसे पुन: जी उठना; अन्तमें भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा युक्तिपूर्वक उसका वध
    • श्रीकृष्णका यादवोंके साथ चन्द्रावतीपुरीमें जाकर शकुनि-पुत्रको वहाँका राज्य देना तथा शकुनि आदिके पूर्व जन्मोंका परिचय
    • इलावृतवर्षमें राजा शोभनसे भेंटकी प्राप्ति; स्वायम्भुव मनुकी तपोभूमिमें मूर्तिमती सिद्धियोंका निवास; लीलावतीपुरीमें अग्निदेवसे उपायनकी उपलब्धि; वेदनगरमें मूर्तिमान् वेद, राग, ताल, स्वर, ग्राम और नृत्यके भेदोंका वर्णन
    • रागिनियों तथा रागपुत्रोंके नाम और वेद आदिके द्वारा भगवान‍्का स्तवन
    • रागिनियों तथा राग-पुत्रोंद्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णका स्तवन और उनका द्वारकापुरीके लिये प्रस्थान
    • यादवों और गन्धर्वोंका युद्ध, बलभद्रजीका प्राकटॺ, उनके द्वारा गन्धर्वसेनाका संहार, गन्धर्वराजकी पराजय, वसन्तमालती नगरीका हलद्वारा कर्षण; गन्धर्वराजका भेंट लेकर शरणमें आना और उनपर बलरामजीकी कृपा
    • यादव-सेनाके साथ शक्रसखका युद्ध और उसकी पराजय
    • शक्रसखका प्रद्युम्नको भेंट अर्पण, प्रद्युम्नका लीलावतीपुरीके स्वयंवरमें सुन्दरीको प्राप्त करना तथा इलावृतवर्षसे लौटकर भारत एवं द्वारकापुरी में आना
    • राजसूय यज्ञमें ऋषियों, ब्राह्मणों, राजाओं, तीर्थों, क्षेत्रों, देवगणों तथा सुहृद्-सम्बन्धियोंका शुभागमन
    • राजसूय यज्ञका मङ्गलमय उत्सव; देवताओं, ब्राह्मणों तथा अतिथियोंका दान-मानसे सत्कार
  • +
    श्रीबलभद्रखण्ड
    • श्रीबलभद्रजीके अवतारका कारण
    • श्रीबलभद्रजीके अवतारकी तैयारी
    • ज्योतिष्मतीका उपाख्यान
    • रेवतीका उपाख्यान
    • श्रीबलराम और श्रीकृष्णका प्राकटॺ
    • प्राड्‍‍विपाकमुनिके द्वारा श्रीराम-कृष्णकी व्रजलीलाका वर्णन
    • श्रीराम-कृष्णकी मथुरा-लीलाका वर्णन
    • श्रीराम-कृष्णकी द्वारका-लीलाका वर्णन
    • श्रीबलरामजीकी रासलीलाका वर्णन
    • श्रीबलभद्रजीकी पूजा-पद्धति और पटल
    • श्रीबलराम-स्तोत्र
    • श्रीबलराम-कवच
    • बलभद्र-सहस्रनाम
  • +
    श्रीविज्ञानखण्ड
    • द्वारकामें वेदव्यासजीका आगमन और उग्रसेनद्वारा उनका स्वागत-पूजन
    • व्यासजीके द्वारा गतियोंका निरूपण
    • सकाम एवं निष्काम भक्तियोगका वर्णन
    • भक्त-संतकी महिमाका वर्णन
    • भक्तिकी महिमाका वर्णन
    • मन्दिर-निर्माण तथा विग्रहप्रतिष्ठा एवं पूजाकी विधि
    • नित्यकर्म और पूजा-विधिका वर्णन
    • पूजा-विधिका वर्णन
    • पूजोपचार तथा पूजन-प्रकारका वर्णन
    • परमात्माका स्वरूप-निरूपण
  • +
    अश्वमेधखण्ड
    • अश्वमेध-कथाका उपक्रम; गर्ग-वज्रनाभ-संवाद
    • श्रीकृष्णावतारकी पूर्वार्द्धगत लीलाओंका संक्षेपसे वर्णन
    • जरासंधके आक्रमणसे लेकर पारिजातहरणतककी श्रीकृष्णलीलाओंका संक्षिप्त वर्णन
    • पारिजातहरण
    • देवराज और उनकी देवसेनाके साथ श्रीकृष्णका युद्ध तथा विजयलाभ; पारिजातका द्वारकापुरीमें आरोपण
    • श्रीकृष्णके अनेक चरित्रोंका संक्षेपसे वर्णन
    • देवर्षि नारदका ब्रह्मलोकसे आगमन; राजा उग्रसेनद्वारा उनका सत्कार; देवर्षिद्वारा अश्वमेध यज्ञकी महत्ताका वर्णन; श्रीकृष्णकी अनुमति एवं नारदजीद्वारा अश्वमेध यज्ञकी विधिका वर्णन
    • यज्ञके योग्य श्यामकर्ण अश्वका अवलोकन
    • गर्गाचार्यका द्वारकापुरीमें आगमन तथा अनिरुद्धका अश्वमेधीय अश्वकी रक्षाके लिये कृतप्रतिज्ञ होना
    • उग्रसेनकी सभामें देवताओंका शुभागमन; अनिरुद्धके शरीरमें चन्द्रमा और ब्रह्माका विलय तथा राजा और रानीकी बातचीत
    • ऋत्विजोंका वरण-पूजन; श्यामकर्ण अश्वका आनयन और अर्चन; ब्राह्मणोंको दक्षिणादान; अश्वके भालदेशमें बँधे हुए स्वर्णपत्रपर गर्गजीके द्वारा उग्रसेनके बल-पराक्रमका उल्लेख तथा अनिरुद्धको अश्वकी रक्षाके लिये आदेश
    • अश्वमोचन तथा उसकी रक्षाके लिये सेनापति अनिरुद्धका विजयाभिषेक
    • अनिरुद्धका अन्त:पुरसे आज्ञा लेकर अश्वकी रक्षाके लिये प्रस्थान; उनकी सहायताके लिये साम्बका कृतप्रतिज्ञ होना; लक्ष्मणाका उन्हें सम्मुख युद्धके लिये प्रोत्साहन देना; श्रीकृष्णके भाइयों और पुत्रोंका भी श्रीकृष्णकी आज्ञासे प्रस्थान करना तथा यादवोंकी चतुरङ्गिणी सेनाका विस्तृत वर्णन
    • अनिरुद्धका सेनासहित अश्वकी रक्षाके लिये प्रयाण; माहिष्मतीपुरीके राजकुमारका अश्वको बाँधना तथा अनिरुद्धका राजा इन्द्रनीलसे युद्धके लिये उद्यत होना
    • अनिरुद्ध और साम्बका शौर्य; माहिष्मती-नरेशपर इनकी विजय
    • चम्पावतीपुरीके राजाद्वारा अश्व का पकड़ा जाना; यादवोंके साथ हेमाङ्गदके सैनिकोंका घोर युद्ध; अनिरुद्ध और श्रीकृष्णपुत्रोंके शौर्यसे पराजित राजाका उनकी शरणमें आना
    • स्त्री-राज्यपर विजय और वहाँकी कुमारी रानी सुरूपाका अनिरुद्धकी प्रिया होनेके लिये द्वारकाको जाना
    • राक्षस भीषणद्वारा यज्ञीय अश्वका अपहरण तथा विमानद्वारा यादव-वीरोंकी उपलङ्कापर चढ़ाई
    • यादवों और निशाचरोंका घोर युद्ध; अनिरुद्ध और भीषणकी मूर्च्छा तथा चेतना एवं रणभूमिमें बकका आगमन
    • बक और भीषणकी पराजय तथा यादवोंका घोड़ा लेकर आकाशमार्गसे लौटना
    • भद्रावतीपुरी तथा राजा यौवनाश्वपर अनिरुद्धकी विजय
    • यज्ञके घोड़ेका अवन्तीपुरीमें जाना और वहाँ अवन्तीनरेशकी ओरसे सेनासहित यादवोंका पूर्ण सत्कार होना
    • अनिरुद्धके पूछनेपर सान्दीपनिद्वारा श्रीकृष्ण-तत्त्वका निरूपण; श्रीकृष्णकी परब्रह्मता एवं भजनीयताका प्रतिपादन करके जगत् से वैराग्य और भगवान‍्के भजनका उपदेश
    • अनुशाल्व और यादव-वीरोंमें घोर युद्ध
    • अनुशाल्वद्वारा प्रद्युम्नको उपहारसहित अश्वका अर्पण तथा बल्वल दैत्यके द्वारा उस अश्वका अपहरण
    • नारदजीके मुखसे बल्वलके निवासस्थानका पता पाकर यादवोंका अनेक तीर्थोंमें स्नान-दान करते हुए कपिलाश्रमतक जाना और वहाँ कपिल मुनिको प्रणाम करके सागरके तटपर सेनाका पड़ाव डालना
    • यादवोंद्वारा समुद्रपर बाणमय सेतुका निर्माण
    • यादवोंका पाञ्चजन्य उपद्वीपमें जाना; दैत्योंकी परस्पर मन्त्रणा; मयासुरका बल्वलको घोड़ा लौटा देनेके लिये सलाह देना; परंतु बल्वलका युद्धके निश्चयपर ही अडिग रहना
    • यादवों और असुरोंका घोर संग्राम तथा ऊर्ध्वकेश एवं अनिरुद्धका द्वन्द्व युद्ध
    • ऊर्ध्वकेश और अनिरुद्धका तथा नद और गदका घोर युद्ध; ऊर्ध्वकेश और नदका वध
    • वृकद्वारा सिंहका और साम्बद्वारा कुशाम्बका वध
    • मयको बल्वलका समझाना; बल्वलकी युद्धघोषणा; समस्त दैत्योंका युद्धके लिये निर्गमन; विलम्बके कारण सैन्यपालके पुत्रका वध तथा दु:खी सैन्यपालको मन्त्रिपुत्रोंका विवेकपूर्वक धैर्य बँधाना
    • श्रीकृष्णकी कृपासे दैत्यराजकुमार कुनन्दनके जीवनकी रक्षा
    • दैत्यों और यादवोंका घोर युद्ध; बल्वल, कुनन्दन तथा अनिरुद्धके अद्भुत पराक्रम
    • बल्वलके चारों मन्त्रिकुमारोंका वध; बल्वलद्वारा मायामय युद्ध तथा अनिरुद्धके द्वारा उसकी पराजय
    • श्रीकृष्णपुत्र सुनन्दनद्वारा दैत्यपुत्र कुनन्दनका वध
    • भगवान‍् शिवका अपने गणोंके साथ बल्वलकी ओरसे युद्धस्थलमें आना और शिवगणों तथा यादवोंका घोर युद्ध; दीप्तिमान‍्का शिवगणोंको मार भगाना और अनिरुद्धका भैरवको जृम्भणास्त्रसे मोहित करना
    • नन्दिकेश्वरद्वारा सुनन्दनका वध; भगवान‍् शिवके त्रिशूलसे आहत हुए अनिरुद्धकी मूर्च्छा; साम्ब द्वारा शिवकी भर्त्सना; साम्ब और शिवका युद्ध तथा रणक्षेत्रमें भगवान‍् श्रीकृष्णका शुभागमन
    • भगवान‍्शंकरद्वारा श्रीकृष्णका स्तवन; शिव और श्रीकृष्णकी एकता; श्रीकृष्णद्वारा सुनन्दन, अनिरुद्ध एवं अन्य सब यादवोंको जीवनदान देना तथा बल्वलद्वारा यज्ञ-सम्बन्धी अश्वका लौटाया जाना
    • यज्ञ-सम्बन्धी अश्वका व्रजमण्डलमें वृन्दावनके भीतर प्रवेश; श्रीदामाका उसे बाँधकर नन्दजीके पास ले जाना; नन्दजीका समस्त यादवों और श्रीकृष्णसे सानन्द मिलना; यादव-सेनाका वृन्दावनमें और श्रीकृष्णका नन्दपत्तनमें निवास
    • श्रीराधा और श्रीकृष्णका मिलन
    • रासक्रीडाके प्रसङ्गमें श्रीवृन्दावन, यमुना-पुलिन, वंशीवट, निकुञ्जभवन आदिकी शोभाका वर्णन; गोपसुन्दरियों, श्यामसुन्दर तथा श्रीराधाकी छबिका चिन्तन
    • श्रीकृष्णका श्रीराधा और गोपियोंके साथ विहार तथा मानवती गोपियोंके अभिमानपूर्ण वचन सुनकर श्रीराधाके साथ उनका अन्तर्धान होना
    • गोपियोंका श्रीकृष्णको खोजते हुए वंशीवटके निकट आना और श्रीकृष्णका मानवती राधाको त्यागकर अन्तर्धान होना
    • गोपाङ्गनाओंद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुए उनका आह्वान और श्रीकृष्णका उनके बीचमें आविर्भाव
    • श्रीकृष्णके आगमनसे गोपियोंको उल्लास; श्रीहरिके वेणुगीतकी चर्चासे श्रीराधाकी मूर्च्छाका निवारण; श्रीहरिका श्रीराधा आदि गोपसुन्दरियोंके साथ वन-विहार, स्थल-विहार, जल-विहार, पर्वत-विहार और रासक्रीडा
    • श्रीकृष्णसहित यादवोंका व्रजवासियोंको आश्वासन देकर वहाँसे प्रस्थान
    • अश्वका हस्तिनापुरीमें जाना; उसके भालपत्रको पढ़कर दुर्योधन आदिका रोषपूर्वक अश्वको पकड़ लेना तथा यादव-सैनिकोंका कौरवोंको घायल करना
    • यादवों और कौरवोंका घोर युद्ध
    • कौरवोंकी पराजय और उनका भगवान‍् श्रीकृष्णसे मिलकर भेंटसहित अश्वको लौटा देना
    • यादवोंका द्वैतवनमें राजा युधिष्ठिरसे मिलकर घोड़ेके पीछे-पीछे अन्यान्य देशोंमें जाना तथा अश्वका कौन्तलपुरमें प्रवेश
    • श्यामकर्ण अश्वका कौन्तलपुरमें जाना और भक्तराज चन्द्रहासका बहुत-सी भेंट-सामग्रीके साथ अश्वको अनिरुद्धकी सेवामें अर्पित करना और वहाँसे उन सबका प्रस्थान
    • उद्धवकी सलाहसे समस्त यादवोंका द्वारकापुरीकी ओर प्रस्थान तथा अनिरुद्धकी प्रेरणासे उद्धवका पहले द्वारकापुरीमें पहुँचकर यात्राका वृत्तान्त सुनाना
    • वसुदेव आदिके द्वारा अनिरुद्धकी अगवानी; सेना और अश्वसहित यादवोंका द्वारकापुरीमें लौटकर सबसे मिलना तथा श्रीकृष्ण और उग्रसेन आदिके द्वारा समागत नरेशोंका सत्कार
    • व्यासजीका मुनि-दम्पति तथा राज-दम्पतियोंको गोमतीका जल लानेके लिये आदेश देना; नारदजीका मोह और भगवान‍् द्वारा उस मोहका भञ्जन; श्रीकृष्णकी कृपासे रानियोंका कलशमें जल भरकर लाना
    • राजा द्वारा यज्ञमें विभिन्न बन्धु-बान्धवोंको भिन्न-भिन्न कार्योंमें लगाना; श्रीकृष्णका ब्राह्मणोंके चरण पखारना; घीकी आहुतिसे अग्निदेवको अजीर्ण होना; यज्ञपशुके तेजका श्रीकृष्णमें प्रवेश; उसके शरीरका कपूर्रके रूपमें परिवर्तन; उसकी आहुति और यज्ञकी समाप्तिपर अवभृथस्नान
    • ब्राह्मणभोजन, दक्षिणा-दान, पुरस्कार-वितरण, सम्बन्धियोंका सम्मान तथा देवता आदि सबका अपने-अपने निवास-स्थानको प्रस्थान
    • श्रीकृष्णद्वारा कंस आदिका आवाहन और उनका श्रीकृष्णको ही परमपिता बताकर इस लोकके माता-पितासे मिले बिना ही वैकुण्ठलोकको प्रस्थान
    • गर्गाचार्यके द्वारा राजा उग्रसेनके प्रति भगवान् श्रीकृष्णके सहस्रनामोंका वर्णन
    • कौरवोंके संहार, पाण्डवोंके स्वर्गगमन तथा यादवोंके संहार आदिका संक्षिप्त वृत्तान्त; श्रीराधा तथा व्रजवासियोंसहित भगवान् श्रीकृष्णका गोलोकधाममें गमन
    • भगवान् के श्यामवर्ण होनेका रहस्य; कलियुगकी पापमयी प्रवृत्ति; उससे बचनेके लिये श्रीकृष्णकी समाराधना तथा एकादशी-व्रतका माहात्म्य
    • गुरु और गङ्गाकी महिमा; श्रीवज्रनाभद्वारा कृतज्ञता-प्रकाशन और गुरुदेवका पूजन तथा श्रीकृष्णके भजन-चिन्तन एवं गर्गसंहिताका माहात्म्य
  • +
    गर्गसंहिता-माहात्म्य
    • गर्गसंहिताके प्राकटॺका उपक्रम
    • नारदजीकी प्रेरणासे गर्गद्वारा संहिताकी रचना; संतानके लिये दु:खी राजा प्रतिबाहुके पास महर्षि शाण्डिल्यका आगमन
    • राजा प्रतिबाहुके प्रति महर्षि शाण्डिल्यद्वारा गर्गसंहिताके माहात्म्य और श्रवण-विधिका वर्णन
    • शाण्डिल्य मुनिका राजा प्रतिबाहुको गर्गसंहिता सुनाना; श्रीकृष्णका प्रकट होकर राजा आदिको वरदान देना; राजाको पुत्रकी प्राप्ति और संहिताका माहात्म्य
  • अंतिम पृष्ठ

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