॥ श्रीहरि:॥

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श्री एकनाथ चरित्र

हिन्दी/संस्कृत

यह चरित्र एकनाथ महाराजका है। इनका नाम महाराष्ट्रमें अत्यन्त लोकप्रिय है। श्रीज्ञानेश्वरका नाम गम्भीर बना देता है, तुकारामके नाममें लीनता है, रामदासके नामकी धाक है, वैसे ही इनके नाममें सबको प्रसन्न कर देनेकी शक्ति है। कारण इनका चरित्र ऐसा ही है जो पाठक आगे पढ़ेंगे। काशीमें जैसे गंगा बहती हैं, वैसे ही महाराष्ट्रमें, विशेषकर पैठणमें एकनाथकी स्मृतिगंगा बहती है। आज भी महाराष्ट्रमें सर्वत्र एकनाथषष्ठी मनायी जाती है और पैठणमें तो इस दिन सब दिशाओंसे यात्री एकत्र होते और इस स्मृतिगंगामें स्नानकर कृतार्थताका अनुभव करते हैं। प्रतिष्ठान या पैठण किसी समय विद्याका एक प्रधान केन्द्रस्थान था, पर आज पैठणमें और तो कुछ नहीं, पर एकनाथकी दिव्य स्मृति है। पैठणकी विद्या सफल हो गयी जब एकनाथ उत्पन्न हुए। पैठणमें एकनाथ महाराजका स्थान अभीतक है, ‘योगक्षेमं वहाम्यहम्’ के न्यायसे उनके वंशधरोंको मिली हुई जागीर भी है, वंशधर भी हैं, एकनाथ महाराजकी स्मृति और उनका कार्य भी है। स्मृतिके उत्सव भी होते हैं।
  • प्रथम पृष्ठ
  • भूमिका
  • ग्रन्थकारकी प्रस्तावना
  • प्रपितामह भानुदास
  • बाल्यकाल
  • गुरु जनार्दनस्वामी
  • श्रीदत्तकृपा और अनुष्ठान
  • एकनाथकी तीर्थयात्रा
  • नाथका गृहस्थाश्रम
  • एकनाथकी गुरुभक्ति
  • +
    एकनाथ महाराजकी कुछ कथाएँ
    • १—शरीरपर थूकनेवाला यवन
    • २—शान्ति-भंग करनेवालेको २०० रुपयेका पुरस्कार
    • ३—श्राद्धान्न और महार—
    • ४—दण्डवत्-स्वामी
    • ५—क्षुधित ब्राह्मणोंका सत्कार
    • ६—वडारियोंका सम्मान
    • ७—गधेको प्राणदान!
    • ८—विष्णुसहस्रनामका पाठ
    • ९—वेश्याका उद्धार!
    • १०—चोरोंका सत्कार
    • ११—रनिया महार और उसकी स्त्री
    • १२—ब्राह्मण और पारस
    • १३—अन्त्यज बालक और कोढ़ी ब्राह्मण
    • १४—महार और ब्रह्मराक्षस
  • नाथ और श्रीखण्डिया
  • काशी आदिकी यात्रा और ग्रन्थ
  • अन्तिम
  • चतु:श्लोकी भागवत
  • +
    रुक्मिणी-स्वयंवर
    • श्रीकृष्णस्वरूप
    • कृष्ण-निन्दा
    • रमणीक द्वारका
    • रुक्मिणी-रूप-वर्णन
    • वर-पूजन
    • वन्दन
    • देवी-देव एक
  • +
    चिरंजीव-पद
    • विरक्त
    • अखण्ड एकान्त
  • +
    भावार्थ-रामायण
    • अजन्मा रामका जन्म
    • रामका रणयज्ञ
    • सीता-शुद्धि
    • रामका सगुण रूप
  • +
    एकनाथी भागवत
    • बोध-वचन
    • उजेला
    • माया
    • भजनानन्द
    • भक्ति और प्राप्ति
    • भगवान् के चरणोंमें
    • सद्‍गुरु
    • साधक
    • भागवत-धर्म
    • ज्ञान और विज्ञान
    • अहंकार
    • जीवधर्म
    • चेतन और अचेतन प्रतिमा
    • लोकसंग्रह
    • सुखकी वार्ता
    • धन-लोभ और स्त्री-काम
    • कामादिकोंकी होली
    • सत्य
    • नाम-कीर्तन
    • प्रिय भक्त
    • गोपियोंका आनन्दानुभव
    • योगसंग्रहस्थिति
    • त्यागका त्यागत्व
    • शरणागति
    • सरल उपाय
    • भक्त और भगवान्
    • जन और जनार्दन
    • प्रसन्नता
    • भगवत्कृपा
    • मन
    • भगवद्भजन
    • निरपेक्षता
    • एकान्त-भक्ति
    • त्रिगुण-संक्रम
    • कर्म-ब्रह्म
    • अनन्य-प्रीतिका प्रभाव
    • दु:संगका परिणाम
    • दुर्जनके लक्षण
    • भयंकर दु:संग
    • संसार-सुखरूप
    • सत्संग
    • श्रेष्ठ धर्म
  • अन्तिम पृष्ठ

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