॥ श्रीहरि:॥

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Shri Bhaktamal | श्रीभक्तमाल

हिन्दी/संस्कृत

प्रस्तुत पुस्तक में बिना किसी भेदभावके भक्तचरितोंका वर्णन हुआ है। भारतवर्षके विभिन्न क्षेत्र, भाषा, जाति, सम्प्रदाय एवं वर्ग आदिके सन्तोंका चरित इसमें वर्णित है। अत: इसके पठन-श्रवणसे उक्त आधारोंपर होनेवाली अविवेकमूलक विषमताएँ दूर होती हैं। इसकी गाथाओंमें कई स्थलोंपर हमारी प्राचीन संस्कृतिकी छटाके दर्शन होते हैं, जो आज दुर्लभ हो रहा है। आशा है पाठक-पाठिकागण इस भक्तमालको पढ़कर लाभान्वित होंगे तथा भगवद्भक्तोंके चरितसे प्रेरणा प्राप्तकर भक्तिपथपर अग्रसर होंगे, जिससे उन्हें परलोकमें सुख-शान्ति और मानव-जीवनके परम एवं चरम लक्ष्य परमात्मप्रभुकी करुणामयी कृपा प्राप्त हो सकेगी।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • +
    भक्तमाल—एक परिचय
    • भक्तमालके प्राकटॺकी रोचक कथा
    • श्रीनाभादासजीका पावनस्मरण
    • भक्तमालकी टीका
  • ‘बिना भक्तमाल भक्तिरूप अति दूर है’
  • +
    भगवद्भक्तोंद्वारा की गयी प्रार्थना
    • मन्त्रद्रष्टा ऋषिकी प्रार्थना
    • ध्रुवकी प्रार्थना
    • परमात्मप्रभुसे प्रार्थना
    • प्रह्लादकी प्रार्थना
    • महर्षि आपस्तम्बकी प्रार्थना
    • रन्तिदेवकी प्रार्थना
    • वृत्रासुरकी प्रार्थना
    • भीष्मकी प्रार्थना
    • कुन्तीकी प्रार्थना
    • बिल्वमंगलकी प्रार्थना
    • श्रीशंकराचार्यकी प्रार्थना
    • श्रीयामुनाचार्यकी प्रार्थना
    • श्रीनिम्बार्काचार्यकी प्रार्थना
    • श्रीचैतन्यदेवकी प्रार्थना
    • श्रीसूरदासजीकी प्रार्थना
    • गोस्वामी श्रीतुलसीदासजीकी प्रार्थना
  • भक्त और भगवान्
  • श्रीनाभादासजीकृत भक्तमालका मंगलाचरण
  • श्रीप्रियादासजीकृत भक्तिरसबोधिनी टीकाका मंगलाचरण
  • भक्तिरसबोधिनी टीकाका नामस्वरूप-वर्णन
  • श्रीभक्तिदेवीका शृंगार
  • भक्तिरसबोधिनी टीकाकी महिमा
  • भक्तमालकी महिमा
  • संतसंगके प्रभावका वर्णन
  • भक्तमाल-स्वरूपवर्णन
  • भक्तमाल-माहात्म्यवर्णन
  • भक्तमालके मंगलाचरणकी भक्तिरसबोधिनी टीका
  • भक्तमालकी रचनाके लिये श्रीनाभाजीको आज्ञा प्राप्त होना
  • श्रीनाभाजीका चरित्र-वर्णन
  • चौबीस अवतारोंकी कथा
  • श्रीप्रियादासकृत भक्तिरसबोधिनी टीका
  • +
    भगवान‍्के चौबीस अवतारोंकी कथा
    • (१) मत्स्यावतारकी कथा
    • (२) श्रीवराह-अवतारकी कथा
    • (३) कमठ (कच्छप)-अवतारकी कथा
    • (४) श्रीनृसिंह-अवतारकी कथा
    • (५) श्रीवामनावतारकी कथा
    • (६) श्रीपरशुरामावतारकी कथा
    • (७) श्रीरामावतारकी कथा
    • (८) श्रीकृष्णावतारकी कथा
    • (९) श्रीबुद्ध-अवतारकी कथा
    • (१०) कल्कि-अवतारकी कथा
    • (११) श्रीव्यासजीके अवतारकी कथा
    • (१२) श्रीपृथुजीके अवतारकी कथा
    • (१३) श्रीहरि-अवतारकी कथा
    • (१४) श्रीहंस-अवतारकी कथा
    • (१५) मन्वन्तरावतारोंकी कथा
    • (१६) श्रीयज्ञ-अवतारकी कथा
    • (१७) श्रीऋषभ-अवतारकी कथा
    • (१८) श्रीहयग्रीव-अवतारकी कथा
    • (१९) ध्रुववरदेन (श्रीहरि)-के अवतारकी कथा
    • (२०) श्रीधन्वन्तरि-अवतारकी कथा
    • (२१) श्रीबदरीपति (नर-नारायण)-अवतारकी कथा
    • (२२) श्रीदत्तात्रेय-अवतारकी कथा
    • (२३) श्रीकपिल-अवतारकी कथा
    • (२४) श्रीसनकादि-अवतारकी कथा
  • श्रीरामजीके चरणचिह्न
  • +
    द्वादश प्रधान भक्त
    • (१) श्रीब्रह्माजी
    • (२) श्रीनारदजी
    • (३) श्रीशंकरजी
    • (४) श्रीसनकादिजी
    • (५) श्रीकपिलदेवजी
    • (६) श्रीमनुजी
    • (७) श्रीनरहरिदास (श्रीप्रह्लादजी)
    • (८) श्रीजनकजी
    • (९) श्रीभीष्मपितामहजी
    • (१०) श्रीबलिजी
    • (११) श्रीशुकदेवजी
    • (१२) श्रीधर्मराजजी
    • अजामिलकी कथा
  • +
    षोडश पार्षद
    • भगवान् श्रीनारायणके पार्षद
  • +
    हरिवल्लभ (भगवान‍्के प्रिय भक्त)
    • श्रीकमला (श्रीलक्ष्मीजी)
    • श्रीगरुड़जी
    • सुनन्द आदि
    • श्रीहनुमान‍्जी
    • श्रीजाम्बवान‍्जी
    • श्रीसुग्रीवजी
    • श्रीविभीषणजी
    • श्रीशबरीजी
    • श्रीजटायुजी
    • श्रीध्रुवजी
    • श्रीउद्धवजी
    • श्रीअम्बरीषजी
    • (क) राजर्षि अम्बरीषके एकादशीव्रतनिष्ठाकी कथा
    • श्रीविदुरजी एवं उनकी धर्मपत्नी (विदुरानीजी)
    • श्रीअक्रूरजी
    • श्रीसुदामाजी
    • श्रीचन्द्रहासजी
    • श्रीचित्रकेतुजी
    • गज-ग्राह
    • भक्त पाण्डव
    • महर्षि मैत्रेयजी
    • श्रीकुन्तीजी
    • श्रीद्रौपदीजी
  • +
    श्रीहरिध्याननिष्ठ भक्तगण
    • नौ योगीश्वर
    • श्रीश्रुतदेवजी
    • श्रीअंगजी
    • श्रीमुचुकुन्दजी
    • श्रीप्रियव्रतजी
    • श्रीपृथुजी
    • महाराज परीक्षित‍्
    • श्रीशेषजी
    • श्रीसूतजी
    • महाशाल श्रीशौनकजी
    • श्रीप्रचेतागण
    • श्रीशतरूपाजी
    • त्रयसुता
    • श्रीमदालसाजी
    • यज्ञपत्नियाँ
    • महाभाग्यवती व्रजगोपियाँ
  • +
    प्रभुप्राप्तिके मार्गका अनुसरण करनेवाले भक्त
    • श्रीप्राचीनबर्हिजी
    • श्रीसत्यव्रतजी
    • राजा रहूगण और जड़भरतजी
    • श्रीसगरजी
    • श्रीभगीरथजी
    • महर्षि वाल्मीकि
    • श्वपच भक्त वाल्मीकिजी
    • श्रीमिथिलेशजी
    • श्रीरुक्मांगदजी
    • श्रीरुक्मांगदजीकी पुत्री
    • राजा हरिश्चन्द्र आदि परोपकारी भक्त
    • राजर्षि भरत
    • श्रीदधीचिजी
    • भक्त सुधन्वा
    • भक्त सुरथ
    • महाराज शिबि
    • बलिपत्नी श्रीविन्ध्यावलीजी
    • श्रीनीलध्वजजी
    • भक्त मयूरध्वज एवं ताम्रध्वज
    • श्रीअलर्कजी
  • +
    भगवान‍्की मायाको जीत लेनेवाले भक्त
    • महर्षि ऋभु
    • श्रीइक्ष्वाकुजी
    • श्रीऐलजी (पुरूरवा)
    • श्रीगाधिजी
    • महाराज रघु
    • श्रीरयजी
    • राजर्षि गय
    • श्रीशतधन्वाजी
    • श्रीअमूर्तजी
    • महाराज रन्तिदेव
    • गुरुभक्त उत्तंक
    • श्रीभूरिश्रवाजी
    • महर्षि देवल
    • श्रीवैवस्वत मनुजी
    • राजर्षि नहुषजी
    • राजर्षि ययाति
    • महाराज दिलीप
    • श्रीपूरुजी
    • श्रीयदुजी
    • श्रीगुह निषादजी
    • श्रीमान्धाताजी
    • श्रीपिप्पलादजी
    • श्रीनिमिजी
    • श्रीभरद्वाजजी
    • श्रीदक्षजी
    • महर्षि श्रीशरभंगजी
    • श्रीसंजयजी
    • श्रीशमीकजी
    • श्रीउत्तानपादजी
    • श्रीयाज्ञवल्क्यजी
  • राजर्षि निमि और नौ योगीश्वर
  • +
    नवधाभक्तिके आचार्य
    • श्रीपरीक्षित् जी
    • श्रीशुकदेवजी
    • श्रीप्रह्लादजी
    • भगवती श्रीलक्ष्मीजी
    • श्रीपृथुजी
    • श्रीअक्रूरजी
    • श्रीहनुमान‍्जी
    • श्रीअर्जुनजी
    • श्रीबलिजी
  • भगवत्प्रसादके तत्त्वको जाननेवाले श्रेष्ठ भक्त
  • +
    भक्ति तथा ज्ञानके प्रकाशक आचार्य
    • महर्षि पुलह
    • अगस्त्य
    • पुलस्त्य
    • महर्षि च्यवन
    • सौभरि
    • महर्षि वसिष्ठजी
    • श्रीकर्दमजी
    • श्रीअत्रिजी
    • श्रीऋचीकजी
    • श्रीगर्गजी
    • श्रीगौतमजी
    • व्यासशिष्यगण
    • श्रीलोमशजी
    • श्रीभृगुजी
    • श्रीदाल्भ्यजी
    • श्रीअंगिराजी
    • श्रीशृंगी ऋषिजी
    • श्रीमाण्डव्यजी
    • श्रीविश्वामित्रजी
    • श्रीदुर्वासाजी
    • अट्ठासी हजार ऋषिगण
    • श्रीजाबालिजी
    • महर्षि जमदग्नि
    • श्रीमायादर्श (मार्कण्डेयजी)
    • श्रीकश्यपजी
    • श्रीपर्वतजी
    • श्रीपराशरजी
  • अठारह पुराण
  • +
    अठारह स्मृतियाँ और उनके रचयिता आचार्य
    • (१) मनुस्मृति
    • (२) अत्रिस्मृति
    • (३) विष्णुस्मृति
    • (४) हारीतस्मृति
    • (५) यमस्मृति
    • (६) याज्ञवल्क्यस्मृति
    • (७) अंगिरास्मृति
    • (८) शनैश्चरस्मृति
    • (९) संवर्तस्मृति
    • (१०) कात्यायनस्मृति
    • (११) शाण्डिल्यस्मृति
    • (१२) गौतमस्मृति
    • (१३) वसिष्ठस्मृति
    • (१४) दक्षस्मृति
    • (१५) बृहस्पतिस्मृति
    • (१६) शातातपस्मृति
    • (१७) पराशरस्मृति
    • (१८) क्रतुस्मृति
  • श्रीरामसचिव (श्रीरामके मन्त्रिगण)
  • +
    श्रीराम-सहचरवर्ग
    • सूर्यपुत्र सुग्रीव
    • बालिपुत्र अंगद
    • केशरीपुत्र हनुमान‍्जी
    • श्रीजाम्बवान‍्जी
    • अन्य सहचर
  • नौ नन्दजी
  • +
    भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाके सहचर—व्रजवासीगण
    • नन्दपत्नी माता यशोदा
    • जगज्जननी श्रीराधा
    • अष्टसखी
    • श्रीकृष्णके व्रजसखा
  • श्रीकृष्णके षोडश सखा
  • सप्तद्वीपके भक्त
  • जम्बूद्वीपके भक्त
  • श्वेतद्वीपके भक्त
  • अष्टनाग
  • +
    चतु:सम्प्रदायाचार्य१
    • श्रीरामानुजाचार्यजी
    • श्रीरामानन्दाचार्यजी
    • आचार्य श्रीविष्णुस्वामीजी
    • श्रीमध्वाचार्यजी
    • श्रीनिम्बार्काचार्यजी
  • +
    श्रीसम्प्रदायके आचार्य
    • श्रीविष्वक्सेनजी
    • श्रीशठकोपाचार्य
    • श्रीबोपदेवजी
    • श्रीनाथमुनिजी
    • श्रीपुण्डरीकाक्षजी
    • श्रीराममिश्रजी
    • श्रीयामुनाचार्यजी
  • +
    श्रीरामानुजाचार्यजी एवं श्रीकूरेशाचार्यजी
    • श्रीरामानुजाचार्यजी
    • श्रीकूरेशाचार्यजी
  • +
    चार महान् सन्त
    • श्रीश्रुतिप्रज्ञजी
    • श्रीश्रुतिदेवजी
    • श्रीश्रुतिधामजी
    • श्रीश्रुतिउदधिजी
  • श्रीलालाचार्यजी
  • श्रीपादपद्मजी
  • +
    श्रीरामानुजसिद्धान्तके मतावलम्बी अन्य आचार्यगण
    • श्रीदेवाचार्यजी
    • श्रीहर्यानन्दजी
    • श्रीराघवानन्दजी
    • श्रीरामानन्दाचार्यजी
  • +
    श्रीस्वामी रामानन्दाचार्यजी और उनके द्वादश प्रधान शिष्य
    • श्रीरामानन्दाचार्यजी
    • श्रीपद्मावतीजी
    • श्रीभावानन्दजी
  • +
    श्रीअनन्तानन्दजी और उनकी शिष्यपरम्परा
    • श्रीअनन्तानन्दजी
    • श्रीयोगानन्दजी
    • श्रीगयेशजी
    • श्रीकर्मचन्दजी
    • श्रीसारीरामदासजी
    • श्रीरंगजी
  • पयहारी श्रीकृष्णदासजी
  • +
    श्रीपयहारीजीके शिष्यगण
    • श्रीकील्हदेवजी
    • श्रीअग्रदेवजी (श्रीअग्रदासजी)
    • श्रीचरणदासजी
    • श्रीहठीनारायणदासजी
    • श्रीसूरजदासजी
    • श्रीटीलाजी
    • श्रीगंगादेवीजी
    • श्रीविष्णुदासजी
    • श्रीरंगदासजी (श्रीरंगारामजी)
  • श्रीकील्हदेवजी
  • श्रीअग्रदासजी
  • श्रीशंकराचार्यजी
  • श्रीनामदेवजी
  • श्रीजयदेवजी
  • श्रीश्रीधरस्वामीजी
  • श्रीबिल्वमंगलजी
  • श्रीविष्णुपुरीजी
  • +
    श्रीविष्णुस्वामी-सम्प्रदायके अनुयायी सन्तगण
    • श्रीज्ञानदेवजी
    • श्रीत्रिलोचनजी
    • श्रीमद्वल्लभाचार्यजी
  • +
    कलियुगमें प्रेमकी प्रधानता प्रकट करनेवाले भक्त
    • श्रीकुलशेखरजी
    • श्रीलीलानुकरणजी
    • श्रीरतिवन्तीजी
  • +
    भक्तिसे भगवान‍्को वशमें करनेवाले भक्त
    • भगवत्प्रसादनिष्ठ राजा
    • श्रीकर्माबाईजी
    • श्रीसिलपिल्लेकी भक्त—दो कन्याएँ
    • जमींदारकन्याकी कथा
    • राजाकी कन्याकी कथा
    • अपने पुत्रको विष देनेवाली दो भक्तिमती नारियाँ
  • +
    सन्तवेशका आदर करनेवाले भक्त
    • सन्तवेशनिष्ठ हंसोंकी कथा
    • सदाव्रती महाजनकी कथा
  • +
    भगवान् द्वारा भक्तोंकी वाणीको सत्य करना
    • श्रीभुवनसिंहजीकी कथा
    • श्रीदेवाजी पण्डाकी कथा
    • श्रीकामध्वजजी
    • श्रीजयमलजी
    • श्रीग्वालभक्तजी
    • श्रीश्रीधर स्वामीजी
  • +
    भगवान‍्का भक्तप्रेम
    • निष्किंचन भक्त श्रीहरिपालजी
    • श्रीसाक्षीगोपालजीके भक्त
    • श्रीरामदासजी
  • +
    भक्तके वश भगवान्
    • श्रीजसू स्वामीजी
    • श्रीनन्ददासजी वैष्णवसेवी
    • श्रीअल्हजी
    • श्रीवारमुखीजी
  • ब्राह्मण-दम्पतीका भगवद्विश्वास
  • वेषनिष्ठ एक राजा
  • अन्तर्निष्ठ नरपाल
  • गुरुनिष्ठ शिष्य
  • +
    श्रीरैदासजी
    • (क) श्रीरैदासजीके जन्मकी कथा
    • (ख) रैदासजीका सन्तप्रेम और भगवान‍्से वार्तालाप
    • (ग) चित्तौड़की रानीद्वारा इनका शिष्य बनना
  • +
    श्रीकबीरदासजी
    • (क) श्रीरामानन्दजीका शिष्य बननेकी घटना
    • (ख) श्रीकबीरदासजीकी दिनचर्या और उनका भगवद्भाव
    • (ग) कबीरदासजीके जीवनके कुछ चमत्कार
    • (घ) कबीरदासजी और बादशाह सिकन्दर लोदी
    • (ङ) भगवान‍्का कबीरदासजीको दर्शन देना
    • श्रीपीपाजी
    • (क) श्रीरामानन्दाचार्यजीका शिष्य बननेकी घटना
    • (ख) पीपाजीकी रानी श्रीसीता सहचरीका श्रीरामानन्दजीकी शिष्या बनना
    • (ग) श्रीपीपाजी तथा उनकी रानीको श्रीकृष्णदर्शन होनेकी कथा
    • (घ) पीपाजीद्वारा हिंसक सिंहको अहिंसक वैष्णव बनाना
    • (ङ) श्रीचीधरदम्पतीकी सन्तनिष्ठा
    • (च) श्रीसीता सहचरीजीकी सन्तसेवाका दृष्टान्त
    • (छ) श्रीपीपाजीको स्वर्णमुहरोंकी प्राप्ति और उनका त्याग
    • (ज) राजा सूर्यसेनमलका पीपाजीका शिष्य बनना
    • (झ) पीपाजीके जीवनकी विलक्षण घटनाएँ
    • (ञ) श्रीपीपादम्पतीके सन्तनिष्ठाकी अद‍्भुत कथा
    • (ट) राजा सूर्यसेनमलको ज्ञान प्रदान करना
    • (ठ) दुराचारी भगवद्विमुखोंको सन्तभाव प्रदान करना
    • (ड) ग्वालिनको शिष्य बनाना
    • (ढ) श्रीरंगदासको भक्तिका मर्म समझाना
  • श्रीधन्नाजी
  • श्रीसेनजी
  • श्रीसुखानन्दजी
  • श्रीसुरसुरानन्दजी
  • श्रीसुरसुरीजी
  • श्रीनरहरियानन्दजी
  • श्रीपद्मनाभजी
  • श्रीतत्त्वाजी, श्रीजीवाजी
  • श्रीमाधवदासजी
  • श्रीरघुनाथदास गोस्वामीजी
  • श्रीनित्यानन्दजी, श्रीकृष्णचैतन्य महाप्रभुजी
  • श्रीसूरदासजी
  • श्रीपरमानन्ददासजी
  • श्रीकेशवभट्टजी
  • श्रीश्रीभट्टजी
  • श्रीहरिव्यासदेवजी
  • श्रीदिवाकरजी
  • गोस्वामी श्रीविट्ठलनाथजी
  • श्रीत्रिपुरदासजी
  • +
    गोस्वामी श्रीविट्ठलेशसुतजी
    • गोसाईं श्रीविट्ठलनाथजीके सात पुत्र (विट्ठलेशसुत)
  • श्रीकृष्णदासजी
  • श्रीवर्धमानजी तथा श्रीगंगलजी
  • श्रीक्षेम गुसाईंजी
  • +
    श्रीविट्ठलदासजी
    • श्रीविट्ठलदाससुत श्रीरंगीरायजी
  • श्रीहरिराम हठीलेजी
  • श्रीकमलाकरभट्टजी
  • श्रीनारायणभट्टजी
  • श्रीब्रजबल्लभभट्टजी
  • श्रीरूपसनातनजी
  • श्रीहितहरिवंशजी गोस्वामी
  • श्रीस्वामी हरिदासजी
  • श्रीहरिराम व्यासजी
  • श्रीजीवगोस्वामीजी
  • +
    श्रीराधारमणके भक्त
    • श्रीगोपालभट्टजी
    • श्रीअलिभगवान्
    • श्रीविट्ठलविपुलदेव
    • श्रीजगन्नाथ थानेश्वरीजी
    • श्रीलोकनाथजी
    • श्रीमधुगोस्वामीजी
    • श्रीकृष्णदास ब्रह्मचारीजी
    • श्रीकृष्णदास पण्डित
    • श्रीभूगर्भगोसाईंजी
    • श्रीहृषीकेश देवाचार्यजी
    • श्रीरंगजी
    • श्रीघमण्डीजी
  • श्रीरसिकमुरारिजी
  • +
    भवसागरसे पार करानेवाले भगवद्भक्त
    • सदन कसाई
    • गुसाईं श्रीकाशीश्वरजी
    • श्रीसोझाजी
    • श्रीसींवाजी
    • श्रीअधारजी
    • श्रीहरिनाभजी
    • श्रीस्वभूरामदेवाचार्यजी
    • श्रीऊदारामजी
    • श्रीडूँगरजी
    • श्रीपदारथजी
    • श्रीविमलानन्दजी
  • +
    सच्चे सन्त
    • श्रीखोजीजी
    • श्रीराँका-बाँकाजी
    • श्रीयतीरामजी
    • श्रीरामरावलजी
    • श्रीसीहाजी
    • श्रीदलहासिंहजी
    • श्रीपद्मजी
    • श्रीमनोरथजी
    • श्रीद्यौगूजी
    • श्रीचाचागुरु
    • श्रीसवाईसिंहजी
    • श्रीचाँदाजी
    • श्रीनापाजी
    • श्रीकीताजी
  • +
    परोपकारी भक्त
    • श्रीलड्डूजी
    • श्रीसन्तजी
    • श्रीतिलोकजी सुनार
    • श्रीलक्ष्मणजी
    • श्रीलफराजी (श्रीलफरा गोपालदेवाचार्यजी)
    • श्रीकुम्भनदासजी
    • श्रीखेमदासजी
    • श्रीहरिदासजी
    • श्रीउद्धवजी
  • +
    अभिलाषा पूर्ण करनेवाले भक्त
    • श्रीसोमजी
    • श्रीभीमजी
    • श्रीध्यानदासजी
    • श्रीमुकुन्दजी
    • श्रीवृद्धव्यासजी
    • श्रीजगनजी
    • श्रीझाँझूदासजी
    • श्रीबाहुबलजी
    • श्रीकपूरजी
    • श्रीघाटमजी
  • +
    भक्तोंके पालक महन्त
    • श्रीदेवानन्दजी
    • श्रीखेमजी
    • श्रीरूपाजी (श्रीरूपरसिकदेवाचार्यजी)
  • +
    भगवद्भजनपरायण सन्त
    • श्रीरुद्रप्रतापजी गजपति
    • श्रीहरिनाथजी
    • श्रीगोविन्द ब्रह्मचारीजी
  • +
    भक्त कविगण
    • श्रीगोविन्दस्वामीजी
    • श्रीविद्यापतिजी
    • श्रीब्रह्मदासजी
    • श्रीकेशवाचार्यजी
    • श्रीपूर्णसिंहजी
  • +
    श्रीमथुरामण्डलके भक्त
    • श्रीगुंजामालीजी और उनकी पुत्रवधू
    • श्रीकेशवजी दण्डौती
    • श्रीचतुर्भुजदासजी
    • श्रीबेनीजी
  • +
    कलियुगकी भक्त नारियाँ
    • रानी श्रीगणेशदेईजी
    • श्रीझालीरानीजी
    • श्रीशोभाजी
    • श्रीप्रभुताजी
    • श्रीउमा भटियानीजी
    • श्रीगौराबाईजी
    • श्रीकलाबाईजी
    • श्रीजीवाबाईजी
    • श्रीजेवासीजी
    • श्रीकीकीजी
    • श्रीगंगाबाईजी
  • +
    श्रीहरिके सम्मत भक्त
    • श्रीनरवाहनजी
    • श्रीजापूजी
    • श्रीरूपाजी
    • श्रीअर्जुनजी
    • श्रीदामोदरजी
    • श्रीमयानन्दजी
  • +
    सन्तसेवाको भगवत्सेवासे बढ़कर माननेवाले भक्त
    • श्रीदासजी
    • बूँदी बनिया
    • भक्तवर श्रीलक्ष्मणजी
    • श्रीगोपालजी
  • श्रीलाखाजी
  • +
    श्रीनरसीजी
    • (क) नरसीका गृहत्याग
    • (ख) भगवान् शंकरद्वारा नरसीको कृष्णभक्तिका वरदान
    • (ग) नरसीका शिवसहचरी बनकर रासमण्डलका दर्शन करना
    • (घ) श्रीकृष्णद्वारा नरसीको भक्तिका उपदेश तथा नरसीका गृहस्थाश्रममें प्रवेश
    • (ड़) नरसीद्वारा श्रीसाँवलशाहके नाम हुण्डी लिखना
    • (च) नरसीके भक्तिभावका विलक्षण प्रभाव
    • (छ) नरसीद्वारा दो गायिकाओंको भगवत्प्रेमकी महिमा बताना
    • (ज) नरसीके भगवन्नाम-संकीर्तनका प्रभाव
    • (झ) नरसीद्वारा भगवान‍्को केदारा राग सुनानेकी कथा
    • (ञ) भगवान् श्रीकृष्ण तथा रुक्मिणीद्वारा नरसीके पुत्रका विवाह सम्पन्न कराना
  • श्रीयशोधरजी
  • श्रीनन्ददासजी
  • श्रीजनगोपालजी
  • श्रीमाधवदासजी
  • +
    श्रीअंगदजी
    • (क) अंगदजीका अपनी स्त्रीकी भक्तिसे प्रभावित हो भक्त बनना तथा उन्हें अमूल्य नग (हीरे)-की प्राप्ति
    • (ख) हीरेकी प्राप्तिके लिये भक्त अंगदको विष देना, किंतु विषका निष्प्रभावी होना
    • (ग) जगन्नाथजीद्वारा प्रत्यक्ष हाथ बढ़ाकर हीरेको प्राप्त करना
    • (घ) अंगदजीके भक्तिभावसे राजाका भी भक्त बन जाना
  • +
    श्रीचतुर्भुजजी
    • (क) चतुर्भुजजीकी भक्तनिष्ठाकी परीक्षा
    • (ख) राजाका मैना पक्षीद्वारा चतुर्भुजजीकी भक्तिके प्रभावको जानना
  • +
    भक्तिमती श्रीमीराजी
    • (क) कृष्णप्रेमकी अनन्यता
    • (ख) मीराद्वारा विषपान
    • (ग) मीराजीका कृष्णप्रेम
    • (घ) मीराजीके सतीत्वकी परीक्षा
    • (ङ) मीराजीका रणछोड़में विलीन होना
  • श्रीपृथ्वीराजजी
  • +
    भक्त राजागण
    • श्रीजयमलजी
    • श्रीरामचन्द्रजी
    • श्रीरायमलजी
    • श्रीमधुकरशाहजी
  • श्रीखेमालरत्नजी राठौर
  • राजा श्रीरामरयनजी
  • श्रीरामरयनजीकी रानी
  • श्रीकिशोरसिंहजी
  • श्रीहरीदासजी
  • श्रीचतुर्भुजजी कीर्तननिष्ठ
  • श्रीकृष्णदासजी चालक
  • श्रीसन्तदासजी
  • श्रीसूरदास मदनमोहनजी
  • श्रीकात्यायनीजी
  • श्रीमुरारिदासजी
  • +
    भक्तमालसुमेरु गोस्वामी श्रीतुलसीदासजी
    • (क) श्रीतुलसीदासजीका बाल्यकाल और उनके द्वारा गृहस्थका परित्याग
    • (ख) काशीमें श्रीहनुमान‍्जीसे भेंट
    • (ग) चित्रकूटमें भगवान् श्रीरामके दर्शन और काशीमें श्रीशंकरजीसे वरप्राप्ति
    • (घ) भगवन्नामनिष्ठाकी एक घटना
    • (ङ) श्रीराम-लक्ष्मणद्वारा तुलसीदासजीकी कुटियापर पहरा देना
    • (च) रामभक्तिके प्रभावसे एक स्त्रीके पतिको जीवनदान देनेकी घटना
    • (छ) दिल्लीके बादशाहके साथ घटी घटना तथा श्रीनाभाजीसे भेंट
    • (ज) इष्टदेव श्रीरामके प्रति अनन्य निष्ठा
  • श्रीमानदासजी
  • श्रीगिरिधरजी
  • श्रीगोसाईं गोकुलनाथजी
  • श्रीबनवारीदासजी
  • श्रीनारायणमिश्रजी
  • श्रीराघवदासजी
  • श्रीबावनजी
  • श्रीपरशुरामदेवाचार्यजी
  • +
    श्रीगदाधरभट्टजी
    • (क) अपने इष्टके धाम ‘श्रीवृन्दावन’ के प्रति निष्ठाका एक दृष्टान्त
    • (ख) श्रीमद्भागवतकथाके मध्य घटी एक विलक्षण घटना
    • (ग) कथाके श्रोता एक महन्तजी और श्रीगदाधरभट्टजीका प्रेमाह्लाद
    • (घ) चोर भगवद्भक्त बन गया
    • (ङ) श्रीगदाधरभट्टजीका भगवद्भाव
  • +
    चारण भक्त
    • श्रीचौमुखजी
    • श्रीचण्डजी
    • श्रीईश्वरदासजी
    • श्रीकरमानन्दजी
    • श्रीकोल्हजी, श्रीअल्हजी
    • श्रीनारायणदासजी
  • श्रीपृथ्वीराजजी
  • श्रीसींवाजी
  • +
    श्रीमती रत्नावतीजी
    • (क) रानी रत्नावती और भगवद्भक्ता दासीका संवाद
    • (ख) दासीद्वारा रानीको भगवत्प्रेमकी रीति सिखाना
    • (ग) रानीका महल छोड़कर सन्तसेवापरायण होना
    • (घ) राजाद्वारा रानी तथा पुत्रके सन्तप्रेमके प्रति रोष प्रकट करना
    • (ड़) लोगोंके समझानेपर राजा तथा राजकुमारके युद्धका बन्द होना
    • (च) राजाद्वारा रानीको मरवानेका षड्यन्त्र करना, पर उसके भक्तिभावसे स्वयं भी भगवद्भक्त बन जाना
    • (छ) रानीकी भक्तिके प्रभावसे राजा मानसिंह तथा भाई माधवसिंहका संकटसे उद्धार
  • श्रीजगन्नाथ पारीखजी
  • श्रीमथुरादासजी
  • श्रीनारायणदासजी नर्तक
  • +
    श्रीभूरिदा भक्तगण
    • श्रीबोहितजी
    • श्रीहरिनाभ मिश्र
    • श्रीबच्छपालजी
    • श्रीछीतस्वामीजी
    • श्रीबिहारीदासजी
  • +
    संसारसे निवृत्त भक्त
    • श्रीउद्धवजी
    • श्रीविदुरजी
  • श्रीचतुरोनगनजी
  • +
    भक्तसेवी मधुकरिया भक्त
    • श्रीगोमानन्दजी
    • श्रीपरमानन्दजी
    • श्रीभगवानजी
    • श्रीश्यामजी
    • श्रीकूबाजी (केवलदास)
    • पण्डा श्रीदेवादासजी
  • +
    श्रीअग्रदेवजीके शिष्य
    • श्रीजंगीजी
    • श्रीविनोदीजी
  • +
    श्रीटीलाजीका वंश
    • श्रीटीलाजी
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  • +
    श्रीकील्हदेवजीके शिष्यगण
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  • श्रीमाधवग्वालजी
  • श्रीप्रयागदासजी
  • श्रीप्रेमनिधिजी
  • श्रीराघवदास दूबलोजी
  • +
    सन्तसेवी भक्त
    • श्रीहरिनारायणजी
    • श्रीऊधौजी
    • भेलाग्राम-निवासी श्रीतुलसीदासजी
  • +
    भगवद्भक्त नारियाँ
    • श्रीदमाबाईजी
    • श्रीलालीजी
    • श्रीनीराजी
    • श्रीखीचनीजी
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    • श्रीबाँदररानीजी (मोहनदासी)
    • गंगा-जमुनाबाई
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