तत्त्व-ज्ञानके बहुत ऊँचे सिद्धान्तोंका सरल भाषामें बोध करा देनेवाले लेख तो इसमें हैं ही, साथ ही कुछ ऐसे लेख हैं जिनमें भ्रातृ-धर्म और पातिव्रत-धर्मपर भी विस्तारसे प्रकाश डाला गया है। इससे यह पुस्तक तत्त्व-विचारपूर्ण होनेके साथ-साथ सरल, व्यावहारिक शिक्षा देनेवाली सबके कामकी वस्तु हो गयी है। मेरी प्रार्थना है कि इस ग्रन्थको पाठक-पाठिकागण मननपूर्वक पढ़ें और इससे पूरा लाभ उठावें।