॥ श्रीहरि:॥

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संस्कार प्रकाश

हिन्दी/संस्कृत

मनुष्यकी नैतिक, मानसिक, आध्यात्मिक उन्नतिके लिये, इसके साथ ही बल-वीर्य, प्रज्ञा और दैवीय गुणोंके प्रस्फुटनके लिये शास्त्रोंद्वारा निर्दिष्ट संस्कारोंसे व्यक्तिको संस्कारित करनेकी आवश्यकता है। विभिन्न संस्कारोंसे सम्बन्धित ज्ञातव्य बातें, उनका सामान्यपरिचय तथा संस्कारोंकी प्रयोगात्मक विधि दी जा रही है, जिससे संस्कारोंसे सम्बन्धित सभी जानकारी सर्वसामान्यको हो सके। आशा है, सर्वसाधारणजन इस पुस्तकसे पूर्ण लाभान्वित होंगे। इस घोर कलिकालमें संस्कारोंके लोप होनेसे यदि इस ग्रन्थके द्वारा भगवत्कृपासे किंचित् रक्षा हो सकी तथा सर्वसाधारणके कल्याणमें यह निमित्त बन सका तो यह प्रयास सार्थक होगा। 
  • प्रथम पृष्ठ
  • षोडश संस्कारोंकी आवश्यकता
  • +
    १. गर्भाधानसंस्कार
    • (क) गर्भाधानसंस्कारका सामान्य परिचय
    • (ख) सहवासके अनन्तरका कृत्य
    • (ग) गर्भाधानके लिये शुभाशुभ समय
    • (घ) गर्भाधानके समयकी भावना
    • (ड़) गर्भिणी स्त्रीके आवश्यक पालनीय नियम
    • (च) गर्भिणीपतिके पालनीय नियम
    • (छ) दोहद (गर्भकालीन इच्छा)
    • (ज) गर्भाधानसंस्कार-प्रयोग*
  • +
    २. पुंसवनसंस्कार
    • पुंसवनका तात्पर्य
    • पुंसवन—गर्भसंस्कार अथवा क्षेत्र-संस्कार
    • पुंसवनसंस्कारका समय
    • पुंसवनसंस्कारका उपांगकर्म—अनवलोभन (गर्भरक्षण)- कर्म
    • पुंसवनसंस्कार-प्रयोग
  • +
    ३. सीमन्तोन्नयनसंस्कार
    • ‘सीमन्तोन्नयन’ शब्दका अर्थ तथा संस्कारकी महिमा
    • गर्भसंस्कार या गर्भिणीका संस्कार
    • सीमन्तोन्नयनकी सामान्य प्रक्रिया
    • सीमन्तोन्नयनसंस्कार-प्रयोग
  • +
    ४. (क) जातकर्मसंस्कार
    • जातकर्मसंस्कारका परिचय एवं महत्त्व
    • जातकर्म-संस्कारमें आशौच-प्रवृत्ति और प्रतिग्रहजन्य दोष नहीं होता
    • +
      जातकर्म-संस्कारमें करणीय कृत्य
      • मेधाजनन
      • आयुष्यकरण
      • बालकका अभिमर्शन
      • माताके प्रति कल्याण-कामना
      • माताके स्तनोंका प्रक्षालन तथा दुग्धपान
      • जलपूर्ण कुम्भका स्थापन
      • सूतिका-गृहके द्वारपर अग्निस्थापन
      • बालककी कुमारग्रह आदि बालग्रहोंसे रक्षाका उपाय
      • नालच्छेदन*
    • जातकर्मसंस्कार-प्रयोग*
  • +
    ४. (ख) षष्ठीमहोत्सव एवं राहुवेध
    • षष्ठीमहोत्सव एवं राहुवेध-संस्कारका प्रयोजन
    • षष्ठी देवीका परिचय तथा महिमा
    • विशेष बात
    • षष्ठीमहोत्सव*-प्रयोग
  • +
    ५. नामकरणसंस्कार
    • नामकरणसंस्कारका माहात्म्य
    • नामकरणसंस्कारका समय
    • नाम कैसा हो
    • नक्षत्रचरणोंके आधारपर
    • व्यावहारिक नाम
    • नाक्षत्रिक (राशि)-नामका प्राधान्य
    • वर्णानुसार नामकी व्यवस्था
    • जन्मराशिनाम और पुकारनामकी व्यवस्था
    • नामकरणसंस्कार-प्रयोग
  • +
    ६. निष्क्रमणसंस्कार एवं सूर्यावलोकन
    • सामान्य परिचय एवं संस्कारकी संक्षिप्त प्रक्रिया
    • +
      निष्क्रमण-संस्कारके उपांगकर्म
      • (क) भूमि-उपवेशन कर्म
      • (ख) दोलारोहण—पर्यंकारोहण
      • (ग) गोदुग्धपान
    • निष्क्रमणसंस्कार (सूर्यावलोकन तथा भूम्युपवेशन)-प्रयोग
  • +
    ७. अन्नप्राशनसंस्कार
    • अन्नप्राशन-संस्कारका काल तथा उद्देश्य
    • अन्नप्राशनका उपांग—जीविकानिर्धारण-विज्ञान
    • अन्नप्राशनसंस्कार-प्रयोग
  • +
    ८. चूडाकरणसंस्कार
    • चूडाकरणका अभिप्राय और उसका काल
    • चूडाकरणसंस्कारकी उपयोगिता और वैज्ञानिकता
    • चूडाकरणसंस्कार-प्रयोग
  • +
    ९. अक्षरारम्भसंस्कार
    • अक्षरारम्भ संस्कार की महिमा
    • अक्षरारम्भसंस्कार-प्रयोग
  • +
    १०. कर्णवेधसंस्कार
    • कर्णवेधका तात्पर्य और उसकी महिमा
    • कर्णवेधसंस्कार-प्रयोग
  • +
    ११. उपनयनसंस्कार
    • उपनयन-संस्कारकी महिमा
    • उपनयन-संस्कार कब करें
    • उपनयनका गौणकाल
    • मुख्यकाल तथा गौणकालके अतिक्रमण होनेपर यज्ञोपवीत-संस्कारकी व्यवस्था
    • कामनापरक यज्ञोपवीत
    • उपनयन-संस्कार और यज्ञोपवीत (जनेऊ)-का अभेद सम्बन्ध
    • यज्ञोपवीतका प्रादुर्भाव
    • यज्ञोपवीत क्या है?
    • अभिमन्त्रित यज्ञोपवीतको धारण करना
    • नवीन यज्ञोपवीतको अभिमन्त्रित करना
    • शौचादिके समय यज्ञोपवीतकी स्थिति
    • यज्ञोपवीतकी तीन स्थितियाँ
    • कन्याओंका उपनयन-संस्कार नहीं होता
    • उपनयनसंस्कारके मुख्य कर्म तथा उनकी सामान्य विधि
    • उपनयनसंस्कार-प्रयोग
  • +
    १२. वेदारम्भसंस्कार
    • वेदारम्भका तात्पर्य तथा सामान्य विधान
    • वेदारम्भसंस्कार-प्रयोग
  • +
    १३. समावर्तनसंस्कार
    • समावर्तनका अर्थ तथा संस्कारकी महिमा
    • गुरुद्वारा स्नातकके लिये उपदेश*
    • समावर्तनसंस्कार-प्रयोग
  • +
    १४. विवाहसंस्कार
    • कन्यादानके अधिकारी
    • विवाह—संक्षिप्त विवेचन
    • वैवाहिक कर्मोंमें प्रयुक्त होनेवाले मन्त्रोंका भाव
    • कन्यादानके मन्त्र
    • लाजाहोमके मन्त्र
    • पाणिग्रहणके मन्त्र
    • सप्तपदीके मन्त्र
    • हृदयालम्भनके मन्त्र
    • कन्याको पतिके गोत्रकी प्राप्ति
    • संक्षेपमें स्त्री-पुरुषके गृहस्थाश्रम-सम्बन्धी धर्म
    • विवाहादि संस्कारोंमें अशौचकी सम्भावनापर व्यवस्था
    • देशाचारकी प्रामाणिकता
    • +
      विवाहसंस्कार-प्रयोग
      • वरवरण (तिलक-सगाई)
      • वरपूजन
      • मण्डपस्थापन
      • हल्दात
      • हरिद्रालेपन तथा कंकणबन्धन (बान)
      • विवाहपूर्वांगपूजन
      • प्रायश्चित्तसंकल्प
      • पंचांगपूजन
      • लोकाचार
      • बारातप्रस्थान
      • वरका पूजन
      • कन्यावरण (लोकाचार)
      • रक्षाविधान
      • विवाहविधान
      • अग्निस्थापन
      • वरपक्षीय प्रथम शाखोच्चार
      • कन्यापक्षीय प्रथम शाखोच्चार
      • वरपक्षीय द्वितीय गोत्रोच्चार
      • कन्यापक्षीय द्वितीय शाखोच्चार
      • वरपक्षीय तृतीय शाखोच्चार
      • कन्यापक्षीय तृतीय शाखोच्चार
      • कन्यादानविधि
      • विवाहहोम
      • हवनविधान
      • सप्तपदी
      • सप्तपदीके श्लोक
    • चतुर्थीकर्म
    • ग्रहपूजादानसङ्कल्प
    • भाषाशाखोच्चार
    • विवाहाग्निपरिग्रहसंस्कार
    • त्रेताग्निसंग्रहसंस्कार
  • +
    १५. अन्त्येष्टिसंस्कार
    • अन्त्येष्टिसंस्कारका सामान्य परिचय
    • मरणासन्नावस्थाके दान
    • पंचधेनुदान
    • वैतरणी नदी
    • वैतरणी नदीका निर्माण
    • पंचक मृत्यु
    • अन्त्येष्टिसंस्कार-प्रयोग
  • +
    १६. वर्धापन (वर्षगाँठ-जन्मोत्सव)
    • वर्धापनप्रयोगविधि
  • +
    १७. (क) पंचांगपूजन-प्रयोग
    • स्वस्त्ययन एवं शान्तिपाठ
    • गणेशाम्बिकापूजन
    • कलश-स्थापन
    • पुण्याहवाचन
    • षोडशमातृकापूजन
    • सप्तघृतमातृकापूजन (वसोर्धारापूजन)
    • आयुष्यमन्त्रपाठ*
    • सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध
    • सांकल्पिक नान्दीमुखश्राद्ध-प्रयोग
    • नवग्रह-मण्डल* पूजन
  • +
    १७. (ख) कतिपय संस्कारोंसे सम्बद्ध विशिष्ट ज्ञातव्य बातें
    • +
      गर्भाधानसंस्कार
      • स्त्रियोंका ऋतुकाल
      • ऋतुस्नाता स्त्रीके कर्तव्य
      • स्त्रियोंके रजस्वला होनेका आख्यान
      • रजस्वला स्त्रीके पालनीय आवश्यक नियम और उनका वैज्ञानिक रहस्य
      • रजस्वला स्त्रीके साथ सहवासका निषेध
      • रात्रिमें रजोदर्शन, जन्म तथा मरण होनेपर अशौचकालकी व्यवस्था
      • रजस्वलाको स्पर्श करनेपर शुद्धिकी व्यवस्था
      • रजस्वलाकी शुद्धिका विचार
      • गर्भस्राव, गर्भपात तथा प्रसव होनेपर अशौचकी प्रवृत्ति एवं शुद्धिकी व्यवस्था
      • रजस्वला, गर्भिणी तथा सूतिकाकी मृत्युपर दाहसंस्कारकी व्यवस्था
      • गर्भावस्थामें जीवकी प्रतिज्ञा
    • +
      उपनयनसंस्कार
      • यज्ञोपवीतकी निर्माण-विधि
      • यज्ञोपवीतका परिमाण ९६ अंगुल (चौआ) ही क्यों रखा गया है?
      • यज्ञोपवीतमें तीन सूत्र और वह त्रिवृत् क्यों?
      • नौ तन्तुओंके नौ देवता
      • ब्रह्मग्रन्थिकी आवश्यकता
      • उपनयन करानेके अधिकारी
      • उपनयनका काल (मुहूर्त)
    • +
      विवाहसंस्कार
      • स्नातक एवं ब्रह्मचारीके भेद
      • विवाहयोग्य कन्याके लक्षण
      • वरकी योग्यता
      • वरके गुण
      • वरके दोष
      • विवाहके भेद
      • विवाहसम्बन्धी कतिपय धर्मशास्त्रीय व्यवस्थाएँ
      • वैधव्यपरिहारके उपाय
    • शाखोच्चारसम्बन्धी मांगलिक श्लोक
  • अन्तिम पृष्ठ

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