•राजा पद्मके भवनमें सरस्वती और लीलाका प्रवेश और राजाद्वारा उनका पूजन, मन्त्रीद्वारा राजाका जन्मवृत्तान्त-वर्णन, राजा विदूरथ और सरस्वती-देवीकी बातचीत, वसिष्ठजीद्वारा अज्ञानावस्थामें जगत् और स्वप्नकी सत्यताका वर्णन, सरस्वतीद्वारा विदूरथको वरप्रदान, नगरपर शत्रुका आक्रमण और नगरकी दुरवस्थाका कथन, भयभीत हुई राजमहिषीका राजाकी शरणमें आना, लीलाको दूसरे वररूप राजा पद्मकी प्राप्ति