॥ श्रीहरि:॥

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संक्षिप्त स्कन्दपुराण

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
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    माहेश्वर-खण्ड
    • (केदार-खण्ड)
    • भगवान् शिवकी महिमा, दक्षका शिवजीसे द्वेष तथा दक्ष-यज्ञमें सतीका गमन
    • सतीका अग्नि-प्रवेश, दक्ष-यज्ञ-विध्वंस तथा दक्षपर पुन: भगवान् शिवकी कृपा
    • शिवपूजनकी महिमा
    • शिवलिंग-पूजनकी महिमा तथा रावणके उत्कर्ष और पतनका वृत्तान्त
    • गुरुकी अवहेलनासे इन्द्रकी दैत्योंद्वारा पराजय, समुद्र-मन्थन, शंकरजीकी कृपासे कालकूट विषसे सबकी रक्षा, विविध रत्नोंका प्राकटॺ तथा लक्ष्मीजीका प्रादुर्भाव
    • अमृतकी उत्पत्ति, भगवान‍्का मोहिनीरूपद्वारा देवताओंको अमृत पिलाना, शिवके द्वारा राहुसे चन्द्रमाकी रक्षा तथा शिवके लिये दीपदान, रुद्राक्षधारण और विभूति-धारणका माहात्म्य
    • इन्द्रकी विजय, इन्द्रद्वारा विश्वरूपका वध, नहुषका स्वर्गसे पतन, ब्रह्महत्यासे इन्द्रकी मुक्ति तथा पुन: राज्यकी प्राप्ति
    • विश्वकर्माके तपसे वृत्रासुरकी उत्पत्ति तथा दधीचिद्वारा देवताओंको अस्थिदान
    • पिप्पलादका जन्म, सुवर्चाका पतिलोकगमन, देवासुर-संग्राममें नमुचिका वध, प्रदोषव्रतकी विधि और उद्यापन, इन्द्र और वृत्रासुरका युद्ध तथा इन्द्रकी विजय
    • बलिके द्वारा देवताओंकी पराजय, अदितिके व्रत-तपस्यासे सन्तुष्ट हो भगवान‍्का वामनरूपमें अवतार, बलिके पूर्वजन्मका प्रसंग तथा बलिपर वामनजीकी कृपा
    • तारकासुरको ब्रह्माजीका वरदान, हिमालयके घर सतीका पार्वतीरूपमें अवतार, शंकरजीके रोषसे कामदेवका भस्म होना तथा पार्वतीकी उग्र तपस्या
    • देवताओंकी प्रार्थनासे भगवान् शिवका पार्वतीजीके पास जाना और उनके प्रेमकी परीक्षा ले उनकी तपस्याको सफल बनाना
    • सप्तर्षियोंका आगमन, शिवके साथ पार्वतीके विवाहका निश्चय, समस्त देवताओंका शिवकी बारातमें आगमन, हिमवान‍्द्वारा स्वागत तथा मण्डपमें कन्यादानकी तैयारी
    • हिमवान‍्द्वारा कन्यादान, बारातका भोजन और बिदाई, शिवमहिमा तथा कुमारका जन्म
    • देवताओंका तारकासुर और उनकी सेनाके साथ संग्राम तथा कुमार कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध
    • यमराजके द्वारा भगवान् शिवकी स्तुति तथा शिवके द्वारा यमराजको आत्मज्ञानका उपदेश
    • कार्तिकेयजीकी स्तुति और उनके द्वारा पर्वतोंको वरदान तथा महाराज श्वेतका चरित्र
    • शिवरात्रिव्रतकी महिमा
    • कुमारिकाखण्ड
    • पंचाप्सरस तीर्थमें अर्जुनद्वारा अप्सराओंका उद्धार
    • सारस्वत-कात्यायन-संवाद—दान और त्यागकी महिमा
    • नारदजीके द्वारा धर्मवर्माके दानसम्बन्धी जटिल प्रश्नोंका समाधान
    • कलाप-ग्रामनिवासी सुतनुद्वारा नारदजीके जटिल प्रश्नोंका समाधान
    • नारदजीके द्वारा कलाप-ग्रामके ब्राह्मणोंको महीसागरसंगममें ले आना और वहाँ उन्हें भूमि आदि देकर पुण्यस्थानकी स्थापना करना
    • लोमशजीका राजा इन्द्रद्युम्नको अपने पूर्वजन्मका चरित्र सुनाकर शिवकी आराधनाका महत्त्व बतलाना
    • संवर्तके मुखसे महीसागरसंगमकी महिमा तथा भर्तृयज्ञद्वारा शतरुद्रिय सुनकर शिवकी आराधनासे इन्द्रद्युम्न आदि सब भक्तोंको शिवसारूप्यकी प्राप्ति
    • कुमारका अनुताप, भगवान् विष्णुका उन्हें समझाना तथा उनकी सम्मतिसे स्कन्दद्वारा तीन शिवलिंगोंकी स्थापना और भगवान् शिवका वरदान
    • कुमारका विजयस्तम्भ, प्रलम्ब दानवका वध तथा भूगोलका वर्णन
    • नवग्रहोंकी स्थिति, ऊपरके सात लोकोंका वर्णन, वायुके सात स्कन्ध, सात पाताल, इक्‍कीस नरक, ब्रह्माण्डकटाह एवं काल-मान आदिका निरूपण
    • राजा शतशृंगकी पुत्री कुमारीका चरित्र तथा कुमारीखण्डकी श्रेष्ठता
    • कालभीतिकी तपस्या तथा धर्मनिष्ठा, महाकालका प्रादुर्भाव और कालभीतिपर भगवान् शंकरकी कृपा
    • महाकालद्वारा करन्धमके प्रश्नानुसार श्राद्ध तथा युगव्यवस्थाका वर्णन
    • त्रिदेवोंकी श्रेष्ठता और पापोंके भेद
    • शिवपूजाकी विधि तथा सदाचारका निरूपण
    • नारदजीके द्वारा भगवान् वासुदेवकी स्थापना, ऐतरेयका अपनी मातासे संसारदु:खका वर्णन, भगवान‍्का प्रत्यक्ष प्रकट होकर ऐतरेयको वरदान देना तथा वासुदेवके ध्यानसे ऐतरेयकी मुक्ति
    • भट्टादित्यकी स्थापना तथा नारदजीके द्वारा एक सौ आठ नामोंसे उनकी स्तुति
    • महात्मा नन्दभद्रके सारभूत विचार तथा उनके द्वारा सत्यव्रतके नास्तिकतापूर्ण विचारोंका खण्डन
    • नन्दभद्र और बालकका संवाद, बालादित्यकी स्थापना और नन्दभद्रकी मुक्ति
    • महीसागरसंगमतीर्थकी रक्षा करनेवाली देवियोंका परिचय
    • उभय सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और कमठके द्वारा गर्भवास तथा मानव-शरीरकी उत्पत्तिका वर्णन
    • कमठद्वारा शरीरकी उत्पत्ति, विनाश तथा जीवके परलोकवासका वर्णन
    • पापकर्मोंके फल, जयादित्यकी स्तुति और महिमा
    • नारदजीके गुणोंका वर्णन तथा गौतमेश्वरकी महिमाके प्रसंगमें योगका निरूपण
    • महीसागरसंगमकी श्रेष्ठता तथा उसके गुप्त-क्षेत्र होनेका कारण
    • घटोत्कचका विवाह और बर्बरीकका जन्म
    • बर्बरीक और विजयकी गुप्तक्षेत्रमें साधना तथा पाण्डवोंसे बर्बरीककी भेंट
    • बर्बरीकका वध तथा उसके पूर्वजन्मके वृत्तान्तका वर्णन और ग्रन्थका उपसंहार
    • अरुणाचल-माहात्म्यखण्ड
    • भगवान् शंकरका ‘अरुणाचल’ रूपसे प्रकट होना तथा ब्रह्मा और विष्णुका उनकी स्तुति करना
    • शिवके विभिन्न तीर्थोंकी महिमा
    • अरुणाचल क्षेत्रकी महिमा, विभिन्न पापोंके फल और उन पापकर्मोंका प्रायश्चित्त
    • अरुणाचलेश्वरकी पूजा, शिवजीके द्वारा सृष्टिका प्रादुर्भाव तथा विष्णुके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति
    • शिव-पार्वतीके दाम्पत्य-जीवनकी एक झाँकी, पार्वतीकी अरुणाचल क्षेत्रमें तपस्या और दुर्गादेवीके द्वारा शुम्भ, निशुम्भ और महिषासुरका वध
    • खड्गतीर्थकी उत्पत्ति, ज्योतिदर्शन, पार्वतीपर अरुणाचलेश्वरकी कृपा तथा भगवान् शिवका वरदान
    • कान्तिशाली तथा कलाधरका उद्धार, राजा वज्रांगदद्वारा अरुणाचलेश्वरकी आराधना तथा भगवान् शिवकी उनके ऊपर कृपा
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    वैष्णव-खण्ड
    • (भूमिवाराहखण्ड या वेंकटाचल-माहात्म्य)
    • मेरुगिरिपर भगवान् वाराहकी सेवामें पृथ्वीदेवीका उपस्थित होना और श्रेष्ठ पर्वतों तथा वेंकटाचलवर्ती तीर्थोंका माहात्म्य सुनना
    • भगवान् वाराहका मन्त्र, उसके जपकी विधि, ध्यान तथा उसके अनुष्ठानका फल
    • महर्षि अगस्त्यकी प्रार्थनासे भगवान् विष्णुका वेंकटाचलपर श्री-भू देवियोंके साथ निवास तथा आकाशराजके यहाँ पद्मावती और वसुदानका जन्म
    • वेंकटाचलनिवासी श्रीहरि और पद्मावतीका विवाह
    • तोण्डमानको निषादके साथ भगवान् श्रीनिवासका दर्शन होना
    • वाराहभगवान् तथा अस्थिसरोवर तीर्थकी महिमा, भक्त कुम्हार तथा राजा तोण्डमानका परमधामगमन
    • राजा परीक्षित् को ब्राह्मणका शाप, तक्षकके काटनेसे उनकी मृत्यु तथा उनकी रक्षा न करनेके पापसे कलंकित काश्यप ब्राह्मणका स्वामिपुष्करिणीमें स्नान करके शुद्ध होना
    • स्वामितीर्थकी महिमा और उसमें स्नान करनेसे राजा धर्मगुप्तके शापजनित उन्मादका निवारण
    • कृष्णतीर्थ और भगवान् वेंकटेश्वरका माहात्म्य
    • पापनाशन तीर्थकी महिमा—भद्रमति ब्राह्मणका चरित्र
    • आकाशगंगातीर्थकी महिमा—रामानुजपर भगवान‍्की कृपा तथा भगवद्भक्तोंका लक्षण
    • दान-पात्र-विचार, चक्रतीर्थकी महिमा, पद्मनाभकी तपस्या, भगवान‍्का वरदान तथा राक्षसके आक्रमणसे चक्रद्वारा पद्मनाभकी रक्षा
    • सुन्दर गन्धर्वका वसिष्ठजीके शापसे राक्षसभावको प्राप्त होकर पुन: उससे मुक्त होना
    • घोणतीर्थका माहात्म्य—गन्धर्वपत्नीका उद्धार
    • वेंकटाचलके मुख्य तीर्थोंका वर्णन, पुराण-श्रवणकी महिमा और नियम तथा अर्जुनकी तीर्थयात्रा
    • अर्जुनका कालहस्तीश्वरके समीप भरद्वाजके आश्रमपर जाना और भरद्वाजजीके द्वारा अगस्त्यजीके प्रभावका वर्णन
    • महर्षि अगस्त्यकी तपस्यासे सुवर्णमुखरी नदीका प्रादुर्भाव और उसका माहात्म्य
    • सुवर्णमुखरी नदीके तीर्थोंका वर्णन, भगवान् विष्णुकी महिमा, प्रलयकालकी स्थिति तथा श्वेतवाराहरूपमें भगवान‍्का प्राकटॺ
    • वेंकटाचलपर राजा शंख और महर्षि अगस्त्य आदिको भगवान‍्का प्रत्यक्ष दर्शन तथा वरप्राप्ति
    • आकाशगंगातीर्थमें अंजनाकी तपस्या और उसे वायुदेवद्वारा वरदानकी प्राप्ति
    • उत्कलखण्ड या पुरुषोत्तमक्षेत्र-माहात्म्य
    • भगवान् विष्णुका ब्रह्माजीको पुरुषोत्तमक्षेत्रमें जानेका आदेश
    • यमराज तथा मार्कण्डेयजीके द्वारा भगवान‍्की स्तुति और पुरुषोत्तमक्षेत्रकी महिमा
    • पुरुषोत्तमक्षेत्रके विभिन्न तीर्थों और देवताओंका परिचय, तीर्थ और भगवान‍्की महिमा तथा पापपरायण पुण्डरीक और अम्बरीषका उस क्षेत्रमें आना
    • पुण्डरीक और अम्बरीषद्वारा भगवान‍्की स्तुति तथा पुरुषोत्तमक्षेत्रमें रहकर भजन करनेसे उनकी मुक्तिका वर्णन
    • उत्कल देशके भव्य रूपका परिचय, राजा इन्द्रद्युम्नका एक तीर्थयात्रीसे पुरुषोत्तमक्षेत्रकी महिमा सुनकर पुरोहितके भाईको वहाँ भेजना और उनका नीलाचलके समीप शबरसे वार्तालाप
    • विद्यापतिका शबरके साथ नीलमाधवका दर्शन करके तीर्थकी परिक्रमा करना और अवन्तीमें जाकर राजा इन्द्रद्युम्नको सब समाचार सुनाना
    • भगवान् जगन्नाथके नीलमणिमय विग्रहका वर्णन, इन्द्रद्युम्नके पास नारदजीका आगमन और भक्ति एवं भक्तके स्वरूपका विवेचन
    • राजा इन्द्रद्युम्नका पुरुषोत्तमक्षेत्रको प्रस्थान और महानदीके तटपर विश्राम
    • राजाका एकाम्रक्षेत्र (भुवनेश्वर)-में जाकर भगवान् शिवका पूजन करना और भगवान् शिवका नारदजीसे उनके कर्तव्यकार्योंका संकेत करना
    • राजा इन्द्रद्युम्नका नारदजीके साथ नृसिंहजी, कल्पवट तथा नीलमाधवके स्थानका दर्शन करना और आकाशवाणी सुनना
    • देवर्षि नारदजीके द्वारा भगवान् नृसिंहकी स्थापना और राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा उनका स्तवन
    • इन्द्रद्युम्नके द्वारा सहस्र अश्वमेध यज्ञोंका अनुष्ठान और ध्यानमें भगवान‍्का दर्शन
    • अश्वमेधकी पूर्ति, आकाशवाणी, भगवान‍्की काष्ठमयी प्रतिमाका निर्माण, संस्कार तथा स्तवन
    • देवताओं तथा ब्रह्माजीके द्वारा भगवद्विग्रहोंका स्तवन और उनकी स्थापना
    • ब्रह्माजीके द्वारा भगवत्स्वरूपकी एकताका प्रतिपादन तथा भगवान‍्का राजा इन्द्रद्युम्नको अपनी सेवाका आदेश देना
    • समुद्रमें स्नानकी विधि और भगवद् विग्रहोंका वर्णन
    • इन्द्रद्युम्न-सरोवरमें स्नान, नृसिंहजीका दर्शन-पूजन तथा भगवद्विग्रहोंके ज्येष्ठ-स्नानका वर्णन
    • श्रीजगन्नाथजीकी रथयात्रा, गुण्डिचा-महोत्सव तथा पुन: मन्दिरप्रवेश सम्बन्धी यात्रा एवं उत्सवकी महिमा
    • पुरुषोत्तमक्षेत्रमें चातुर्मास्यकी महिमा, राजा श्वेतपर भगवत्कृपा तथा भगवत्प्रसादका माहात्म्य
    • भगवान् पुरुषोत्तमके पार्श्व-परिवर्तन, उत्थापन और प्रावरण आदि उत्सवोंका महत्त्व
    • पुष्यस्नानोत्सव, उत्तरायणोत्सव तथा दोलारोहणोत्सवका वर्णन
    • भगवान‍्की द्वादशादित्य मूर्तियोंकी उपासना, दक्षके द्वारा भगवान‍्की आराधना और वर-प्राप्ति तथा विभिन्न विभूतियोंके रूपमें भगवान‍्की उपासनाका फल
    • राजा इन्द्रद्युम्नका ब्रह्मलोकगमन, पुराण-श्रवणकी विधि और ग्रन्थका उपसंहार
    • बदरिकाश्रम-माहात्म्य
    • सब तीर्थोंका संक्षिप्त माहात्म्य तथा बदरीक्षेत्रकी विस्तृत महिमाका उपक्रम
    • बदरीक्षेत्रकी महिमा—अग्निदेवके सर्वभक्षणरूप दोषका निवारण
    • बदरीक्षेत्रकी पाँच शिलाओंमेंसे नारदशिला और मार्कण्डेयशिलाका माहात्म्य
    • गरुड़शिला, वाराहीशिला और नारसिंहीशिलाकी उत्पत्ति और महिमा
    • बदरीक्षेत्र और वहाँ भगवान‍्के प्रसाद-ग्रहणकी विशेष महिमा
    • कपालतीर्थ, ब्रह्मतीर्थ और वसुधारातीर्थकी महिमा
    • पंचतीर्थ, सोमतीर्थ, द्वादशादित्यतीर्थ, चतु:स्रोततीर्थ, सत्यपदतीर्थ तथा नर-नारायणाश्रमकी महिमा
    • मेरुतीर्थ, लोकपालतीर्थ, दण्डपुष्करिणी, गंगासंगम तथा धर्मक्षेत्र आदिका माहात्म्य और ग्रन्थका उपसंहार
    • कार्तिकमास-माहात्म्य
    • कार्तिकमासकी श्रेष्ठता तथा उसमें करनेयोग्य स्नान, दान, भगवत्पूजन आदि धर्मोंका महत्त्व
    • विभिन्न देवताओंके संतोषके लिये कार्तिकस्नानकी विधि तथा स्नानके लिये श्रेष्ठ तीर्थोंका वर्णन
    • कार्तिकव्रत करनेवाले मनुष्यके लिये पालनीय नियम
    • कार्तिकव्रतसे एक पतित ब्राह्मणीका उद्धार तथा दीपदान एवं आकाशदीपकी महिमा
    • कार्तिकमें तुलसीवृक्षके आरोपण और पूजन आदिकी महिमा
    • त्रयोदशीसे लेकर दीपावलीतकके उत्सवकृत्यका वर्णन
    • कार्तिक शुक्ला प्रतिपदा और यमद्वितीयाके कृत्य तथा बहिनके घरमें भोजनका महत्त्व
    • आँवलेके वृक्षकी उत्पत्ति और उसका माहात्म्य
    • गुणवतीका कार्तिकव्रतके पुण्यसे सत्यभामाके रूपमें अवतार तथा भगवान‍्के द्वारा शंखासुरका वध और वेदोंका उद्धार
    • कार्तिकव्रतके पुण्यदानसे एक राक्षसीका उद्धार
    • भक्तिके प्रभावसे विष्णुदास और राजा चोलका भगवान‍्के पार्षद होना
    • जय-विजयका चरित्र
    • सांसर्गिक पुण्यसे धनेश्वरका उद्धार, दूसरोंके पुण्य और पापकी आंशिक प्राप्तिके कारण तथा मासोपवास व्रतकी संक्षिप्त विधि
    • तुलसीविवाह और भीष्मपंचक-व्रतकी विधि एवं महिमा
    • एकादशीको भगवान‍्के जगानेकी विधि, कार्तिकव्रतका उद्यापन और अन्तिम तीन तिथियोंकी महिमाके साथ ग्रन्थका उपसंहार
    • मार्गशीर्षमास-माहात्म्य
    • मार्गशीर्षमासमें प्रात:स्नानकी महिमा, स्नानविधि, तिलक-धारण, गोपीचन्दनका माहात्म्य, तुलसीमालाका महत्त्व, भगवत्पूजनका विधान और शंखकी महिमा
    • भगवान‍्के पूजनमें घण्टानाद, चन्दन, पुष्प, तुलसीदल, धूप और दीपका माहात्म्य
    • स्तुतिपाठ, मन्त्रजप, साष्टांग प्रणाम तथा दामोदरमन्त्रके जपका माहात्म्य
    • राजा वीरबाहुके पूर्वजन्मका वृत्तान्त एवं एकादशीव्रत और उसका उद्यापन
    • एकादशीके जागरण और मत्स्योत्सवकी विधि एवं माहात्म्य
    • ब्राह्मण-भोजन, प्रसाद-भक्षण और श्रीकृष्णकीर्तनकी महिमा
    • श्रीकृष्णके बालस्वरूपका ध्यान, दामोदरमन्त्रके अधिकारी शिष्य और गुरुका लक्षण और श्रीमद्भागवतकी महिमा
    • मार्गशीर्षमासमें मथुरासेवनका माहात्म्य और ग्रन्थका उपसंहार
    • श्रीमद्भागवत-माहात्म्य
    • परीक्षित् और वज्रनाभका समागम, शाण्डिल्य मुनिके मुखसे भगवान‍्की लीलाके रहस्य और व्रजभूमिके महत्त्वका वर्णन
    • यमुना और श्रीकृष्णपत्नियोंका संवाद, कीर्तनोत्सवमें उद्धवजीका प्रकट होना
    • श्रीमद्भागवतका माहात्म्य, भागवतश्रवणसे श्रोताओंको भगवद्धामकी प्राप्ति
    • श्रीमद्भागवतका स्वरूप, प्रमाण, श्रोता-वक्ताके लक्षण, श्रवणविधि और माहात्म्य
    • वैशाखमास-माहात्म्य
    • वैशाखमासकी श्रेष्ठता; उसमें जल, व्यजन, छत्र, पादुका और अन्न आदि दानोंकी महिमा
    • वैशाखमासमें विविध वस्तुओंके दानका महत्त्व तथा वैशाखस्नानके नियम
    • वैशाखमासमें छत्रदानसे हेमकान्तका उद्धार
    • महर्षि वसिष्ठके उपदेशसे राजा कीर्तिमान‍्का अपने राज्यमें वैशाखमासके धर्मका पालन कराना और यमराजका ब्रह्माजीसे राजाके लिये शिकायत करना
    • ब्रह्माजीका यमराजको समझाना और भगवान् विष्णुका उन्हें वैशाखमासमें भाग दिलाना
    • भगवत्कथाके श्रवण और कीर्तनका महत्त्व तथा वैशाखमासके धर्मोंके अनुष्ठानसे राजा पुरुयशाका संकटसे उद्धार
    • राजा पुरुयशाको भगवान‍्का दर्शन, उनके द्वारा भगवत्स्तुति और भगवान‍्के वरदानसे राजाकी सायुज्य मुक्ति
    • शंख-व्याध-संवाद, व्याधके पूर्वजन्मका वृत्तान्त
    • भगवान् विष्णुके स्वरूपका विवेचन, प्राणकी श्रेष्ठता, जीवोंके विभिन्न स्वभावों और कर्मोंका कारण तथा भागवतधर्म
    • वैशाखमासके माहात्म्य-श्रवणसे एक सर्पका उद्धार और वैशाखधर्मके पालन तथा रामनाम-जपसे व्याधका वाल्मीकि होना
    • धर्मवर्णकी कथा, कलिकी अवस्थाका वर्णन, धर्मवर्ण और पितरोंका संवाद एवं वैशाखकी अमावास्याकी श्रेष्ठता
    • वैशाखकी अक्षय तृतीया और द्वादशीकी महत्ता, द्वादशीके पुण्यदानसे एक कुतियाका उद्धार
    • वैशाख मासकी अन्तिम तीन तिथियोंकी महत्ता तथा ग्रन्थका उपसंहार
    • श्रीअयोध्या-माहात्म्य
    • अयोध्यापुरीकी महिमा और सीमाका वर्णन, चक्रतीर्थ एवं श्रीविष्णुहरिका माहात्म्य
    • ब्रह्मकुण्ड, ऋणमोचन तथा पापमोचन आदि तीर्थोंकी महिमा
    • स्वर्गद्वार तथा चन्द्रहरितीर्थकी महिमा, चन्द्रसहस्रव्रतकी उद्यापनविधि
    • धर्महरिकी स्थापना और स्वर्णखनि तीर्थ, रघुका सर्वस्व दान तथा कौत्सकी याचनाको सफल करना
    • सम्भेदतीर्थ, सीताकुण्ड, गुप्तहरि और चक्रहरि तीर्थकी महिमा
    • गोप्रतारतीर्थकी महिमा और श्रीरामके परमधामगमनकी कथा
    • क्षीरोदकतीर्थ, बृहस्पतिकुण्ड, रुक्मिणी आदि कुण्डोंका माहात्म्य
    • अयोध्याक्षेत्रके अन्य विविध तीर्थोंका वर्णन तथा वसिष्ठके मुखसे विभीषण आदिका अयोध्या-माहात्म्य-श्रवण
    • गयाकूप आदि अनेक तीर्थोंका माहात्म्य तथा ग्रन्थका उपसंहार
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    ब्राह्मखण्ड
    • सेतु-माहात्म्य
    • सेतुतीर्थ (रामेश्वर-क्षेत्र)-की महिमा
    • सेतुबन्धकी कथा तथा सेतुमें स्थित मुख्य-मुख्य तीर्थोंके नाम
    • चक्रतीर्थका माहात्म्य—गालवमुनि तथा धर्मकी तपस्याका वर्णन
    • सेतुबन्धन आरम्भ करनेकी बात तथा सेतुयात्राका क्रम एवं विधान
    • सीतासरोवर और मंगलतीर्थका माहात्म्य, राजा मनोजवकी कथा
    • एकान्तरामनाथ, ब्रह्मकुण्ड, हनुमत्कुण्ड और अगस्त्यतीर्थका माहात्म्य
    • रामतीर्थ, लक्ष्मणतीर्थ और जटातीर्थकी महिमा
    • लक्ष्मीतीर्थ और अग्नितीर्थका माहात्म्य—पिशाचयोनिको प्राप्त हुए दुष्पण्यका उद्धार
    • चक्रतीर्थ, शिवतीर्थ, शंखतीर्थ और यमुना, गंगा एवं गयातीर्थकी महिमा—राजा जानश्रुतिको रैक्वके उपदेशसे ब्रह्मभावकी प्राप्ति
    • कोटितीर्थकी महिमा—भगवान् श्रीकृष्णका अवतार, कंसवध तथा श्रीकृष्णका कोटितीर्थमें स्नान
    • सर्वतीर्थ तथा धनुष्कोटि तीर्थोंकी महिमा
    • अश्वत्थामाके द्वारा सोते हुए पाण्डव योद्धाओंका वध तथा धनुष्कोटिमें स्नान करनेसे उसका उद्धार
    • धनुष्कोटिमें स्नान करनेसे परावसुका पापसे उद्धार
    • धनुष्कोटिकी महिमा; सियार, वानर तथा दुराचार ब्राह्मणकी कथा और महालय श्राद्धकी आवश्यकता
    • क्षीरकुण्डकी उत्पत्ति और महिमा—महर्षि मुद्‍गलको भगवान् विष्णुका दर्शन
    • कपितीर्थकी महिमा—उसमें स्नान करनेसे रम्भा और घृताचीका शापसे उद्धार
    • रामेश्वर नामक महालिंगकी महिमा
    • भगवान् श्रीरामके द्वारा राक्षसोंसहित रावणका वध और सेतुके क्षेत्रमें रामेश्वरलिंगकी स्थापना
    • श्रीरामचन्द्रजीके द्वारा हनुमान‍्जीको ज्ञानोपदेश
    • हनुमान‍्जीद्वारा भगवान् श्रीराम और सीताका स्तवन तथा अपने लाये हुए शिवलिंगका स्थापन
    • भगवान् रामेश्वरके प्रभावसे राजा शंकरका ब्रह्महत्या और स्त्रीहत्याके पापसे उद्धार
    • राजा पुण्यनिधिके यहाँ महालक्ष्मीका पुत्रीके रूपमें निवास एवं सेतुमाधवकी महिमा
    • सेतुतीर्थकी यात्राका क्रम
    • सेतुतीर्थका माहात्म्य तथा इस खण्डका उपसंहार
    • धर्मारण्य-माहात्म्य
    • धर्मकी तपस्यासे धर्मारण्यक्षेत्रकी प्रसिद्धि और उसका माहात्म्य
    • सदाचार—शौच, स्नान, सन्ध्या, तर्पण, बलिवैश्वदेव आदिका महत्त्व
    • वेदोंके स्वाध्याय, बलिवैश्वदेव, अतिथिसेवा, आठ प्रकारके विवाह, पंचयज्ञ तथा व्यावहारिक शिष्टाचारोंका कथन
    • पतिव्रता स्त्रियोंके बर्ताव, धर्म और नियम तथा श्राद्ध और धर्मारण्यका महत्त्व
    • धर्मारण्यवासी ब्राह्मणोंके गोत्र तथा उनकी रक्षाके लिये कामधेनुद्वारा वैश्योंकी उत्पत्ति
    • लोलजिह्वाक्षका वध, गणेशजीकी उत्पत्ति और देवताओंद्वारा उनका स्तवन
    • संज्ञाकी तपस्या, अश्विनीकुमारोंका जन्म तथा वकुलादित्यकी स्थापना
    • इन्द्रेश्वरकी स्थापना और उनकी महिमा, देवमज्जनक तड़ागका माहात्म्य तथा लोहासुरके अत्याचारसे धर्मारण्यकी जनताका पलायन
    • सरस्वती नदी, द्वारकातीर्थ एवं गोवत्स आदि तीर्थोंकी महिमा
    • संक्षेपसे श्रीरामचन्द्रजीके सम्पूर्ण चरित्रका वर्णन
    • वसिष्ठजीके द्वारा भिन्न-भिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन, श्रीरामकी धर्मारण्ययात्रा, वहाँके भगे हुए ब्राह्मणोंको पुन: लाकर बसाना और सत्यमन्दिरकी स्थापना करना
    • रामनामकी महिमा, कलियुगका प्रभाव तथा धर्मारण्यक्षेत्रके माहात्म्यश्रवणका फल
    • चातुर्मास्य-माहात्म्य
    • चातुर्मास्य व्रतका माहात्म्य, संयम-नियम, दयाधर्म तथा चौमासेमें अन्न आदि दानोंकी महिमा
    • चातुर्मास्यमें इष्ट वस्तुके परित्याग तथा नियम-पालनका महत्त्व
    • चातुर्मास्यमें विशेष-विशेष तप और भगवान‍्की षोडशोपचार पूजाका क्रम
    • ब्रह्माजीके द्वारा मानसी और शारीरिक सृष्टिका प्रादुर्भाव, चारों वर्णोंके धर्म तथा शूद्र जातियोंके भेदोंका वर्णन
    • पैजवन शूद्र और महर्षि गालवका संवाद तथा शालग्रामशिलाके पूजनका महत्त्व
    • सतीका देहत्याग, पार्वतीविवाह, भगवान् शिवका हरिहररूपमें प्राकटॺ और शालग्रामशिलाका महत्त्व
    • शालग्राम-पूजन, द्वादशाक्षर मन्त्र एवं रामनामकी महिमा
    • भगवान् शिवका नर्मदेश्वर शिवलिंगरूप होना तथा गालव-शूद्र-संवादका उपसंहार
    • महादेवजीके द्वारा पार्वतीके प्रति ध्यानयोग एवं ज्ञानयोगका निरूपण
    • ज्ञानयोग और उसके साधन, स्कन्दस्वामीका सेनापतित्व और कौमारव्रत
    • ब्रह्मोत्तरखण्ड
    • शिवके षडक्षर एवं पंचाक्षर मन्त्रका माहात्म्य; राजा दाशार्ह तथा रानी कलावतीकी कथा
    • शिवरात्रिको शिवपूजनका महत्त्व, राजा मित्रसहका वसिष्ठके शापसे राक्षस होकर ब्राह्मणकी हत्या करना और गौतमजीका उन्हें गोकर्णक्षेत्रकी महिमा सुनाना
    • गोकर्ण क्षेत्रमें शिवरात्रिके शिव-पूजनके माहात्म्यसे एक चाण्डालीका परमधाम-गमन
    • शिव-पूजाकी महिमाके विषयमें परम शिवभक्त राजा चन्द्रसेन और भक्त श्रीकर गोपकी अद्भुत कथा
    • प्रदोषमें शिवपूजनकी अवहेलनासे दोषकी प्राप्तिके प्रसंगमें विदर्भराज और उसके पुत्रकी कथा
    • प्रदोषव्रतकी विधि, इसके पालनसे द्विजकुमार और राजकुमारकी दरिद्रताका निवारण तथा राज्यकी प्राप्ति
    • सोमवार-व्रतके प्रभावसे सीमन्तिनीको पुन: परम सौभाग्यकी प्राप्ति
    • त्यागी हुई रानी और राजकुमारकी वैश्य एवं शिवयोगीद्वारा रक्षा तथा शिवयोगीका राजपुत्रको धर्मका उपदेश करना
    • शिवयोगीसे शिव-कवचका उपदेश और दिव्य खड्ग एवं शंख पाकर भद्रायुका शत्रुओंको जीतना तथा निषधराजकी पुत्रीसे उसका विवाह
    • भद्रायु तथा कीर्तिमालिनीके भक्तिभावकी परीक्षा लेकर भगवान् शिवका उन्हें वरदान देना
    • भस्मकी महिमासे ब्रह्मराक्षसका उद्धार
    • भस्मकी महिमा, शबरकी चिताभस्मद्वारा की हुई पूजासे शिवजीकी प्रसन्नता और उसकी जली हुई पत्नीका पुन: जीवित होना
    • उमामहेश्वरव्रतकी महिमा, इसके पालनसे शारदाको शिवलोककी प्राप्ति तथा सत्कथा-श्रवणका माहात्म्य और ब्राह्मखण्डकी समाप्ति
  • +
    काशीखण्ड (पूर्वार्ध)
    • मेरुगिरिसे स्पर्धा करके विन्ध्याचलका सूर्यके मार्गको रोकना और ब्रह्माजीके आदेशसे देवताओंका काशीमें अगस्त्य मुनिके समीप जाना
    • बृहस्पतिजीके मुखसे लोपामुद्राके पातिव्रतधर्मका वर्णन
    • अगस्त्यजीका काशीपुरीसे प्रस्थान, विन्ध्यपर्वतको लघुरूपमें रहनेका आदेश और महालक्ष्मीकी स्तुति
    • मुक्तिदायक तीर्थोंका वर्णन तथा मानसतीर्थ एवं काशीकी श्रेष्ठता
    • शिवशर्माका सात पुरियोंकी यात्रा करना और हरद्वारमें उसका परमधाम-गमन
    • शिवशर्मा और विष्णुपार्षदोंका संवाद तथा विभिन्न लोकोंका वर्णन
    • शिवशर्माका सूर्यलोकमें पहुँचकर सूर्यदेवकी महिमा श्रवण करना
    • इन्द्रलोक तथा अग्निलोकका वर्णन, विश्वानर मुनिके द्वारा की हुई आराधनासे प्रसन्न होकर शिवजीका उन्हें वरदान देना
    • विश्वानरके पुत्र गृहपतिका भगवान् शिवकी आराधनासे अग्नि एवं दिक्पालका पद प्राप्त करना
    • नैर्ऋत्यलोक तथा वरुणलोकका वर्णन
    • वायु, कुबेर, ईशान और चन्द्रमाके लोकोंकी स्थितिका वर्णन
    • बुधलोक और शुक्रलोककी स्थिति, बुध और शुक्रके द्वारा भगवान् शिवकी स्तुति और वरदान-प्राप्ति
    • मंगल, बृहस्पति और शनिके लोकोंकी स्थिति
    • सप्तर्षिलोक और ध्रुवलोककी स्थिति, ध्रुवकी तपस्या और वरदान-प्राप्ति
    • महर्लोक, जनलोक और तपोलोककी स्थिति; ब्रह्माजीके द्वारा सत्यलोकका महत्त्व-कथन और भारतवर्ष एवं वहाँके तीर्थोंकी महत्ता बताते हुए प्रयाग और काशीकी महिमाका प्रतिपादन
    • वैकुण्ठ और कैलासकी स्थिति तथा शिव और विष्णुकी अभिन्नता एवं महत्ताका निरूपण
    • अगस्त्यजीका श्रीशैलपर कार्तिकेयजीकी सेवामें जाना और उनके मुखसे काशीकी महिमा श्रवण करना
    • काशीकी उत्पत्ति-कथा, काशी और मणिकर्णिकाका माहात्म्य
    • श्रीगंगाजीकी महिमा
    • गंगाजीकी महिमा
    • गंगासहस्रनामस्तोत्र*
    • शिवकी कृपाके बिना काशीवासकी दुर्लभता तथा काशीकी महिमा
    • काशीपुरीकी श्रेष्ठता, हरिकेश यक्षको शिवाराधनाके द्वारा दण्ड-पाणि-पदकी प्राप्ति और दण्डपाण्यष्टकस्तोत्र
    • ईशानके द्वारा ज्ञानोद (ज्ञानवापी) तीर्थका प्राकटॺ, ज्ञानवापीकी महिमाके प्रसंगमें सुशीला (कलावती)-की कथा, काशीके विविध तीर्थोंका वर्णन
    • ज्ञानवापीकी महिमा और उसके सेवनसे माल्यकेतु और कलावतीको तारक ब्रह्मकी प्राप्ति
    • संक्षेपसे सदाचार और उसके महत्त्वका वर्णन
    • संस्कारोंका संक्षिप्त परिचय, ब्रह्मचारी एवं ब्रह्मचर्य-आश्रमके धर्म
    • गृहस्थ-आश्रमके धर्म, पंचयज्ञकी महिमा, काशीवासकी महत्ता तथा राजा दिवोदासको पृथ्वीके राज्यकी प्राप्ति
    • गृहस्थोचित शिष्टाचार और धर्म
    • वानप्रस्थ और संन्यास आश्रमके धर्मका वर्णन, योगमार्गका निरूपण
    • मृत्युसूचक चिह्नोंका वर्णन
    • महाराज दिवोदासके धर्मपूर्ण राज्यका वर्णन
    • भगवान् शिवके आदेशसे सूर्यका काशीमें गमन और निवास तथा लोलार्कतीर्थका माहात्म्य
    • उत्तरार्क सूर्यकी महिमा, सुलक्षणाकी तपस्या और उसपर शिव-पार्वतीकी कृपा
    • साम्बादित्य, द्रौपदादित्य और मयूखादित्यकी माहात्म्य-कथा
    • गरुडेश्वर लिंग तथा खखोल्कादित्यकी प्रादुर्भाव-कथा, काशीमें गरुड और विनताकी तपस्या और वरदान-प्राप्ति
  • +
    काशीखण्ड (उत्तरार्ध)
    • अरुणादित्य, वृद्धादित्य, केशवादित्य, विमलादित्य, गंगादित्य तथा यमादित्यकी महिमाका वर्णन
    • ब्रह्माजीका दिवोदासकी सहायतासे काशीमें यज्ञ करना और दशाश्वमेधतीर्थकी महिमा
    • पिशाचमोचनतीर्थकी महिमा
    • गणेशजीका काशीमें जाना और लोकप्रिय होना, गणेशजीका स्तवन
    • भगवान् विष्णुका काशी-गमन, केशव एवं पादोदकतीर्थकी महिमा, धर्मक्षेत्रमें पुण्य-कीर्तिका उपदेश तथा राजा दिवोदासकी निर्वाणप्राप्ति
    • धर्मनदतीर्थके पंचनद नाम पड़नेका कारण, अग्निविन्दुके द्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति, भगवान‍्के मुखसे पंचनद एवं विन्दुमाधवतीर्थकी महिमाका निरूपण
    • भगवान् विष्णुद्वारा अपने आदिकेशव प्रभृति स्वरूपोंका वर्णन तथा अग्निविन्दुकी मुक्ति
    • भगवान् शिवका स्वागत या वृषभध्वजतीर्थकी महिमा तथा शिवका काशीपुरीमें प्रवेश
    • जैगीषव्यपर भगवान् शिवकी कृपा और उनके द्वारा शिवकी स्तुति
    • काशीके ब्राह्मणोंको भगवान् शिवका वरदान तथा काशी क्षेत्रकी महिमा
    • परापरेश्वर और व्याघ्रेश्वर लिंगकी महिमा, भगवान् शिवद्वारा व्याघ्ररूपधारी दैत्यका वध
    • हिमवान‍्के द्वारा काशीमें शैलेश्वर लिंगकी प्रतिष्ठा
    • रत्नेश्वर लिंगकी महिमा
    • कृत्तिवासेश्वर लिंगका प्राकटॺ और उसकी महिमा
    • विभिन्न तीर्थोंके देवविग्रहोंका काशीमें आगमन और उनका स्थान
    • दैत्योंसहित दुर्गमासुरका देवी और उनकी शक्तियोंके साथ युद्ध
    • दुर्गदैत्यका वध, देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति और दुर्गा नामकी प्रसिद्धि
    • काशीके अट्ठाईस प्रमुख लिंगोंका संक्षिप्त वर्णन तथा ॐकारेश्वरके प्राकटॺकी कथा, ब्रह्माजीके द्वारा ॐकारेश्वरका स्तवन और उनकी महिमा
    • त्रिलोचन लिंगकी महिमा
    • केदारेश्वर लिंगकी माहात्म्य-कथा
    • श्रीधर्मेश्वर लिंगका माहात्म्य, धर्मपीठका गौरव तथा मनोरथतृतीया व्रतकी विधि और महिमा
    • वीरेश्वर लिंगकी महिमाके प्रसंगमें राजा अमित्रजित और मलयगन्धिनीका चरित्र
    • वीरेश्वरका जन्म, तपस्या, वीरेश्वरगलिंगका प्राकटॺ और उसकी महिमा
    • दुर्वासेश्वर (कामेश्वर)-लिंगकी महिमा
    • श्रीविश्वकर्मेश्वर-लिंगकी महिमा
    • दक्षेश्वर तथा पार्वतीश्वर लिंगका माहात्म्य
    • नर्मदेश्वर तथा सतीश्वर लिंगका माहात्म्य
    • अमृतेश्वर लिंगकी महिमा तथा व्यासोक्त व्रत एवं धर्मोंका निरूपण
    • काशीके तीर्थोंका संक्षिप्त वर्णन
    • भगवान् शिवके मुखसे विश्वेश्वर लिंगकी महिमाका वर्णन
    • पंचतीर्थी, चतुर्दश आयतन, अष्ट आयतन, शैलेशादि और एकादश आयतनोंकी यात्रा, गौरीयात्रा, गणेशयात्रा, अन्तर्गृहयात्रा तथा विश्वनाथयात्राका वर्णन
  • +
    आवन्त्यखण्ड
    • अवन्तीक्षेत्र-माहात्म्य
    • सनत्कुमारजीके द्वारा महाकालतीर्थकी श्रेष्ठताका निरूपण
    • महाकाल वनमें भगवान् शिवका प्रवेश, कपालमोचन, देवताओंद्वारा स्तवन तथा महापाशुपत व्रतकी महिमा
    • रुद्रभक्तिका निरूपण तथा महाकाल क्षेत्रमें निवास करनेवाले मनुष्योंके नियम
    • हालाहल दैत्यका वध, रुद्रसरोवरकी महिमा तथा कुशस्थलीमें चार समुद्रोंका आगमन और उसका माहात्म्य
    • शंकरवापी, शंकरादित्य, गन्धवती नदी, हरसिद्धि देवी, वटयक्षिणी, पिशाचतीर्थ, शिप्रागुप्तेश्वर आदि तथा हनुमत्केश्वरकी महिमा
    • महाकालकी परिक्रमा, यात्रा और विभिन्न देवताओंके दर्शनका माहात्म्य
    • वाल्मीकिकी तपस्या और वाल्मीकेश्वरकी महिमा
    • शुक्रेश्वर आदिके पूजनकी महिमा, पंचेशानी यात्राका माहात्म्य तथा पद्मावती आदिके दर्शनका फल
    • अंकपादतीर्थकी महिमा, श्रीकृष्णके द्वारा मरे हुए गुरुपुत्रके लाये जानेकी कथा
    • लड्डुकप्रिय गणेश, कुसुमेश्वर, मार्कण्डेयेश्वर, ब्रह्माणी देवी, ब्रह्मेश्वर, यज्ञवापी, रूपकुण्ड, अनंगेश्वर तथा सोमेश्वरका माहात्म्य
    • नरकोंका संक्षिप्त वर्णन, केदारेश्वर, जटेश्वर, इन्द्रेश्वर, कुण्डेश्वर, गोपेश्वर, आनन्देश्वर तथा रामेश्वरके दर्शन-पूजनका माहात्म्य
    • सौभाग्य आदि तीर्थोंकी महिमा, अर्जुनको इन्द्रसे सूर्यप्रतिमाकी प्राप्ति तथा अवन्तीमें उसकी स्थापना और उनके दर्शनका माहात्म्य
    • भगवान् सूर्यकी अष्टोत्तरशतनामोंद्वारा स्तुति तथा अन्यान्य तीर्थोंकी महिमा
    • स्वर्णक्षुर आदिकी महिमा, अन्धकासुरका युद्ध, नरदीप एवं शंखोद्धार आदिका माहात्म्य
    • ॐकारेश्वर आदिका महत्त्व तथा अन्धकासुरको शिवगणोंमें श्रेष्ठ स्थानकी प्राप्ति
    • उज्जयिनीपुरीके कनकशृंगा आदि नाम पड़नेका कारण
    • काष्ठा, कला आदि कालमान, युग और कल्पभेद तथा प्रतिकल्पपुरीका माहात्म्य
    • शिप्राका माहात्म्य, उसके ‘ज्वरघ्नी’ और ‘अमृतोद्भवा’ आदि नाम पड़नेका कारण
    • जय-विजयको सनकादिका शाप, भगवान‍्का वाराहावतार, वाराहके हृदयसे शिप्राकी उत्पत्ति तथा उसका माहात्म्य
    • क्षातासंगम तथा उसके निकटवर्ती तीर्थोंकी महिमा, राजा युगादिदेवके धर्ममय राज्यकी प्रशंसा
    • गयातीर्थकी महिमा, पुरुषोत्तममास और पुरुषोत्तमतीर्थकी महत्ता तथा गोमती कुण्डका माहात्म्य
    • गंगेश्वर और विश्वेश्वरतीर्थका माहात्म्य, बलिके द्वारा देवताओंकी पराजय, ब्रह्माजीका देवताओंको विष्णुसहस्रनामस्तोत्रका उपदेश देना
    • भगवान‍्का वामनरूपसे प्रकट हो बलिसे तीन पग भूमि माँगना और वामनकुण्डकी महिमा
    • भैरवतीर्थ और नागतीर्थकी महिमा
    • नृसिंहतीर्थकी महिमा
    • कुटुम्बेश्वर, देवप्रयाग तथा कर्कराजतीर्थकी महिमा
    • अवन्तीक्षेत्रके महत्त्वपूर्ण तीर्थ, देवता, वहाँकी यात्राके क्रम एवं माहात्म्यका वर्णन
    • रेवाखण्ड
    • राजा युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा पुरूरवाकी तपस्यासे नर्मदाजीके मर्त्यलोकमें आगमनका वर्णन
    • राजा हिरण्यतेजाके तपसे नर्मदाका अवतरण
    • नर्मदाका मर्त्यलोकमें आकर पुरुकुत्सुको अपना पति बनाना तथा नर्मदास्नानकी महिमा
    • नर्मदा-तटवर्ती अनन्तपुर एवं व्यासतीर्थकी महिमा
    • वरांगना-नर्मदा-संगम तथा कपिलातीर्थका माहात्म्य, महाराज मनुकी त्रिपुरीयात्रा और नर्मदासे वरदान पाना
    • भृगुतीर्थ और भास्करतीर्थका माहात्म्य
    • सोमतीर्थ, ब्रह्मकुण्ड, ब्रह्मेश्वर लिंग, सिद्धेश्वर लिंग तथा संगमतीर्थकी महिमा
    • ध्रुवेश्वर, वाराह, चान्द्रायण, द्वादशादित्य तथा गांजालतीर्थकी महिमा, राजा हरिकेशकी शुद्धि
    • नर्मदा और मत्स्याके संगमका माहात्म्य, महर्षि आपस्तम्बके द्वारा गौओंकी महत्ताका प्रतिपादन तथा तीर्थके प्रभावसे निषादोंका मछलियोंसहित उद्धार
    • कलहंसेश्वर तीर्थका प्रादुर्भाव और उसका माहात्म्य
    • नर्मदापुरका माहात्म्य, जमदग्निको कामधेनुकी प्राप्ति, कार्तवीर्यद्वारा मुनिका वध और धेनुका अपहरण तथा परशुरामद्वारा कार्तवीर्यका वध
    • शिवनेत्र कुण्ड तथा जनकतीर्थका माहात्म्य
    • सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, शाण्डिल्या और नर्मदाके संगमकी महिमा तथा नर्मदा-कुब्जाके संगमपर रन्तिदेवका यज्ञ
    • कुब्जा और नर्मदाके संगमकी महिमा, हरिकेश ब्राह्मणका परिवारसहित ब्रह्मराक्षसयोनिसे उद्धार
    • माहेश्वरतीर्थकी महिमा, राजा सालंकायनका यज्ञ
    • श्वेतकिंशुक आदि तीर्थोंकी महिमा
    • मान्धाताका चरित्र
    • बाणासुरके तीन पुरोंका भगवान् शंकरके द्वारा संहार, जालेश्वरनामक बाणलिंगकी उत्पत्ति और बाणासुरको शिवलोक-प्राप्ति
    • अमरकण्टक और यज्ञपर्वतके श्रेष्ठ तीर्थ एवं लिंग, राजा इन्द्रद्युम्नका यज्ञ और उन्हें देवोंका वरदान
    • पुराणलक्षण, कलिकालका प्रभाव तथा राजर्षि वसुदानके यज्ञमें प्रकट हुई कपिला और नर्मदाके संगमका माहात्म्य
    • अमरावतीमें भगवान‍्का दैत्यसूदनरूपसे निवास तथा वहाँके अन्यान्य तीर्थों और शिवलिंगोंका माहात्म्य
    • अमरकण्टकपर सूत्रयागका माहात्म्य, कावेरी-संगम और पयोष्णी-संगमकी महिमा तथा वहाँके अन्य तीर्थोंके सेवनकी महत्ता
    • भद्ररुद्रेश्वरकी महिमा, दुर्वासाजीके द्वारा अमरकण्टकका गयातीर्थके तुल्य होना तथा राजा भरतका यज्ञ
    • ब्रह्माजीके द्वारा सौम्या इष्टिसे दानवोंका निवारण तथा रुद्रके एक सौ एक नामोंद्वारा शिवजीका स्तवन
    • कपिला-नर्मदा-संगम और ईशान आदि तीर्थोंकी महिमा, यमलोकके मार्गके कष्टों तथा अट्ठाईस नरककोटियोंका वर्णन
    • पापियोंकी नरक-यातनाका वर्णन
    • दान, पुण्य, शिवध्यान और नर्मदासेवनसे नरकसे उद्धार होनेका तथा संसारसे वैराग्यका उपदेश
    • मातंग, मृगवन और वाराहतीर्थकी महिमा
    • संसारसे मुक्त होनेके लिये पाप और पाखण्डी जनोंके त्याग तथा शिव एवं नर्मदाके आश्रय लेनेका उपदेश
    • शिवलोककी उत्कृष्टता, गोसेवाका महत्त्व, दानकी महिमा तथा नर्मदातटपर दान एवं शिवध्यानका माहात्म्य
    • अमरावतीके दक्षिण विष्णु-मन्दिरकी महिमा, मेघवनका महत्त्व तथा विभिन्न तीर्थोंकी महाशक्तियोंके नाम
    • अशोकवनिकातीर्थमें महाराज रविश्चन्द्रके द्वारा यज्ञ, दान तथा मुनियोंका उद्धार
    • वागीश्वरतीर्थमें राजा ब्रह्मदत्तके यज्ञमें प्रेतोंका उद्धार तथा सहस्रावर्त आदि तीर्थोंकी महिमा
    • देवपथतीर्थ, शुक्लतीर्थ, दीप्तिकेश्वरकी महिमा, देवासुरोंके द्वारा महादेवजीकी स्तुति तथा वैष्णव तीर्थकी महिमा
    • नर्मदाजीकी तथा भगवान् विष्णुकी स्तुति
    • मेघनादतीर्थका प्राकटॺ और उसकी महिमा
    • करंजेश्वर तथा कुण्डलेश्वरतीर्थका प्रादुर्भाव और माहात्म्य
    • पिप्पलेश्वर, विमलेश्वर, विश्वरूपा-नर्मदासंगम तथा एक दिनमें मेघनादेश्वर आदि पाँच लिंगोंकी यात्राका माहात्म्य, राजा धर्मसेनकी कथा
    • मृकण्ड-आश्रममें दो गन्धर्वोंका उद्धार तथा चन्द्रमती-नर्मदासंगम आदि अन्य तीर्थोंकी महिमा
    • भानुमतीका तीर्थसेवन, शूलभेदतीर्थमें शबर-दम्पतिका उद्धार और सती भानुमतीको कैलासधामकी प्राप्ति
    • आदित्येश्वरतीर्थकी महिमा, मुनियोंद्वारा नर्मदाका स्तवन और उस तीर्थमें गोदानकी महिमा
    • धनदतीर्थका माहात्म्य, पूज्य और अपूज्य ब्राह्मण, वृषोत्सर्गकी महत्ता तथा गौतमेश्वरतीर्थकी महिमा
    • पराशराश्रमकी महिमा, पराशर मुनिकी तपस्या, वरदान-प्राप्ति, भीमेश्वरमें गायत्री-जपका महत्त्व और नारदेश्वरतीर्थका माहात्म्य
    • नर्मदा-नागेशके संगममें कण्ठकी ब्रह्महत्यासे मुक्ति और सद्‍गति
    • पूतकेश्वर तथा जलशायी (चक्र) तीर्थका माहात्म्य, श्रीविष्णुके द्वारा नलमेघ दानवके वधकी कथा
    • प्रभासेश्वर, मार्कण्डेयेश्वर, संकर्षण, मन्मथेश्वर तथा एरण्डीसंगममें पुत्रप्राप्तिपदतीर्थकी महिमा, अनसूयाजीके पुत्ररूपसे ब्रह्मा, शिव और विष्णुका अवतार
    • सौवर्णतीर्थ, करण्डेश्वरतीर्थ, भाण्डारतीर्थ, रोहिणीतीर्थ, चक्रतीर्थ तथा धूमपाततीर्थका माहात्म्य और माहात्म्य-श्रवणका फल
    • श्रीसत्यनारायण-व्रतकी विधि, ब्राह्मण और लकड़हारेकी कथा
    • सत्यनारायण-व्रतकी महिमा, राजा उल्कामुख, साधु वणिक् और राजा वंशध्वजकी कथा
  • +
    नागरखण्ड (पूर्वार्ध)
    • राजा त्रिशंकुका वसिष्ठपुत्रोंके शापसे चाण्डाल होकर विश्वामित्र-मुनिकी शरणमें जाना, तीर्थसेवनसे राजाका उद्धार और विश्वामित्रजीके द्वारा उनसे यज्ञ करानेका उद्योग
    • विश्वामित्रजीके द्वारा त्रिशंकुका यज्ञ पूरा करके नूतन सृष्टि-रचनाका उद्योग, त्रिशंकुका ब्रह्माजीके साथ स्वर्गगमन
    • नागबिलका महत्त्व, इन्द्रकी ब्रह्महत्यासे मुक्ति, रक्तशृंग-पर्वतके द्वारा नागबिलका भरा जाना और मृगीके शापसे राजा चमत्कारका कोढ़ी होना
    • शंखतीर्थकी उत्पत्ति, उसमें स्नानसे राजा चमत्कारके कुष्ठरोगकी निवृत्ति और राजाका ब्राह्मणोंके लिये श्रेष्ठ नगर निर्माण कराकर दान देना
    • राजा चमत्कारकी तपस्यासे सन्तुष्ट हुए शिवका अचलेश्वररूपसे निवास और रक्तशृंग पर्वतकी परिक्रमा आदिका माहात्म्य
    • चमत्कारपुरमें गयाशीर्षतीर्थकी महिमा—राजा विदूरथके द्वारा तीन प्रेतोंका उद्धार
    • मार्कण्डेय मुनिको अमरत्वकी प्राप्ति, ब्रह्माजीकी स्थापना, बालसख्यतीर्थकी महिमा
    • मृगपदतीर्थ और विष्णुपदतीर्थका प्रादुर्भाव तथा माहात्म्य, विष्णुपदीमें स्नान और विष्णुपदके स्पर्श आदिका महत्त्व
    • विष्णुपदीकी अद्भुत महिमा, चण्डशर्माकी शुद्धि
    • हाटकेश्वर-क्षेत्रकी दक्षिणोत्तर सीमाके गोकर्णोंका परिचय, गोकर्ण और यमका संवाद, नरकवर्णन, क्षेत्रसेवनका माहात्म्य
    • सिद्धेश्वर लिंगकी महिमा तथा वत्स मुनिके द्वारा षडक्षर-मन्त्रके माहात्म्य एवं मांसाहारकी निन्दा तथा अहिंसाकी महत्ताका वर्णन
    • सप्तर्षि-आश्रमकी महिमा, सप्तर्षियोंका हाटकेश्वरक्षेत्रमें आगमन
    • अगस्त्य-आश्रममें शिव-पूजा आदिका माहात्म्य
    • दुर्वासा-लोमहर्षण-संवाद, मन्त्रसिद्धिकी विधि
    • धुन्धुमारेश्वरकी स्थापना और महिमा, जलशायी विष्णु तथा अशून्यशयन-व्रतका महत्त्व, वाष्कलि दैत्यका वध
    • विश्वामित्रका मेनकासे वार्तालाप, सती स्त्रियोंके पालन करनेयोग्य धर्मका वर्णन, विश्वामित्रका वैराग्य, दोनोंका परस्पर शाप और तीर्थजलमें स्नानसे उद्धार
    • सरस्वतीतीर्थकी महिमा, राजा अम्बुवीचिकी मूकताका निवारण तथा राजाके द्वारा सरस्वतीदेवीका स्तवन
    • महाकालके समीप जागरणकी महिमा, राजा रुद्रसेनका पूर्ववृत्तान्त
    • कलशेश्वरका माहात्म्य, नन्दिनी धेनुके द्वारा व्याघ्रयोनिको प्राप्त हुए राजा कलशका शापसे उद्धार
    • अगस्त्यकुण्ड, कपिलानदी, वैष्णवीशिला, सिद्धक्षेत्र आदिकी महिमा, नलद्वारा चर्ममुण्डाकी स्तुति तथा नलेश्वरकी महिमा
    • गालवको सूर्यदेवकी आराधनासे पुत्रकी प्राप्ति, अर्जुनके द्वारा विभिन्न देवोंकी स्थापना तथा विषकन्या शर्मिष्ठाद्वारा स्थापित शर्मिष्ठातीर्थका माहात्म्य
    • चमत्कारीदेवीकी महिमा, कार्तिकेयजीके द्वारा शक्तिस्थापना तथा भानुमती-दुर्योधनके विवाहमें सम्मिलित कौरव, पाण्डव एवं यादवोंद्वारा शिवलिंगस्थापन
    • स्कन्दस्वामी और देवयजनकी महिमा तथा तीनों सूर्य-विग्रहोंके दर्शनका माहात्म्य
    • चन्द्रदेवके मन्दिरके निर्माणका महत्त्व, अम्बावृद्धाके दर्शनकी महत्ता, शन्तनुके राज्यमें अवर्षण, अग्नितीर्थका प्राकटॺ और अग्निको ब्रह्माका वरदान
    • ब्रह्मकुण्ड तथा गोमुखतीर्थकी उत्पत्तिकथा एवं महिमा
    • परशुरामद्वारा लोहयष्टिकी स्थापना और उसकी महिमा, देवीकुण्डका माहात्म्य, देवीकी कृपासे अजको दिव्यास्त्रोंकी प्राप्ति तथा पातालगमन
    • राजवापीके प्रसंगमें राजा दशरथका प्रभाव, शनैश्चरग्रहकी पराजय, इन्द्रके साथ राजाकी मैत्री और उनके यहाँ श्रीराम आदिके प्राकटॺकी कथा
    • श्रीरामके द्वारा लक्ष्मणका त्याग, लक्ष्मणका परमधाम-गमन, श्रीरामका किष्किन्धा, लंका एवं हाटकेश्वरतीर्थमें जाना और रामेश्वर, लक्ष्मणेश्वर एवं सीता आदिकी प्रतिमा स्थापित करना
    • चित्रशर्मा तथा अन्यान्य ब्राह्मणोंके द्वारा भगवान् शंकरको सन्तुष्ट करके हाटकेश्वर आदि सभी क्षेत्रोंके देवताओंकी चमत्कारपुरमें स्थापना
    • अड़सठ क्षेत्रों और उनमें भी प्रधान आठ क्षेत्रोंके नाम तथा उनके कीर्तनका महत्त्व
    • भगवान् शिवके दिये हुए मन्त्रद्वारा नागरब्राह्मणोंपर आये हुए सर्पोंके उपद्रवका निवारण
    • चमत्कारपुरमें पुनर्वास करनेवाले ब्राह्मणोंकी संख्या
    • रैवत और क्षेमंकरीद्वारा रैवतेश्वर तथा कात्यायनीकी स्थापना
    • दुर्वासाके शापसे चित्रसम दैत्यका महिष होना, महिषकी तपस्या, वरदान-प्राप्ति तथा स्वर्ग-विजय, कात्यायनीके द्वारा महिषका वध
    • केदारक्षेत्रका प्रादुर्भाव तथा वहाँ भगवान् शिवकी आराधनाका माहात्म्य
    • शुक्लतीर्थकी महिमा
    • कर्णोत्पलातीर्थकी उत्पत्ति, राजा सत्यसन्ध और कर्णोत्पलाकी अद्भुत कथा
    • शाण्डिलीके उपदेशसे कात्यायनीके द्वारा पंचपिण्डा गौरीकी उपासना और पति-प्रेमकी प्राप्ति
    • वास्तुपदतीर्थ तथा अजागृहा देवीकी महिमा और एक ब्राह्मणका रोगोंसे उद्धार
    • पतिव्रताकी शक्तिसे उसके मरे हुए पतिको पुन: नवजीवनकी प्राप्ति
    • शूलीतीर्थ और दीर्घिकातीर्थका प्राकटॺ, माण्डव्य मुनिका धर्मराजको शाप देना और उनके शूलीपर चढ़नेका कारण
    • अन्न और जलके दानकी महत्ता, अन्नदानके बिना वसुषेणको स्वर्गमें भी कष्ट होना तथा सत्यसेनद्वारा स्थापित मिष्टान्नद देवकी महिमा
    • अदितिदेवीद्वारा आराधित अमरेश्वर लिंगकी महिमा
    • शुकदेवजीका जन्म, वैराग्य, व्यासजीके साथ उनका संवाद और वनगमन
    • राजा सुरथके द्वारा भैरवजीकी स्थापना और आराधना तथा शंखतीर्थ, शिव, गणेश, गौरी और चक्रपाणि वासुदेव आदि देवविग्रहोंके दर्शनका माहात्म्य
    • गौरी, जया और विजयाकुण्डका माहात्म्य, सिद्धिके उपाय तथा नागर-खण्डके पूर्वार्ध भागके श्रवणका फल
  • +
    नागरखण्ड (उत्तरार्ध)
    • सब पापोंकी शुद्धिके लिये पुरश्चरणसप्तमी व्रतकी विधि एवं महिमा
    • चण्डशर्माके द्वारा सत्ताईस शिवलिंगोंका पूजन, शिवकृपाप्राप्ति, ऋचीक मुनिका गाधिपुत्रीके साथ विवाह और जमदग्निका जन्म
    • विश्वामित्रकी उत्पत्ति, राज्य-प्राप्ति, वसिष्ठ मुनिके आश्रमपर नन्दिनीद्वारा सेनासहित विश्वामित्रका सत्कार, नन्दिनीके कोपसे उनका पराभव तथा राज्य त्यागकर तप करनेका निश्चय
    • विश्वामित्रकी तपस्या, ब्राह्मणपदकी प्राप्ति, विश्वामित्रकी भेजी हुई शक्तिका वसिष्ठजीके द्वारा स्तम्भन और सरस्वतीके जलकी शुद्धि
    • पंचपिण्डिका गौरी-पूजासे अमाकी सौभाग्यवृद्धि, अमाके पूर्वजन्मका चरित्र
    • पूर्वजन्ममें अमारूपा लक्ष्मीदेवीके द्वारा पंचपिण्डिका गौरीकी उत्पत्ति एवं स्थापनाका वर्णन
    • हाटकेश्वरक्षेत्रमें तीनों पुष्करतीर्थोंके आगमनका वृत्तान्त
    • अतिथि-सत्कारका माहात्म्य
    • हाटकेश्वरक्षेत्रमें पुष्करके प्राकटॺका वार्षिक समय, उसकी महिमा तथा ब्रह्मज्ञानसाधक दो तीर्थोंका माहात्म्य
    • ब्राह्मणकन्या और राजकन्याका अनुपम प्रेम, राजकुमारीका दशार्णराजके साथ विवाहका निश्चय
    • परावसुके द्वारा मद्यपानका प्रायश्चित्त, राजकन्या रत्नवती और परावसुका सुदृढ़ आत्मसंयम
    • ब्राह्मणकन्या और शूद्रराजकन्याकी तपस्या, भगवान् शिवका वरदान तथा उनके नामसे दो प्रसिद्ध तीर्थोंका प्रादुर्भाव
    • त्रिविध क्षेत्र, अरण्य और पुरी आदिका वर्णन, हाटकेश्वरक्षेत्रके चार प्रसिद्ध तीर्थोंकी महिमा
    • अहल्याका शापोद्धार तथा हाटकेश्वरक्षेत्रमें अहल्या, शतानन्द और गौतमजीकी तपस्या एवं पातालवासी हाटकेश्वरका दर्शन
    • शंखतीर्थकी महिमा, राजा दम्भका चरित्र तथा ताम्बूलके दोष, सुर्ती खानेका निषेध
    • विश्वामित्रतीर्थ एवं रत्नादित्यकी महिमा, धन्वन्तरि आदिकी कुष्ठरोगसे मुक्ति
    • श्राद्धकल्प
    • श्राद्धकी आवश्यकता तथा समय
    • श्राद्धकी विधि, विहित और निषिद्ध ब्राह्मण तथा मन्वादि एवं युगादि पुण्यतिथियोंका वर्णन
    • श्राद्धकर्ता और श्राद्धभोक्ताके लिये नियम, एकोद्दिष्ट और सपिण्डीकरणके विषयमें कुछ ज्ञातव्य बातोंका निर्देश
    • सपिण्डनकी आवश्यकता, तीन गति, भीष्मद्वारा मृत्युके बादकी स्थितिका निरूपण
    • नरकों और पापोंसे मुक्त होनेका उपाय तथा भगवान् जलशायीकी महिमा
    • चातुर्मास्य व्रतके पालनीय नियम और उनकी महिमा
    • शिवरात्रिकी महिमा
    • सिद्धेश्वरकी महिमा और तुलादानका महत्त्व
    • पृथ्वीदानकी महिमा
    • चार प्रकारके कालमानका वर्णन, दु:शील नामक ब्राह्मणका चरित्र तथा दु:शीलेश्वरकी महिमा
    • निम्बेश्वरकी स्थापना तथा ग्यारह रुद्रोंका प्राकटॺ एवं उनके दर्शन-पूजनकी महिमा
    • नागरखण्डका उपसंहार, श्रवण तथा व्यासपूजनका माहात्म्य
  • +
    प्रभासखण्ड
    • सूतजीके द्वारा प्रभास-खण्डका उपक्रम तथा पुराणों और उपपुराणोंका वर्णन
    • शिव-पार्वती-संवाद, तीर्थोंका संक्षिप्त वर्णन तथा प्रभासक्षेत्रकी विशेष महिमा
    • प्रभासतीर्थकी सीमा, क्षेत्रविभाग, महिमा तथा रक्षकगणोंका वर्णन
    • सोमनाथके दिव्य स्वरूपका दिग्दर्शन
    • सोमनाथके आठ नाम और पार्वतीके अठारह नामोंका वर्णन, सोमनाथ नामका हेतु तथा सोमेश्वरकी महिमा
    • सोमनाथकी महिमा
    • प्रभासमें भगवान् शिवका स्वरूप, पार्वतीद्वारा उनकी स्तुति तथा प्रभासक्षेत्रमें भगवान् विष्णुकी स्थितिका कारण
    • प्रभासमें सूर्यदेव, सिद्धेश्वरलिंग तथा सिद्धलिंगकी महिमा
    • अर्कस्थलका माहात्म्य, आदित्यकी महिमा, दन्तधावनकी विधि तथा सूर्यदेवकी आराधनापूजाका विधान
    • चन्द्रमाकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा ओषधि आदिका पोषण
    • सृष्टि-कथा—दक्षकन्याओं तथा धर्म एवं कश्यपजीकी सन्ततिका संक्षिप्त वर्णन
    • चन्द्रमाके द्वारा प्रभासक्षेत्रमें शिवकी आराधना, वरदान-प्राप्ति, सोमनाथके मन्दिरका निर्माण तथा ब्राह्मणोंको उनकी आराधनामें लगाना
    • सोमवारव्रतकी विधि और महिमा, गन्धर्वसेनाकी रोगनिवृत्ति
    • सोमनाथकी यात्राविधि
    • समुद्रमें स्नानकी विधि और महिमा
    • सोमनाथके दर्शन-पूजनकी महिमा और पंचस्रोता सरस्वतीका आविर्भाव तथा माहात्म्य; बडवानलका समुद्रमें वास
    • सरस्वती नदीकी महिमा तथा वहाँ स्नान, दान और श्राद्धका माहात्म्य
    • ‘कपर्दी’ की अग्रपूजाका हेतु और महिमा
    • केदारलिंगकी महिमा, राजा शशिविन्दुके पूर्वजन्मका वृत्तान्त
    • श्वेतकेत्वीश्वर आदि विभिन्न शिवलिंगोंका माहात्म्य
    • प्रभासक्षेत्रकी त्रिविध शक्तियों तथा दूतीशक्तियोंके दर्शन-पूजनका माहात्म्य
    • भैरवेश्वर आदि विविध लिंगोंका माहात्म्य
    • कलकलेश्वर, उत्तंकेश्वर, वैश्वानरेश्वर तथा गौतमेश्वरकी महिमा
    • वैष्णवक्षेत्रमें भगवान् दैत्यसूदनकी महिमा
    • योगेश्वरी देवीकी महिमा
    • आदिनारायणका माहात्म्य
    • पाण्डवेश्वरलिंग तथा ग्यारह रुद्रोंका माहात्म्य
    • चन्द्रेश्वर, चक्रपाणि, दण्डपाणि तथा साम्बादित्यकी महिमा
    • बालरूपधारी ब्रह्माकी महिमा, ब्रह्माजीकी आयुका मान तथा त्रिदेवोंकी एकता
    • ब्राह्मणोंकी महिमा, क्षेत्रवासी ब्राह्मणोंके भेद
    • ब्रह्माजीके प्रति भक्तिके भेद, रथयात्रा, ब्रह्माके एक सौ आठ नाम तथा कार्तिकपूर्णिमाको उनके दर्शनका माहात्म्य
    • प्रत्यूषेश्वर, अनिलेश्वर, प्रभासेश्वर, रामेश्वर, लक्ष्मणेश्वर, कुण्डेश्वरीदेवी तथा भूतेश्वरका माहात्म्य
    • गोप्यादित्यकी स्थापना और महिमा तथा नीलसे हानि
    • रामेश्वर, चित्रांगदेश्वर तथा रावणेश्वरकी महिमा
    • पौलोमीश्वर, शाण्डिल्येश्वर, क्षेमेश्वर तथा सागरादित्यका माहात्म्य
    • अक्षमालेश्वर, पाशुपतेश्वर, ध्रुवेश्वर तथा सिद्धि लक्ष्मीकी महिमा
    • महाकाली देवी, पुष्करावर्तका नदी, कंकालभैरव तथा चित्रादित्यकी महिमा
    • लोमशेश्वर, चित्रपथा नदी, रूपकुण्ड, रत्नेश्वर तथा वैनतेयेश्वरका माहात्म्य
    • रैवन्त और अनन्तेश्वरकी महिमा, सावित्रीकी कथा, सावित्री-व्रतकी महिमा तथा ब्रह्मा-सावित्रीके पूजनका महत्त्व
    • शालकटङ्कटा देवी, दशरथेश्वर, भरतेश्वर, लिंगचतुष्टय, कुन्तीश्वर, अर्कस्थल तथा त्रिसंगमतीर्थ आदिका महत्त्व
    • देवमाता, शेषस्थान, प्रभासपंचक, रुद्रेश्वर, महाश्मशान तथा सरस्वती नदी और संगममें स्नानका महत्त्व
    • श्राद्धके विषयमें कुछ ज्ञातव्य बातें
    • श्राद्धविधि, सप्तशुद्धिका विचार, श्राद्धमें ग्राह्य एवं त्याज्यका निर्णय और सप्तार्चिषस्तोत्र
    • परायी वस्तुके अपहरण और प्रतिग्रहके दोष
    • उत्तम-अधम जन्म, व्यर्थ और सफल दान, सुपात्रके लक्षण, विद्धा एकादशीके दोष तथा द्रव्याभावमें श्राद्धकी विधि
    • मार्कण्डेयेश्वर आदि विविध लिंगोंकी महिमा
    • गौतम और प्रेतका संवाद, प्रेतोंका उद्धार तथा प्रेततीर्थकी उत्पत्ति
    • नरकेश्वरका माहात्म्य
    • संवर्तेश्वर, बलभद्रेश्वर, दशाश्वमेधिक तीर्थ, शतमेधादि लिंग तथा दुर्वासादित्यका माहात्म्य
    • नागरादित्य, पिंगा नदी, संगमेश्वर तथा गंगेश्वरकी महिमा
    • नन्दादित्य, पर्णादित्य, गंगेश्वर, सूर्यप्राची, त्रिलोचनलिंग, देविका, उमापतीश्वर, भूधरवराह तथा मूलस्थानगत सूर्यकी महिमा, वाल्मीकिजीकी पूर्वकथा
    • भगवान् सूर्यके अष्टोत्तरशतनामोंकी महिमा
    • महर्षि च्यवनकी कथा और च्यवनेश्वरकी महिमा
    • सुकन्यासरोवर, गोष्पदतीर्थ, गंगेश्वर, बालादित्य, पातालगंगा तथा कुबेरेश्वरकी महिमा; कुबेरके द्वारा शिवकी स्तुति
    • भद्रकाली, कुबेर, ऋषितोया नदी, शृगालेश्वर तथा गुप्त प्रयागका माहात्म्य
    • माधव, शृगालेश्वर, त्रिपथगा, गोपालस्वामी, उत्तरार्क, मरुद्देवी आदि विविध तीर्थ और देवविग्रहोंके सेवनकी महिमा
    • तलस्वामी, शंखावर्त तीर्थ और गोष्पद तीर्थकी महिमा, वहाँ श्राद्धकी विधि तथा राजा पृथुके द्वारा पृथ्वीका दोहन
    • पृथुके गोष्पद तीर्थमें श्राद्ध-यज्ञ करनेसे वेनको स्वर्गप्राप्ति
    • नारायणगृह तथा जालेश्वरलिंगकी महिमा, आपस्तम्ब और नाभागकी कथा, गौओं और संतोंका माहात्म्य
    • चन्द्रेश्वर, कपिलेश्वर तथा नलेश्वरकी महिमा
    • राजा गज और भद्रमुनिका संवाद, विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और दामोदर-माहात्म्य
    • तीर्थमें पूजन, श्राद्ध और दानकी महिमा; गृहस्थके लिये आचरणीय शिष्टाचार, दान एवं श्राद्धका उपदेश
    • राजा बलिके राज्यकी प्रशंसा, नारदजीका बलिको राजाके कर्तव्यका उपदेश, उत्पात-शान्तिके लिये बलिके द्वारा यज्ञका प्रारम्भ
    • देवर्षि नारदका वामनजीको मत्स्य आदि अवतारोंका वृत्तान्त सुनाना, नृसिंहावतार एवं प्रह्लादकी कथा
    • वामनजीका बलिसे तीन पग भूमि ग्रहण करना तथा गंगा और वामनस्थलीकी महिमा, प्रभासखण्डका उपसंहार
    • श्रीद्वारका-माहात्म्य
    • भगवान‍्के परमधाम पधारनेपर महर्षियोंका ब्रह्माजीकी आज्ञासे प्रह्लादजीके समीप जाना और प्रश्न करना
    • द्वारकाकी महिमा, वहाँकी यात्रा और उसमें योग देनेका माहात्म्य, गोमती और चक्रतीर्थकी उत्पत्ति एवं महिमा, सनकादिकोंपर भगवान‍्की कृपा
    • गोमतीमें स्नान और भगवत्पूजनकी महिमा
    • चक्रतीर्थ तथा रुक्मिणीह्रदका माहात्म्य
    • विष्णुपदोद्भवतीर्थकी महिमा, उद्धवजीका व्रजमें आगमन, उनके साथ गोपियोंकी बातचीत, गोपियोंका द्वारकागमन तथा मयसरोवरकी महिमा
    • गोपी-सरोवरका निर्माण और उसकी महिमाका वर्णन
    • ब्रह्मकुण्ड, चन्द्रसरोवर, इन्द्रसरोवर, महादेवसरोवर, गौरीसरोवर, वरुणसरोवर तथा पंचनदतीर्थका माहात्म्य
    • सिद्धेश्वरलिंग, ऋषितीर्थ, गदातीर्थ आदि विविध तीर्थों और देवी-देवताओंके सेवनकी महिमा तथा श्रीकृष्ण-दर्शनका माहात्म्य
    • श्रीकृष्ण तथा रुक्मिणीदेवीके दर्शन और पूजनकी महिमा
    • द्वारकापुरी तथा वहाँ श्रीकृष्णके दर्शन-पूजनका माहात्म्य तथा तुलसीकी महिमा
    • शंखोद्धारतीर्थकी महिमा
    • द्वारकापुरी, गोपीचन्दन तथा गोमतीका माहात्म्य
    • एकादशीकी रात्रिमें श्रीहरिके समीप जागरणका माहात्म्य
    • द्वारका-यात्राकी विधि एवं महिमा
    • ऋषियों और देवताओंकी द्वारका-यात्रा तथा भगवद्दर्शन एवं पूजन
    • दिलीप-वसिष्ठ-संवाद, द्वारकासे लौटे हुए यात्रीके दर्शनसे राक्षसके वज्रलेप पापका नाश
    • द्वारकापुरी तथा श्रीकृष्ण-दर्शनका माहात्म्य
    • द्वारकामें श्रीकृष्णदर्शनकी महिमा, एकादशीव्रतके भेद, चक्रचिह्नित शिलाओंकी विशेष संज्ञा तथा भयनिवारणके उपाय
    • द्वारका-माहात्म्यके पाठकी महिमा, वैष्णव-सेवाका महत्त्व, नीलका निषेध, वृक्ष काटनेसे हानि, उसे लगानेका फल, आक, बिल्वपत्र, आँवला एवं तुलसी-रोपणका महत्त्व तथा द्वारका-माहात्म्यका उपसंहार
  • अंतिम पृष्ठ

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