॥ श्रीहरि:॥

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संक्षिप्त महाभारत

हिन्दी/संस्कृत

महाभारत संस्कृत वाङ्मयकी एक अमूल्य निधि है। इसे शास्त्रोंमें पंचम वेदके नामसे अभिहित किया गया है। यह भारतका सच्चा एवं बृहत् इतिहास तो है ही, जैसा कि इसके नामसे ही व्यक्त होता है; साथ ही इसमें धर्म, ज्ञान, वैराग्य, भक्ति, योग, नीति, सदाचार, अध्यात्म आदि सभी विषयोंका अत्यन्त विशद एवं सारगर्भित विवेचन किया गया है। इसे भारतीय ज्ञानका विश्वकोष कहा जाय तो कोई अत्युक्ति न होगी। इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यासजीने ही अपने श्रीमुखसे इसके विषयमें कहा है ‘यन्नेहास्ति न कुत्रचित्—जिस विषयकी चर्चा इसमें नहीं की गयी है, उसकी चर्चा अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं है।’ श्रीमद्भगवद‍्गीता-जैसा अमूल्य रत्न भी इसी महासागरकी देन है। परवर्ती अनेकानेक महाकवियोंने इसीको उपजीव्य बनाकर अपने अमर महाकाव्यों तथा नाटकोंकी रचना की है। इस ग्रन्थकी जितनी प्रशंसा की जाय, वह थोड़ी ही है। इसमें कुल मिलाकर एक लाख श्लोक हैं, इसी कारण इसे ‘शतसाहस्री संहिता’ के नामसे पुकारा जाता है।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • +
    आदिपर्व
    • ग्रन्थका उपक्रम
    • जनमेजयके भाइयोंको शाप और गुरुसेवाकी महिमा
    • सर्पोंके जन्मकी कथा
    • समुद्र-मन्थन और अमृत आदिकी प्राप्ति
    • कद्रू और विनताकी कथा तथा गरुड़की उत्पत्ति
    • अमृतके लिये गरुड़की यात्रा और गज-कच्छपका वृत्तान्त
    • गरुड़का अमृत लेकर आना और विनताको दासीभावसे छुड़ाना
    • शेषनागकी वरप्राप्ति और माताके शापसे बचनेके लिये सर्पोंकी बातचीत
    • जरत्कारु ऋषिकी कथा और आस्तीकका जन्म
    • परीक्षित् की मृत्युका कारण
    • सर्प-यज्ञका निश्चय और आरम्भ
    • आस्तीकके वर माँगनेपर सर्प-यज्ञका बंद होना और सर्पोंसे बचनेका उपाय
    • श्रीवेदव्यासजीकी आज्ञासे वैशम्पायनजीका कथा प्रारम्भ करना
    • भूभार-हरणके लिये देवताओंके अवतारग्रहणके निश्चय
    • देवता, दानव, पशु, पक्षी आदि सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति
    • देवता, दानव आदिका मनुष्योंके रूपमें अंशावतार और कर्णकी उत्पत्ति
    • दुष्यन्त और शकुन्तलाका गान्धर्व-विवाह
    • भरतका जन्म, दुष्यन्तके द्वारा उसकी स्वीकृति और राज्याभिषेक
    • दक्ष प्रजापतिसे ययातितक वंश-वर्णन
    • कच और देवयानीकी कथा
    • देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह एवं उसका परिणाम
    • ययातिका देवयानीके साथ विवाह, शुक्राचार्यका शाप और पूरुका यौवनदान
    • ययातिका भोग और वैराग्य, पूरुका राज्याभिषेक
    • ययातिका स्वर्गवास, इन्द्रसे बातचीत, पतन, सत्संग और पुन: स्वर्गगमन
    • पूरुवंशका वर्णन
    • राजर्षि शान्तनुका गंगासे विवाह और उनके पुत्र भीष्मका युवराज होना
    • भीष्मकी दुष्कर प्रतिज्ञा और शान्तनुको सत्यवतीकी प्राप्ति
    • चित्रांगद और विचित्रवीर्यका चरित्र, भीष्मका पराक्रम और दृढ़प्रतिज्ञा तथा धृतराष्ट्रादिका जन्म
    • माण्डव्य ऋषिकी कथा
    • धृतराष्ट्र आदिका विवाह और पाण्डुका दिग्विजय
    • धृतराष्ट्रके पुत्रोंका जन्म और नाम
    • ऋषिकुमार किन्दमके शापसे पाण्डुको वैराग्य
    • पाण्डवोंकी उत्पत्ति और पाण्डुका परलोक-गमन
    • हस्तिनापुरमें कुन्ती और पाण्डवोंका आगमन तथा पाण्डुकी अन्त्येष्टि-क्रिया
    • सत्यवती आदिका देह-त्याग और दुर्योधनका भीमसेनको विष देना
    • कृपाचार्य, द्रोणाचार्य और अश्वत्थामाका जन्म तथा उनका कौरवोंसे सम्बन्ध
    • राजकुमारोंकी शिक्षा और परीक्षा तथा एकलव्यकी गुरुभक्ति
    • रंगमण्डपमें राजकुमारोंके अस्त्रकौशलका प्रदर्शन और कर्णको अंगदेशका राजा बनाना
    • द्रुपदका पराभव
    • युधिष्ठिरका युवराजपद, उनके गुणप्रभावकी वृद्धिसे धृतराष्ट्रको चिन्ता, कणिककी कूटनीति
    • पाण्डवोंको वारणावत जानेकी आज्ञा
    • वारणावतमें लाक्षाभवन, पाण्डवोंकी यात्रा, विदुरका गुप्त उपदेश
    • पाण्डवोंका लाक्षागृहमें रहना, सुरंगका खोदा जाना और आग लगाकर निकल भागना
    • पाण्डवोंका गंगापार होना, कौरवोंके द्वारा उनकी अन्त्येष्टिक्रिया और वनमें भीमसेनका विषाद
    • हिडिम्बासुरका वध
    • हिडिम्बाके साथ भीमसेनका विवाह, घटोत्कचकी उत्पत्ति और पाण्डवोंका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश
    • आर्त ब्राह्मणपरिवारपर कुन्तीकी दया
    • बकासुरका वध
    • द्रौपदीके स्वयंवरका समाचार तथा धृष्टद्युम्न और द्रौपदीकी जन्म-कथा
    • व्यासजीका आगमन और द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा
    • पाण्डवोंकी पंचाल-यात्रा और अर्जुनके हाथों चित्ररथ गन्धर्वकी पराजय
    • सूर्यपुत्री तपतीके साथ राजा संवरणका विवाह
    • ब्रह्मतेजकी महिमा और विश्वामित्रका वसिष्ठकी नंदिनीके साथ संघर्ष
    • महर्षि वसिष्ठकी क्षमा—कल्माषपादकी कथा
    • पाण्डवोंका धौम्य मुनिको पुरोहित बनाना
    • द्रौपदी-स्वयंवर
    • अर्जुनका लक्ष्यवेध और उनके तथा भीमसेनके द्वारा अन्य राजाओंकी पराजय
    • कुन्तीकी आज्ञापर द्रौपदीके विषयमें पाण्डवोंका विचार तथा श्रीकृष्ण और बलरामसे भेंट
    • धृष्टद्युम्न और द्रुपदकी बातचीत, पाण्डवोंकी परीक्षा और परिचय
    • व्यासजीके द्वारा द्रौपदीके साथ पाण्डवोंके विवाहका निर्णय
    • पाण्डवोंका विवाह
    • पाण्डवोंको राज्य देनेके सम्बन्धमें कौरवोंका विचार और निर्णय
    • विदुरका पाण्डवोंको हस्तिनापुर लाना और इन्द्रप्रस्थमें उनके राज्यकी स्थापना
    • इन्द्रप्रस्थमें देवर्षि नारदका आगमन, सुन्द और उपसुन्दकी कथा
    • नियम-भंगके कारण अर्जुनका वनवास एवं उलूपी और चित्रांगदाके साथ विवाह
    • सुभद्राहरण और अभिमन्यु एवं प्रतिविन्ध्य आदि कुमारोंका जन्म
    • खाण्डव-दाहकी कथा
  • +
    सभापर्व
    • मयासुरकी प्रार्थना-स्वीकृति एवं भगवान् श्रीकृष्णका द्वारका-गमन
    • दिव्य सभाका निर्माण एवं देवर्षि नारदका प्रश्नके रूपमें प्रवचन
    • देव-सभाओंका कथन और स्वर्गीय पाण्डुका संदेश
    • राजसूय-यज्ञके सम्बन्धमें विचार
    • जरासन्धके विषयमें भगवान् श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिरकी बातचीत
    • जरासन्धकी उत्पत्ति और शक्तिका वर्णन
    • श्रीकृष्ण, भीमसेन एवं अर्जुनकी मगध-यात्रा और जरासन्धसे बातचीत
    • जरासन्ध-वध और बंदी राजाओंकी मुक्ति
    • पाण्डवोंकी दिग्विजय
    • राजसूय-यज्ञका प्रारम्भ
    • भगवान् श्रीकृष्णकी अग्रपूजा
    • शिशुपालका क्रोध, युधिष्ठिरका समझाना और भीष्मादिका कथन
    • शिशुपालकी जन्म-कथा और वध
    • राजसूय-यज्ञकी समाप्ति
    • धर्मराज युधिष्ठिरसे व्यासका भविष्य-कथन
    • दुर्योधनकी जलन और शकुनिकी सलाह
    • दुर्योधन और धृतराष्ट्रकी बातचीत तथा विदुरकी सलाह
    • युधिष्ठिरको हस्तिनापुर बुलाना और कपट-द्यूतमें पाण्डवोंकी पराजय
    • कौरव-सभामें द्रौपदी
    • दुबारा कपट-द्यूत और पाण्डवोंकी वनयात्रा
    • पाण्डवोंकी वनयात्राके बाद कौरवोंकी स्थिति
  • +
    वनपर्व
    • पाण्डवोंका वनगमन और उनके प्रति प्रजाका प्रेम
    • धर्मराज युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंसे संवाद और शौनकजीका उपदेश
    • पुरोहित धौम्यके आदेशानुसार युधिष्ठिरकी सूर्योपासना और अक्षयपात्रकी प्राप्ति
    • धृतराष्ट्रके क्रोधित होनेपर विदुरका पाण्डवोंके पास जाना और उनके बुलानेपर लौट आना
    • दुर्योधनकी दुरभिसन्धि, व्यासजीका आगमन और मैत्रेयजीका शाप
    • किर्मीर-वधकी कथा
    • भगवान् श्रीकृष्ण आदिका काम्यक वनमें आगमन, उनके साथ पाण्डवोंकी बातचीत और उनका वापस लौटना
    • द्वैतवनमें पाण्डवोंका निवास, मार्कण्डेय मुनि और दाल्भ्यबकका उपदेश
    • धर्मराज युधिष्ठिर और द्रौपदीका संवाद, क्षमाकी प्रशंसा
    • युधिष्ठिर और द्रौपदीका संवाद, निष्कामधर्मकी प्रशंसा, द्रौपदीका उद्योगके लिये प्रोत्साहन
    • युधिष्ठिर और भीमसेनकी कर्तव्यके विषयमें बातचीत
    • युधिष्ठिरको व्यासजीका उपदेश, प्रतिस्मृति विद्या प्राप्त करके अर्जुनकी तपोवन-यात्रा एवं इन्द्रद्वारा परीक्षा
    • अर्जुनकी तपस्या, शंकरके साथ युद्ध, पाशुपतास्त्र तथा दिव्यास्त्रोंकी प्राप्ति
    • स्वर्गमें अर्जुनकी अस्त्र एवं नृत्य-शिक्षा, उर्वशीके प्रति मातृभाव, इन्द्रका लोमश मुनिको पाण्डवोंके पास भेजना
    • अर्जुनके स्वर्ग जानेपर धृतराष्ट्र और पाण्डवोंकी स्थिति तथा बृहदश्वका आगमन
    • नल-दमयन्तीकी कथा, दमयन्तीका स्वयंवर और विवाह
    • कलियुगका दुर्भाव, जूएमें नलका हारना और नगरसे निर्वासन
    • नलका दमयन्तीको त्यागना, दमयन्तीको संकटोंसे बचते हुए दिव्य ऋषियोंके दर्शन और राजा सुबाहुके महलमें निवास
    • नलका रूप बदलना, ऋतुपर्णके यहाँ सारथि होना, भीमकके द्वारा नल-दमयन्तीकी खोज और दमयन्तीका मिलना
    • नलकी खोज, ऋतुपर्णकी विदर्भ-यात्रा, कलियुगका उतरना
    • दमयन्तीके द्वारा राजा नलकी परीक्षा, पहचान, मिलन, राज्यप्राप्ति और कथाका उपसंहार
    • नारदजीद्वारा तीर्थयात्राकी महिमाका वर्णन
    • धौम्यद्वारा तीर्थोंका वर्णन
    • लोमश मुनिके द्वारा पाण्डवोंको इन्द्रका सन्देश मिलना, व्यास आदिका आगमन तथा पाण्डवोंकी तीर्थयात्राका प्रारम्भ
    • नैमिषारण्य, प्रयाग और गयाकी यात्रा तथा अगस्त्याश्रममें लोमशजीद्वारा अगस्त्य-लोपामुद्राकी कथा
    • परशुरामजीके तेजोहीन होने तथा पुन: तेज प्राप्त करनेका प्रसंग
    • वृत्रवध और अगस्त्यजीके समुद्रशोषणका वृत्तान्त
    • सगरपुत्रोंका नाश और गंगावतरण
    • ऋष्यशृंगका चरित
    • परशुरामजीकी उत्पत्ति और उनके चरित्रोंका वर्णन
    • प्रभासक्षेत्रमें पाण्डवोंसे यादवोंकी भेंट
    • राजकुमारी सुकन्या और महर्षि च्यवन
    • राजा मान्धाताका जन्मवृत्तान्त
    • कुछ अन्य तीर्थोंका वर्णन और राजा उशीनरकी कथा
    • अष्टावक्रके जन्म और शास्त्रार्थका वृत्तान्त
    • पाण्डवोंकी गन्धमादन-यात्रा
    • बदरिकाश्रमकी यात्रा
    • भीमसेनकी हनुमान‍्जीसे भेंट और बातचीत
    • भीमके सौगन्धिक वनमें पहुँचनेपर यक्ष-राक्षसोंसे युद्ध होना तथा युधिष्ठिर आदिका भी वहाँ पहुँच जाना और सबका वापस लौटना
    • जटासुर-वध
    • पाण्डवोंका वृषपर्वा और आर्ष्टिषेणके आश्रमोंपर जाना
    • भीमसेनके हाथसे यक्ष और राक्षसोंका वध तथा कुबेरके द्वारा शान्तिस्थापन
    • धौम्यका युधिष्ठिरको नाना स्थान दिखलाना और अर्जुनका गन्धमादनपर लौटकर आना
    • अर्जुनकी प्रवासकथा—किरातका प्रसंग और लोकपालोंसे अस्त्र प्राप्त करना
    • अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और युद्धकी तैयारीका कथन
    • अर्जुनद्वारा निवातकवचोंके साथ अपने युद्धका वर्णन
    • अर्जुनके द्वारा कालिकेय और पौलोमोंके साथ युद्ध और स्वर्गसे विदाईका वर्णन
    • पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वतसे चलकर अन्यत्र भ्रमण करते हुए द्वैतवनमें प्रवेश
    • भीमका सर्पके चंगुलमें फँसना और युधिष्ठिरके द्वारा सर्पके प्रश्नोंका उत्तर
    • युधिष्ठिर और सर्पके प्रश्नोत्तर, नहुषके सर्पयोनिमें आनेका इतिहास, भीमकी रक्षा और नहुषका स्वर्गगमन
    • काम्यक वनमें पाण्डवोंके पास श्रीकृष्ण और मार्कण्डेय मुनिका आना
    • उत्तम ब्राह्मणोंका महत्त्व
    • तार्क्ष्य-सरस्वती-संवाद
    • वैवस्वत मनुका चरित्र—महामत्स्यका उपाख्यान
    • श्रीकृष्णकी महिमा और सहस्रयुगके अन्तमें होनेवाले प्रलयका वर्णन
    • मार्कण्डेयद्वारा बालमुकुन्दका दर्शन और उनकी महिमाका वर्णन
    • कलिधर्म और कल्कि-अवतार
    • मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश
    • इन्द्र और बक मुनिका संवाद
    • क्षत्रिय राजाओंका महत्त्व—सुहोत्र, शिबि और ययातिकी प्रशंसा
    • राजा शिबिका चरित्र
    • दानके लिये उत्तम पात्रका विचार और दानकी महिमा
    • यमलोकका मार्ग और वहाँ इस लोकमें किये हुए दानका उपयोग
    • दान, पवित्रता, तप और मोक्षका विचार
    • धुन्धुमारकी कथा—उत्तंक मुनिकी तपस्या और उन्हें विष्णुका वरदान
    • उत्तंक मुनिका राजा बृहदश्वसे धुन्धुको मारनेके लिये अनुरोध
    • धुन्धुका वध
    • पतिव्रता स्त्री और कौशिक ब्राह्मणका संवाद
    • कौशिक ब्राह्मणका मिथिलामें जाकर धर्मव्याधसे उपदेश लेना
    • शिष्टाचारका वर्णन
    • धर्मकी सूक्ष्म गति और फलभोगमें जीवकी परतन्त्रता
    • जीवात्माकी नित्यता और पुण्य-पाप कर्मोंके शुभाशुभ परिणाम
    • इन्द्रियोंके असंयमसे हानि और संयमसे लाभ
    • तीनों गुणोंका स्वरूप तथा ब्रह्मसाक्षात्कारके उपाय
    • धर्मव्याधकी अपने माता-पिताके प्रति भक्ति
    • कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाके लिये उपदेश और कौशिकका जाना
    • कार्त्तिकेयके जन्म और देवसेनापतित्व-ग्रहणका वृत्तान्त
    • श्रीकार्त्तिकेयजीके कुछ उदार कर्म और उनके नाम
    • द्रौपदीका सत्यभामाको अपनी चर्या सुनाना
    • द्रौपदीका सत्यभामाको उपदेश तथा सत्यभामाकी विदाई
    • कौरवोंकी घोषयात्रा और उनका गन्धर्वोंके साथ युद्धमें पराभव
    • पाण्डवोंका गन्धर्वोंसे युद्ध करके दुर्योधनादिको छुड़ाना
    • दुर्योधनका अनुताप और प्रायोपवेशका निश्चय
    • दुर्योधनका प्रायोपवेश-परित्याग
    • कर्णकी दिग्विजय और दुर्योधनका वैष्णवयाग
    • व्यासजीका युधिष्ठिरके पास आना और उन्हें तप एवं दानका महत्त्व बताना
    • मुद‍्गल ऋषिकी कथा
    • दुर्योधनके द्वारा दुर्वासाका अतिथि-सत्कार और वरदान पाना
    • युधिष्ठिरके आश्रमपर दुर्वासाका आतिथ्य, भगवान‍्के द्वारा पाण्डवोंकी रक्षा
    • जयद्रथके द्वारा द्रौपदीका हरण
    • पाण्डवोंके द्वारा द्रौपदीकी रक्षा और जयद्रथकी पराजय
    • भीमके हाथों जयद्रथकी दुर्गति और बन्धन तथा युधिष्ठिरकी दयासे छूटकर तपस्या करके उसका वर प्राप्त करना
    • श्रीराम आदिका जन्म, कुबेर तथा रावण आदिकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति
    • देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें उत्पन्न होना
    • रामका वनवास, खर-दूषण आदि राक्षसोंका नाश और रावणका मारीचके पास जाना
    • कपटमृगका वध और सीताका हरण
    • जटायु-वध और कबन्धका उद्धार
    • भगवान् रामकी सुग्रीवसे मैत्री और वालीका वध
    • त्रिजटाका स्वप्न, रावणका प्रलोभन और सीताका सतीत्व
    • सीताकी खोजमें वानरोंका जाना तथा हनुमान‍्जीका श्रीरामचन्द्रजीसे सीताका समाचार कहना
    • वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकामें सेनाका प्रवेश
    • अंगदका रावणके पास जाकर रामका संदेश सुनाना और राक्षसों तथा वानरोंका संग्राम
    • प्रहस्त, धूम्राक्ष और कुम्भकर्णका वध
    • राम-लक्ष्मणको मूर्च्छा और इन्द्रजित् का वध
    • राम-रावण-युद्ध, रावण-वध और राम-सीता-सम्मिलन
    • श्रीरामचन्द्रजीका अयोध्यामें लौटना और राज्याभिषेक
    • सावित्रीचरित्र—सावित्रीका जन्म और विवाह
    • सावित्रीद्वारा सत्यवान‍्को जीवनदान
    • द्युमत्सेन और शैब्याकी चिन्ता, सत्यवान् और सावित्रीका आश्रममें पहुँचना तथा द्युमत्सेनका राज्य पाना
    • स्वप्नमें ब्राह्मणवेषधारी सूर्यदेवकी कर्णको चेतावनी
    • कर्णकी जन्मकथा—कुन्तीकी ब्राह्मणसेवा और वरप्राप्ति
    • सूर्यद्वारा कुन्तीके गर्भसे कर्णका जन्म और अधिरथके यहाँ उसका पालन तथा विद्याध्ययन
    • इन्द्रको कवच-कुण्डल देकर कर्णका अमोघ शक्ति प्राप्त करना
    • ब्राह्मणकी अरणी लानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे जाना तथा भीमसेनादि चारों भाइयोंका एक सरोवरपर निर्जीव होकर गिरना
    • यक्ष-युधिष्ठिर-संवाद
    • सब पाण्डवोंका जीवित होना, महाराज युधिष्ठिरका वर पाना तथा पाण्डवोंका अज्ञातवासके लिये सब ब्राह्मणोंसे विदा होना
  • +
    विराटपर्व
    • विराटनगरमें कौन क्या कार्य करे, इसके विषयमें पाण्डवोंका विचार
    • धौम्यका युधिष्ठिरको राजाके यहाँ रहनेका ढंग बताना
    • पाण्डवोंका मत्स्यदेशमें जाना, शमीवृक्षपर अस्त्र रखना और युधिष्ठिर, भीम तथा द्रौपदीका क्रमश: राजमहलमें पहुँचना
    • सहदेव, अर्जुन और नकुलका विराटके भवनमें प्रवेश
    • भीमसेनके हाथसे जीमूत नामक मल्लका वध
    • द्रौपदीपर कीचककी आसक्ति और उसके द्वारा द्रौपदीका अपमान
    • द्रौपदी और भीमसेनकी बातचीत
    • कीचक और उसके भाइयोंका वध और राजाका सैरन्ध्रीको संदेश
    • कौरवसभामें पाण्डवोंकी खोजके विषयमें बातचीत तथा विराटनगरपर चढ़ाई करनेका निश्चय
    • विराट और सुशर्माका युद्ध तथा भीमसेनद्वारा सुशर्माका पराभव
    • कौरवोंकी चढ़ाई, उत्तरका बृहन्नलाको सारथि बनाकर युद्धमें जाना और कौरव-सेनाको देखकर डरसे भागना
    • अर्जुनका शमीवृक्षके पास जाकर अपने शस्त्रास्त्रसे सुसज्जित होना और उत्तरको अपना परिचय देकर कौरव-सेनाकी ओर जाना
    • अर्जुनसे युद्ध करनेके विषयमें कौरव महारथियोंमें विवाद
    • अर्जुनका दुर्योधनके सामने आना, विकर्ण और कर्णको पराजित करना तथा उत्तरको कौरव वीरोंका परिचय देना
    • आचार्य कृप और द्रोणकी पराजय
    • अर्जुनके साथ अश्वत्थामा और कर्णका युद्ध तथा उनकी पराजय
    • अर्जुन और भीष्मका युद्ध तथा भीष्मका मूर्च्छित होना
    • दुर्योधनकी पराजय, कौरव-सेनाका मोहित होना और कुरुदेशको लौटना
    • उत्तरका अपने नगरमें प्रवेश, स्वागत तथा विराटके द्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार एवं क्षमा प्रार्थना
    • पाण्डवोंकी पहचान और अर्जुनके साथ उत्तराके विवाहका प्रस्ताव
    • अभिमन्युके साथ उत्तराका विवाह
  • +
    उद्योगपर्व
    • विराटनगरमें पाण्डवपक्षके नेताओंका परामर्श, सैन्यसंग्रहका उद्योग तथा राजा द्रुपदका धृतराष्ट्रके पास दूत भेजना
    • श्रीकृष्णको अर्जुन और दुर्योधनका निमन्त्रण तथा उनके द्वारा दोनों पक्षोंकी सहायता
    • शल्यका सत्कार तथा उनका दुर्योधन और युधिष्ठिर दोनोंको वचन देना
    • त्रिशिरा और वृत्रासुरके वधका वृत्तान्त तथा इन्द्रका तिरस्कृत होकर जलमें छिप जाना
    • नहुषकी इन्द्रपदप्राप्ति, उसका इन्द्राणीपर आसक्त होना और इन्द्राणीका अवधि माँगकर अश्वमेध यज्ञद्वारा इन्द्रको शुद्ध करना
    • इन्द्रकी बतायी हुई युक्तिसे नहुषका पतन तथा इन्द्रका पुन: देवराज्यपर प्रतिष्ठित होना
    • शल्यकी विदाई तथा कौरव और पाण्डवोंके सैन्यसंग्रहका वर्णन
    • द्रुपदके पुरोहितके साथ भीष्म और धृतराष्ट्रकी बातचीत
    • धृतराष्ट्र और संजयकी बातचीत
    • उपप्लव्यमें संजय और युधिष्ठिरका संवाद
    • संजयके प्रति भगवान् श्रीकृष्णके वचन
    • संजयकी विदाई, युधिष्ठिरका संदेश
    • संजयकी धृतराष्ट्रसे भेंट
    • विदुरजीके द्वारा धृतराष्ट्रको नीतिका उपदेश (विदुरनीति)
    • विदुरनीति
    • विदुरनीति
    • विदुरनीति
    • विदुरनीति
    • विदुरनीति
    • विदुरनीति
    • विदुरनीति
    • सनत्सुजात ऋषिका आगमन
    • सनत्सुजातजीके द्वारा धृतराष्ट्रके प्रश्नोंका उत्तर
    • ब्रह्मज्ञानमें उपयोगी मौन, तप आदिके लक्षण तथा गुण-दोषका निरूपण
    • ब्रह्मचर्य तथा ब्रह्मका निरूपण
    • योगप्रधान ब्रह्मविद्याका प्रतिपादन
    • परमात्माका स्वरूप और उनका योगीजनोंके द्वारा साक्षात्कार
    • संजयका कौरवोंकी सभामें आकर दुर्योधनको अर्जुनका संदेश सुनाना
    • कर्ण, भीष्म और द्रोणकी सम्मति तथा संजयद्वारा पाण्डवपक्षके वीरोंका वर्णन
    • धृतराष्ट्रका पाण्डवपक्षके वीरोंकी प्रशंसा करते हुए युद्धके लिये अनिच्छा प्रकट करना
    • दुर्योधनका वक्तव्य और संजयद्वारा अर्जुनके रथका वर्णन
    • संजयसे पाण्डवपक्षके वीरोंका विवरण सुनकर धृतराष्ट्रका युद्ध न करनेकी सम्मति देना, दुर्योधनका उससे असहमत होना तथा संजयका राजा धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णका संदेश सुनाना
    • कर्णका वक्तव्य, भीष्मद्वारा उसकी अवज्ञा, कर्णकी प्रतिज्ञा, विदुरका वक्तव्य तथा धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना
    • श्रीव्यासजी और गान्धारीके सामने संजयका राजा धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णका माहात्म्य सुनाना
    • कौरवोंकी सभामें दूत बनकर जानेके लिये श्रीकृष्ण और युधिष्ठिरका संवाद
    • श्रीकृष्णके साथ भीमसेन, अर्जुन, नकुल, सहदेव और सात्यकिकी बातचीत
    • भगवान् कृष्णसे द्रौपदीकी बातचीत तथा उनका हस्तिनापुरके लिये प्रस्थान
    • हस्तिनापुरमें श्रीकृष्णके स्वागतकी तैयारियाँ और कौरवोंकी सभामें परामर्श
    • श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें प्रवेश तथा राजा धृतराष्ट्र, विदुर और कुन्तीके यहाँ जाना
    • राजा दुर्योधनका निमन्त्रण छोड़कर भगवान‍्का विदुरजीके यहाँ भोजन तथा उनसे बातचीत करना
    • श्रीकृष्णका कौरवोंकी सभामें आना तथा सबको पाण्डवोंका संदेश सुनाना
    • परशुरामजी और महर्षि कण्वका सन्धिके लिये अनुरोध तथा दुर्योधनकी उपेक्षा
    • श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना तथा भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रद्वारा उनका समर्थन
    • दुर्योधन और श्रीकृष्णका विवाद, दुर्योधनका सभा-त्याग, धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना
    • दुर्योधनकी कुमन्त्रणा, भगवान‍्का विश्वरूपदर्शन और कौरवसभासे प्रस्थान
    • कुन्तीका विदुलाकी कथा सुनाकर पाण्डवोंके लिये संदेश देना तथा श्रीकृष्णका उससे विदा होकर पाण्डवोंके पास जाना
    • दुर्योधनके साथ भीष्म और द्रोणाचार्यकी बातचीत तथा श्रीकृष्ण और कर्णका गुप्त परामर्श
    • कुन्तीका कर्णके पास जाना और कर्णका उसके चार पुत्रोंको न मारनेका वचन देना
    • श्रीकृष्णका राजा युधिष्ठिरको कौरवसभाके समाचार सुनाना
    • पाण्डवसेनाके सेनापतिका चुनाव तथा उसका कुरुक्षेत्रमें जाकर पड़ाव डालना
    • कौरवपक्षका सैन्य-संगठन तथा दुर्योधनका पितामह भीष्मको प्रधान सेनापति बनाना
    • श्रीबलरामजीका पाण्डवोंसे मिलकर तीर्थयात्राके लिये जाना
    • रुक्मीका सहायताके लिये आना, किंतु पाण्डव और कौरव दोनोंहीका उसकी सहायता स्वीकार न करना
    • दुर्योधनका पाण्डवोंसे कहनेके लिये उलूकको अपना कटु संदेश सुनाना
    • उलूकका पाण्डवोंको दुर्योधनका संदेश सुनाना और फिर पाण्डवोंका संदेश लेकर दुर्योधनके पास आना
    • दुर्योधनका भीष्मजीके मुखसे अपनी सेनाके रथी और अतिरथियोंका विवरण सुनना
    • पाण्डवपक्षके रथी और अतिरथियोंकी गणना
    • भीष्मजीका शिखण्डीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, अम्बाका भीष्मद्वारा हरण और शाल्वद्वारा तिरस्कार
    • अम्बाका तपस्वियोंके आश्रममें आना, परशुरामजीका भीष्मको समझाना और उनके स्वीकार न करनेपर दोनोंका युद्ध करनेके लिये कुरुक्षेत्रमें आना
    • भीष्म और परशुरामका युद्ध और उसकी समाप्ति
    • भीष्मजीका वध करनेके लिये अम्बाकी तपस्या
    • शिखण्डीकी पुरुषत्वप्राप्तिका वृत्तान्त
    • दुर्योधनके प्रति भीष्मादिका और युधिष्ठिरके प्रति अर्जुनका बल-वर्णन
    • कौरव और पाण्डव-सेनाओंका युद्धभूमिके लिये प्रस्थान
  • +
    भीष्मपर्व
    • शिविरस्थापन तथा युद्धके नियमोंका निर्णय
    • व्यासजीद्वारा संजयकी नियुक्ति तथा अनिष्टसूचक उत्पातोंका वर्णन
    • व्यास-धृतराष्ट्र-संवाद और संजयद्वारा भूमिके गुणोंका वर्णन
    • युद्धमें भीष्मजीका पतन सुनकर धृतराष्ट्रका विषाद तथा संजयद्वारा कौरव-सेनाके संगठनका वर्णन
    • दोनों सेनाओंकी व्यूह-रचना
    • युधिष्ठिर और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा दुर्गाका स्तवन और वर-प्राप्ति
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—अर्जुनविषादयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—सांख्ययोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—कर्मयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—ज्ञान-कर्मसंन्यासयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—कर्मसंन्यासयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—आत्मसंयमयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—ज्ञान-विज्ञानयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—अक्षरब्रह्मयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—राजविद्या-राजगुह्ययोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—विभूतियोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—विश्वरूपदर्शनयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—भक्तियोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—गुणत्रयविभागयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—पुरुषोत्तमयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—दैवासुरसम्पद्विभागयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—श्रद्धात्रयविभागयोग
    • श्रीमद्भगवद‍्गीता—मोक्षसंन्यासयोग
    • राजा युधिष्ठिरका भीष्म, द्रोण, कृप और शल्यके पास जाकर उन्हें प्रणाम करके युद्ध करनेके लिये आज्ञा और आशीर्वाद माँगना
    • युद्धका आरम्भ—दोनों पक्षोंके वीरोंका परस्पर भिड़ना
    • अभिमन्यु, उत्तर और श्वेतका संग्राम तथा उत्तर और श्वेतका वध
    • युधिष्ठिरकी चिन्ता, कृष्णका आश्वासन और क्रौंचव्यूहकी रचना
    • दूसरा दिन—कौरवोंकी व्यूह-रचना और अर्जुन तथा भीष्मका युद्ध
    • धृष्टद्युम्न और द्रोणका तथा भीमसेन और कलिंगोंका युद्ध
    • धृष्टद्युम्न, अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम
    • तीसरा दिन—दोनों सेनाओंकी व्यूह-रचना और घमासान युद्ध
    • भीष्मका पराक्रम, श्रीकृष्णका भीष्मको मारनेके लिये उद्यत होना और अर्जुनका पुरुषार्थ
    • सांयमनिपुत्र और कुछ धृतराष्ट्रपुत्रोंका वध तथा घटोत्कच और भगदत्तका युद्ध
    • संजयका राजा धृतराष्ट्रको भीष्मजीके मुखसे कही हुई श्रीकृष्णकी महिमा सुनाना
    • भीमसेन, अभिमन्यु और सात्यकिकी वीरता तथा भूरिश्रवाद्वारा सात्यकिके दस पुत्रोंका वध
    • मकर और क्रौंच-व्यूहका निर्माण, भीम और धृष्टद्युम्नका पराक्रम
    • भीम और दुर्योधनका युद्ध, अभिमन्यु तथा द्रौपदीके पुत्रोंका पराक्रम
    • छठे दिनके दोपहरतकका युद्ध
    • छठे दिनके दोपहरसे पीछेका युद्ध
    • सातवें दिनका युद्ध और धृतराष्ट्रके आठ पुत्रोंका वध
    • शकुनिके भाइयोंका तथा इरावान‍्का वध
    • घटोत्कचका युद्ध
    • दुर्योधन और भीष्मकी बातचीत तथा भगदत्तका पाण्डवोंसे युद्ध
    • इरावान‍्की मृत्युपर अर्जुनका शोक तथा भीमसेनद्वारा कुछ धृतराष्ट्रपुत्रोंका वध
    • दुर्योधनकी प्रार्थनासे भीष्मजीका पाण्डवोंकी सेनाके संहारके लिये प्रतिज्ञा करना
    • भीष्मजीका पाण्डव वीरोंके साथ घोर युद्ध तथा श्रीकृष्णका चाबुक लेकर भीष्मजीपर दौड़ना
    • पाण्डवोंका भीष्मजीसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना
    • दसवें दिनके युद्धका प्रारम्भ
    • दसवें दिनके युद्धका वृत्तान्त
    • भीष्मजीका वध
    • भीष्मजीके पास जाकर सब राजाओंका तथा कर्णका मिलना
  • +
    द्रोणपर्व
    • कर्णका युद्धके लिये तैयार होना तथा द्रोणाचार्यका सेनापतिके पदपर अभिषेक
    • द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा तथा उनका पहले दिनका युद्ध
    • अर्जुनके वधके लिये संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा और अर्जुनका उनके साथ युद्ध
    • द्रोणाचार्यद्वारा पाण्डवोंका पराभव तथा वृक, सत्यजित्, शतानीक, वसुदान और क्षत्रदेव आदिका वध
    • द्रोणाचार्यकी रक्षाके लिये कौरव और पाण्डव वीरोंका द्वन्द्वयुद्ध
    • भगदत्तकी वीरता, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका नाश तथा भगदत्तका वध
    • वृषक, अचल और नील आदिका वध; शकुनि और कर्णकी पराजय
    • चक्रव्यूह-निर्माण और अभिमन्युकी प्रतिज्ञा
    • अभिमन्युका व्यूहमें प्रवेश और पराक्रम
    • दु:शासन और कर्णकी पराजय तथा जयद्रथका पराक्रम
    • अभिमन्युके द्वारा कौरव-सेनाके कई प्रमुख वीरोंका संहार
    • अभिमन्युके द्वारा कौरववीरोंका संहार और छ: महारथियोंके प्रयत्नसे उसका वध
    • युधिष्ठिरका विलाप तथा व्यासजीके द्वारा मृत्युकी उत्पत्तिका वर्णन
    • व्यासजीके द्वारा सृंजयपुत्र, मरुत, सुहोत्र, शिबि और रामके परलोकगमनका वर्णन
    • भगीरथ, दिलीप, मान्धाता, ययाति, अम्बरीष और शशबिन्दुकी मृत्युका दृष्टान्त
    • राजा गय, रन्तिदेव, भरत और पृथुकी कथा और युधिष्ठिरकी शोक-निवृत्ति
    • अर्जुनका विषाद और जयद्रथको मारनेकी प्रतिज्ञा
    • भयभीत हुए जयद्रथको द्रोणका आश्वासन तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत
    • श्रीकृष्णका आश्वासन, सुभद्राका विलाप तथा दारुकसे श्रीकृष्णका वार्तालाप
    • अर्जुनका स्वप्न, श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको आश्वासन तथा सबका युद्धके लिये प्रस्थान
    • धृतराष्ट्रका विषाद तथा संजयका उपालम्भ
    • द्रोणाचार्यजीका शकटव्यूह और कई वीरोंका संहार करते हुए अर्जुनका उसमें प्रवेश
    • दुर्योधनके उलाहना देनेपर द्रोणाचार्यका उसे अभेद्य कवच पहनाकर अर्जुनके साथ युद्ध करनेके लिये भेजना
    • द्रोणाचार्यके साथ धृष्टद्युम्न और सात्यकिका घोर युद्ध
    • विन्द, अनुविन्दका वध तथा कौरव-सेनाके बीचमें श्रीकृष्णकी अश्वचर्या
    • अर्जुनका दुर्योधन तथा अश्वत्थामा आदि आठ महारथियोंसे संग्राम
    • शकटव्यूहके मुहानेपर कौरव और पाण्डवपक्षके वीरोंका संग्राम तथा कौरवपक्षके कई वीरोंका वध
    • सात्यकि और द्रोणका युद्ध तथा राजा युधिष्ठिरका सात्यकिको अर्जुनके पास भेजना
    • सात्यकिका कौरव-सेनामें प्रवेश
    • कौरव-सेनाके पराभवके विषयमें राजा धृतराष्ट्र और संजयका संवाद तथा कृतवर्माके पराक्रमका वर्णन
    • सात्यकिका कृतवर्माके साथ युद्ध, जलसन्धका वध तथा द्रोण और दुर्योधनादि धृतराष्ट्र-पुत्रोंसे घोर संग्राम
    • सात्यकिके द्वारा राजकुमार सुदर्शनका वध, काम्बोज और यवन आदि अनार्य योद्धाओंसे घोर संग्राम तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी पराजय
    • आचार्यके द्वारा दु:शासनका तिरस्कार, वीरकेतु आदि पांचालकुमारोंका वध तथा उनका धृष्टद्युम्न आदि पांचालोंके एवं सात्यकिका दु:शासन और त्रिगर्त्तोंके साथ घोर संग्राम
    • द्रोणाचार्यद्वारा बृहत्क्षत्र, धृष्टकेतु और क्षेत्रधर्माका वध तथा चेकितान आदि अनेकों वीरोंकी पराजय
    • महाराज युधिष्ठिरका घबराकर भीमसेनको अर्जुनके पास भेजना तथा भीमका अनेकों धृतराष्ट्रपुत्रोंको मारकर अर्जुनके पास पहुँचना
    • भीमसेनके हाथसे कर्णकी पराजय, द्रोणके साथ दुर्योधनकी सलाह तथा युधामन्यु और उत्तमौजाके साथ उसका युद्ध
    • भीमसेनके हाथसे कर्णकी पराजय तथा धृतराष्ट्रके सात पुत्रोंका वध
    • भीमसेन और कर्णका भीषण संग्राम, चौदह धृतराष्ट्रपुत्रोंका संहार तथा कर्णके द्वारा भीमका पराभव
    • सात्यकिका राजा अलम्बुष तथा त्रिगर्त्त और शूरसेन देशके वीरोंको परास्त करके अर्जुनके पास पहुँचना तथा अर्जुनका धर्मराजके लिये चिन्तित होना
    • सात्यकि और भूरिश्रवाका भीषण युद्ध तथा सात्यकिद्वारा भूरिश्रवाका वध
    • अर्जुनका अनेकों महारथियोंसे भीषण संग्राम तथा जयद्रथका सिर काटना
    • कृपाचार्यकी मूर्च्छा और सात्यकि तथा कर्णका युद्ध
    • अर्जुनका कर्णको फटकारना, युधिष्ठिरका अर्जुन आदिसे मिलना और भगवान‍्का स्तवन करना
    • दुर्योधन और द्रोणाचार्यकी अमर्षपूर्ण बातचीत तथा कर्ण-दुर्योधन-संवाद
    • युधिष्ठिरके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, द्रोणके हाथसे शिबिका वध तथा भीमके द्वारा कलिंग, ध्रुव, जयरात, दुर्मद और दुष्कर्णका वध
    • आचार्य द्रोणका आक्रमण, घटोत्कच और अश्वत्थामाका घोर युद्ध
    • बाह्लीक और धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, युधिष्ठिरका पराक्रम, कर्ण तथा कृपमें विवाद और अश्वत्थामाका कोप
    • अर्जुनके द्वारा कर्णकी पराजय और अश्वत्थामाका दुर्योधनके साथ संवाद तथा पांचालोंके साथ घोर युद्ध
    • कौरव-सेनाका संहार, सोमदत्तका वध, युधिष्ठिरका पराक्रम और दोनों सेनाओंमें दीपकका प्रकाश
    • दुर्योधनका सैनिकोंको प्रोत्साहन, कृतवर्माका पराक्रम, सात्यकिद्वारा भूरिका वध और घटोत्कचके साथ अश्वत्थामाका युद्ध
    • भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी, कर्णके द्वारा सहदेवकी, शल्यके द्वारा विराटकी और शतानीकके द्वारा चित्रसेनकी पराजय
    • द्रुपद-वृषसेन, प्रतिविन्ध्य-दु:शासन, नकुल-शकुनि और शिखण्डी-कृपाचार्यका युद्ध तथा धृष्टद्युम्न, सात्यकि एवं अर्जुनका पराक्रम
    • द्रोण और कर्णके द्वारा पाण्डव-सेनाका संहार तथा भयभीत हुए युधिष्ठिरकी बातसे श्रीकृष्णका घटोत्कचको कर्णसे युद्ध करनेके लिये भेजना
    • घटोत्कचके हाथसे अलम्बुष (द्वितीय)-का वध तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर युद्ध
    • भीमसेनके साथ अलायुधका युद्ध तथा घटोत्कचके हाथसे अलायुधका वध
    • घटोत्कचका पराक्रम और कर्णकी अमोघ शक्तिसे उसका वध
    • घटोत्कचकी मृत्युसे भगवान‍्की प्रसन्नता तथा पाण्डवहितैषी भगवान‍्के द्वारा कर्णका बुद्धिमोह
    • युधिष्ठिरका विषाद और भगवान् कृष्ण तथा व्यासजीके द्वारा उसका निवारण
    • अर्जुनकी आज्ञासे दोनों सेनाओंका रणभूमिमें शयन तथा दुर्योधन और द्रोणकी रोषपूर्ण बातचीत
    • दोनों दलोंका द्वन्द्वयुद्ध; विराट, सपौत्र द्रुपद और केकयादिका वध; दुर्योधन और दु:शासनकी पराजय; भीम-कर्ण तथा अर्जुन-द्रोणका युद्ध
    • सात्यकि और दुर्योधनका युद्ध, द्रोणका घोर कर्म, ऋषियोंका द्रोणको अस्त्र त्यागनेका आदेश तथा अश्वत्थामाकी मृत्यु सुनकर द्रोणका जीवनसे निराश होना
    • आचार्य द्रोणका वध
    • कौरवोंका भयभीत होकर भागना, पिताकी मृत्यु सुनकर अश्वत्थामाका कोप और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग
    • अर्जुनके द्वारा युधिष्ठिरको उलाहना, भीमका क्रोध, धृष्टद्युम्नका द्रोणके विषयमें आक्षेप और सात्यकिके साथ उसका विवाद
    • नारायणास्त्रका प्रभाव देख युधिष्ठिरका विषाद तथा भगवान् कृष्णके बताये हुए उपायसे उसका निवारण; अश्वत्थामाके साथ धृष्टद्युम्न, सात्यकि तथा भीमसेनका घोर युद्ध
    • अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रका प्रयोग और व्यासजीका उसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महिमा सुनाना
    • व्यासजीके द्वारा अर्जुनके प्रति भगवान् शंकरकी महिमाका वर्णन
  • +
    कर्णपर्व
    • कर्णके सेनापतित्वमें युद्धका आरम्भ और भीमके द्वारा क्षेमधूर्तिका वध
    • विन्द-अनुविन्द और चित्रसेन तथा चित्रका वध, अश्वत्थामा और भीमसेनका भयंकर युद्ध
    • संशप्तकों और अश्वत्थामाके साथ अर्जुनका घोर संग्राम,अर्जुनके हाथसे दण्डधार और दण्डका वध
    • अर्जुनके द्वारा संशप्तकोंका तथा अश्वत्थामाके हाथसे राजा पाण्डॺका वध
    • अंगराजका वध, सहदेवके द्वारा दु:शासनकी तथा कर्णके द्वारा नकुलकी पराजय और कर्णद्वारा पांचालोंका संहार
    • उलूक-युयुत्सु, श्रुतकर्मा-शतानीक, शकुनि-सुतसोम और शिखण्डी-कृतवर्मामें द्वन्द्वयुद्ध; अर्जुनके द्वारा अनेकों वीरोंका संहार तथा दोनों ओरकी सेनाओंमें घमासान युद्ध
    • दुर्योधन और कर्णका राजा युधिष्ठिर, अर्जुन एवं सात्यकिके साथ संग्राम
    • कर्णके प्रस्ताव और दुर्योधनके आग्रहसे शल्यका आनाकानीके बाद कर्णका सारथि बनना स्वीकार करना
    • त्रिपुरोंकी उत्पत्ति और उनके नाशका प्रसंग
    • शल्यको सारथि बनाकर कर्णका युद्धके लिये प्रयाण
    • शल्यके सारथ्यमें कर्णका युद्धभूमिके लिये प्रस्थान और दोनोंका कटु-सम्भाषण
    • राजा शल्यका कर्णको एक हंस और कौएका उपाख्यान सुनाना
    • कर्ण और शल्यका कटु-सम्भाषण और दुर्योधनका उन्हें समझाना
    • कौरव-व्यूहनिर्माण, कर्ण और शल्यकी बातचीत, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका, कर्णद्वारा पांचालोंका तथा भीमद्वारा भानुसेनका संहार और सात्यकिसे वृषसेनकी पराजय
    • कर्ण और युधिष्ठिरका संग्राम, कर्णकी मूर्च्छा, कर्णद्वारा युधिष्ठिरका पराभव तथा भीमके द्वारा कर्णका परास्त होना
    • भीमसेनके द्वारा धृतराष्ट्रके कई पुत्रों तथा कौरवयोद्धाओंका भीषण संहार
    • अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका संहार
    • कृपाचार्यके द्वारा शिखण्डीकी पराजय, सुकेतुका वध, धृष्टद्युम्नके द्वारा कृतवर्मा और दुर्योधनका परास्त होना तथा कर्णद्वारा पांचाल आदि महारथियोंका संहार
    • अर्जुनके द्वारा संशप्तकोंका संहार और अश्वत्थामाकी पराजय
    • अश्वत्थामाकी प्रतिज्ञा, धृष्टद्युम्न और कर्णका युद्ध, अश्वत्थामाके द्वारा धृष्टद्युम्नकी और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय
    • भगवान् श्रीकृष्णद्वारा अर्जुनसे कौरवोंके आक्रमण तथा भीमके पराक्रमका वर्णन
    • दोनों पक्षके योद्धाओंका द्वन्द्वयुद्ध तथा भीमसेनका पराक्रम
    • कर्णसे पराजित और घायल होकर युधिष्ठिरका अपनी छावनीमें विश्रामके लिये जाना
    • अर्जुनद्वारा अश्वत्थामाकी पराजय, कर्णद्वारा भार्गवास्त्रका प्रयोग, श्रीकृष्ण और अर्जुनका युधिष्ठिरसे मिलनेके लिये छावनीपर जाना तथा युधिष्ठिरका उनसे कर्णके मारे जानेका समाचार पूछना
    • अर्जुनकी बातसे कर्णके जीवित रहनेका पता पाकर युधिष्ठिरका उन्हें धिक्‍कारना तथा युधिष्ठिरका वध करनेके लिये उद्यत हुए अर्जुनको भगवान‍्द्वारा धर्मका तत्त्व समझाया जाना
    • भगवान् कृष्णका अर्जुनको प्रतिज्ञाभंग, भ्रातृवध तथा आत्मघातसे बचाना और युधिष्ठिरको वन जानेसे रोकना
    • अर्जुनका युधिष्ठिरसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद देना, अर्जुनकी रणयात्रा और भगवान् कृष्णद्वारा अर्जुनके पराक्रमका वर्णन
    • अर्जुनके वीरोचित उद‍्गार, दोनों पक्षकी सेनाओंमें द्वन्द्वयुद्ध, सुषेणका वध, भीमसेनका पराक्रम तथा अर्जुनके आनेसे उनकी प्रसन्नता
    • अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरव-सेनाका संहार, भीमके हाथसे शकुनिका मूर्च्छित होना
    • कर्णकी मारसे पाण्डव-सेनाका पलायन, श्रीकृष्ण और अर्जुनको आते देख शल्य और कर्णकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका विध्वंस
    • अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कौरववीरोंका संहार तथा कर्णका पराक्रम
    • भीमद्वारा दु:शासनका रक्त-पान और उसका वध, युधामन्युद्वारा चित्रसेनका वध तथा भीमका हर्षोद‍्गार
    • धृतराष्ट्रके दस पुत्रोंका वध, कर्णका भय और शल्यका समझाना, नकुल और वृषसेनका युद्ध, अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध तथा कर्णके विषयमें श्रीकृष्ण-अर्जुनकी बातचीत
    • इन्द्रादि देवताओंकी प्रार्थनासे ब्रह्मा और शिवजीका अर्जुनकी विजय घोषित करना तथा कर्णका शल्यसे और अर्जुनका श्रीकृष्णसे वार्तालाप
    • अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव, दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति तथा कर्ण और अर्जुनके युद्धमें भीम और श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तेजित करना
    • कर्ण और अर्जुनका युद्ध
    • भगवान‍्द्वारा अर्जुनकी सर्पमुख बाणसे रक्षा तथा अश्वसेन नागका वध
    • अर्जुनके प्रहारसे कर्णकी मूर्च्छा, पृथ्वीमें धँसे हुए पहियेको निकालते समय कर्णका धर्मकी दुहाई देना और भगवान‍्का उसे फटकारना
    • कर्णका वध और शल्यका दुर्योधनको सान्त्वना देना
    • भीम और अर्जुन आदिके भयसे दुर्योधनके रोकनेपर भी कौरव-सेनाका भागना तथा दोनों ओरकी सेनाओंका शिविरमें जाना
    • कर्णवधके समाचारसे प्रसन्न हुए युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा, राजा धृतराष्ट्र और गान्धारीका शोक तथा कर्णपर्वके श्रवणका माहात्म्य
  • +
    शल्यपर्व
    • धृतराष्ट्रका विषाद; कृपाचार्यका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, किन्तु दुर्योधनका युद्धके लिये ही निश्चय करना
    • राजा शल्यका सेनापतिके पदपर अभिषेक और भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यसे लड़नेके लिये आदेश
    • शल्यके सेनापतित्वमें युद्धका आरम्भ और नकुलद्वारा कर्णके शेष तीनों पुत्रोंका वध
    • शल्यका युधिष्ठिर और भीमसेनके साथ युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका तथा युधिष्ठिरद्वारा द्रुमसेनका वध
    • राजा शल्यका पराक्रम, अर्जुन-अश्वत्थामाका युद्ध तथा राजा सुरथका वध
    • शल्यका पराक्रम तथा शल्यके साथ युधिष्ठिरका युद्ध
    • शल्यका वध
    • मद्रराजके अनुचरोंका वध, कौरव-सेनाका पलायन, भीमद्वारा इक्‍कीस हजार पैदलोंका संहार और दुर्योधनका अपनी सेनाको उत्साहित करना
    • शाल्वका वध, सात्यकि और कृतवर्माका युद्ध तथा दुर्योधनका पराक्रम
    • दोनों सेनाओंका घोर संग्राम और शकुनिका कूट-युद्ध
    • अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णसे दुर्योधनकी अनीतिका कुपरिणाम बताया जाना तथा कौरवोंकी रथसेना और गजसेनाका संहार
    • भीमद्वारा धृतराष्ट्रके बारह पुत्रोंका वध, श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनद्वारा त्रिगर्तोंका संहार
    • शकुनि और उलूकका वध
    • दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश और युयुत्सुका हस्तिनापुर जाना
    • व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना
    • युधिष्ठिर और दुर्योधनका संवाद, युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका किसी एक पाण्डवसे गदायुद्धके लिये तैयार होना
    • श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको उलाहना, भीमकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध, फिर बलरामजीका आगमन और उनका स्वागत
    • बलरामजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रका प्रभाव
    • उदपान तीर्थकी उत्पत्ति—त्रित मुनिका उपाख्यान
    • विनशन आदि तीर्थोंका वर्णन, नैमिषीय तथा सप्तसारस्वत तीर्थोंका विशेष वृत्तान्त
    • रुषंगुके आश्रमपर आर्ष्टिषेण आदि तथा विश्वामित्रकी तपस्या, यायाततीर्थकी महिमा और अरुणामें स्नान करनेसे इन्द्रका उद्धार
    • सोमतीर्थ, अग्नितीर्थ और बदरपाचनतीर्थकी महिमा
    • इन्द्रतीर्थ और आदित्यतीर्थकी महिमा, देवल-जैगीषव्य मुनि तथा वृद्धकन्याक्षेत्रकी कथा
    • समन्तपंचकतीर्थ (कुरुक्षेत्र)-की महिमा तथा नारदजीके कहनेसे बलदेवजीका भीम और दुर्योधनका युद्ध देखने जाना
    • बलरामजीकी सलाहसे सबका समन्तपंचकमें जाना तथा वहाँ भीम और दुर्योधनमें गदायुद्धका आरम्भ
    • भीम और दुर्योधनका भयंकर गदायुद्ध
    • भीमके प्रहारसे दुर्योधनकी जंघाओंका टूटना, भीमद्वारा दुर्योधनका तिरस्कार और युधिष्ठिरका विलाप
    • क्रोधमें भरे हुए बलरामको श्रीकृष्णका समझाना और युधिष्ठिरके साथ श्रीकृष्ण तथा भीमसेनकी बातचीत
    • पाण्डवोंका दुर्योधनके शिविरमें आकर उसपर अधिकार करना, अर्जुनके रथका दाह
    • भगवान् कृष्णका हस्तिनापुर जाना और धृतराष्ट्र तथा गान्धारीको सान्त्वना देकर वापस आना
    • दुर्योधनका विलाप तथा अश्वत्थामाका विषाद, प्रतिज्ञा और सेनापतिके पदपर अभिषेक
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    सौप्तिकपर्व
    • तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम करना और वहाँ अश्वत्थामाका पाण्डवोंको कपटपूर्वक मारनेका निश्चय करके कृपाचार्य और कृतवर्मासे सलाह लेना
    • कृपाचार्य और अश्वत्थामाका संवाद
    • अश्वत्थामाका श्रीमहादेवजीपर प्रहार, उसका पराभव और फिर आत्मसमर्पण करके उनसे खड्ग प्राप्त करना
    • अश्वत्थामाके द्वारा पाण्डव और पांचाल वीरोंका संहार
    • अश्वत्थामादिका दुर्योधनको सब समाचार सुनाना तथा दुर्योधनकी मृत्यु
    • राजा युधिष्ठिर और द्रौपदीका मृत पुत्रोंके लिये शोक तथा द्रौपदीकी प्रेरणासे भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये जाना
    • श्रीकृष्णका अश्वत्थामाके विषयमें एक पूर्वप्रसंग सुनाना
    • अश्वत्थामा और अर्जुनका एक-दूसरेपर ब्रह्मास्त्र छोड़ना तथा नारद और व्यासजीका उन्हें शान्त करा देना
    • पाण्डवोंका द्रौपदीके पास आकर उसे मणि देना तथा श्रीकृष्णका राजा युधिष्ठिरको अश्वत्थामाके अद‍्भुत पराक्रमका रहस्य बताना
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    स्त्रीपर्व
    • शोकाकुल धृतराष्ट्रको संजय और विदुरका समझाना
    • विदुरजीका महाराज धृतराष्ट्रके प्रति संसारके स्वरूप, उसकी भयंकरता और उससे छूटनेके उपायका वर्णन करना
    • शोकमग्न राजा धृतराष्ट्रको महर्षि व्यासका समझाना
    • विदुरजीके समझानेसे राजा धृतराष्ट्रका कुरुकुलकी स्त्रियोंके साथ कुरुक्षेत्रकी ओर जाना तथा रास्तेमें कृपाचार्य आदिसे उनकी भेंट होना
    • पाण्डवोंका राजा धृतराष्ट्र और गान्धारीसे मिलना, गान्धारीका भीमसेनपर क्रोध तथा व्यासजी और भीमसेनका उसे शान्त करना
    • युद्धभूमिमें पहुँचकर स्त्रियोंका विलाप करना और गान्धारीका श्रीकृष्णसे उनकी दशाका वर्णन करना
    • गान्धारीका अन्य मरे हुए वीरोंको देखकर विलाप करना और श्रीकृष्णको शाप देना
    • राजा धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा मरे हुए योद्धाओंका दाहकर्म
    • सब स्त्रियोंका अपने सम्बन्धियोंको जलांजलि देना तथा कुन्तीके मुखसे कर्णके जन्मका रहस्य खुलनेपर भाइयोंके सहित राजा युधिष्ठिरका शोकाकुल होना
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    शान्तिपर्व
    • शोकाकुल युधिष्ठिरको सान्त्वना देते हुए देवर्षि नारदका उन्हें कर्णका पूर्वचरित्र सुनाना
    • युधिष्ठिरका घर छोड़कर वनमें जानेका विचार और अर्जुनद्वारा इसका विरोध
    • युधिष्ठिरका वनवासी, मुनि एवं संन्यासी होनेका विचार तथा भीम और अर्जुनद्वारा उसका विरोध
    • युधिष्ठिरको नकुल, सहदेव तथा द्रौपदीका समझाना
    • अर्जुनद्वारा दण्डनीतिका समर्थन और भीमका युधिष्ठिरको राज्यकी ओर आकृष्ट करनेका प्रयास
    • युधिष्ठिरद्वारा भीमको फटकार और मुनिवृत्तिकी प्रशंसा तथा अर्जुनका राजा जनकके दृष्टान्तसे उन्हें समझाना
    • महर्षि देवस्थान और अर्जुनका राजा युधिष्ठिरको समझाना
    • महर्षि व्यासका शंख-लिखित और राजा हयग्रीवके दृष्टान्त देकर युधिष्ठिरको प्रजापालनके लिये उत्साहित करना
    • व्यासजीका युधिष्ठिरसे कालकी महिमा कहना तथा युधिष्ठिरका अर्जुनके प्रति पुन: अपना शोक प्रकट करना
    • श्रीव्यासजीका राजा युधिष्ठिरको अश्मा मुनिका कहा हुआ धर्मोपदेश सुनाना
    • श्रीकृष्णका नारदजीद्वारा सृंजयके प्रति कहे हुए अनेकों राजाओंके दृष्टान्त सुनाकर राजा युधिष्ठिरको समझाना
    • श्रीव्यासजीका राजा युधिष्ठिरको राजधर्मका उपदेश देना
    • पाप और उनके प्रायश्चित्तोंका वर्णन
    • प्रायश्चित्तयोग्य कर्म, अन्नकी अशुद्धि और दानके अनधिकारीके विषयमें स्वायम्भुव मनुका प्रसंग
    • व्यासजी और भगवान् श्रीकृष्णकी सलाहसे महाराज युधिष्ठिरका हस्तिनापुरमें आना
    • महाराज युधिष्ठिरका अभिषेक, उनकी राज्यव्यवस्था तथा उनके द्वारा सम्बन्धियोंके श्राद्ध
    • युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति, भाइयों और कुटुम्बियोंका सत्कार तथा नाना प्रकारके दान
    • युधिष्ठिरका भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे उनके साथ भीष्मजीके पास जानेका विचार
    • भीष्मद्वारा भगवान‍्की स्तुति
    • परशुरामजीका चरित्र
    • श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा, भीष्मद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति और श्रीकृष्णका भीष्मसे धर्मोपदेशके लिये कहना
    • भीष्मका अपनी असमर्थता प्रकट करना और भगवान‍्का उन्हें वरदान देकर जाना तथा दूसरे दिन पुन: सबके साथ वहाँ उपस्थित होना
    • श्रीकृष्ण और भीष्मजीकी बातचीत तथा भीष्मका आश्वासन पाकर युधिष्ठिरका प्रश्न करनेके लिये तैयार होना
    • युधिष्ठिरके पूछनेपर भीष्मका उनसे राजोचित शिष्टाचारका वर्णन
    • राजाके नीतिपूर्ण बर्तावका वर्णन
    • राज्यशासनके कुछ साधनोंका वर्णन
    • ब्रह्माजीके नीतिशास्त्र तथा राजा पृथुके प्रसंगका वर्णन
    • राजा युधिष्ठिरके प्रश्न करनेपर भीष्मजीका चारों वर्ण और चारों आश्रमोंके धर्म सुनाना
    • सर्वसाधारणके धर्म, राजधर्मकी महत्ता और उसके विषयमें इन्द्रवेषधारी भगवान् विष्णु और राजा मान्धाताके संवादका वर्णन
    • राजधर्ममें चारों आश्रमोंके धर्मोंका समावेश
    • प्रजाके अभ्युदयके लिये राजाकी आवश्यकताका निरूपण तथा इस विषयमें बृहस्पति और राजा वसुमनाके संवादका उल्लेख
    • राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा युगनिर्माणमें दण्डनीतिकी प्रधानताका वर्णन
    • राजाको इहलोक और परलोकमें सुखकी प्राप्ति करानेवाले छत्तीस गुणोंका वर्णन
    • राजधर्मका वर्णन, राजाके लिये विद्वान् पुरोहितकी आवश्यकता तथा दोनोंमें मेल रहनेसे लाभ
    • ब्राह्मण और क्षत्रियकी सम्मिलित शक्तिका प्रभाव तथा राजाके धर्मानुकूल व्यवहारोंका वर्णन
    • उत्तम-अधम ब्राह्मणोंके साथ राजाका बर्ताव और केकयराजका उपाख्यान
    • आपत‍्कालमें ब्राह्मण आदि वर्णोंके कर्तव्य तथा ऋत्विजोंके लक्षण
    • मित्र और अमित्रोंकी पहचान
    • मन्त्रीकी जाँच—कालकवृक्षीय मुनिका उपाख्यान
    • सभासद् आदिके लक्षण तथा गुप्त सलाह सुननेके अधिकारी
    • राजाकी व्यावहारिक नीति और उसके निवासयोग्य नगरका वर्णन
    • राष्ट्रकी रक्षा तथा वृद्धिके उपाय और प्रजासे कर लेनेका ढंग
    • राजाके नीतिपूर्ण बर्ताव और उसके द्वारा धर्मपालनकी आवश्यकता
    • धर्माचरणसे लाभ तथा राजाके धर्म
    • राजाके आचरणके विषयमें वामदेवजीके उपदेशका उल्लेख
    • युद्धनीतिका वर्णन
    • युद्धमें होनेवाली हिंसाके प्रायश्चित्त और वीर तथा कायरोंको प्राप्त होनेवाले लोकोंका वर्णन
    • सैन्यसंचालनकी विधि, योद्धाओंके लक्षण और विजयके चिह्नोंका वर्णन
    • कालकवृक्षीय मुनिका उपदेश—राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय राजाका कर्तव्य
    • कालकवृक्षीय मुनिका कूटनीति बतलाना और क्षेमदर्शीका राजा जनकसे मेल करा देना
    • माता, पिता और गुरुकी सेवाका उपदेश, सत्य-असत्यकी पहचान तथा व्यावहारिक नीतिका वर्णन
    • दु:खोंसे छूटनेका उपाय और मनुष्यके स्वभावकी पहचानके लिये व्याघ्र तथा सियारकी कथा
    • शक्तिशाली शत्रुके सामने नम्र होने और मूर्खकी बातोंको अनसुनी करनेका उपदेश तथा राजा और राजसेवकोंके गुणोंका वर्णन
    • राजधर्म और दण्डके स्वरूपका वर्णन
    • दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन
    • त्रिवर्गका विचार और आंगरिष्ठ तथा कामन्दकका संवाद
    • शील-निरूपण—इन्द्र और प्रह्लादकी कथा
    • यम और गौतमका संवाद तथा आपत्तिके समय राजाका धर्म
    • आपत्तिग्रस्त राजाके कर्तव्य तथा मर्यादाका पालन करनेवाले दस्युओंकी सद‍्गतिका वर्णन
    • राजाके लिये धनसंग्रहके स्थान तथा अनागत विपत्तिसे सावधान रहनेमें तीन मत्स्योंका दृष्टान्त
    • शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें विडाल और चूहेका आख्यान
    • शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका प्रसंग तथा ब्राह्मणसेवाका माहात्म्य
    • शरणागतकी रक्षा करनेके विषयमें एक बहेलिया और कपोत-कपोतीका प्रसंग
    • अबुद्धिपूर्वक किये हुए पापकी निवृत्तिके विषयमें राजा जनमेजय और इन्द्रोत मुनिका प्रसंग
    • मृतककी पुनर्जीवनप्राप्तिके विषयमें एक ब्राह्मणबालकके जीवित होनेका प्रसंग
    • प्रबल शत्रुसे बचनेका उपाय बतानेके लिये सेमलवृक्ष और वायुका प्रसंग
    • लोभमें पाप, शिष्ट पुरुषोंके लक्षण, अज्ञानके दोष तथा दमकी प्रशंसा
    • तप और सत्यकी महिमा, क्रोध-काम आदि दोषोंका वर्णन तथा नृशंस पुरुषके लक्षण
    • पाप और उनके प्रायश्चित्त
    • धर्म, अर्थ, काम और मोक्षके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार
    • मित्र बनाने और न बनानेयोग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथा
    • शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन
    • कल्याणकामीके कर्तव्यके विषयमें पिता-पुत्रका संवाद
    • सुख-दु:खका विवेचन और त्यागकी महिमा
    • तृष्णात्यागके विषयमें मंकिका दृष्टान्त तथा विदेहराज जनक और मुनिवर बोध्यकी उक्तियाँ
    • संतजनोंके आचरणके विषयमें प्रह्लाद और अवधूत ब्राह्मणका संवाद
    • मनुष्यको सद‍्बुद्धिका आश्रय लेना चाहिये—इस विषयमें काश्यप ब्राह्मण और इन्द्रका संवाद
    • संसार और शरीरोंके मूलतत्त्वोंका वर्णन
    • जीवकी नित्यता और सत्ताका वर्णन; चारों वर्णोंकी उत्पत्ति तथा उनके कर्म
    • सत्यकी महिमा, असत्यके दोष, दान आदिके फल और आश्रमधर्मोंका वर्णन
    • आचारकी विधि और अध्यात्मज्ञानका वर्णन
    • ध्यानयोगका वर्णन और जपकी महिमा बतानेके लिये एक जापक ब्राह्मणकी कथा
    • मनु और बृहस्पतिका संवाद—मनुके द्वारा ज्ञानयोग आदिके फल तथा परमात्मतत्त्वका वर्णन
    • आत्माकी दुर्विज्ञेयता
    • आत्मदर्शनका उपाय
    • भगवान् विष्णुसे विश्वकी उत्पत्ति तथा वराह-अवतारका वर्णन
    • गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए योग तथा सदाचारका निरूपण
    • सब प्रकारके दोषोंसे छूटनेके लिये ज्ञान, वैराग्य और ब्रह्मचर्यका उपदेश
    • मुक्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश
    • महर्षि पंचशिखका राजा जनकको उपदेश
    • दमकी महिमा तथा व्रत और तपका वर्णन, प्रह्लादद्वारा इन्द्रको उपदेश
    • इन्द्रका नमुचि और बलिके साथ संवाद—कालकी महिमाका वर्णन
    • इन्द्रके पास लक्ष्मीका आना तथा दानव-दैत्योंके उत्थान और पतनका कारण बताना
    • जैगीषव्यका देवलको समत्वबुद्धिका उपदेश तथा श्रीकृष्णका उग्रसेनके प्रति नारदजीके गुणोंका वर्णन
    • व्यासजीका शुकदेवके पूछनेपर उन्हें कालका स्वरूप तथा सृष्टिकी उत्पत्ति बतलाना
    • प्रलयका क्रम, ब्राह्मणको दान देनेकी महिमा तथा ब्राह्मणके कर्तव्यका वर्णन
    • ज्ञानद्वारा मोक्षकी प्राप्ति, ध्यानके सहायक योग और सात प्रकारकी धारणाओंका वर्णन
    • बुद्धिकी प्रशंसा, प्राणियोंके तारतम्य, ज्ञानका साधन तथा उसकी महिमा
    • योगसे परमात्माकी प्राप्तिका वर्णन
    • कर्म और ज्ञानका अन्तर तथा ब्रह्मचर्य-आश्रमका वर्णन
    • गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास-आश्रमका वर्णन
    • अध्यात्मज्ञान और उसके साधनोंका वर्णन
    • ब्रह्मज्ञानके उपाय, उसकी महिमा तथा कामरूपी वृक्षको काटनेका उपदेश
    • पंचभूतोंके गुणोंका वर्णन तथा धर्मका प्रतिपादन
    • युधिष्ठिरका धर्मविषयक प्रश्न और भीष्मजीका उसके उत्तरमें जाजलि तथा तुलाधार वैश्यका संवाद सुनाना
    • जाजलिको तुलाधार तथा पक्षियोंका उपदेश
    • राजा विचख्नुके द्वारा अहिंसाधर्मकी प्रशंसा तथा चिरकारीका उपाख्यान
    • अहिंसापूर्वक राज्यशासन करनेके विषयमें द्युमत्सेन और सत्यवान‍्का संवाद
    • कपिलका स्यूमरश्मिसे निवृत्तिप्रधान धर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन
    • ब्रह्मज्ञानमें सभी आश्रमोंका अधिकार बताते हुए ब्रह्मतत्त्वका निरूपण
    • धर्मकी प्रधानता बतलानेके लिये एक ब्राह्मण और कुण्डधार मेघकी कथा
    • पापी, धर्मात्मा, विरक्त और मुक्त होनेके कारण तथा मोक्षके साधनोंका वर्णन
    • भूत और इन्द्रियादिके विषयमें नारद और देवल मुनिका तथा तृष्णाक्षयके विषयमें माण्डव्य और जनकका संवाद
    • संन्यासीके स्वभाव, आचरण और धर्मोंका वर्णन
    • ब्राह्मी स्थितिका वर्णन करते हुए भीष्मजीका वृत्रासुरकी कथा सुनाना
    • इन्द्रद्वारा वृत्रासुरके वधका प्रसंग
    • दक्ष-यज्ञ-विध्वंस
    • दक्षप्रजापतिका भगवान् शिवकी स्तुति करना
    • समंगका नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन तथा नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश
    • अरिष्टनेमिका राजा सगरको मोक्षका उपदेश
    • राजा जनकको पराशर मुनिका उपदेश
    • राजा जनकके भिन्न-भिन्न प्रश्न और पराशरजीद्वारा उनके समाधान
    • साध्यगणोंको हंसका उपदेश
    • सांख्य और योगका अन्तर बतलाते हुए योगमार्गका वर्णन
    • सांख्यका वर्णन
    • क्षर और अक्षरका विषय बतलानेके लिये करालजनक और वसिष्ठका संवाद
    • वसिष्ठजीके द्वारा जीवकी अज्ञताका वर्णन
    • आत्माकी प्रकृतिसे भिन्नता तथा योग और सांख्यका मत
    • राजकुमार वसुमान‍्को एक ऋषिका धर्मविषयक उपदेश
    • याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार सृष्टि, प्रलय और गुणोंका वर्णन
    • योग तथा मृत्युसूचक चिह्नोंका वर्णन
    • याज्ञवल्क्यद्वारा मोक्षधर्मका वर्णन
    • व्यासजीका अपने पुत्र शुकदेवको उपदेश
    • दान, यज्ञ और तप आदि शुभकर्मोंकी उपयोगिताका वर्णन तथा शुकदेवजीके जन्मका वृत्तान्त
    • पिताकी आज्ञासे शुकदेवजीका मिथिलामें जाना और जनकके राजमहलमें उनका सत्कार होना
    • राजा जनकके द्वारा शुकदेवजीका पूजन तथा उनके प्रश्नका समाधान करना
    • शुकदेवजीका पिताके पास लौट आना तथा व्यासजीका अपने शिष्योंको स्वाध्यायकी विधि और शुकदेवको अनध्यायका कारण बताना
    • शुकदेवजीको नारदजीका उपदेश
    • नारदजीका शुकदेवको उपदेश और शुकदेवका सूर्यलोकमें जानेका निश्चय
    • शुकदेवकी ऊर्ध्वगतिका वर्णन तथा व्यासको महादेवजीका आश्वासन देना
    • बदरिकाश्रममें भगवान् नारायणके द्वारा नारदजीकी शंकाका समाधान
    • नारदजीका श्वेतद्वीपमें जाना तथा भीष्मका युधिष्ठिरसे उपरिचरके चरित्रवर्णनके प्रसंगमें तन्त्रशास्त्रकी उत्पत्ति बतलाना
    • राजा उपरिचरके यज्ञमें एकत आदि मुनियोंका बृहस्पतिसे श्वेतद्वीप एवं भगवान‍्की महिमाका वर्णन
    • नारदजीका अनेकों नामोंके द्वारा भगवान‍्की स्तुति करना
    • श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान‍्का दर्शन होना और भगवान‍्का अपने भविष्य-अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना
    • श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने नामोंकी व्याख्या सुनाना
    • देवर्षि नारद और नर-नारायणकी बातचीत तथा सौतिके द्वारा भगवान‍्की महिमाका वर्णन
    • हयग्रीव-अवतार, नारायणकी महिमा तथा भक्तिधर्मकी परम्पराका वर्णन
    • अतिथिके कहनेसे धर्मारण्यका नागराजके यहाँ जाना और सूर्य-मण्डलसे उनके लौटनेपर उनसे उञ्छवृत्तिकी महिमा सुनना
  • +
    अनुशासनपर्व
    • युधिष्ठिरको समझानेके लिये भीष्मजीके द्वारा गौतमी ब्राह्मणी, व्याध, सर्प, मृत्यु और कालके संवादका वर्णन
    • अतिथि-सत्कारके विषयमें सुदर्शनका उपाख्यान
    • विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम
    • स्वामिभक्त एवं दयालु पुरुषकी श्रेष्ठता बतलाते हुए इन्द्र और तोतेके संवादका उल्लेख
    • भाग्यकी अपेक्षा पुरुषार्थकी श्रेष्ठता
    • कर्मोंके फलका वर्णन तथा श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा
    • गीदड़ और वानरकी कथा—ब्राह्मणको प्रतिज्ञा करके न देने और उसका धन लेनेसे दोष
    • शूद्रको विशेष उपदेश देनेसे अनर्थकी प्राप्ति—एक शूद्र और मुनिकी कथा
    • युधिष्ठिरके विविध प्रश्नोंका उत्तर तथा दानके लिये उत्तम पात्रका लक्षण
    • त्याज्य अन्न, श्राद्धमें निमन्त्रण देनेयोग्य ब्राह्मण, दानपात्र तथा नरक एवं स्वर्ग देनेवाले कर्मोंका विवेचन
    • ब्रह्महत्याके समान पापों तथा विविध तीर्थोंका वर्णन
    • गंगाजीके माहात्म्यका वर्णन
    • राजा वीतहव्यको ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा
    • नारदजीका भगवान् श्रीकृष्णको पूज्य पुरुषके लक्षण बताना और उशीनरद्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा
    • ब्राह्मणोंके महत्त्वका वर्णन
    • दानपात्र पुरुषोंकी परीक्षा और स्त्री-रक्षाके विषयमें देवशर्मा तथा विपुलकी कथा
    • देवशर्माका विपुलको उसके दुरावकी याद दिलाना तथा उसको साथ ले पत्नीसहित स्वर्गमें जाना
    • कन्याके विवाहके सम्बन्धमें विचार
    • वर्णसंकरोंकी उत्पत्ति तथा कृतकपुत्रका वर्णन
    • गौओंके माहात्म्य-वर्णनके प्रसंगमें महर्षि च्यवन और नहुषके संवादकी कथा
    • राजा कुशिक और च्यवनमुनिका उपाख्यान—मुनिद्वारा राजाके धैर्यकी परीक्षा
    • च्यवनका कुशिकको स्वर्गीय दृश्य दिखाना, उनके घरमें रहनेका प्रयोजन बतलाना और उनके वंशको ब्राह्मणत्व-प्राप्तिका वरदान देना
    • नाना प्रकारके शुभ कर्मोंका और जलाशय बनाने तथा बगीचे लगानेका फल
    • भीष्मद्वारा उत्तम दान और उत्तम ब्राह्मणोंकी प्रशंसा करते हुए उनकी आराधनाका उपदेश
    • राजाके लिये यज्ञ, दान और ब्राह्मण आदि प्रजाकी रक्षाका उपदेश
    • भूमिदानका महत्त्व
    • अन्न, सुवर्ण और जल आदि दान करनेका माहात्म्य
    • नाना प्रकारके दानोंका वर्णन तथा ब्राह्मणका धन लेनेसे होनेवाले अनिष्टके सम्बन्धमें राजा नृगकी कथा
    • ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक, गोदान और स्वर्ण-दक्षिणाकी महिमाका तथा गो-चोरीके पापका वर्णन
    • व्रत, नियम और दम आदिकी प्रशंसा तथा गोदानकी विधि
    • गोदानके फल, कपिला गौकी उत्पत्ति और गोमाहात्म्यके विषयमें वसिष्ठ-सौदास-संवादका वर्णन
    • व्यासजीका शुकदेवसे गोदानकी महिमाका वर्णन तथा भीष्मजीका गौ और लक्ष्मीका संवाद सुनाना
    • ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गौओंका उत्कर्ष बताना तथा सुवर्णकी उत्पत्ति और उसके दानकी महिमाके सम्बन्धमें वसिष्ठ और परशुरामका संवाद
    • भिन्न-भिन्न तिथियों और नक्षत्रोंमें श्राद्ध करनेका तथा उसमें तिल आदि देनेका फल
    • श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा—पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन
    • श्राद्धके विषयमें महर्षि निमिको अत्रिका उपदेश तथा अन्य ज्ञातव्य बातें
    • उपवास और ब्रह्मचर्य आदिके लक्षण तथा प्रतिग्रहके दोष बतानेके लिये राजा वृषादर्भि और सप्तर्षियोंकी कथा
    • ब्रह्मसर तीर्थमें अगस्त्यजीके कमलकी चोरी होनेपर ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंकी धर्मोपदेशपूर्ण शपथ
    • छत्र और उपानह दान करनेके विषयमें सूर्य और जमदग्नि मुनिका संवाद
    • गृहस्थ-धर्मके विषयमें पृथ्वी और श्रीकृष्णका संवाद तथा पुष्प, धूप और दीपके दान एवं देवता आदिको बलि देनेका माहात्म्य बतानेके लिये बलि-शुक्र-संवादका उल्लेख
    • अनशन-व्रतका माहात्म्य
    • आयुको बढ़ाने और घटानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन
    • भाइयोंके पारस्परिक बर्ताव और उपवासके फलका वर्णन
    • दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रतका उपदेश और मानस तथा पार्थिव तीर्थकी महत्ता
    • बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मका प्रकार और पापोंके कारण तिर्यक्-योनियोंमें जन्म लेनेका क्रम बतलाना
    • बृहस्पतिका युधिष्ठिरको अन्न-दान और अहिंसा-धर्मकी महिमा बताना
    • हिंसा और मांस-भक्षणकी निन्दा तथा मांस न खानेकी प्रशंसा
    • व्यासजीकी एक कीड़ेपर कृपा
    • कीड़ेका क्रमश: ब्राह्मण-योनिमें जन्म लेकर ब्रह्मलोक प्राप्त करना
    • व्यास-मैत्रेय-संवादमें दान, तप आदिकी प्रशंसा
    • शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रत-धर्मका वर्णन
    • साम-गुणकी प्रशंसा—राक्षस और ब्राह्मणका संवाद
    • श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका तथा धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवाद
    • विष्णु, ब्रह्मा, अग्नि, लक्ष्मी तथा अंगिरा आदि ऋषियोंके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन
    • अरुन्धती, सूर्य, प्रमथ, महेश्वर, स्कन्द और विष्णुके बताये हुए विशेष धर्मका वर्णन
    • ग्राह्यान्न और त्याज्यान्न मनुष्योंका वर्णन तथा अयोग्य दान और अन्न ग्रहण करनेका प्रायश्चित्त
    • दृष्टान्तपूर्वक दानकी श्रेष्ठता और पाँच प्रकारके दानोंका वर्णन
    • तपस्या करते हुए श्रीकृष्णके पास ऋषियोंका आना, उनका प्रभाव देखना और नारदजीका शिव-पार्वतीके धर्मविषयक संवादका वर्णन करना
    • वानप्रस्थ-धर्मका वर्णन
    • ऊँच और नीच वर्णकी प्राप्ति करानेवाले तथा बन्धन, मुक्ति एवं स्वर्ग देनेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन
    • स्वर्ग और नरककी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन
    • पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन
    • भगवान् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन
    • विष्णुसहस्रनाम
    • जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता आदिके मंगलमय नामोंका वर्णन और गायत्री-जपका फल
    • ब्राह्मणोंकी महिमाका वर्णन तथा कार्तवीर्य और वायुदेवताका संवाद
    • वायुदेवताके द्वारा कश्यप, अगस्त्य, वसिष्ठ, अत्रि और च्यवन मुनिकी महिमाका वर्णन
    • भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन
    • श्रीकृष्णके द्वारा ब्राह्मणोंकी महिमा तथा भगवान् शंकरके माहात्म्यका वर्णन
    • धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्म-अधर्मके फल, सज्जन-दुर्जनोंके लक्षण और शिष्टाचारका वर्णन
    • भीष्मका शुभाशुभ कर्मोंको सुख-दु:खकी प्राप्तिका कारण बतलाते हुए धर्मके अनुष्ठानपर जोर देना
    • भीष्मजीका देवता, ऋषि, पर्वत और नदी आदिके नाम बतलाकर उनके स्मरणसे धर्मकी प्राप्ति बतलाना तथा भीष्मजीकी आज्ञासे युधिष्ठिरका परिवारसहित हस्तिनापुरमें जाना
    • भीष्मके अन्त्येष्टि-संस्कारकी सामग्री लेकर युधिष्ठिर आदिका उनके पास आना और भीष्मका श्रीकृष्ण आदिसे देहत्यागकी अनुमति लेना
    • भीष्मजीका प्राण-त्याग और धृतराष्ट्र आदिके द्वारा उनका दाह-संस्कार, कौरवोंका गंगाके जलसे भीष्मको जलांजलि देना, गंगाजीका प्रकट होकर पुत्रके लिये शोक करना और श्रीकृष्णका उन्हें समझाना
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    आश्वमेधिकपर्व
    • युधिष्ठिरका शोक करना, श्रीकृष्णका उन्हें सान्त्वना देना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाते हुए राजा मरुत्तकी कथा सुनाना
    • इन्द्रकी प्रेरणासे बृहस्पतिका मनुष्यके यज्ञ न करानेकी प्रतिज्ञा करना, मरुत्तका नारदजीकी आज्ञासे संवर्तके पास जाना और उन्हें यज्ञके लिये राजी करना
    • संवर्तका मरुत्तको सुवर्णकी प्राप्तिके लिये महादेवजीकी नाममयी स्तुतिका उपदेश करना, मरुत्तकी सम्पत्तिसे बृहस्पतिका चिन्तित होना और उनकी प्रेरणासे इन्द्रका मरुत्तके पास अग्निको भेजना
    • इन्द्रका गन्धर्वराजको भेजकर मरुत्तको भय दिखाना और संवर्तका मन्त्रबलसे सब देवताओंको बुलाकर मरुत्तका यज्ञ पूर्ण करना
    • भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको समझाना, ऋषियोंका अन्तर्धान होना और भीष्म आदिका श्राद्ध करके युधिष्ठिर आदिका हस्तिनापुरमें जाना
    • श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना
    • अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध महर्षि और काश्यपका संवाद
    • जीवकी मृत्यु और उसकी त्रिविध गतिका वर्णन
    • जीवके गर्भ-प्रवेश, आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन
    • मोक्ष-प्राप्तिके उपायका वर्णन
    • ब्राह्मणका अपनी स्त्रीसे इन्द्रिय-यज्ञ तथा मन-इन्द्रिय-संवादका वर्णन
    • प्राण-अपान आदिका संवाद और ब्रह्माजीका सबकी श्रेष्ठता बतलाना
    • अन्तर्यामीकी प्रधानता और ब्रह्मरूपी वनका वर्णन
    • आत्माकी निर्लिप्तता, परशुरामजीके द्वारा क्षत्रिय-कुलका संहार और पितामहोंके समझानेसे परशुरामजीका तपस्याके लिये जाना
    • राजा अम्बरीषकी गायी हुई गाथा और ब्राह्मण-जनक-संवादका वर्णन
    • ब्राह्मणका अपने ज्ञाननिष्ठ स्वरूपका परिचय देना तथा श्रीकृष्णका अर्जुनसे मोक्ष-धर्मके विषयमें गुरु और शिष्यका संवाद सुनाना
    • ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुण, रजोगुण और सत्त्वगुणके कार्योंका वर्णन
    • सत्त्व आदि गुण, प्रकृतिके नाम तथा परमात्मतत्त्वके ज्ञानकी महिमा
    • अहंकारसे पंचमहाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश
    • चराचर प्राणियोंके अधिपतियों, धर्म आदिके लक्षणों और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता
    • सब पदार्थोंके आदि-अन्त, ज्ञानकी नित्यता; देहरूपी कालचक्र तथा गृहस्थके धर्मका वर्णन
    • ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन
    • परमात्माकी प्राप्तिके उपायोंका वर्णन
    • सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान‍्की प्रशंसा, पंचभूतोंके गुण और आत्माकी श्रेष्ठताका वर्णन
    • तपस्याका प्रभाव, आत्माका स्वरूप और उसके ज्ञानकी महिमा तथा अनुगीताका उपसंहार
    • श्रीकृष्णका अर्जुनके साथ हस्तिनापुर जाना और वहाँ सबसे मिलकर युधिष्ठिरकी आज्ञा ले सुभद्राके साथ द्वारकाको प्रस्थान करना
    • मार्गमें श्रीकृष्णसे कौरवोंके विनाशकी बात सुनकर उत्तंक मुनिका कुपित होना और श्रीकृष्णका उन्हें शान्त करके अपने अध्यात्मज्ञानका वर्णन करना
    • श्रीकृष्णका उत्तंक मुनिको विश्वरूपका दर्शन कराना और मरु-देशमें जल प्राप्त होनेका वरदान देना
    • उत्तंककी गुरु-भक्तिका वर्णन—गुरुपत्नीकी आज्ञासे उत्तंकका सौदासके पास जाकर उनकी रानीके कुण्डल माँगना
    • कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना
    • भगवान् श्रीकृष्णका द्वारकामें जाकर सबसे मिलना और वसुदेवजीके पूछनेपर महाभारत-युद्धका वृत्तान्त सुनाना
    • श्रीकृष्णका वसुदेवजीको अभिमन्यु-वधका हाल सुनाना और व्यासजीका उत्तरा तथा अर्जुनको समझाकर युधिष्ठिरको अश्वमेधयज्ञ करनेकी आज्ञा देना
    • भाइयोंके साथ युधिष्ठिरका हिमालयपर जाना और वहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना
    • श्रीकृष्णका हस्तिनापुरमें आना और उत्तराके मृत बालकको जिलानेके लिये कुन्ती आदिकी उनसे प्रार्थना
    • उत्तराकी विलापपूर्ण प्रार्थना और श्रीकृष्णका परीक्षित् को जीवित कर देना
    • श्रीकृष्णद्वारा परीक्षित् का नामकरण, पाण्डवोंका हस्तिनापुरमें पहुँचना तथा व्यास और श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको यज्ञ आरम्भ करनेकी आज्ञा देना
    • व्यासजीकी आज्ञासे अश्वमेध-यज्ञके लिये छोड़े हुए अश्वकी रक्षाके लिये अर्जुनकी नियुक्ति और घोड़ेके पीछे उनका सेनासहित जाना
    • अर्जुनके द्वारा त्रिगर्तोंकी पराजय
    • प्राग्ज्योतिषपुरमें वज्रदत्तके साथ अर्जुनका युद्ध और वज्रदत्तकी पराजय
    • अर्जुनका सैन्धववीरोंके साथ युद्ध और दु:शलाके प्रयत्नसे उसकी समाप्ति
    • अर्जुन और बभ्रुवाहनका युद्ध तथा अर्जुनकी मृत्यु
    • चित्रांगदाका विलाप, बभ्रुवाहनका शोक, उलूपीके प्रयत्नसे अर्जुनका पुन: जीवित होना तथा उन सबकी बातचीत
    • अर्जुनका मगध, चेदि, काशी, कोसल आदि देशोंके राजाओंको परास्त करते हुए गान्धार देशमें पहुँचना
    • गान्धारराजको परास्त करके अर्जुनका लौटना, यज्ञभूमिकी तैयारी और नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट देखना
    • श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे अर्जुनका संदेश कहना, अर्जुनका हस्तिनापुरमें आना तथा उलूपी और चित्रांगदाके साथ बभ्रुवाहनका आगमन
    • बभ्रुवाहन आदिका सत्कार तथा अश्वमेध-यज्ञका आरम्भ
    • युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना
    • युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके सेरभर सत्तू-दानकी महिमा बतलाना
    • महर्षि अगस्त्यके यज्ञकी कथा
    • युधिष्ठिरका वैष्णव-धर्मविषयक प्रश्न और भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा धर्म तथा अपनी महिमाका वर्णन
    • चारों वर्णोंके कर्म और उनके फलोंका वर्णन तथा धर्मकी वृद्धि और पापके क्षय होनेका उपाय
    • निरर्थक जन्म, दान और जीवनका वर्णन, सात्त्विक आदि दानोंका लक्षण, दानका योग्य पात्र और ब्राह्मणकी महिमा
    • बीज और योनिकी शुद्धि तथा गायत्री-जप और ब्राह्मणोंकी महिमाका वर्णन
    • यमलोकके मार्गका कष्ट और उससे बचनेके उपाय
    • जल-दान, अन्न-दान और अतिथि-सत्कारका माहात्म्य
    • भूमिदान, तिलदान और उत्तम ब्राह्मणकी महिमा
    • विविध प्रकारके दानोंकी महिमा
    • पंचमहायज्ञ, विधिवत् स्नान और उसके अंगभूत कर्म,भगवान‍्के प्रिय पुष्प तथा भगवद्भक्तोंका वर्णन
    • कपिला गौका माहात्म्य और उसके दस भेद
    • कपिला गौका माहात्म्य, अयोग्य ब्राह्मण तथा नरक और स्वर्गमें ले जानेवाले पाप और पुण्योंका वर्णन
    • धर्म और शौचके लक्षण, संन्यासी और अतिथिके सत्कारका उपदेश, शिष्टाचार, दानपात्र ब्राह्मण तथा अन्न-दानकी प्रशंसा
    • भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध
    • आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन
    • अग्निके स्वरूप, अग्निहोत्रकी विधि तथा उसके माहात्म्यका वर्णन
    • चान्द्रायण-व्रतकी विधि, उसके करनेके निमित्त तथा महिमाका वर्णन
    • सर्वहितकारी धर्मका वर्णन, द्वादशी-व्रतका माहात्म्य तथा युधिष्ठिरके द्वारा भगवान‍्की स्तुति
    • विषुव योग और ग्रहण आदिमें दानकी महिमा, पीपलका महत्त्व, तीर्थभूत गुणोंकी प्रशंसा और उत्तम प्रायश्चित्त
    • उत्तम और अधम ब्राह्मणोंके लक्षण, भक्त, गौ, ब्राह्मण और पीपलकी महिमा तथा ब्राह्मणत्वसे गिरानेवाले कर्म
    • भगवान‍्के उपदेशका उपसंहार और उनका द्वारकागमन
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    आश्रमवासिकपर्व
    • कुन्ती आदि स्त्रियोंका तथा भाइयोंसहित राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र और गान्धारीके अनुकूल बर्ताव
    • गान्धारीसहित धृतराष्ट्रकी वनमें जानेके लिये तैयारी और युधिष्ठिरका शोक
    • व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना और धृतराष्ट्रका उन्हें राजनीतिकी शिक्षा देना
    • धृतराष्ट्रका प्रजावर्गसे वन जानेकी अनुमति लेते हुए क्षमा माँगना और युधिष्ठिरको उनके हाथों सौंपना
    • साम्ब नामक ब्राह्मणका प्रजाकी ओरसे धृतराष्ट्रको उत्तर देना
    • धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरसे धन लेकर उससे भीष्म आदिका श्राद्ध करना
    • धृतराष्ट्र और गान्धारीका कुन्ती आदिके साथ वन-गमन और कुन्तीका युधिष्ठिर आदिको समझाकर लौटाना
    • गान्धारी और धृतराष्ट्र आदिका गंगा-तटपर विश्राम करते हुए कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर घोर तपस्या करना
    • नारदजीका धृतराष्ट्रसे तपस्याका महत्त्व बतलाना और पाण्डवोंका धृतराष्ट्रके पास जानेकी तैयारी करना
    • पाण्डवोंका परिवारसहित कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर धृतराष्ट्र आदिका दर्शन करना तथा संजयका ऋषियोंसे उनका परिचय देना
    • धृतराष्ट्र और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा विदुरजीका युधिष्ठिरके शरीरमें प्रवेश
    • युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना और महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रको सान्त्वना देना
    • गान्धारी और कुन्तीका व्यासजीसे मरे हुए पुत्रोंके दर्शन करानेका अनुरोध
    • धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा व्यासजीका मरे हुए वीरोंको प्रकट करके उन्हें उनके सम्बन्धियोंसे मिलाना
    • जनमेजयको परीक्षित् के दर्शन और युधिष्ठिर आदिका हस्तिनापुरको लौटना
    • नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिकी मृत्युका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक और उन तीनोंके अन्त्येष्टि-कर्म
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    मौसलपर्व
    • युधिष्ठिरका अपशकुन देखना तथा द्वारकामें उत्पात देख श्रीकृष्णका यादवोंको तीर्थयात्राके लिये आज्ञा देना
    • यदुवंशियोंका संहार
    • बलरामजी और भगवान् श्रीकृष्णका परमधाम-गमन
    • द्वारकामें आकर अर्जुनका वसुदेवसे संवाद तथा वसुदेवजीका निधन
    • अर्जुन और व्यासजीकी बातचीत
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    महाप्रास्थानिकपर्व
    • द्रौपदीसहित पाण्डवोंका महाप्रस्थान
    • मार्गमें द्रौपदी तथा सहदेव आदि चार पाण्डवोंका गिरना
    • युधिष्ठिरका इन्द्र और धर्मके साथ वार्तालाप तथा सदेह स्वर्गगमन
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    स्वर्गारोहणपर्व
    • स्वर्गमें नारद और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा युधिष्ठिरको नरकका दर्शन
    • इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्यलोकको जाना
    • युधिष्ठिरका दिव्यलोकमें श्रीकृष्ण आदिके दर्शन करना, भीष्म आदिका अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य
  • +
    महाभारत-श्रवण-विधि
    • माहात्म्य, कथा सुननेकी विधि और उसका फल
  • महाभारत-सार
  • अन्तिम पृष्ठ

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