॥ श्रीहरि:॥

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संक्षिप्त गरुडपुराण

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • आचारकाण्ड
  • भगवान् विष्णुकी महिमा तथा उनके अवतारोंका वर्णन
  • गरुडपुराणकी वक्तृ-श्रोतृ-परम्परा, भगवान् विष्णुद्वारा अपने स्वरूपका वर्णन तथा गरुडजीको पुराणसंहिताके प्रणयनका वरदान
  • गरुडपुराणके प्रतिपाद्य विषयोंका निरूपण
  • सृष्टि-वर्णन
  • मानस-सृष्टि-वर्णन, दक्ष प्रजापतिद्वारा मिथुनधर्मसे सृष्टिका विस्तार
  • ध्रुववंश तथा दक्ष प्रजापतिकी साठ कन्याओंकी सन्ततियोंका वर्णन
  • देवपूजा-विधान, विष्णुपूजोपयोगी वज्रनाभमण्डल, विष्णुदीक्षा तथा लक्ष्मी-पूजा
  • नवव्यूहार्चनविधि, पूजानुक्रम-निरूपण
  • पूजानुक्रम-निरूपण
  • विष्णुपञ्जरस्तोत्र१
  • ध्यान-योगका वर्णन
  • विष्णुसहस्रनाम
  • भगवान् विष्णुका ध्यान एवं सूर्यार्चन-निरूपण
  • मृत्युञ्जय-मन्त्र-जपकी महिमा
  • सर्पोंके विष हरनेके उपाय तथा दुष्ट उपद्रवोंको दूर करनेके मन्त्र (प्राणेश्वरी विद्या)
  • पञ्चवक्त्र-पूजन तथा शिवार्चन-विधि
  • भगवती त्रिपुरा तथा गणेश आदि देवोंकी पूजा-विधि
  • सर्पों एवं अन्य विषैले जीव-जन्तुओंके विषको दूर करनेका मन्त्र
  • श्रीगोपालजीकी पूजा, त्रैलोक्यमोहन-मन्त्र तथा श्रीधर-पूजनविधि
  • पञ्चतत्त्वार्चन-विधि
  • सुदर्शनचक्र-पूजा-विधि
  • भगवान् हयग्रीवके पूजनकी विधि
  • गायत्रीन्यास तथा संध्या-विधि
  • देवी दुर्गाका स्वरूप, सूर्य-ध्यान तथा माहेश्वरीपूजन-विधि
  • शिवके पवित्रारोपणकी विधि
  • विष्णुके पवित्रारोपणकी विधि
  • ब्रह्ममूर्तिके ध्यानका निरूपण
  • विविध शालग्रामशिलाओंके लक्षण
  • वास्तुमण्डल-पूजाविधि
  • प्रासाद-लक्षण
  • देव-प्रतिष्ठाकी सामान्य विधि
  • वर्ण एवं आश्रमधर्मोंका निरूपण
  • संध्योपासन, तर्पण, देवाराधन आदि नित्य कर्मों तथा आशौचका निरूपण
  • दानधर्मका निरूपण एवं विभिन्न देवताओंकी उपासना
  • प्रायश्चित्त-निरूपण
  • नवनिधियोंके लक्षणोंसे युक्त पुरुषके ऐश्वर्य एवं स्वभावका वर्णन
  • भुवनकोशवर्णनमें राजा प्रियव्रतके वंशका निरूपण
  • भारतवर्षका वर्णन
  • प्लक्ष तथा पुष्कर आदि द्वीपों एवं पाताल आदिका निरूपण
  • भुवनकोश-वर्णनमें सूर्य तथा चन्द्र आदि नौ ग्रहोंके रथोंका विवरण
  • ज्योतिश्चक्रमें वर्णित नक्षत्र, उनके देवता एवं कतिपय शुभ-अशुभ योगों तथा मुहूर्तोंका वर्णन
  • ग्रहदशा, यात्राशकुन, छींकका फल तथा सूर्यचक्र आदिका निरूपण
  • ग्रहोंके शुभ एवं अशुभ स्थान तथा उनके अनुसार शुभाशुभ फलका संक्षिप्त विवेचन
  • लग्न-फल, राशियोंके चर-स्थिर आदि भेद, ग्रहोंका स्वभाव तथा सात वारोंमें किये जाने योग्य प्रशस्त कार्य
  • सामुद्रिक शास्त्रके अनुसार स्त्री-पुरुषके शुभाशुभ लक्षण, मस्तक एवं हस्तरेखासे आयुका परिज्ञान
  • स्त्रियोंके शुभाशुभ लक्षण
  • स्त्री एवं पुरुषोंके शुभाशुभ लक्षण
  • चक्राङ्कित शालग्रामशिलाओंके विविध नाम, तीर्थमाहात्म्य तथा साठ संवत्सरोंके नाम
  • स्वरोदय-विज्ञान
  • रत्नोंके प्रादुर्भावका आख्यान तथा वज्र (हीरे)-की परीक्षा
  • मुक्ताके विविध भेद, लक्षण और परीक्षण-विधि
  • पद्मरागके विविध लक्षण एवं उसकी परीक्षा-विधि
  • मरकतमणि* का लक्षण तथा उसकी परीक्षा-विधि
  • इन्द्रनीलमणिका लक्षण तथा उसकी परीक्षा-विधि
  • वैदूर्यमणिकी परीक्षा-विधि
  • पुष्परागमणिकी परीक्षा-विधि
  • कर्केतनमणिकी परीक्षा-विधि
  • भीष्मकमणिकी परीक्षा-विधि
  • पुलकमणिके लक्षण तथा उसकी परीक्षा-विधि
  • रुधिराक्ष रत्न-परीक्षा
  • स्फटिक-परीक्षा
  • विद्रुममणिकी परीक्षा
  • गङ्गा आदि विविध तीर्थोंकी महिमा
  • गया-माहात्म्य तथा गयाक्षेत्रके तीर्थोंमें श्राद्धादि करनेका फल
  • गयाके तीर्थोंका माहात्म्य तथा गयाशीर्षमें पिण्डदानकी महिमामें विशालकी कथा
  • गयातीर्थमें पिण्डदानकी महिमा
  • गयाके तीर्थोंकी महिमा तथा आदिगदाधरका माहात्म्य
  • चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन तथा अठारह विद्याओंके नाम
  • प्रजापति रुचि और उनके पितरोंका संवाद
  • रुचिद्वारा की गयी पितृस्तुति तथा श्राद्धमें इस पितृस्तुतिके पाठका माहात्म्य
  • प्रम्लोचा नामक अप्सराकी दिव्य कन्या मानिनीसे प्रजापति रुचिका विवाह
  • भगवान् विष्णुका अमूर्त ध्यान-स्वरूप
  • भगवान् विष्णुका मूर्त ध्यानस्वरूप
  • वर्णधर्म-निरूपण
  • वर्णधर्म-निरूपण
  • गृहस्थधर्म-निरूपण
  • वर्णसंकर जातियोंका प्रादुर्भाव, गृहस्थधर्म, वर्णधर्म तथा सैंतीस प्रकारके अनध्याय
  • द्रव्यशुद्धि
  • दान-धर्मकी महिमा
  • श्राद्धके अवसर तथा अधिकारी; श्राद्धकी संक्षिप्त विधि, महिमा और फल
  • विनायकशान्ति-स्नान
  • ग्रहशान्ति-निरूपण
  • वानप्रस्थ-धर्म-निरूपण
  • संन्यास-धर्म-निरूपण
  • कर्मविपाक-निरूपण
  • प्रायश्चित्त-विधान एवं सान्तपन, कृच्छ्र, पराक तथा चान्द्रायणादि व्रतोंका विविध स्वरूप
  • अशौच तथा आपद्‍वृत्ति-निरूपण
  • महर्षि पराशरप्रोक्त वर्ण तथा आश्रम-धर्म एवं प्रायश्चित्त-धर्मका निरूपण
  • बृहस्पतिप्रोक्त नीतिसार
  • नीतिसार-निरूपण
  • नीतिसार
  • राजनीति-निरूपण
  • राजाद्वारा सेवकोंके लिये अपनायी जाने योग्य भृत्यनीतिका निरूपण
  • नीतिसार
  • नीतिसार
  • नीतिसार
  • तिथि आदि व्रतोंका वर्णन
  • अनंगत्रयोदशीव्रत
  • अखण्डद्वादशीव्रत
  • अगस्त्यार्घ्यव्रत-निरूपण
  • रम्भातृतीयाव्रत
  • चातुर्मास्यव्रतका निरूपण
  • मासोपवासव्रतका निरूपण
  • भीष्मपञ्चकव्रत
  • शिवरात्रिव्रतकथा तथा व्रत-विधान
  • एकादशीमाहात्म्य
  • विष्णुमण्डल-पूजाविधि
  • भीमा-एकादशीव्रत एवं माहात्म्य तथा पूजन-विधि
  • व्रतपरिभाषा तथा व्रतमें पालन करनेयोग्य नियम और अन्य ज्ञातव्य बातें
  • प्रतिपदा, तृतीया, चतुर्थी तथा पञ्चमीमें किये जानेवाले विविध तिथिव्रत
  • षष्ठी तथा सप्तमीके विविध व्रत
  • दूर्वाष्टमी तथा श्रीकृष्णाष्टमीव्रत
  • बुधाष्टमीव्रत-कथा
  • अशोकाष्टमी, महानवमी तथा नवमीके अन्य व्रत और ऋष्येकादशी व्रत-माहात्म्य
  • श्रवणद्वादशीव्रत
  • तिथिव्रत, वारव्रत एवं नक्षत्रादिव्रत-निरूपण और प्रतिपदादि तिथियोंमें पूजनीय देवता
  • सूर्यवंशवर्णन
  • चन्द्रवंशवर्णन
  • भविष्यके राजवंशका वर्णन
  • भगवान् के विभिन्न अवतारोंकी कथा तथा पतिव्रता-माहात्म्यमें ब्राह्मणपत्नी, अनसूया एवं भगवती सीताके पातिव्रतका आख्यान
  • रामचरितवर्णन (रामायणकी कथा)
  • हरिवंशवर्णन (श्रीकृष्णकथा)
  • महाभारतकी कथा एवं बुद्ध आदि अवतारोंकी कथाका वर्णन
  • निदानका अर्थ तथा रोगोंका सामान्य निदान-निरूपण
  • ज्वर-निदान
  • आगन्तुक-ज्वरका लक्षण
  • रक्त-पित्त-निदान
  • कास (खाँसी)-निदान
  • श्वासरोग-निदान
  • हिक्‍कारोग-निदान
  • राजयक्ष्मा-निदान
  • अरोचक, वमन आदि रोगोंका निदान
  • हृदय-तृषारोगका निदान
  • मदात्यय-निदान
  • अर्श (बवासीर)-निदान
  • अतिसार-ग्रहणी-निदान
  • मूत्राघात-निदान
  • प्रमेहरोग-निदान
  • विद्रधि एवं गुल्म-निदान
  • उदररोग-निदान
  • पाण्डु-शोथ-निदान
  • विसर्परोगका निदान
  • कुष्ठरोगका निदान
  • कृमि-निदान
  • वातव्याधि-निदान
  • वातरक्त-निदान
  • वैद्यकशास्त्रकी परिभाषा
  • पदार्थोंके गुण-दोष और औषधि-सेवनमें अनुपानका महत्त्व
  • ज्वर, अतिसार आदि रोगोंका उपचार
  • नाडीव्रण, कुष्ठ आदि रोगोंकी चिकित्सा
  • स्त्रियोंके रोगोंकी चिकित्सा, ग्रहदोषके उपाय, ऋतुचर्या तथा पथ्यकारक सर्वौषधियाँ
  • मधुर, अम्ल और तिक्त आदि द्रव्योंका वर्ग तथा उनका औषधीय उपयोग
  • ब्राह्मीघृत आदि स्नेहपाकोंकी निर्माण-विधि तथा विविध रोगोंमें उनका उपचार
  • ज्वर-चिकित्सा
  • पलितकेश तथा कर्णशूलके उपचार
  • नेत्र, नाक, मुख, गला, अनिद्रा तथा पादरोग और शस्त्राघातादिजनित रोगोंकी चिकित्सा
  • गर्भ-सम्बन्धी रोग, दन्त तथा कर्णशूल एवं रोमशमन आदिका उपचार
  • भोज्य पदार्थोंका विहित सेवनकाल, बल-बुद्धिवर्धक औषधियाँ तथा विषदोषशमनके उपाय
  • ग्रहणी, अतिसार, अग्निमान्द्य, छर्दि तथा अर्श आदि रोगोंका उपचार
  • सिध्म, अर्श, मूत्रकृच्छ्र, अजीर्ण तथा गण्डमाला आदि रोगोंकी औषधियाँ
  • गणपतिमन्त्रका औषधिक योग तथा शोथ, अजीर्ण, विषूचिका और पीनस आदि विविध रोगोंके उपचार
  • प्रमेह, मूत्रनिरोध, शर्करा, गण्डमाला, भगंदर तथा अर्श आदि रोगोंका निदान
  • आयुवृद्धिकरी औषधिके सेवनकी विधि
  • व्रण आदि रोगोंकी चिकित्सा
  • पटल आदि नेत्ररोग, गुल्म, दन्तकृमि, विविध ज्वर तथा विषदोष-शमनके उपाय
  • गण्डमाला, प्लीहा, विद्रधि, कुष्ठ, दद्रु, सिध्म, पीनस तथा छर्दि आदि विविध रोगोंका उपचार और सुगन्धित द्रव्योंके निर्माणकी विधि
  • सर्प, बिच्छू तथा अन्य विषैले जीव-जन्तुओंके विषकी चिकित्सा
  • विविध स्नेह-पाकोंद्वारा रोगोंका उपचार, स्मरण तथा मेधाशक्तिवर्धक ब्राह्मी-घृतादिके निर्माणकी विधि
  • बुद्धि-शुद्धकर ओषधि, विविध अभ्यङ्गों एवं उपयोगी चूर्णोंके निर्माणकी विधि, विरेचक द्रव्य तथा औषध-सेवनमें भगवान् विष्णुके स्मरणकी महिमा
  • व्याधिहर वैष्णव कवच
  • सर्वकामप्रदा विद्या
  • विष्णुधर्माख्यविद्या
  • विषहरी गारुडी विद्या तथा भगवान् गरुडके विराट् स्वरूपका वर्णन
  • त्रिपुराभैरवी तथा ज्वालामुखी आदि देवियोंके पूजनकी विधि
  • वायुजय-निरूपण
  • उत्तम तथा अधम अश्वोंके लक्षण, अश्वोंके आगन्तुज और त्रिदोषज रोगोंकी चिकित्सा तथा अश्वशान्ति, गजायुर्वेद, गजचिकित्सा और गजशान्ति
  • स्त्रियोंके विविध रोगोंकी चिकित्सा, बालकोंकी रक्षाके उपाय तथा बलवर्धक औषधियाँ
  • गो एवं अश्व-चिकित्सा
  • औषधियोंके पर्यायवाची नाम
  • व्याकरण-निरूपण
  • व्याकरणसार
  • छन्द-विधान
  • छन्द-विधान (आर्या आदि वृत्तोंके लक्षण)
  • छन्द-विधान (समवृत्तलक्षण)
  • छन्द-विधान (अर्द्धसमवृत्त लक्षण)
  • छन्द-विधान (विषमवृत्तलक्षण)
  • छन्द-विधान (प्रस्तार-निरूपण)
  • सदाचार एवं शौचाचारका निरूपण
  • स्नान तथा संक्षेपमें संध्या-तर्पणकी विधि*
  • तर्पण*-विधिका वर्णन
  • बलिवैश्वदेवनिरूपण
  • संध्याविधि*
  • पार्वणश्राद्धविधि*
  • नित्यश्राद्ध, वृद्धिश्राद्ध एवं एकोद्दिष्टश्राद्धका वर्णन
  • सपिण्डीकरणश्राद्धकी विधि
  • धर्मसारका कथन
  • प्रायश्चित्तनिरूपण, चान्द्रायणादि विभिन्न व्रतोंके* लक्षण तथा पञ्चगव्य-विधान
  • भगवान् विष्णुकी महिमा, चतुष्पाद-धर्मनिरूपण, पुराणों तथा उपपुराणों और अठारह विद्याओंका परिगणन, चारों युगोंके धर्मोंका कथन एवं कलियुगमें नामसंकीर्तनका माहात्म्य
  • नैमित्तिक तथा प्राकृतिक प्रलय और भगवान् विष्णुसे पुन: सृष्टिका प्रादुर्भाव
  • कर्मविपाकका कथन
  • अष्टाङ्गयोग एवं एकाक्षर ब्रह्मका स्वरूप तथा प्रणवजपका माहात्म्य
  • भगवद्भक्तिनिरूपण तथा भक्तोंकी महिमा
  • नामसंकीर्तनकी महिमा
  • विष्णुपूजामें श्रद्धा-भक्तिकी महिमा
  • विष्णुभक्तिका माहात्म्य
  • नृसिंहस्तोत्र तथा उसकी महिमा
  • कुलामृतस्तोत्र
  • मृत्य्वष्टकस्तोत्र*
  • अच्युतस्तोत्र
  • ब्रह्मज्ञाननिरूपण तथा षडङ्गयोग
  • आत्मज्ञाननिरूपण
  • गीतासार
  • गीतासार
  • ब्रह्मगीतासार
  • ब्रह्मगीतासार
  • गरुडपुराणका माहात्म्य
  • धर्मकाण्ड—प्रेतकल्प
  • वैकुण्ठलोकका वर्णन, मरणकालमें और मरणके अनन्तर जीवके कल्याणके लिये विहित विभिन्न कर्तव्योंके बारेमें गरुडजीके द्वारा किये गये प्रश्न, प्रेतकल्पका उपक्रम
  • मरणासन्न व्यक्तिके कल्याणके लिये किये जानेवाले कर्म, मृत्युसे पूर्वकी स्थिति तथा कर्मविपाकका वर्णन
  • नरकोंका स्वरूप, नरकोंमें प्राप्त होनेवाली विविध यातनाएँ तथा नरकमें गिरानेवाले कर्म एवं जीवकी शुभाशुभ गति
  • आसन्नमृत्यु-व्यक्तिके निमित्त किये जानेवाले प्रायश्चित्त, दस दान आदि विविध कर्म, मृत्युके बाद किये जानेवाले कर्म, षट्‍‍पिण्डदान, दाह-संस्कारसे पूर्व किये जानेवाले कर्म, दाह-संस्कारके बाद अस्थिसंचयनादि कर्म तथा गृहप्रवेशके समयके कर्म, दुर्मृत्युकी गति, नारायण-बलिका विधान, पुत्तलदाहविधि तथा पञ्चक-मृत्युके कृत्य
  • आशौचमें विहित कृत्य, आशौचकी अवधि, दशगात्रविधि, प्रथमषोडशी, मध्यमषोडशी तथा उत्तमषोडशीका विधान, नौ श्राद्धोंका स्वरूप, वार्षिक कृत्य, जीवका यममार्गनिदान, मार्गमें पड़नेवाले षोडश नगरोंमें जीवकी यातनाका स्वरूप, यमपुरीमें पापात्माओं और पुण्यात्माओंको घोर तथा सौम्यरूपमें यमराजके दर्शन
  • वृषोत्सर्गकी महिमामें राजा वीरवाहनकी कथा, देवर्षि नारदके पूर्वजन्मके इतिहासवर्णनमें सत्संगति और भगवद्भक्तिका माहात्म्य, वृषोत्सर्गके प्रभावसे राजा वीरवाहनको पुण्यलोककी प्राप्ति
  • संतप्तक ब्राह्मण तथा पाँच प्रेतोंकी कथा, सत्संगति तथा भगवत्कृपासे पाँच प्रेतों तथा ब्राह्मणका उद्धार
  • और्ध्वदैहिक क्रियाके अधिकारी तथा जीवित-श्राद्धकी संक्षिप्त विधि
  • राजा बभ्रुवाहनकी कथा, राजाद्वारा प्रेतके निमित्त की गयी और्ध्वदैहिक क्रिया एवं वृषोत्सर्गसे प्रेतका उद्धार
  • श्राद्धान्नका पितरोंके पास पहुँचना, दृष्टान्तरूपमें देवी सीताद्वारा भोजन करते हुए ब्राह्मणके शरीरमें महाराज दशरथ आदिका दर्शन करना, मृत्युके अनन्तर दूसरे शरीरकी प्राप्ति, सत्कर्मकी महिमा तथा पिण्डदानसे शरीरका निर्माण
  • जीवकी ऊर्ध्वगति एवं अधोगतिका वर्णन
  • चौरासी लाख योनियोंमें मनुष्यजन्मकी श्रेष्ठता, मनुष्यमात्रका एकमात्र कर्तव्य—धर्माचरण
  • वृषोत्सर्ग तथा सत्कर्मकी महिमा
  • और्ध्वदैहिक क्रिया, गोदान एवं वृषोत्सर्गका माहात्म्य
  • मरनेके समय तथा मृत्युके अनन्तर किये जानेवाले कर्म, पापात्माओंको रौद्ररूपमें तथा पुण्यात्माओंको सौम्यरूपमें यम-दर्शन, यमदूतोंद्वारा दी जानेवाली यातनाका स्वरूप, शवके निमित्त प्रदत्त छ: पिण्डोंका प्रयोजन, शवदाहकी विधि, संक्षेपमें दशाहसे त्रयोदशाहतकके कृत्य, यममार्गमें पड़नेवाले सोलह पुर तथा प्रेतका विलाप
  • यममार्गके सोलह पुरोंका वर्णन
  • समस्त शुभाशुभ कर्मोंके साक्षी ब्रह्माके पुत्र श्रवणदेवोंका स्वरूप
  • विविध दानादि कर्मोंका फल प्रेतको प्राप्त होना, पददानका माहात्म्य, जीवको अवान्तर-देहकी प्राप्तिका क्रम
  • जीवका यमपुरीमें प्रवेश, वहाँ शुभाशुभ कर्मोंका फलभोग, कर्मानुसार अन्य देहकी प्राप्ति, मनुष्य-जन्म पाकर धर्माचरण ही मुख्य कर्तव्य
  • प्रेतबाधाका स्वरूप तथा मुक्तिके उपाय
  • प्रेतबाधाजन्य दीखनेवाले स्वप्न, उनके निराकरणके उपाय तथा नारायणबलिका विधान
  • प्रेतयोनि दिलानेवाले निन्दित कर्म, पञ्चप्रेतोपाख्यान तथा प्रेतत्वप्राप्ति न करानेवाले श्रेष्ठ कर्म
  • प्रेतबाधाजन्य विविध स्वप्न तथा उसका प्रायश्चित्तविधान
  • अल्पमृत्युके कारण तथा बालकोंकी अन्त्येष्टिक्रियाका निरूपण
  • बालकोंकी अन्त्येष्टिक्रियाका स्वरूप, सत्पुत्रकी महिमा तथा औरस और क्षेत्रज आदि पुत्रोंद्वारा अन्त्येष्टि करनेका फल
  • सपिण्डीकरण श्राद्धका महत्त्व, प्रतिवर्ष विहित मासिक श्राद्ध आदिकी अनिवार्यता, पति-पत्नीके सह-मरण आदिकी विशेष परिस्थितिमें पाक एवं पिण्डदान आदिकी विभिन्न व्यवस्थाका निरूपण तथा बभ्रुवाहनकी कथा
  • प्रेतत्वमुक्तिके उपाय
  • दानधर्मकी महिमा, आतुरकालके दानका वैशिष्टॺ, वैतरणी-गोदानकी महिमा
  • और्ध्वदैहिक क्रियामें विहित पद आदि विविध दानोंका फल तथा जीवको प्राप्त देहके स्वरूपका वर्णन
  • शुक्र-शोणितके संयोगसे जीवका प्रादुर्भाव, गर्भमें जीवका स्वरूप तथा उसकी वृद्धिका क्रम, शरीरके निर्माणमें पञ्चतत्त्वादिका अवदान, षाट्कौशिक शरीर, गर्भसे जीवके बाहर निकलनेपर विष्णुमायाद्वारा मोहित होना, आतुर व्यक्तिके लिये क्रियमाण कर्म तथा उनका फल, पिण्ड और ब्रह्माण्डकी समान स्थिति
  • यमलोक, यममार्ग, यमराजके भवन तथा चित्रगुप्तके भवनका वर्णन, यमदूतोंद्वारा पापियोंको पीड़ित करना
  • इष्टापूर्तकर्मकी महिमा तथा और्ध्वदैहिक कृत्य, दस पिण्डदानसे आतिवाहिक शरीरके निर्माणकी प्रक्रिया, एकादशाहादि श्राद्धका विधान, शय्यादानकी महिमा एवं सपिण्डीकरण-श्राद्धका स्वरूप
  • सपिण्डीकरण-श्राद्धमें प्रेतपिण्डके मेलनका विधान, पितरोंकी प्रसन्नताका फल, पञ्चक-मरण तथा शान्तिविधान, पुत्तलिकादाह, प्रेतश्राद्धमें त्याज्य अठारह पदार्थ, मलिनषोडशी, मध्यमषोडशी तथा उत्तमषोडशी श्राद्ध, शवयात्रा-विधान
  • तीर्थमरण एवं अनशनव्रतका माहात्म्य, आतुरावस्थाके दानका फल, धनकी एकमात्र गति दान तथा दानकी महिमा
  • और्ध्वदैहिक कर्ममें उदकुम्भदानका माहात्म्य
  • तीर्थमरणकी महिमा, अन्त समयमें भगवन्नामकी महिमा, शालग्रामशिला तथा तुलसीकी सन्निधिमें मरणका फल, मुक्तिदायक तथा स्वर्गदायक प्रशस्त कर्म, इष्टापूर्तकर्म तथा अनाथ प्रेतके संस्कारका माहात्म्य
  • आशौचकी व्यवस्था
  • दुर्मृत्यु होनेपर सद्‍गतिलाभके लिये नारायणबलिका विधान
  • वृषोत्सर्गकी संक्षिप्त विधि
  • भूमि तथा गोचर्म भूमि आदि दानोंका माहात्म्य और ब्रह्मस्वहरणका दोष
  • शुद्धि-विधान
  • दुर्मृत्यु तथा अकालमृत्युपर किये जानेवाले श्राद्धादि कर्म और सर्पदंशसे मृत्युपर विहित क्रिया-विधान
  • पार्वण आदि श्राद्धोंके अधिकारी; एकसे अधिककी मृत्युपर पिण्डदान आदिकी व्यवस्था; मृत्युतिथि-मासके अज्ञात होनेपर तथा प्रवासकालमें मृत्यु होनेपर श्राद्ध आदिकी व्यवस्था; नित्य एवं दैव तथा वृद्धि आदि श्राद्धोंकी कर्तव्यताका प्रतिपादन
  • सत्कर्मकी महिमा तथा कर्मविपाकका फल
  • यममार्गमें स्थित वैतरणी नदीका वर्णन, पापकर्मोंसे घोर वैतरणीमें निवास, वैतरणीसे पार होनेके लिये वैतरणी-धेनुदान, भगवान् विष्णु, गङ्गा तथा ब्राह्मणकी महिमा
  • दु:खी गर्भस्थ जीवका विविध प्रकारका चिन्तन करना, यमयातनाग्रस्त जीवका सदा सुकृत करनेका उपदेश देना
  • भगवान् विष्णुद्वारा गरुडको दिये गये महत्त्वपूर्ण उपदेश, मनुष्य-योनिप्राप्तिकी दुर्लभताका वर्णन, मनुष्य-शरीर प्राप्तकर आत्मकल्याणके लिये सचेष्ट रहना, संसारकी दु:खरूपता तथा अनित्यता और ईश्वरकी नित्यताका वर्णन, कालके द्वारा सभीके विनाशका प्रतिपादन, सत्संग और विवेकज्ञानसे मोक्षकी प्राप्ति, तत्त्वज्ञानरूपी मोक्षप्राप्तिके उपाय, गरुडपुराणकी वक्तृ-श्रोतृपरम्परा तथा गरुडपुराणका माहात्म्य
  • ब्रह्मकाण्ड*
  • भगवान् श्रीहरिकी महिमा तथा उनके सर्वेश्वरत्वका प्रतिपादन, श्रीहरिको श्रीमद्भागवत, विष्णु तथा गरुड—ये तीन पुराण विशेष प्रिय हैं, इनका निरूपण तथा गरुडपुराणका माहात्म्य
  • गरुडजीको श्रीकृष्णद्वारा भगवान् विष्णुकी महिमा बताना तथा प्रलयकालके अन्तमें योगनिद्रामें शयन कर रहे उन भगवान् विष्णुको सृष्टि-हेतु अनेक प्रकारकी स्तुति करते हुए जगाना
  • नारायणसे सृष्टिका प्रादुर्भाव तथा तत्त्वाभिमानी देवोंका प्राकटॺ
  • देवताओंद्वारा नारायणकी स्तुति
  • नारायणसे प्राकृत तथा वैकृत सृष्टिका विस्तार
  • नारायणकी पूर्णताका वर्णन तथा पदार्थोंके सारासारका निर्णय
  • परमात्मा हरि तथा देवी महालक्ष्मीके विभिन्न अवतारोंका वर्णन
  • भगवान् शेष तथा भगवान् रुद्रके विविध अवतार
  • श्रीकृष्णपत्नी देवी नीला (नाग्नजिती)-की कथा
  • भद्रा तथा मित्रविन्दाद्वारा श्रीकृष्णकी भार्या बननेकी कथा
  • सूर्यपुत्री कालिन्दीकी कथा
  • लक्ष्मणाद्वारा भगवान् श्रीकृष्णको प्राप्त करनेकी कथा
  • सोमपुत्री जाम्बवतीकी कथा
  • अंतिम पृष्ठ

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