॥ श्रीहरि:॥

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संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • श्रीदेवीभागवतकी आरती
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    श्रीमद्देवीभागवत-माहात्म्य
    • ऋषिगण तथा सूतजीका संवाद, देवीभागवतकी महिमा
    • देवीभागवतके माहात्म्य-प्रसंगमें जाम्बवान‍्के यहाँसे श्रीकृष्णके मणि प्राप्त करने तथा जाम्बवतीसे विवाह करके द्वारका लौटनेकी कथा
    • देवीभागवतके माहात्म्य-प्रसंगमें राजा सुद्युम्नके स्त्री बनने और श्रीमद्देवीभागवत-श्रवणके फलस्वरूप सदाके लिये पुरुष बनकर राज्य-लाभ और परमपद प्राप्त करनेकी कथा
    • देवीभागवतके माहात्म्य-प्रसंगमें मुनिके शापसे रेवती नक्षत्रके पतन, पर्वतसे रेवती नामकी कन्याके प्रादुर्भाव, ऋषि प्रमुचके द्वारा उसके पालन तथा राजा दुर्दमके साथ उसके विवाहकी एवं रेवती नक्षत्रके पुन: स्थापनकी कथा
    • श्रीमद्देवीभागवतपुराणकी श्रवण-विधि, श्रवणके महान् फल तथा माहात्म्यका वर्णन
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    पहला स्कन्ध
    • सूतजी और शौनकजीका संवाद, शौनकजीकी प्रार्थनापर सूतजीके द्वारा पुराणोंके नाम तथा उनकी श्लोक-संख्याका कथन एवं उपपुराणों तथा अट्ठाईस व्यासोंके नाम, भागवतकी महिमा
    • व्यासजीका वनमें जाना, नारदजीका मिलना और भगवान् विष्णु तथा ब्रह्मामें हुए प्राचीन संवादका वर्णन करते हुए व्यासजीको देवीकी उपासना करनेके लिये कहना
    • भगवान् विष्णुके हयग्रीवावतारका कारण तथा ‘हयग्रीव’ स्वरूपसे ‘हयग्रीव’ दानवका वध
    • त्रिविध साहित्य तथा त्रिविध श्रवणका विवेचन करते हुए पुराणकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मधु-कैटभको देवीका वरदान, भगवान् विष्णुका योग-निद्राके अधीन होना, ब्रह्माजीके द्वारा देवीकी स्तुति और भगवान् विष्णुका योग-निद्रासे जागरण
    • मधु-कैटभके साथ भगवान् विष्णुका युद्ध, भगवतीकी स्तुतिसे भगवान‍्के द्वारा मधु-कैटभका सम्मोहन और भगवान् विष्णुके द्वारा उनका वध
    • व्यासजीकी तपस्या और भगवान् शंकरका वरदान, राजा सुद्युम्नकी इला नामक स्त्रीरूपमें परिणति, पुरूरवाकी उत्पत्ति, सुद्युम्नकी देवी-उपासना तथा भगवतीकी कृपासे सुद्युम्नको परमधामकी प्राप्ति, राजा पुरूरवाको उर्वशीकी प्राप्ति और प्रतिज्ञाभंगके कारण उर्वशीका राजाको छोड़कर चले जाना
    • श्रीशुकदेवजीका जन्म और व्यासजीके द्वारा विवाहके लिये कहे जानेपर शुकदेवजीका अस्वीकार करना, वटपत्रपर स्थित बालकरूप भगवान् विष्णुकी कथा
    • भगवान् विष्णु और महालक्ष्मीका तथा भगवान् विष्णु और ब्रह्माका संवाद, व्यासजीके द्वारा शुकदेवजीसे जनकजीके पास मिथिलापुरी जाकर संदेह निवारण करनेका अनुरोध और शुकदेवजीका जानेके लिये प्रस्तुत होना, श्रीशुकदेवजीका मिथिलापुरीमें पहुँचकर नगरके द्वारपालको उपदेश देना, महलके द्वारपर रोके जानेके बाद उनका विलासभवनमें पहुँचना तथा प्रत्येक स्थितिमें निर्विकार रहना
    • राजा जनक और शुकदेवजीके प्रश्नोत्तर, राजा जनकके उपदेशसे शुकदेवजीकी शंकाका निराकरण, व्यासजीके पास लौटनेके बाद उनका विवाह, चार पुत्र तथा एक कन्याकी उत्पत्ति, कन्याके विवाह और संतानका वर्णन, शुकदेवजीका गृह-त्याग और व्यासजीका विषाद, श्रीशंकरजीका अनुग्रह, व्यासजीको शुकदेवका प्रतिबिम्ब-दर्शन
    • व्यासजीका सरस्वती नदीके तटपर निवास, शंतनुके कथा-प्रसंगमें भीष्मजीके द्वारा काशिराजकी कन्याओंके हरण, चित्रांगदके मरण और विचित्रवीर्यके विवाह आदिकी कथा और व्यासजीके द्वारा संतानोत्पादनका प्रसंग
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    दूसरा स्कन्ध
    • सत्यवतीकी उत्पत्ति तथा भगवान् व्यासके प्राकटॺकी कथा
    • राजा महाभिष और गंगाजीको ब्रह्माजीका शाप, महाभिषकी शंतनुके रूपमें उत्पत्ति तथा शंतनुके राज्यपदपर प्रतिष्ठित होने, शंतनुके साथ गंगाजीके विवाह और वसुओंके उनके पुत्ररूपमें उत्पन्न होने, उनके गंगाप्रवाह किये जाने तथा भीष्मके उत्पन्न होनेपर गंगाके चले जानेकी कथा
    • भीष्मप्रतिज्ञा तथा सत्यवतीके साथ शंतनुके विवाह और कौरव-पाण्डवोंके जन्मकी कथा
    • कौरव-पाण्डवोंका संक्षिप्त इतिहास, युद्धमें प्राय: सभीका संहार, व्यासजीके द्वारा श्रीभुवनेश्वरीकी कृपासे गान्धारी, कुन्ती, उत्तरा आदिको मृत सम्बन्धियोंके दर्शन, भगवान् श्रीकृष्ण-बलरामका अन्तर्धान, पाण्डवोंका हिमालय-प्रवेश, परीक्षित् को राज्यप्राप्ति और ब्राह्मणकुमारका शाप
    • रुरुके द्वारा आधी आयु देनेपर प्रमद्वराका पुन: जीवित होना, तक्षकके द्वारा धन प्राप्त करनेपर मन्त्रविद् कश्यपका लौट जाना, फलके अंदर कीड़ेके रूपमें पैठकर तक्षकका परीक्षित् के पास पहुँचकर उन्हें काटना और परीक्षित् की मृत्यु
    • जनमेजयका राज्याभिषेक, उत्तंकके अनुरोधसे सर्पयज्ञका आयोजन, आस्तीकको वचन देनेके कारण जनमेजयके द्वारा सर्पयज्ञकी समाप्ति और आस्तीकके जन्मका इतिहास
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    तीसरा स्कन्ध
    • जनमेजयका श्रीव्यासजीसे प्रधान देवता तथा ब्रह्माण्डकी उत्पत्ति एवं स्वरूपके सम्बन्धमें प्रश्न, ब्रह्माजीके द्वारा नारदजीके प्रति भगवती आद्या शक्तिके प्रभावका वर्णन, श्रीदेवीजीके द्वारा दिये हुए विमानपर श्रीब्रह्मा, विष्णु, महेशका विविध लोकोंमें गमन तथा वहाँके विलक्षण दृश्योंको देखते हुए अन्तमें भगवतीके दिव्य द्वीपमें पहुँचना
    • ब्रह्माजीका भगवतीके चरणनखमें समस्त देवता, लोक आदिको देखना तथा भगवान् विष्णु, भगवान् शंकर और ब्रह्माके द्वारा भगवती जगदम्बिकाकी स्तुति
    • जगदम्बिकाके द्वारा अपने स्वरूपका वर्णन तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकरके लिये महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकालीको अर्पण करके उनको कार्य करनेका आदेश
    • नारदजीके पूछनेपर ब्रह्माजीके द्वारा परमात्माके स्थूल और सूक्ष्म स्वरूपका, त्रिविध सृष्टि तथा गुणादिका वर्णन
    • भगवती देवीकी कृपासे मूर्ख उतथ्यके महान् पण्डित सत्यव्रत ब्राह्मण बन जानेकी कथाका आरम्भ, अनायास सारस्वतमन्त्रके उच्चारणसे भगवतीकी महती कृपा
    • तीन प्रकारके यज्ञ, मानसयज्ञकी महत्ता और जनमेजयसे देवी-यज्ञ करनेके लिये व्यासजीकी प्रेरणा
    • भगवान् विष्णुद्वारा अम्बिका-यज्ञ और आकाशवाणी
    • जनमेजयके प्रश्न करनेपर श्रीव्यासजीके द्वारा देवीकी महिमाका कथन, राजा ध्रुवसंधिकी कथा, अपने-अपने दौहित्रोंके पक्षमें राजा युधाजित् और वीरसेनका विवाद एवं युधाजित् और वीरसेनका युद्ध, वीरसेनकी मृत्यु, मनोरमाका पुत्र सुदर्शनको लेकर मन्त्री विदल्लके साथ मुनि भरद्वाजके आश्रममें गमन और भरद्वाजके द्वारा उसे आश्रयदान
    • राजकुमार सुदर्शनको मारनेके लिये युधाजित् का भरद्वाजाश्रमपर जाना, मुनिसे मनोरमा तथा सुदर्शनको बलपूर्वक छीन ले जानेकी बात कहना तथा मुनिका रहस्यभरा उत्तर देना, भरद्वाजकी बात सुनकर मन्त्रीकी सम्मतिसे युधाजित् का लौट जाना तथा कामबीज मन्त्रके प्रभावसे सुदर्शनका जगदम्बिकाकी कृपा प्राप्त करना
    • राजकुमारी शशिकलाका सुदर्शनको मनमें वरण करना, काशिराज-रानीका कन्याको समझाना, कन्याका सुदर्शनसे विवाह करनेका निश्चय प्रकट करना, सुदर्शनका तथा अन्यान्य राजाओंका स्वयंवरमें पहुँचना
    • शशिकलाके स्वयंवरमें राजाओंका परस्पर विवाद, शशिकलाका सुदर्शनसे विवाह करनेका पूर्ण निश्चय, राजाओंके कोलाहल करनेपर सुबाहुका शशिकलासे सम्मति लेना
    • शशिकलाका सुदर्शनके साथ विवाह, सुदर्शनका नवविवाहिता पत्नी शशिकलाको लेकर जाना, राजाओंसे संग्राम, देवीका प्राकटॺ, देवीके द्वारा युधाजित् और शत्रुजित् का वध तथा सुबाहुके द्वारा देवीकी स्तुति
    • सुबाहुको देवीका वरदान और आदेश, सुदर्शनके द्वारा देवीकी स्तुति और देवीका वरदान, राजाओंके पूछनेपर सुदर्शनके द्वारा देवीकी महिमाका वर्णन, सुदर्शनके द्वारा अयोध्यापुरीमें देवीकी स्थापना, राज्याभिषेक और सुबाहुके द्वारा काशीमें दुर्गाजीकी प्रतिष्ठा
    • व्यासजीद्वारा नवरात्रव्रत-विधिका वर्णन तथा पूजामें निषिद्ध कन्याओंका विवेचन, सुशील वैश्यको देवीकी प्रसन्नता-प्राप्ति
    • नवरात्र-व्रतके प्रसंगमें श्रीरामचरित्रका वर्णन
    • सीताहरण और दैवके विषयमें राम-लक्ष्मणकी बातचीत, श्रीनारदजीद्वारा नवरात्र-व्रतोपदेश और श्रीरामका व्रत करना
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    चौथा स्कन्ध
    • जनमेजय और व्यासजीके अवतारविषयक प्रश्नोत्तर, कश्यपजीको वरुण और ब्रह्माका शाप तथा अदितिको दितिका शाप
    • जनमेजयके पूछनेपर व्यासजीके द्वारा मायाकी महिमाका कथन
    • श्रीनर-नारायणको तपसे डिगानेमें इन्द्रकी असफलता और इन्द्रके द्वारा कामदेव एवं वसन्तका अप्सराओंसहित वहाँ भेजा जाना, नारायणके द्वारा उर्वशी आदिकी उत्पत्ति और नारायणके साथ अप्सराओंका संवाद
    • नारायणसे नरकी बातचीत, च्यवन-प्रह्लादका संवाद, प्रह्लादका नैमिषारण्य-गमन तथा प्रह्लादके साथ नारायणका युद्ध
    • देवताओंके साथ दैत्योंका युद्ध और हारे हुए दैत्योंको शुक्राचार्यके द्वारा अभयदान, शंकरकी तपस्या, देवताओंका दैत्योंपर आक्रमण, दैत्योंका शुक्र-माताकी शरणमें जाना, शुक्र-माताकी देवताओंको निद्रावश कर देना, भगवान् विष्णुके सुदर्शनचक्रसे शुक्र-माताका वध
    • भगवान् विष्णुको भृगुका शाप, शुक्र-माता या भृगु-पत्नीका पुनर्जीवन, इन्द्रकन्या जयन्तीके द्वारा तपोनिरत शुक्राचार्यकी सेवा, बृहस्पतिका शुक्राचार्य बनकर दैत्योंको छलना, दैत्योंके द्वारा शुक्राचार्यका तिरस्कार, शुक्राचार्यके द्वारा दैत्योंको शाप, दैत्योंका पुन: शुक्राचार्यकी शरणमें जाना तथा शुक्राचार्यका प्रसन्न होना
    • देव-दानव-युद्ध और देवीके द्वारा देवासुर-संग्रामका निवारण
    • जनमेजयके पूछनेपर व्यासजीके द्वारा भगवान‍्के विविध अवतारोंका वर्णन तथा नारायणके आश्रमपर आयी हुई अप्सराओंका पूर्ववृत्तान्त
    • भाराक्रान्त पृथ्वीका भगवान‍्की शरणमें जाना, योगमायाका आश्वासन देना
    • देवीकी महिमाका वर्णन तथा श्रीकृष्णावतारके कथाप्रसंगमें वसुदेवजीकी बुद्धिमत्तासे देवकीकी कंसकी तलवारसे रक्षा, देवकीके बालकका कंसके द्वारा मारा जाना
    • कंसके हाथ मारे जानेवाले देवकीके छ: बालकोंके पूर्वजन्मोंकी कथा तथा देवताओं और दानवोंके अंशावतारका वर्णन
    • कारागारमें भगवान् श्रीकृष्णका अवतार, वसुदेवजीके द्वारा श्रीकृष्णको नन्दभवनमें पहुँचाना, योगमायाके द्वारा कंसको चेतावनी, नवजात बालकोंको मारनेके लिये कंसका राक्षसोंको आदेश, श्रीकृष्णावतारका संक्षिप्त चरित्र—नन्दोत्सवसे लेकर प्रद्युम्नके जन्मतककी कथा
    • श्रीकृष्णका शिवजीकी प्रसन्नताके लिये तप करना और शिवजीके द्वारा श्रीकृष्णको वरदान
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    पाँचवाँ स्कन्ध
    • रम्भ-करम्भकी कथा तथा महिषासुर और रक्तबीजकी उत्पत्ति, महिषासुरके द्वारा इन्द्रके पास दूत भेजा जाना, दूतका लौटना और महिषासुरका देवताओंपर आक्रमण करनेके लिये दैत्योंको प्रोत्साहन देना
    • महिषासुरका सामना करनेके विषयमें इन्द्रका देवताओंसे तथा गुरु बृहस्पतिजीसे परामर्श एवं बृहस्पतिजीका इन्द्रके प्रति उपदेश, इन्द्रका भगवान् ब्रह्मा, शंकर तथा विष्णुके पास जाना और इन्द्रादि देवताओंका महिषासुर, बिडाल और ताम्रके साथ युद्ध
    • महिषासुर आदिके साथ भगवान् विष्णु और शंकरका भीषण युद्ध, भगवान् विष्णु, शंकर और ब्रह्माका स्वधाम लौट जाना, इन्द्रादि देवताओंकी पराजय और इन्द्रका ब्रह्माजी तथा शिवजीको साथ लेकर वैकुण्ठमें भगवान‍्के समीप गमन
    • भगवान् विष्णुकी सम्मतिसे देवताओंके द्वारा तेज:प्रदान तथा उस सम्मिलित तेजसमूहसे भगवतीका प्राकटॺ, देवताओंके द्वारा देवीको आयुध-आभरणादि-दान और महिषासुरकी आज्ञासे उसके मन्त्रीका देवीके पास जाना
    • महिषासुरके मन्त्रीके साथ देवीकी बातचीत और मन्त्रीका लौटकर महिषासुरको देवीका संदेश कहना, महिषासुरका मन्त्रियोंसे परामर्श और महिषासुरके द्वारा ताम्रको देवीके पास भेजा जाना
    • ताम्रका भागकर लौट आना, महिषासुरका मन्त्रियोंके साथ परामर्श करना और वाष्कल तथा दुर्मुखको भेजना, देवीके द्वारा वाष्कल और दुर्मुखका वध
    • चिक्षुराख्य, ताम्राक्ष, असिलोमा और विडालाक्षका वध
    • महिषासुरका देवीके सामने जाकर उनसे बातचीत करना तथा उसी प्रसंगमें मन्दोदरीका इतिहास कहना
    • भगवती चण्डिकाद्वारा महिषासुरका वध तथा देवताओंके द्वारा जगदम्बाकी स्तुति
    • जनमेजयका प्रश्न, श्रीव्यासजीके द्वारा देवीके मणिद्वीप पधारने तथा राजा शत्रुघ्नके राज्यकी सर्वोत्तम स्थितिका वर्णन
    • शुम्भ-निशुम्भको ब्रह्माजीके द्वारा वरदान, देवताओंके साथ उनका युद्ध और देवताओंकी पराजय, देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति और उनका प्राकटॺ
    • भगवतीके श्रीविग्रहसे कौशिकीका प्राकटॺ, देवीकी कालिकारूपमें परिणति, देवताओंको आश्वासन, शुम्भ-निशुम्भको देवीके पधारनेका संवाद प्राप्त होनेपर उनका मन्त्रियोंसे परामर्श, शुम्भके द्वारा प्रेरित दूत सुग्रीवसे जगदम्बाकी बातचीत
    • धूम्रलोचन और देवीका संवाद तथा धूम्रलोचन-वध
    • चण्ड-मुण्डका निधन तथा रक्तबीजके साथ देवीकी बातचीत
    • देवताओंकी शक्तियोंका प्राकटॺ और महायुद्ध तथा रक्तबीज-वध
    • निशुम्भ और शुम्भका निधन
    • राजा सुरथ और समाधि वैश्यका सुमेधा मुनिके आश्रमपर गमन और सुमेधाके द्वारा देवीमहिमाका वर्णन
    • सुमेधाके द्वारा देवीकी पूजा-विधिका वर्णन एवं सुरथ-समाधिकी तपस्या तथा देवीकृपासे सुरथको राज्य-लाभ और समाधिको ज्ञानप्राप्ति
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    छठा स्कन्ध
    • वृत्रासुरके प्रसंगमें ऋषियोंका प्रश्न, सूतजीका उत्तर, इन्द्रके द्वारा विश्वरूपका वध, त्वष्टाके यज्ञसे वृत्रका प्रादुर्भाव
    • वृत्रासुरके द्वारा इन्द्रकी पराजय
    • वृत्रासुरकी तपस्या तथा वर-प्राप्ति, वृत्रके द्वारा देवताओंपर विजय, वृत्रको मारनेकी योजना
    • वृत्रासुरका वध, ब्रह्महत्याके भयसे इन्द्रका मानसरोवरमें छिप जाना, नहुषको इन्द्रपदकी प्राप्ति और नहुषकी शचीपर आसक्ति
    • देवताओंका बृहस्पतिजीसे परामर्श, बृहस्पतिजीकी सम्मतिके अनुसार कार्य-सम्पादन, इन्द्राणीपर देवीकी कृपा, नहुषका मुनियोंकी पालकीपर सवार होना और मुनिके शापसे नहुषका पतन तथा उसे सर्प-योनिकी प्राप्ति
    • त्रिविध कर्म, युगधर्म, तीर्थ, चित्तशुद्धि, तीर्थकी महत्ता और वसिष्ठ-विश्वामित्रके कलहका वर्णन
    • वसिष्ठजीके मैत्रावरुणि नामका कारण और निमिके नेत्र-पलकोंमें रहनेकी कथा
    • हैहयवंशी क्षत्रियोंद्वारा भृगुवंशी ब्राह्मणोंका संहार, देवीकी कृपासे एक भार्गव ब्राह्मणीकी जाँघसे तेजस्वी बालककी उत्पत्ति
    • भगवान् शंकरद्वारा लक्ष्मीको वरदान, अश्वरूप बने हुए भगवान् विष्णुके द्वारा अश्वीरूपा लक्ष्मीको पुत्रकी प्राप्ति, लक्ष्मीका पुन: अपने स्वरूपको प्राप्त होना
    • लक्ष्मीपुत्र एकवीरका चरित्र
    • राजकुमारी एकावलीका चरित्र, एकावलीका कालकेतुके द्वारा हरण, एकवीरके द्वारा कालकेतुका वध और एकावली-एकवीरका विवाह
    • व्यास-नारद-संवाद, नारद और पर्वतका परस्पर शाप-प्रदान, नारदको वानर-मुखकी प्राप्ति और दमयन्तीसे विवाह, दोनों ऋषियोंका परस्पर शाप-मोचन तथा मेल
    • मुनि नारदको मायावश स्त्रीके रूपकी प्राप्ति, राजा तालध्वजसे विवाह, अनेकों पुत्र-पौत्रोंकी प्राप्ति, सबका मरण और शोक, भगवत्कृपासे नारदजीको पुन: स्वरूप-प्राप्ति
    • भगवान् विष्णुके द्वारा महामायाका महत्त्व-वर्णन, व्यासजीके द्वारा जनमेजयके प्रति भगवतीकी महिमाका कथन
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    सातवाँ स्कन्ध
    • व्यासजीके प्रति जनमेजयका सृष्टिविषयक प्रश्न
    • राजा शर्यातिकी कथाका आरम्भ, सुकन्याके द्वारा महर्षि च्यवनके नेत्रोंका छेदा जाना, महर्षिके कोपसे शर्यातिका ससैन्य अस्वस्थ होना, च्यवनका अपने साथ सुकन्याका विवाह करनेके लिये कहना और सुकन्याकी प्रसन्नतासे च्यवनके साथ उसका विवाह
    • सुकन्याद्वारा च्यवन मुनिकी सेवा, अश्विनीकुमारोंका आगमन, उनके द्वारा च्यवन ऋषिको नेत्र तथा यौवनकी प्राप्ति
    • च्यवनको नेत्रयुक्त तरुण देखकर शर्यातिका संदेह; संदेहभंग, शर्यातिके द्वारा यज्ञानुष्ठान और उसमें च्यवनकी कृपासे अश्विनीकुमारोंको सोमरसका अधिकार प्राप्त होना, राजा रेवतका ब्रह्मलोकमें जाना
    • राजा रेवतका ब्रह्माजीके पास जाना और उनकी सम्मतिसे रेवती-बलरामका विवाह, इक्ष्वाकुवंशका तथा यौवनाश्वकी दक्षिण कुक्षिसे मान्धाताके जन्मका वर्णन
    • सत्यव्रतका त्रिशंकु नाम होनेका कारण, भगवतीकी कृपासे सत्यव्रतकी शापमुक्ति, सत्यव्रतका सदेह स्वर्ग जानेका आग्रह, वसिष्ठके द्वारा सत्यव्रतको शाप, हरिश्चन्द्रकी कथाका प्रारम्भ
    • त्रिशंकुपर विश्वामित्रकी कृपा, विश्वामित्रके तपोबलसे त्रिशंकुका सदेह स्वर्गगमन, हरिश्चन्द्रकी कथा
    • राजा हरिश्चन्द्रपर विश्वामित्रका कोप तथा विश्वामित्रकी कपटपूर्ण बातोंमें आकर हरिश्चन्द्रका राज्यदान, दक्षिणाके लिये हरिश्चन्द्रके साथ विश्वामित्रका दुर्व्यवहार
    • विश्वामित्रकी दक्षिणा चुकानेके लिये राजा हरिश्चन्द्रका काशीगमन, रानीसे बातचीत, ब्राह्मणके हाथ रानी और राजकुमारका विक्रय
    • हरिश्चन्द्रका चाण्डालके हाथ बिककर विश्वामित्रकी दक्षिणा चुकाना और चाण्डालके आज्ञानुसार श्मशानघाटका काम सँभालना
    • चाण्डालकी आज्ञासे हरिश्चन्द्रका श्मशानघाटपर जाना
    • साँपके काटनेसे रोहितकी मृत्यु, रानीका विलाप और उनके प्रति चाण्डालका नृशंस व्यवहार
    • राजा हरिश्चन्द्र और रानी शैब्याका परस्पर परिचय, शरीरत्यागकी तैयारी, देवताओंका आगमन और हरिश्चन्द्रका अयोध्यावासियोंके साथ स्वर्गगमन
    • जगदम्बाके दुर्गा, शताक्षी और शाकम्भरी नामोंका इतिहास; महागौरी, महालक्ष्मीके अन्तर्धान तथा पुन: प्राकटॺकी कथा; सिद्धपीठोंका वर्णन
    • सिद्धपीठ और वहाँ विराजनेवाली शक्तियोंकी नामावली
    • तारकासुरसे पीड़ित देवताओंद्वारा भगवतीकी स्तुति तथा हिमालयके घर देवीका प्राकटॺ; हिमालयकी प्रार्थनापर देवीका ज्ञानोपदेश प्रारम्भ
    • देवीका अपना विराट्‍रूप दिखाना तथा पुन: सौम्यरूपमें प्रकट हो जाना, तदनन्तर हिमालयको पुन: ज्ञानोपदेश करना
    • देवीका हिमालयको ज्ञानोपदेश—विविध योगोंका वर्णन
    • देवीके द्वारा हिमालयको ज्ञानोपदेश—ब्रह्मस्वरूपका वर्णन
    • देवीके द्वारा ज्ञानोपदेश—भक्तिका प्रकार तथा ज्ञान-प्राप्तिकी महिमा
    • देवीके द्वारा देवीतीर्थों, व्रतों, उत्सवों तथा पूजनके प्रकारोंका वर्णन
    • देवी-पूजनके विविध प्रसंगोंका संक्षिप्त वर्णन
    • पूजा-विधि एवं फलश्रुति
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    आठवाँ स्कन्ध
    • सृष्टिके आरम्भमें स्वायम्भुव मनुके द्वारा देवीकी स्तुति तथा वाराहावतारकी संक्षिप्त कथा
    • स्वायम्भुव मनुकी कन्याओंके वंशका संक्षिप्त परिचय और सातों द्वीपोंके उत्थानका उपक्रम
    • भूमण्डलके विस्तारका और आम्र, जाम्बू, कदम्ब एवं वटवृक्षके फलोंके रससे प्रकट हुई नदियोंका वर्णन तथा गंगाजीके अवतरणका वृत्तान्त
    • इलावृतवर्षमें भगवान् शंकरद्वारा भगवान् श्रीहरिके संकर्षणरूपकी, भद्राश्ववर्षमें भद्रश्रवाके द्वारा हयग्रीवरूपकी, हरिवर्षमें प्रह्लादके द्वारा नृसिंहरूपकी, केतुमालवर्षमें श्रीलक्ष्मीजीके द्वारा कामदेवरूपकी और रम्यकवर्षमें मनुजीके द्वारा मत्स्यरूपकी स्तुति-उपासना
    • हिरण्यमयवर्षमें अर्यमाके द्वारा कच्छपरूपकी, उत्तरकुरुवर्षमें पृथ्वीदेवीके द्वारा वाराहरूपकी एवं किम्पुरुषवर्षमें श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा श्रीरामचन्द्ररूपकी और भारतवर्षमें श्रीनारदजीके द्वारा नारायणरूपकी स्तुति-उपासनाका वर्णन तथा भारतवर्षकी महिमाका कथन
    • प्लक्ष, शाल्मलि, कुश, क्रौंच, काक और पुष्करद्वीपोंका वर्णन
    • लोकालोकपर्वतकी व्यवस्था तथा सूर्यकी गतिका वर्णन
    • चन्द्रमा आदि ग्रहोंकी गतिका, शिशुमार चक्रका तथा राहुमण्डलादिका वर्णन
    • अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पातालका वर्णन
    • नारदद्वारा भगवान् अनन्तका यशोगान तथा नरक-नामावली
    • तामिस्र आदि नरकोंका वर्णन
    • देवीकी उपासनाके प्रसंगका वर्णन
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    नवाँ स्कन्ध
    • पंचविध प्रकृतिका स्पष्टीकरण तथा अंश, कला एवं कलांशका विशद विवेचन
    • परब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराधासे प्रकट चिन्मय देवी और देवताओंके चरित्र
    • परिपूर्णतम श्रीकृष्ण और चिन्मयी श्रीराधासे प्रकट विराट्स्वरूप बालकका वर्णन
    • सरस्वतीकी पूजाका विधान तथा कवच
    • याज्ञवल्क्यद्वारा भगवती सरस्वतीकी स्तुति
    • विष्णुपत्नी लक्ष्मी, सरस्वती एवं गंगाका परस्पर शापवश भारतवर्षमें पधारना
    • भगवान‍्के मुखारविन्दसे भक्तोंके महत्त्व और लक्षणोंका विशद वर्णन
    • कलियुगके भावी चरित्रका, कालमानका तथा गोलोककी श्रीकृष्ण-लीलाका वर्णन
    • पृथ्वीकी उत्पत्तिका प्रसंग, ध्यान और पूजनका प्रकार तथा स्तुति एवं पृथ्वीके प्रति शास्त्रविपरीत व्यवहार करनेपर नरकोंकी प्राप्तिका वर्णन
    • गंगाकी उत्पत्तिका विस्तृत प्रसंग
    • गंगाके ध्यान और स्तवनका वर्णन और श्रीराधा-कृष्णके अंगसे ही गंगाका प्रादुर्भाव
    • श्रीराधाजीका गंगापर रोष, श्रीकृष्णके प्रति राधाका उपालम्भ, श्रीराधाके भयसे गंगाका श्रीकृष्णके चरणोंमें छिप जाना, जलाभावसे पीड़ित देवताओंका गोलोकमें जाना, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे राधाका प्रसन्न होना तथा गंगाका प्रकट होना, देवताओंके प्रति श्रीकृष्णका आदेश तथा गंगाके विष्णुपत्नी होनेका प्रसंग
    • तुलसीके कथाप्रसंगमें राजा वृषध्वजका चरित्र-वर्णन
    • वेदवतीकी कथा, इसी प्रसंगमें भगवान् रामके चरित्रका एक अंश-कथन, भगवती सीता तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त
    • भगवती तुलसीके प्रादुर्भावका प्रसंग
    • तुलसीको स्वप्नमें शंखचूड़के दर्शन और शंखचूड़ तथा तुलसीके विवाहके लिये ब्रह्माजीका दोनोंको आदेश
    • तुलसीके साथ शंखचूड़का गान्धर्व-विवाह तथा देवताओंके प्रति उसके पूर्वजन्मका स्पष्टीकरण
    • पुष्पदन्तका दूत बनकर शंखचूड़के पास जाना और शंखचूड़के द्वारा तुलसीके प्रति ज्ञानोपदेश
    • शंखचूड़का पुष्पभद्रा नदीके तटपर जाना, वहाँ भगवान् शंकरका दर्शन तथा उनसे विशद वार्तालाप
    • भगवान् शंकर और शंखचूड़के पक्षोंमें घोर युद्ध, शंकर और शंखचूड़का युद्ध, शंकरके छोड़े हुए त्रिशूलसे शंखचूड़का भस्म होना और सुदामा गोपके स्वरूपमें विमानद्वारा गोलोक पधारना
    • शंखचूड़-वेषधारी श्रीहरिद्वारा तुलसीका पातिव्रत्य-भंग, शंखचूड़का पुन: गोलोक जाना, तुलसी और श्रीहरिका वृक्ष एवं शालग्राम-पाषाणके रूपमें भारतवर्षमें रहना तथा तुलसीमहिमा, शालग्रामके विभिन्न लक्षण तथा महत्त्वका वर्णन
    • तुलसी-पूजन, ध्यान, नामाष्टक तथा तुलसीस्तवनका वर्णन
    • सावित्रीदेवीकी पूजा-स्तुतिका विधान
    • राजा अश्वपतिद्वारा सावित्रीकी उपासना तथा फलस्वरूप सावित्री नामक कन्याकी उत्पत्ति, सत्यवान‍्के साथ सावित्रीका विवाह, सत्यवान‍्की मृत्यु, सावित्री और यमराजका संवाद
    • सावित्री-धर्मराजके प्रश्नोत्तर, सावित्रीको वरदान
    • सावित्री-धर्मराजके प्रश्नोत्तर तथा सावित्रीके द्वारा धर्मराजको प्रणाम-निवेदन
    • नरककुण्डों और उनमें जानेवाले पापियों तथा पापोंका वर्णन
    • पंचदेवोपासकोंके नरकमें न जानेका कथन तथा छियासी प्रकारके नरककुण्डोंका विशद परिचय
    • भगवती भुवनेश्वरीके स्वरूप, महत्त्व और गुणोंकी अनिर्वचनीयता
    • भगवती महालक्ष्मीका प्राकटॺ तथा विभिन्न व्यक्तियोंसे उनके पूजित होनेका तथा दुर्वासाके शापसे महालक्ष्मीके देवलोक-त्याग और इन्द्रके दु:खी होकर बृहस्पतिके पास जानेका वर्णन
    • भगवती लक्ष्मीका समुद्रसे प्रकट होना और इन्द्रके द्वारा महालक्ष्मीका ध्यान तथा स्तवन किये जाने और पुन: अधिकार प्राप्त किये जानेका वर्णन
    • भगवती स्वाहा तथा भगवती स्वधाका उपाख्यान, उनके ध्यान, पूजाविधान तथा स्तोत्रोंका वर्णन
    • भगवती दक्षिणाके प्राकटॺका प्रसंग, उनका ध्यान, पूजा-विधान तथा स्तोत्र-वर्णन एवं चरित्रश्रवणकी फलश्रुति
    • देवी षष्ठीके ध्यान, पूजन एवं स्तोत्र तथा विशद महिमाका वर्णन
    • भगवती मंगलचण्डी और मनसादेवीका उपाख्यान
    • आदि गौ सुरभीदेवीका उपाख्यान
    • भगवती श्रीराधा तथा श्रीदुर्गाके मन्त्र, ध्यान, पूजा-विधान तथा स्तवनका वर्णन
  • +
    दसवाँ स्कन्ध
    • स्वायम्भुव मनुकी उत्पत्ति, उनके द्वारा भगवतीकी आराधना और वरप्राप्ति
    • भगवतीका विन्ध्यगिरिपर पधारना, विन्ध्यके प्रति नारदजीके द्वारा सुमेरुकी महिमाका कथन, विन्ध्यके द्वारा सूर्यका मार्गावरोध, देवताओंका भगवान् विष्णुके पास गमन, भगवान् विष्णुकी सम्मतिसे देवताओंका काशीमें अगस्त्यमुनिकी शरणमें जाना और अगस्त्यजीकी कृपासे सूर्यका मार्ग खुलना
    • स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत और चाक्षुष नामक मनुओंका वर्णन
    • वैवस्वत, सावर्णि, दक्षसावर्णि, मेरुसावर्णि, सूर्यसावर्णि, इन्द्रसावर्णि, रुद्रसावर्णि और विष्णुसावर्णि नामक मनुओंका वर्णन, अरुणदानवके वर-लाभ, देवविजय तथा भ्रामरी देवीके द्वारा उसके निधनका वर्णन
  • +
    ग्यारहवाँ स्कन्ध
    • सदाचारका वर्णन
    • सदाचार-वर्णन और रुद्राक्षका माहात्म्य-कथन
    • भूतशुद्धि, भस्ममाहात्म्य तथा प्रात:संध्याका वर्णन
    • गायत्री-महिमा तथा पूजा-विधि
    • मध्याह्न-संध्या, तर्पण और सायं-संध्याका वर्णन
    • गायत्रीपुरश्चरण और प्राणाग्निहोत्रकी विधि
    • प्राजापत्य आदि व्रतोंका वर्णन
    • कामना-सिद्धि और उपद्रव-शान्तिके लिये गायत्रीके विविध प्रयोग
  • +
    बारहवाँ स्कन्ध
    • गायत्री-मन्त्र-जपकी विधिके विषयमें नारदजीका भगवान् नारायणसे प्रश्न, नारायणद्वारा गायत्रीकी प्रधानताका प्रतिपादन तथा उसके चौबीस वर्णोंके ऋषि, छन्द, देवता तथा उन वर्णोंकी शक्ति, रूप एवं मुद्राओंका वर्णन
    • श्रीगायत्रीका ध्यान और गायत्रीकवचका वर्णन
    • गायत्रीहृदय-न्यास और गायत्री-स्तोत्र
    • श्रीगायत्रीसहस्रनाम
    • दीक्षाविधि
    • देवताओंका विजयगर्व, अग्नि और वायुकी तृणको जलाने-उड़ानेमें असमर्थता, इन्द्रको भगवती उमाके दर्शन और उमाके द्वारा ज्ञानोपदेश
    • गायत्रीके अनुग्रहसे गौतमके द्वारा असंख्य ब्राह्मण-परिवारोंकी रक्षा, ब्राह्मणोंकी कृतघ्नता और गौतमके द्वारा ब्राह्मणोंको घोर शाप-प्रदान
    • मणिद्वीपका वर्णन
    • मणिद्वीपका वर्णन
    • मणिद्वीपका वर्णन
    • जनमेजयके द्वारा अम्बायज्ञ तथा देवीभागवतकी महिमा
  • जययुक्त श्रीदेवी-अष्टोत्तर-सहस्रनाम
  • अन्तिम पृष्ठ

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