॥ श्रीहरि:॥

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साधनोपयोगी पत्र

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • १. आनन्दमय ब्रह्मका ध्यान
  • २. व्यवहारकालमें भी भगवान‍्की शरण
  • ३. वैराग्य और चेतावनी
  • ४. भजनके चार साधन और समयकी अमोलकता
  • ५. नाम-जपका सर्वोत्तम स्वरूप
  • ६. चित्त स्थिर करनेके उपाय
  • ७. भगवान‍्में मन लगानेके लिये नाम-जप और प्रेमकी आवश्यकता
  • ८. निर्गुण-निराकारके ध्यानका तत्त्व-रहस्य
  • ९. भजन-ध्यानकी लगनके लिये प्रोत्साहन
  • १०. भजन-ध्यानके प्रभावसे व्यापारका सुधार
  • ११. विषय-विषके नाशके लिये रामनामकी बूटी
  • १२. भजन-ध्यानका प्रभाव
  • १३. निर्गुण-निराकार-ध्यानकी स्थितिके लक्षण
  • १४. सत्संगका रहस्य
  • १५. फिजूलखर्ची और कुरीतियोंको हटानेके लिये प्रेरणा
  • १६. भगवद्भक्तिविषयक महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
  • १७. आत्महत्या कभी नहीं करनी चाहिये
  • १८. कार्यकालमें साधन कैसे किया जाय?
  • १९. घरवालोंको संतोष कराते हुए उपासना करनेके लिये प्रोत्साहन
  • २०. कर्म और ईश्वरभक्तिविषयक दस प्रश्नोंके तात्त्विक उत्तर
  • २१. पिताकी आज्ञाकी रक्षा करते हुए धर्मपालनपर दृढ़ता
  • २२. पिताकी आज्ञाकी रक्षा करते हुए धर्मपालनपर दृढ़ता
  • २३. अध्यात्मविषयक तीस प्रश्नोत्तर
  • २४. गृहस्थोंके लिये दस बातें
  • २५. चेतावनी
  • २६. ध्यानका विषय
  • २७. साधनके लिये जोशकी बातें
  • २८. ध्यानके लिये उत्साह
  • २९. साधनके लिये सावधानी
  • ३०. भगवत्प्रेमके लिये चेतावनी
  • ३१. समय व्यर्थ न बितानेकी प्रेरणा
  • ३२. कर्तव्यका विचार
  • ३३. असली पश्चात्ताप और भगवत्प्रेमके लिये प्रेरणा
  • ३४. समयकी अमूल्यता
  • ३५. प्रेमका विषय
  • ३६. भगवत्प्रेमके उपाय
  • ३७. भगवद्भावोंका प्रचार
  • ३८. संयमकी आवश्यकता
  • ३९. तेज साधनके लिये प्रेरणा
  • ४०. जगज्जनार्दनकी सेवा
  • ४१. निराकार भगवान‍्की भक्ति
  • ४२. उच्चकोटिके महात्माओंका विषय
  • ४३. जीवन्मुक्तका अनुकरण
  • ४४. धनकी निन्दा
  • ४५. भगवत्कृपाका आश्रय
  • ४६. लोभका त्याग
  • ४७. भगवान‍्की प्राप्तिका उपाय
  • ४८. सत्संगका प्रचार कैसे हो?
  • ४९. शास्त्राभ्यासके लिये प्रेरणा
  • ५०. साधनके लिये चेतावनी
  • ५१. गीताभ्यासके लिये प्रोत्साहन
  • ५२. भगवान‍्का नित्य-स्मरण
  • ५३. कर्तव्यपालनपर जोर
  • ५४. मांस-निषेध आदिके विषयमें प्रश्नोत्तर
  • ५५. लौकिक और आध्यात्मिक तिरसठ प्रश्नोत्तर
  • ५६. कार्य करते हुए भगवत्प्राप्तिकी साधना
  • ५७. गुरुडमका विरोध
  • ५८. प्रकृतिके सुधार और भगवान‍्में मन लगानेका विषय
  • ५९. ब्रह्मज्ञान और गुरुके सम्बन्धमें विचार
  • ६०. श्रीशालग्राम, तुलसी और माला-तिलकका विषय
  • ६१. अनुष्ठान आदि विषयक एकादश प्रश्नोत्तर
  • ६२. काम करते हुए भगवान‍्के नाम-रूपका स्मरण
  • ६३. पूजा-पाठका विषय
  • ६४. दु:खोंकी प्राप्तिमें भी भगवद्विधानका अनुभव
  • ६५. श्रद्धा करनेयोग्य भगवान् ही हैं!
  • ६६. क्षेपकरहित मानसके पाठ और गीतादि ग्रन्थोंमें अधिकारका विषय
  • ६७. अन्यायसे रुकनेकी प्रेरणा
  • ६८. उपासना-सम्बन्धी पाँच शंका-समाधान
  • ६९. नाम-जप और भगवद्विषयक लालसा
  • ७०. आत्म-समर्पण
  • ७१. साकार-निराकारका रहस्य
  • ७२. विद्यार्थियोंके लिये उपयोगी शिक्षाएँ
  • अन्तिम पृष्ठ

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