॥ श्रीहरि:॥

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साधना पथ

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • चेतावनी
  • सर्वत्र ईश्वर-दर्शन
  • शरणागति ही सुगम साधन है
  • व्यापारमें सत्यताकी आवश्यकता
  • संगका प्रभाव
  • वैराग्य होनेमें स्थानका प्रभाव
  • परमात्माके ध्यान एवं चिन्तनकी महिमा
  • भगवान् सर्वोपरि हैं
  • कलियुगमें भगवन्नाम-महिमा
  • संसारके सम्बन्धसे ही दु:ख
  • श्रद्धाकी विशेषता
  • विविध प्रश्नोत्तर
  • ब्राह्मणोंके प्रति सद‍्व्यवहारकी प्रेरणा
  • वैराग्यसे उपरति एवं ध्यान
  • पापोंका फल दु:ख
  • भगवान‍्के गुण-प्रभाव
  • बालकोंके लिये शिक्षा
  • धारण करनेयोग्य आवश्यक तीन बातें
  • साधन और निष्ठाकी आवश्यकता
  • प्रेमी भक्तकी स्थिति
  • प्रभुका सौन्दर्य
  • ध्यान और नामजपकी विधियाँ
  • अन्तिम पृष्ठ

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