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॥ श्रीहरि:॥
हिन्दी
ई – पुस्तकें
होम
/ ई – पुस्तकें
/ साधन सुधा सिन्धु
साधन सुधा सिन्धु
लेखक
श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज
भाषा
हिन्दी/संस्कृत
पुस्तक पढ़ें
विषय-सूची
•
प्रथम पृष्ठ
•
नम्र निवेदन
+
ज्ञानयोग (आध्यात्मिक साधना)
•
गीताका ज्ञेय-तत्त्व
•
प्राप्त और प्रतीति
•
मैं-मेरापन कैसे मिटे?
•
भगवान् से नित्ययोग
•
अपने अनुभवका आदर
•
अनुभव और विश्वास
•
शरीरसे अलगावका अनुभव
•
विकारोंसे कैसे छूटें?
•
सार बात
•
मुक्ति सहज है
•
संयोगमें वियोगका दर्शन
•
मुक्तिका रहस्य
•
जाग्रत् में सुषुप्ति
•
हमारा स्वरूप सच्चिदानन्द है
•
दृश्यमात्र अदृश्यमें जा रहा है
•
सत्य क्या है?
•
मैं शरीर नहीं हूँ
•
भय और आशाका त्याग
•
अपनी जानकारीको महत्त्व दें
•
तत्त्वप्राप्तिमें देरी नहीं है
•
अन्त:करणकी शुद्धिका उपाय
•
मुक्ति स्वत:सिद्ध है
•
सबमें परमात्माका दर्शन
•
मन-बुद्धि अपने नहीं
•
निर्दोषताका अनुभव
•
नित्ययोग तथा उसका अनुभव
•
जिज्ञासा और बोध
•
अहम् का नाश तथा तत्त्वका अनुभव
•
करण-निरपेक्ष तत्त्व
•
असत् का वर्णन
•
वर्णनातीतका वर्णन
•
चुप-साधन
•
सत्स्वरूपका अनुभव
•
मुक्ति सहज है
•
मुक्तिका सरल उपाय
•
करण-निरपेक्ष परमात्मतत्त्व
•
स्वत:सिद्ध तत्त्व
•
सत्-असत् का विवेक
•
वासुदेव: सर्वम्
•
प्राप्त तत्त्वका अनुभव
•
सबके अनुभवकी बात
+
अहंकार तथा उसकी निवृत्ति
•
१. लौकिक अहङ्कार
•
२. पारमार्थिक अहङ्कार
+
करणसापेक्ष-करणनिरपेक्ष साधन और करणरहित साध्य
•
करण क्या है?
•
करणसापेक्ष और करणनिरपेक्ष क्या है?
•
करणनिरपेक्ष और करणरहितमें अन्तर
•
धनके दृष्टान्तसे करणनिरपेक्षताका विवेचन
•
करणकी आवश्यकता कहाँतक है?
•
करणरहित (करणनिरपेक्ष) परमात्मतत्त्व
•
करणसापेक्ष साधन
•
करणनिरपेक्ष साधन—
•
करणसापेक्ष और करणनिरपेक्ष साधनमें भेद
+
भगवत्तत्त्व
•
(वासुदेव: सर्वम्)
•
तीन प्रकारकी दृष्टियाँ
•
साध्यतत्त्वकी एकरूपता
•
सहज-निवृत्तिरूप वास्तविक तत्त्व
•
व्यवहारके विविध रूप
•
ज्ञानीके व्यवहारकी विशेषता
•
उपसंहार
+
जिन खोजा तिन पाइया
•
अभ्यास और विवेचन
•
सत्-असत् का विवेक
•
अवस्थातीत तत्त्वका अनुभव
•
करणसे अतीत तत्त्व
•
अहम् हमारा स्वरूप नहीं
+
तत्त्वज्ञान क्या है?
•
(आत्मज्ञान तथा परमात्मज्ञान)
•
तत्त्वज्ञानका सहज उपाय
•
सबसे सुगम परमात्मप्राप्ति
+
असत् का त्याग तथा सत् की खोज
•
सहजनिवृत्ति और स्वत:प्राप्ति
•
विभागयोग
•
शब्दसे शब्दातीतका लक्ष्य
•
अविनाशी रस
+
कर्मयोग (भौतिक साधना)
•
कर्मयोग
•
सभी कर्तव्य कर्मोंका नाम यज्ञ है
•
संसारमें रहनेकी विद्या
•
सेवाकी महत्ता
•
स्वार्थरहित सेवाका महत्त्व
•
कर्मयोगका तत्त्व
•
सेवा कैसे करें?
•
कर्म किसके लिये?
•
कल्याणका सुगम साधन—कर्मयोग
•
भगवान् विवस्वान् को उपदिष्ट कर्मयोग
•
गीताकी अलौकिक शिक्षा
+
योग: कर्मसु कौशलम्
•
उपसंहार—
•
कर्मयोगसे कल्याण
•
गीताका तात्पर्य
•
गीताका अनासक्तियोग
+
भक्तियोग (आस्तिक साधना)
•
गीतामें भक्ति और उसके अधिकारी
•
भगवद्भक्तिका रहस्य
•
भगवद्भजनका स्वरूप
•
भक्तिकी सुलभता
•
सबका कल्याण कैसे हो?
•
अखण्ड साधन
•
माँ!
•
भगवान् से अपनापन
•
सुगम साधन
•
नाम-महिमा
•
नाम-जपकी विधि
•
दस नामापराध
•
होहि राम को नाम जपु
+
मानसमें नाम-वन्दना
•
प्रवचन—१
•
प्रवचन—२
•
प्रवचन—३
•
प्रवचन—४
•
प्रवचन—५
•
प्रवचन—६
•
प्रवचन—७
•
प्रवचन—८
•
प्रवचन—९
+
नाम-जपकी महिमा
•
ज्ञातव्य
+
मूर्ति-पूजा
•
ज्ञातव्य
•
शरणागति
•
शरणागतिका रहस्य
•
भगवत्प्रेम
•
शीघ्र भगवत्प्राप्ति कैसे हो?
•
भगवान् प्रेमके भूखे हैं
•
सच्चा आश्रय
•
शरणागतिकी विलक्षणता
•
भगवान् में अपनापन
•
भगवान् और उनकी दिव्य शक्ति
+
भक्तशिरोमणि श्रीहनुमान् जी की दास्य-रति
•
१-दास्य-रति
•
२-सख्य-रति
•
३-वात्सल्य-रति
•
४-माधुर्य-रति
•
संकीर्तनकी महिमा
•
मुक्ति और भक्ति
•
भक्ति, भक्त तथा भगवान्
•
भक्ति और उसकी महिमा
+
भगवान् का सगुण स्वरूप और भक्ति
•
१. गीतामें समग्र (सगुण) की मुख्यता
•
२. परमात्मा सम्पूर्ण शक्तियोंके मूल हैं
•
३. सबके शासक परमात्मा हैं
•
४. परमात्माके सगुण स्वरूपकी मुख्यता
•
५. ज्ञानमार्ग और भक्तिमार्ग
•
६. भक्तिकी मुख्यता
+
प्रेम, प्रेमी तथा प्रेमास्पद
•
१. हम भगवान् में तथा भगवान् हमारेमें हैं
•
२. भगवान् अपने हैं
•
३. भगवान् प्रेमके अधीन हैं
•
४. नित्यविरह और नित्यमिलन
•
सर्वश्रेष्ठ साधन
•
सब कुछ भगवान् ही हैं
•
विलक्षण भगवत्कृपा
•
वास्तविक सिद्धिका मार्ग
•
प्रार्थना और शरणागति
•
जित देखूँ तित तू
•
भक्तिकी श्रेष्ठता
•
अनिर्वचनीय प्रेम
•
करणनिरपेक्ष साधन—शरणागति
•
गीताकी शरणागति
+
सब जग ईश्वररूप है
•
(वासुदेव: सर्वम्)
•
विविध रूपोंमें भगवान्
•
सर्वत्र भगवद्दर्शन
•
भगवत्प्राप्तिका सुगम तथा शीघ्र सिद्धिदायक साधन
•
गीताकी विलक्षण बात
•
अपने प्रभुको कैसे पहचानें?
•
भगवान् का अलौकिक समग्ररूप
•
अलौकिक साधन—भक्ति
•
प्रार्थना
+
सर्वोपयोगी
•
समयका मूल्य और सदुपयोग
•
वैराग्य
•
सब नाम-रूपोंमें एक ही भगवान्
+
भगवत्तत्त्व
•
निर्गुण-निराकार-तत्त्व
•
सत्-तत्त्व
•
चित्-तत्त्व
•
आनन्द-तत्त्व
•
सत्-चित्-आनन्दकी एकता
•
सगुण-निराकार-तत्त्व
•
अस्ति-तत्त्व
•
भाति-तत्त्व
•
प्रिय-तत्त्व
•
अस्ति, भाति, प्रियकी एकता
•
सगुण-साकार-तत्त्व
•
विग्रह-तत्त्व
•
प्रकाश-तत्त्व
•
प्रेम-तत्त्व
•
सबकी एकता
•
तत्त्व-विवेचन
•
दर्शन, ज्ञान, प्रवेशका प्रकरण
•
अभेद-भेदमार्गका वर्णन
•
उपसंहार
•
सुख कैसे मिले?
•
बार-बार नहिं पाइये मनुष-जनमकी मौज
•
संत और उनकी सेवा
•
बालहितोपदेश-माला
•
विषयासक्ति और भगवत्प्रीतिमें भेद
+
मनकी हलचलके नाशके सरल उपाय
•
भविष्यकी चिन्ता मिटानेके लिये
•
भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालकी चिन्ता मिटानेके लिये
•
हर समय भगवान् के भरोसे प्रसन्न रहनेके लिये
•
अन्त:करणमें अधिक उथल-पुथल होनेपर मनको समझानेके लिये
•
भजन
•
चिन्ता छोड़ते हुए अपने कर्तव्यसे कभी च्युत
•
न हों। श्रीभगवान् की आज्ञा है—
•
श्रीभगवन्नाम-माहात्म्य
•
मनकी हलचलका कारण क्या है?
•
दैवी सम्पदा एवं आसुरी सम्पदा
•
दृढ़ भावसे लाभ
•
भगवत्प्राप्तिसे ही मानव-जीवनकी सार्थकता
•
उपासना शब्दका अर्थ एवं उसका स्वरूप
•
भक्त और आदर्श सन्तान कैसे हो?
+
सर्वोच्च पदकी प्राप्तिका साधन
•
प्राप्त सामर्थ्यका सदुपयोग
•
भगवत्प्राप्तिके लिये भविष्यकी अपेक्षा नहीं
•
मनकी खटपट कैसे मिटे?
•
संसारका आश्रय कैसे छूटे?
•
परमात्मा तत्काल कैसे मिलें?
•
भगवत्प्राप्ति क्रियासाध्य नहीं
•
परमात्मप्राप्तिकी सुगमता
•
मनुष्यका वास्तविक सम्बन्ध
•
सुख-लोलुपताको मिटानेका उपाय
•
इच्छाके त्याग और कर्तव्य-पालनसे लाभ
•
परमात्मप्राप्तिमें भोग और संग्रहकी इच्छा ही महान् बाधक
•
असत् पदार्थोंके आश्रयका त्याग करें
•
वास्तविक बड़प्पन
•
त्यागसे सुखकी प्राप्ति
•
तत्त्वप्राप्तिमें सभी योग्य हैं
•
अभिमान सबको दु:ख देता है
•
सांसारिक सुख दु:खोंके कारण हैं
•
हमारा सम्बन्ध संसारसे नहीं है
•
भगवत्प्राप्ति सहज है
•
संयोगमें वियोगका अनुभव
•
स्वभाव-सुधारकी आवश्यकता
•
अवगुणोंको मिटानेका उपाय
•
वास्तविक उन्नति किसमें?
•
कामनाओंके त्यागसे शान्ति
•
सदुपयोगसे कल्याण
•
नाम-जप और सेवासे भगवत्प्राप्ति
+
हम ईश्वरको क्यों मानें?
•
ज्ञातव्य
•
सत्संगकी आवश्यकता
•
सन्त-महिमा
•
सन्त-चरण-रजका तात्पर्य
•
जीव लौटकर क्यों आता है?
•
श्रीमद्भगवद्गीता और भगवत्प्रेम
•
वास्तविक सुख
•
मनुष्य-जीवनका उद्देश्य
•
मनुष्य-जीवनकी सफलता
•
धन-संग्रहसे हानि
•
मिली हुई सामग्री अपनी नहीं
•
मिला हुआ और देखा हुआ—संसार
•
धनके लोभमें निंदा
•
दृढ़ निश्चयकी महिमा
•
तत्त्वका अनुभव कैसे हो?
•
कारागार—एक शिक्षालय
•
सत्सङ्गका मूल्य समझें
•
पारमार्थिक उन्नति धनके आश्रित नहीं
•
अच्छे बनो
•
वास्तविक बड़प्पन
•
मानव-जीवनका उद्देश्य
•
सावधान रहो!
•
सभी परमात्मप्राप्ति कर सकते हैं
•
दृढ़ विचारसे लाभ
•
भोगासक्ति कैसे छूटे?
•
मनुष्यकी तीन शक्तियाँ
•
प्रतिकूल परिस्थितिसे लाभ
•
स्वाधीनताका रहस्य
•
कल्याण सहज है
•
तत्काल सिद्धिका मार्ग
•
साधनकी मुख्य बाधा
•
संसार जा रहा है!
•
सत्सङ्गसे लाभ कैसे लें?
•
कल्याणका सुगम उपाय—अपनी मनचाहीका त्याग
•
सङ्कल्प-त्यागसे कल्याण
•
अपने साधनको सन्देहरहित बनायें
•
मनुष्य-जीवनकी सफलता
•
बन्धन कैसे छूटे?
•
सच्ची मनुष्यता
•
विश्वास और जिज्ञासा
•
नाशवान् की मुख्यतासे हानि
•
धर्मका सार
•
प्रतिकूलतामें विशेष भगवत्कृपा
•
पराधीनतासे छूटनेका उपाय
•
भगवान् में लगनेका उपाय
•
परमात्मप्राप्तिकी सुगमता
•
परमात्मप्राप्तिमें मुख्य बाधा—सुखासक्ति
•
सुखासक्तिसे छूटनेका उपाय
•
खण्डन-मण्डनसे हानि
•
एक निश्चय
•
विकार आपमें नहीं हैं
•
राग-द्वेषका त्याग
•
सत्सङ्गकी आवश्यकता
•
अहंताका त्याग
•
ममताका त्याग
+
सच्चा गुरु कौन?
•
ज्ञातव्य
•
गुरु कैसा हो?
•
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्
•
नित्ययोगकी प्राप्ति
•
प्राप्त जानकारीके सदुपयोगसे कल्याण
•
जीवकृत सृष्टिसे बन्धन
•
दु:खका कारण—सङ्कल्प
•
दु:ख-नाशका उपाय
•
अनित्य सुखकी रुचि मिटानेकी आवश्यकता
•
काम-क्रोधसे छूटनेका उपाय
•
विकारोंसे छूटनेका उपाय
•
राग-द्वेषसे रहित स्वरूप
•
उद्देश्यकी महत्ता
•
साधक कौन है?
•
मनकी चञ्चलता कैसे मिटे?
•
मृत्युके भयसे कैसे बचें?
+
दुर्गतिसे बचो
•
ज्ञातव्य
+
आहार-शुद्धि
•
ज्ञातव्य
•
भोजनके लिये आवश्यक विचार
•
कर्म-रहस्य
•
देवता कौन?
•
मुक्तिका उपाय
+
गीतामें चरित्र-निर्माण
•
(भगवान् की सम्मुखता)
•
गीतोक्त सदाचार
•
भगवान् विष्णु
•
भगवान् शंकर
•
परमात्मा सगुण हैं या निर्गुण?
•
साधकका कर्तव्य
•
विवेककी जागृति
•
भोग और योग
•
उद्देश्यकी दृढ़तासे लाभ
+
मुक्तिमें सबका समान अधिकार
•
वज्रसूचिकोपनिषद्
•
सत्सङ्ग सुननेकी विद्या
•
संयोग, वियोग और योग
+
समाज-सुधार
•
गीता और रामायणके क्रियात्मक प्रचारकी आवश्यकता
•
कर्मचारियोंके तथा उद्योग-संचालकोंके कर्तव्य
•
वर्ण-व्यवस्थाका तात्पर्य
•
जाति जन्मसे मानी जाय या कर्मसे?
•
अपने कर्मोंके द्वारा भगवान् का पूजन
•
समता कैसे करें?
•
संघर्षका कारण
+
गृहस्थमें कैसे रहें?
•
गृहस्थ-धर्म
•
व्यवहार
•
बालक-सम्बन्धी बातें
•
सन्तानका कर्तव्य
•
स्त्री-सम्बन्धी बातें
•
लड़ाई-झगड़ेका समाधान
+
आवश्यक शिक्षा
•
पारमार्थिक विद्यार्थी
+
किसानोंके लिये शिक्षा
•
खेतीमें हिंसा
•
गौरक्षा
•
गर्भपात महापाप
•
नशा-सेवन
•
मालिकोंके प्रति
•
सुख-शान्तिका उपाय
•
गोहत्या—एक अभिशाप
+
गायकी महत्ता और आवश्यकता
•
प्रश्नोत्तर
•
उपसंहार
•
मातृशक्तिका घोर अपमान
•
दहेज-प्रथासे हानि
•
‘ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी’
+
महापापसे बचो
•
१. ब्रह्महत्या
•
२. मदिरापान
•
३. चोरी
•
४. गुरुपत्नीगमन
•
गर्भपात महापापसे दुगुना पाप है
+
गृहस्थोंके लिये
•
परिवार-नियोजन-कार्यक्रमके प्रचार एवं प्रसारके कारण
•
क्या परिवार-नियोजन आवश्यक है?
•
परिवार-नियोजन-कार्यक्रमके दुष्परिणाम
•
परिवार-नियोजनके दुष्परिणाम भुगत चुके देशोंकी प्रतिक्रिया
+
देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम
•
ईश्वर और प्रकृतिके विधानका तिरस्कार
•
मातृशक्तिका तिरस्कार
•
धर्मका तिरस्कार
•
घोर पापोंसे बचो
•
गर्भपात महापाप क्यों?
+
सबसे बड़ा पाप—गर्भपात
•
गर्भस्थ बच्चेकी हत्याका आँखोंदेखा विवरण
•
गर्भपातके विषयमें धर्मशास्त्रके वचन
+
सर्वश्रेष्ठ हिन्दूधर्म और उसके ह्रासका कारण
•
सर्वश्रेष्ठ धर्म
•
हिन्दुओंकी वृद्धि आवश्यक क्यों?
•
हिन्दुओंके ह्रासका मुख्य कारण
•
कृत्रिम सन्तति-निरोधसे हानि
•
राजाका कर्तव्य
•
आवश्यक चेतावनी
+
पुस्तकोंके नाम तथा उनके लेख, जो ‘साधन-सुधा-सिन्धु’ में संगृहीत हैं
•
१. जीवनका कर्तव्य
•
२. साधन-रहस्य (एकै साधै सब सधै)
•
३. जीवनोपयोगी कल्याण-मार्ग
•
४. सर्वोच्च पदकी प्राप्तिका साधन
•
५. जीवनका सत्य
•
६. कल्याणकारी प्रवचन
•
७. तात्त्विक प्रवचन
•
८. भगवान् से अपनापन
•
९. भगवन्नाम
•
१०. जीवनोपयोगी प्रवचन
•
११. मानसमें नाम-वन्दना
•
१२. सत्संगकी विलक्षणता
•
१३.नाम-जपकी महिमा
•
१४.मूर्ति-पूजा
•
१५.हम ईश्वरको क्यों मानें?
•
१६.दुर्गतिसे बचो
•
१७.आहार-शुद्धि
•
१८.कर्म-रहस्य
•
१९. शरणागति
•
२०. वास्तविक सुख
•
२१. साधकोंके प्रति
•
२२. अच्छे बनो
•
२३. भगवत्प्राप्तिकी सुगमता
•
२४. स्वाधीन कैसे बनें?
•
२५. गृहस्थमें कैसे रहें?
•
२६. सत्संगका प्रसाद
•
२७. सच्चा गुरु कौन?
•
२८. आवश्यक शिक्षा
•
२९. सहज साधना
•
३०. नित्ययोगकी प्राप्ति
•
३१. वासुदेव: सर्वम्
•
३२. साधन और साध्य
•
३३. कल्याण-पथ
•
३४. मातृशक्तिका घोर अपमान
•
३५. जिन खोजा तिन पाइया
•
३६. किसानोंके लिये शिक्षा
•
३७. तत्त्वज्ञान कैसे हो?
•
३८. भगवान् और उनकी भक्ति
•
३९. जित देखूँ तित तू
•
४०. देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम
•
४१. सब जग ईश्वररूप है
•
४२. आवश्यक चेतावनी (यह विकास है या विनाश? जरा सोचिये)
•
४३. गायकी महत्ता और आवश्यकता
•
अंतिम पृष्ठ
सम्बंधित ई-पुस्तकें
सब जग ईश्वररूप है
सत्संग की विलक्षणता
जीवनोपयोगी कल्याण मार्ग
यह विकास है या विनाश ? जरा सोचिये
मातृशक्ति का घोर अपमान
श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी
गीता प्रबोधनी
कल्याणकारी प्रवचन
गृहस्थमें कैसे रहें ?
गीता ज्ञान प्रवेशिका
गीता माधुर्य
क्या गुरु बिना मुक्ति नहीं ?
सार संग्रह
साधन सुधा निधि
नाम जप की महिमा
गीता दर्पण
शिखा (चोटी) धारणकी आवश्यकता
मानस में नाम-वन्दना
प्रश्नोत्तर मणिमाला
मानवमात्र के कल्याण के लिये
भगवन्नाम
शरणागति
सत्संग के अमृत कण
मेरे तो गिरधर गोपाल
एक संत की वसीयत
सहज साधना
कर्म रहस्य
अच्छे बनो
प्रेरक कहानियाँ
मूर्ति पूजा
कल्याण पथ
आदर्श कहानियाँ
सागर के मोती
वासुदेव: सर्वम्
जीवनोपयोगी प्रवचन
तात्त्विक प्रवचन
सब साधनों का सार
भगवत्तत्त्व
अमृत बिन्दु
परम पिता से प्रार्थना
सच्चा गुरु कौन ?
तत्त्वज्ञान कैसे हो?
दुर्गति से बचो
महापाप से बचो
जीवन का सत्य
एकै साधै सब सधै
जीवन का कर्तव्य
सत्य की खोज
भगवान् और उनकी भक्ति
भगवत्प्राप्ति सहज है
ज्ञान के दीप जले
आवश्यक शिक्षा
हम ईश्वर को क्यों मानें?
नित्ययोग की प्राप्ति
भगवान् से अपनापन
साधन और साध्य
गीता माधुर्यम्
संसार का असर कैसे छूटे ?
तू ही तू
वास्तविक सुख
किसान और गाय
सत्संग के फूल
संत समागम
जित देखूँ तित तू
साधकों के प्रति
स्वाधीन कैसे बनें ?
एक नयी बात
सुन्दर समाज का निर्माण
सर्वोच्च पद की प्राप्ति का साधन
भगवत्प्राप्ति की सुगमता
सत्संग का प्रसाद
जिन खोजा तिन पाइया
देश की वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम
सत्संग मुक्ताहार
अमरता की ओर
सब जग ईश्वररूप है
सत्संग की विलक्षणता
जीवनोपयोगी कल्याण मार्ग
यह विकास है या विनाश ? जरा सोचिये
मातृशक्ति का घोर अपमान
श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी
गीता प्रबोधनी
कल्याणकारी प्रवचन
गृहस्थमें कैसे रहें ?
गीता ज्ञान प्रवेशिका
गीता माधुर्य
क्या गुरु बिना मुक्ति नहीं ?
सार संग्रह
साधन सुधा निधि
नाम जप की महिमा
गीता दर्पण
शिखा (चोटी) धारणकी आवश्यकता
मानस में नाम-वन्दना
प्रश्नोत्तर मणिमाला
मानवमात्र के कल्याण के लिये
भगवन्नाम
शरणागति
सत्संग के अमृत कण
मेरे तो गिरधर गोपाल
एक संत की वसीयत
सहज साधना
कर्म रहस्य
अच्छे बनो
प्रेरक कहानियाँ
मूर्ति पूजा
कल्याण पथ
आदर्श कहानियाँ
सागर के मोती
वासुदेव: सर्वम्
जीवनोपयोगी प्रवचन
तात्त्विक प्रवचन
सब साधनों का सार
भगवत्तत्त्व
अमृत बिन्दु
परम पिता से प्रार्थना
सच्चा गुरु कौन ?
तत्त्वज्ञान कैसे हो?
दुर्गति से बचो
महापाप से बचो
जीवन का सत्य
एकै साधै सब सधै
जीवन का कर्तव्य
सत्य की खोज
भगवान् और उनकी भक्ति
भगवत्प्राप्ति सहज है
ज्ञान के दीप जले
आवश्यक शिक्षा
हम ईश्वर को क्यों मानें?
नित्ययोग की प्राप्ति
भगवान् से अपनापन
साधन और साध्य
गीता माधुर्यम्
संसार का असर कैसे छूटे ?
तू ही तू
वास्तविक सुख
किसान और गाय
सत्संग के फूल
संत समागम
जित देखूँ तित तू
साधकों के प्रति
स्वाधीन कैसे बनें ?
एक नयी बात
सुन्दर समाज का निर्माण
सर्वोच्च पद की प्राप्ति का साधन
भगवत्प्राप्ति की सुगमता
सत्संग का प्रसाद
जिन खोजा तिन पाइया
देश की वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम
सत्संग मुक्ताहार
अमरता की ओर
सब जग ईश्वररूप है
सत्संग की विलक्षणता
जीवनोपयोगी कल्याण मार्ग
यह विकास है या विनाश ? जरा सोचिये
मातृशक्ति का घोर अपमान