॥ श्रीहरि:॥

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साधन सुधा सिन्धु

श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • +
    ज्ञानयोग (आध्यात्मिक साधना)
    • गीताका ज्ञेय-तत्त्व
    • प्राप्त और प्रतीति
    • मैं-मेरापन कैसे मिटे?
    • भगवान् से नित्ययोग
    • अपने अनुभवका आदर
    • अनुभव और विश्वास
    • शरीरसे अलगावका अनुभव
    • विकारोंसे कैसे छूटें?
    • सार बात
    • मुक्ति सहज है
    • संयोगमें वियोगका दर्शन
    • मुक्तिका रहस्य
    • जाग्रत् में सुषुप्ति
    • हमारा स्वरूप सच्चिदानन्द है
    • दृश्यमात्र अदृश्यमें जा रहा है
    • सत्य क्या है?
    • मैं शरीर नहीं हूँ
    • भय और आशाका त्याग
    • अपनी जानकारीको महत्त्व दें
    • तत्त्वप्राप्तिमें देरी नहीं है
    • अन्त:करणकी शुद्धिका उपाय
    • मुक्ति स्वत:सिद्ध है
    • सबमें परमात्माका दर्शन
    • मन-बुद्धि अपने नहीं
    • निर्दोषताका अनुभव
    • नित्ययोग तथा उसका अनुभव
    • जिज्ञासा और बोध
    • अहम् का नाश तथा तत्त्वका अनुभव
    • करण-निरपेक्ष तत्त्व
    • असत् का वर्णन
    • वर्णनातीतका वर्णन
    • चुप-साधन
    • सत्स्वरूपका अनुभव
    • मुक्ति सहज है
    • मुक्तिका सरल उपाय
    • करण-निरपेक्ष परमात्मतत्त्व
    • स्वत:सिद्ध तत्त्व
    • सत्-असत् का विवेक
    • वासुदेव: सर्वम्
    • प्राप्त तत्त्वका अनुभव
    • सबके अनुभवकी बात
    • +
      अहंकार तथा उसकी निवृत्ति
      • १. लौकिक अहङ्कार
      • २. पारमार्थिक अहङ्कार
    • +
      करणसापेक्ष-करणनिरपेक्ष साधन और करणरहित साध्य
      • करण क्या है?
      • करणसापेक्ष और करणनिरपेक्ष क्या है?
      • करणनिरपेक्ष और करणरहितमें अन्तर
      • धनके दृष्टान्तसे करणनिरपेक्षताका विवेचन
      • करणकी आवश्यकता कहाँतक है?
      • करणरहित (करणनिरपेक्ष) परमात्मतत्त्व
      • करणसापेक्ष साधन
      • करणनिरपेक्ष साधन—
      • करणसापेक्ष और करणनिरपेक्ष साधनमें भेद
    • +
      भगवत्तत्त्व
      • (वासुदेव: सर्वम्)
      • तीन प्रकारकी दृष्टियाँ
      • साध्यतत्त्वकी एकरूपता
      • सहज-निवृत्तिरूप वास्तविक तत्त्व
      • व्यवहारके विविध रूप
      • ज्ञानीके व्यवहारकी विशेषता
      • उपसंहार
    • +
      जिन खोजा तिन पाइया
      • अभ्यास और विवेचन
    • सत्-असत् का विवेक
    • अवस्थातीत तत्त्वका अनुभव
    • करणसे अतीत तत्त्व
    • अहम् हमारा स्वरूप नहीं
    • +
      तत्त्वज्ञान क्या है?
      • (आत्मज्ञान तथा परमात्मज्ञान)
    • तत्त्वज्ञानका सहज उपाय
    • सबसे सुगम परमात्मप्राप्ति
    • +
      असत् का त्याग तथा सत् की खोज
      • सहजनिवृत्ति और स्वत:प्राप्ति
    • विभागयोग
    • शब्दसे शब्दातीतका लक्ष्य
    • अविनाशी रस
  • +
    कर्मयोग (भौतिक साधना)
    • कर्मयोग
    • सभी कर्तव्य कर्मोंका नाम यज्ञ है
    • संसारमें रहनेकी विद्या
    • सेवाकी महत्ता
    • स्वार्थरहित सेवाका महत्त्व
    • कर्मयोगका तत्त्व
    • सेवा कैसे करें?
    • कर्म किसके लिये?
    • कल्याणका सुगम साधन—कर्मयोग
    • भगवान् विवस्वान् को उपदिष्ट कर्मयोग
    • गीताकी अलौकिक शिक्षा
    • +
      योग: कर्मसु कौशलम्
      • उपसंहार—
    • कर्मयोगसे कल्याण
    • गीताका तात्पर्य
    • गीताका अनासक्तियोग
  • +
    भक्तियोग (आस्तिक साधना)
    • गीतामें भक्ति और उसके अधिकारी
    • भगवद्भक्तिका रहस्य
    • भगवद्भजनका स्वरूप
    • भक्तिकी सुलभता
    • सबका कल्याण कैसे हो?
    • अखण्ड साधन
    • माँ!
    • भगवान् से अपनापन
    • सुगम साधन
    • नाम-महिमा
    • नाम-जपकी विधि
    • दस नामापराध
    • होहि राम को नाम जपु
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      मानसमें नाम-वन्दना
      • प्रवचन—१
      • प्रवचन—२
      • प्रवचन—३
      • प्रवचन—४
      • प्रवचन—५
      • प्रवचन—६
      • प्रवचन—७
      • प्रवचन—८
      • प्रवचन—९
    • +
      नाम-जपकी महिमा
      • ज्ञातव्य
    • +
      मूर्ति-पूजा
      • ज्ञातव्य
    • शरणागति
    • शरणागतिका रहस्य
    • भगवत्प्रेम
    • शीघ्र भगवत्प्राप्ति कैसे हो?
    • भगवान् प्रेमके भूखे हैं
    • सच्चा आश्रय
    • शरणागतिकी विलक्षणता
    • भगवान् में अपनापन
    • भगवान् और उनकी दिव्य शक्ति
    • +
      भक्तशिरोमणि श्रीहनुमान् जी की दास्य-रति
      • १-दास्य-रति
      • २-सख्य-रति
      • ३-वात्सल्य-रति
      • ४-माधुर्य-रति
    • संकीर्तनकी महिमा
    • मुक्ति और भक्ति
    • भक्ति, भक्त तथा भगवान्
    • भक्ति और उसकी महिमा
    • +
      भगवान् का सगुण स्वरूप और भक्ति
      • १. गीतामें समग्र (सगुण) की मुख्यता
      • २. परमात्मा सम्पूर्ण शक्तियोंके मूल हैं
      • ३. सबके शासक परमात्मा हैं
      • ४. परमात्माके सगुण स्वरूपकी मुख्यता
      • ५. ज्ञानमार्ग और भक्तिमार्ग
      • ६. भक्तिकी मुख्यता
    • +
      प्रेम, प्रेमी तथा प्रेमास्पद
      • १. हम भगवान् में तथा भगवान् हमारेमें हैं
      • २. भगवान् अपने हैं
      • ३. भगवान् प्रेमके अधीन हैं
      • ४. नित्यविरह और नित्यमिलन
    • सर्वश्रेष्ठ साधन
    • सब कुछ भगवान् ही हैं
    • विलक्षण भगवत्कृपा
    • वास्तविक सिद्धिका मार्ग
    • प्रार्थना और शरणागति
    • जित देखूँ तित तू
    • भक्तिकी श्रेष्ठता
    • अनिर्वचनीय प्रेम
    • करणनिरपेक्ष साधन—शरणागति
    • गीताकी शरणागति
    • +
      सब जग ईश्वररूप है
      • (वासुदेव: सर्वम्)
    • विविध रूपोंमें भगवान्
    • सर्वत्र भगवद्दर्शन
    • भगवत्प्राप्तिका सुगम तथा शीघ्र सिद्धिदायक साधन
    • गीताकी विलक्षण बात
    • अपने प्रभुको कैसे पहचानें?
    • भगवान् का अलौकिक समग्ररूप
    • अलौकिक साधन—भक्ति
    • प्रार्थना
  • +
    सर्वोपयोगी
    • समयका मूल्य और सदुपयोग
    • वैराग्य
    • सब नाम-रूपोंमें एक ही भगवान्
    • +
      भगवत्तत्त्व
      • निर्गुण-निराकार-तत्त्व
      • सत्-तत्त्व
      • चित्-तत्त्व
      • आनन्द-तत्त्व
      • सत्-चित्-आनन्दकी एकता
      • सगुण-निराकार-तत्त्व
      • अस्ति-तत्त्व
      • भाति-तत्त्व
      • प्रिय-तत्त्व
      • अस्ति, भाति, प्रियकी एकता
      • सगुण-साकार-तत्त्व
      • विग्रह-तत्त्व
      • प्रकाश-तत्त्व
      • प्रेम-तत्त्व
      • सबकी एकता
      • तत्त्व-विवेचन
      • दर्शन, ज्ञान, प्रवेशका प्रकरण
      • अभेद-भेदमार्गका वर्णन
      • उपसंहार
    • सुख कैसे मिले?
    • बार-बार नहिं पाइये मनुष-जनमकी मौज
    • संत और उनकी सेवा
    • बालहितोपदेश-माला
    • विषयासक्ति और भगवत्प्रीतिमें भेद
    • +
      मनकी हलचलके नाशके सरल उपाय
      • भविष्यकी चिन्ता मिटानेके लिये
      • भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालकी चिन्ता मिटानेके लिये
      • हर समय भगवान् के भरोसे प्रसन्न रहनेके लिये
      • अन्त:करणमें अधिक उथल-पुथल होनेपर मनको समझानेके लिये
      • भजन
      • चिन्ता छोड़ते हुए अपने कर्तव्यसे कभी च्युत
      • न हों। श्रीभगवान् की आज्ञा है—
      • श्रीभगवन्नाम-माहात्म्य
      • मनकी हलचलका कारण क्या है?
    • दैवी सम्पदा एवं आसुरी सम्पदा
    • दृढ़ भावसे लाभ
    • भगवत्प्राप्तिसे ही मानव-जीवनकी सार्थकता
    • उपासना शब्दका अर्थ एवं उसका स्वरूप
    • भक्त और आदर्श सन्तान कैसे हो?
    • +
      सर्वोच्च पदकी प्राप्तिका साधन
      • प्राप्त सामर्थ्यका सदुपयोग
    • भगवत्प्राप्तिके लिये भविष्यकी अपेक्षा नहीं
    • मनकी खटपट कैसे मिटे?
    • संसारका आश्रय कैसे छूटे?
    • परमात्मा तत्काल कैसे मिलें?
    • भगवत्प्राप्ति क्रियासाध्य नहीं
    • परमात्मप्राप्तिकी सुगमता
    • मनुष्यका वास्तविक सम्बन्ध
    • सुख-लोलुपताको मिटानेका उपाय
    • इच्छाके त्याग और कर्तव्य-पालनसे लाभ
    • परमात्मप्राप्तिमें भोग और संग्रहकी इच्छा ही महान् बाधक
    • असत् पदार्थोंके आश्रयका त्याग करें
    • वास्तविक बड़प्पन
    • त्यागसे सुखकी प्राप्ति
    • तत्त्वप्राप्तिमें सभी योग्य हैं
    • अभिमान सबको दु:ख देता है
    • सांसारिक सुख दु:खोंके कारण हैं
    • हमारा सम्बन्ध संसारसे नहीं है
    • भगवत्प्राप्ति सहज है
    • संयोगमें वियोगका अनुभव
    • स्वभाव-सुधारकी आवश्यकता
    • अवगुणोंको मिटानेका उपाय
    • वास्तविक उन्नति किसमें?
    • कामनाओंके त्यागसे शान्ति
    • सदुपयोगसे कल्याण
    • नाम-जप और सेवासे भगवत्प्राप्ति
    • +
      हम ईश्वरको क्यों मानें?
      • ज्ञातव्य
    • सत्संगकी आवश्यकता
    • सन्त-महिमा
    • सन्त-चरण-रजका तात्पर्य
    • जीव लौटकर क्यों आता है?
    • श्रीमद्भगवद्गीता और भगवत्प्रेम
    • वास्तविक सुख
    • मनुष्य-जीवनका उद्देश्य
    • मनुष्य-जीवनकी सफलता
    • धन-संग्रहसे हानि
    • मिली हुई सामग्री अपनी नहीं
    • मिला हुआ और देखा हुआ—संसार
    • धनके लोभमें निंदा
    • दृढ़ निश्चयकी महिमा
    • तत्त्वका अनुभव कैसे हो?
    • कारागार—एक शिक्षालय
    • सत्सङ्गका मूल्य समझें
    • पारमार्थिक उन्नति धनके आश्रित नहीं
    • अच्छे बनो
    • वास्तविक बड़प्पन
    • मानव-जीवनका उद्देश्य
    • सावधान रहो!
    • सभी परमात्मप्राप्ति कर सकते हैं
    • दृढ़ विचारसे लाभ
    • भोगासक्ति कैसे छूटे?
    • मनुष्यकी तीन शक्तियाँ
    • प्रतिकूल परिस्थितिसे लाभ
    • स्वाधीनताका रहस्य
    • कल्याण सहज है
    • तत्काल सिद्धिका मार्ग
    • साधनकी मुख्य बाधा
    • संसार जा रहा है!
    • सत्सङ्गसे लाभ कैसे लें?
    • कल्याणका सुगम उपाय—अपनी मनचाहीका त्याग
    • सङ्कल्प-त्यागसे कल्याण
    • अपने साधनको सन्देहरहित बनायें
    • मनुष्य-जीवनकी सफलता
    • बन्धन कैसे छूटे?
    • सच्ची मनुष्यता
    • विश्वास और जिज्ञासा
    • नाशवान् की मुख्यतासे हानि
    • धर्मका सार
    • प्रतिकूलतामें विशेष भगवत्कृपा
    • पराधीनतासे छूटनेका उपाय
    • भगवान् में लगनेका उपाय
    • परमात्मप्राप्तिकी सुगमता
    • परमात्मप्राप्तिमें मुख्य बाधा—सुखासक्ति
    • सुखासक्तिसे छूटनेका उपाय
    • खण्डन-मण्डनसे हानि
    • एक निश्चय
    • विकार आपमें नहीं हैं
    • राग-द्वेषका त्याग
    • सत्सङ्गकी आवश्यकता
    • अहंताका त्याग
    • ममताका त्याग
    • +
      सच्चा गुरु कौन?
      • ज्ञातव्य
    • गुरु कैसा हो?
    • कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्
    • नित्ययोगकी प्राप्ति
    • प्राप्त जानकारीके सदुपयोगसे कल्याण
    • जीवकृत सृष्टिसे बन्धन
    • दु:खका कारण—सङ्कल्प
    • दु:ख-नाशका उपाय
    • अनित्य सुखकी रुचि मिटानेकी आवश्यकता
    • काम-क्रोधसे छूटनेका उपाय
    • विकारोंसे छूटनेका उपाय
    • राग-द्वेषसे रहित स्वरूप
    • उद्देश्यकी महत्ता
    • साधक कौन है?
    • मनकी चञ्चलता कैसे मिटे?
    • मृत्युके भयसे कैसे बचें?
    • +
      दुर्गतिसे बचो
      • ज्ञातव्य
    • +
      आहार-शुद्धि
      • ज्ञातव्य
      • भोजनके लिये आवश्यक विचार
    • कर्म-रहस्य
    • देवता कौन?
    • मुक्तिका उपाय
    • +
      गीतामें चरित्र-निर्माण
      • (भगवान् की सम्मुखता)
    • गीतोक्त सदाचार
    • भगवान् विष्णु
    • भगवान् शंकर
    • परमात्मा सगुण हैं या निर्गुण?
    • साधकका कर्तव्य
    • विवेककी जागृति
    • भोग और योग
    • उद्देश्यकी दृढ़तासे लाभ
    • +
      मुक्तिमें सबका समान अधिकार
      • वज्रसूचिकोपनिषद्
    • सत्सङ्ग सुननेकी विद्या
    • संयोग, वियोग और योग
  • +
    समाज-सुधार
    • गीता और रामायणके क्रियात्मक प्रचारकी आवश्यकता
    • कर्मचारियोंके तथा उद्योग-संचालकोंके कर्तव्य
    • वर्ण-व्यवस्थाका तात्पर्य
    • जाति जन्मसे मानी जाय या कर्मसे?
    • अपने कर्मोंके द्वारा भगवान् का पूजन
    • समता कैसे करें?
    • संघर्षका कारण
    • +
      गृहस्थमें कैसे रहें?
      • गृहस्थ-धर्म
      • व्यवहार
      • बालक-सम्बन्धी बातें
      • सन्तानका कर्तव्य
      • स्त्री-सम्बन्धी बातें
      • लड़ाई-झगड़ेका समाधान
    • +
      आवश्यक शिक्षा
      • पारमार्थिक विद्यार्थी
    • +
      किसानोंके लिये शिक्षा
      • खेतीमें हिंसा
      • गौरक्षा
      • गर्भपात महापाप
      • नशा-सेवन
      • मालिकोंके प्रति
      • सुख-शान्तिका उपाय
    • गोहत्या—एक अभिशाप
    • +
      गायकी महत्ता और आवश्यकता
      • प्रश्नोत्तर
    • उपसंहार
    • मातृशक्तिका घोर अपमान
    • दहेज-प्रथासे हानि
    • ‘ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी’
    • +
      महापापसे बचो
      • १. ब्रह्महत्या
      • २. मदिरापान
      • ३. चोरी
      • ४. गुरुपत्नीगमन
      • गर्भपात महापापसे दुगुना पाप है
    • +
      गृहस्थोंके लिये
      • परिवार-नियोजन-कार्यक्रमके प्रचार एवं प्रसारके कारण
      • क्या परिवार-नियोजन आवश्यक है?
      • परिवार-नियोजन-कार्यक्रमके दुष्परिणाम
      • परिवार-नियोजनके दुष्परिणाम भुगत चुके देशोंकी प्रतिक्रिया
    • +
      देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम
      • ईश्वर और प्रकृतिके विधानका तिरस्कार
      • मातृशक्तिका तिरस्कार
      • धर्मका तिरस्कार
    • घोर पापोंसे बचो
    • गर्भपात महापाप क्यों?
    • +
      सबसे बड़ा पाप—गर्भपात
      • गर्भस्थ बच्चेकी हत्याका आँखोंदेखा विवरण
      • गर्भपातके विषयमें धर्मशास्त्रके वचन
    • +
      सर्वश्रेष्ठ हिन्दूधर्म और उसके ह्रासका कारण
      • सर्वश्रेष्ठ धर्म
      • हिन्दुओंकी वृद्धि आवश्यक क्यों?
      • हिन्दुओंके ह्रासका मुख्य कारण
      • कृत्रिम सन्तति-निरोधसे हानि
    • राजाका कर्तव्य
    • आवश्यक चेतावनी
  • +
    पुस्तकोंके नाम तथा उनके लेख, जो ‘साधन-सुधा-सिन्धु’ में संगृहीत हैं
    • १. जीवनका कर्तव्य
    • २. साधन-रहस्य (एकै साधै सब सधै)
    • ३. जीवनोपयोगी कल्याण-मार्ग
    • ४. सर्वोच्च पदकी प्राप्तिका साधन
    • ५. जीवनका सत्य
    • ६. कल्याणकारी प्रवचन
    • ७. तात्त्विक प्रवचन
    • ८. भगवान् से अपनापन
    • ९. भगवन्नाम
    • १०. जीवनोपयोगी प्रवचन
    • ११. मानसमें नाम-वन्दना
    • १२. सत्संगकी विलक्षणता
    • १३.नाम-जपकी महिमा
    • १४.मूर्ति-पूजा
    • १५.हम ईश्वरको क्यों मानें?
    • १६.दुर्गतिसे बचो
    • १७.आहार-शुद्धि
    • १८.कर्म-रहस्य
    • १९. शरणागति
    • २०. वास्तविक सुख
    • २१. साधकोंके प्रति
    • २२. अच्छे बनो
    • २३. भगवत्प्राप्तिकी सुगमता
    • २४. स्वाधीन कैसे बनें?
    • २५. गृहस्थमें कैसे रहें?
    • २६. सत्संगका प्रसाद
    • २७. सच्चा गुरु कौन?
    • २८. आवश्यक शिक्षा
    • २९. सहज साधना
    • ३०. नित्ययोगकी प्राप्ति
    • ३१. वासुदेव: सर्वम्
    • ३२. साधन और साध्य
    • ३३. कल्याण-पथ
    • ३४. मातृशक्तिका घोर अपमान
    • ३५. जिन खोजा तिन पाइया
    • ३६. किसानोंके लिये शिक्षा
    • ३७. तत्त्वज्ञान कैसे हो?
    • ३८. भगवान् और उनकी भक्ति
    • ३९. जित देखूँ तित तू
    • ४०. देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम
    • ४१. सब जग ईश्वररूप है
    • ४२. आवश्यक चेतावनी (यह विकास है या विनाश? जरा सोचिये)
    • ४३. गायकी महत्ता और आवश्यकता
  • अंतिम पृष्ठ

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