॥ श्रीहरि:॥

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साधन सुधा निधि

श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज

हिन्दी/संस्कृत

वर्तमान समयमें परमात्मतत्त्व तथा उसकी प्राप्तिका साधन सरलतापूर्वक बतानेवाले ग्रन्थोंका अभाव-सा हो गया है। इस कारण सच्चे साधकोंको उचित मार्ग-दर्शन मिलना बहुत कठिन हो रहा है! ऐसी स्थितिमें आध्यात्मिक विषयकी अनेक मार्मिक बातोंसे युक्त महापुरुष परमश्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज के प्रवचनों का यह ग्रन्थ साधकोंके लिये बहुत उपयोगी है और शीघ्र एवं सुगमतापूर्वक परमात्मतत्त्वका अनुभव करानेमें अत्यन्त सहायक है। किसी भी देश, जाति, धर्म, सम्प्रदाय आदिका कोई भी जिज्ञासु यदि प्रस्तुत ग्रन्थका मनोयोगपूर्वक अध्ययन करेगा तो उसके साधनमें अवश्य उन्नति होगी, इसमें सन्देह नहीं। आशा है कि साधकगण इस संकलनको पढ़कर लाभान्वित होंगे।
  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • +
    तत्त्वज्ञान
    • १. अमरताका अनुभव
    • २. मैंपनसे रहित स्वरूपका अनुभव
    • ३. सत्-असत् का विवेक
    • ४. नित्यप्राप्तकी प्राप्ति
    • ५. सर्वत्र भगवद्दर्शनका साधन
    • ६. वास्तविक तत्त्वका अनुभव
    • ७. स्वत:प्राप्त परमात्मतत्त्व
    • ८. साधकोपयोगी अमूल्य बातें
    • ९. कामना और आवश्यकता
    • १०. देनेके भावसे कल्याण
    • ११. सत्यकी खोज
    • १२. विज्ञानसहित ज्ञान
    • १३. योग
    • १४. भगवत्प्राप्तिका सुगम तथा शीघ्र सिद्धिदायक साधन
    • १५. मुक्तिका सुगम उपाय
    • १६. त्यागसे कल्याण
    • १७. सत्यकी स्वीकृतिसे कल्याण
    • १८. अभ्याससे बोध नहीं होता
    • १९. नित्यप्राप्तकी प्राप्ति
    • २०. कामना, जिज्ञासा और लालसा
    • २१. मानवशरीरका सदुपयोग
    • २२. सच्ची आस्तिकता
    • २३. संसारका असर कैसे छूटे?
    • २४. अभिमान कैसे छूटे?
    • २५. साधक, साध्य तथा साधन
    • २६. साधक कौन?
    • २७. मुक्ति स्वाभाविक है
    • २८. हम कर्ता-भोक्ता नहीं हैं
    • २९. अक्रियतासे परमात्मप्राप्ति
    • ३०. कल्याणके तीन सुगम मार्ग
    • ३१-एक नयी बात
    • ३२. सार बात
  • +
    भगवत्प्रेम
    • १. भक्तिकी विलक्षणता
    • २. प्रेमकी जागृतिमें ही मानव-जीवनकी पूर्णता
    • ३. भक्तिकी अलौकिक विलक्षणता
    • ४. भगवल्लीलाका तत्त्व
    • ५. मुक्ति और प्रेम
    • ६. हम भगवान‍्के हैं
    • ७. हमारा असली घर
    • ८. नामजपकी विलक्षणता
    • ९. विचार करें
    • १०. मेरे तो गिरधर गोपाल
    • ११. अभेद और अभिन्नता
    • १२. अलौकिक प्रेम
    • १३.रासलीला—प्रतिक्षण वर्धमान प्रेम
    • १४. अनिर्वचनीय प्रेम
    • १५. तू-ही-तू
    • १६. सब साधनोंका सार
    • १७. अपना किसे मानें?
    • १८. सब कुछ परमात्माका है
    • १९. सच्ची बात
    • २०. परमात्मप्राप्तिमें देरी क्यों?
    • २१. कल्याणका निश्चित उपाय
    • २२. कोटिं त्यक्त्वा हरिं स्मरेत्
    • २३. अनेकतामें एकता
    • २४. मामेकं शरणं व्रज
    • २५. भगवत्प्रेमका स्वरूप और महत्त्व
    • २६. साधन के दो प्रधान सूत्र
    • २७. साधनकी चरम सीमा
    • २८. भगवान् हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं
    • २९. साधकोंके लिये
    • ३०. परमपितासे प्रार्थना
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    सर्वोपयोगी
    • १. अन्त मति सो गति
    • २. आकस्मिक और अकाल मृत्यु
    • ३. शास्त्रीय विवादसे हानि
    • ४. रुपयोंके सहारेसे हानि
    • ५. गीताकी विलक्षणता
    • ६. वेद और श्रीमद्भगवद‍्गीता
    • ७. स्त्रीके दो रूप—कामिनी और माता
    • ८. दिनचर्या और आयुश्चर्या
    • ९. वास्तविक आरोग्य
    • १०. परोपकारका सुगम उपाय
    • ११. धर्मकी महत्ता और आवश्यकता
    • १२. तीन महाव्रत
    • १३. भगवान् गणेश
    • १४. शिखा (चोटी) धारणकी आवश्यकता
    • १५. क्या गुरु बिना मुक्ति नहीं?
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    कहानियाँ
    • १. भगवान‍्की कृपा
    • २. पापका फल भोगना ही पड़ता है
    • ३. आँख और पेटकी बीमारी
    • ४. सन्तको कैसे पहचानें?
    • ५. आदर्श बहू
    • ६. सास-बहूकी लड़ाई मिटानेवाला विलक्षण तावीज
    • ७. सेठको शिक्षा
    • ८. पापका बाप
    • ९. शुद्ध हरिकथा
    • १०. घोड़ा अड़ गया
    • ११. सत्संगका असर
    • १२. चुगलीसे हानि
    • १३. दृढ़ उद्देश्यसे लाभ
    • १४. राम काज करिबे को आतुर
    • १५. तीन दिनका राज्य
    • १६. विचित्र बहुरूपिया
    • १७. नया जन्म
    • १८. कल्याण कैसे होगा?
    • १९. भगवान‍्की मरजी
    • २०. बुद्धिमान् राजा
    • २१. भगवान् किसके दास होते हैं?
    • २२. बुराईके बदले भलाई
    • २३. भगवान् भावके भूखे हैं
    • २४. मिले हुए अधिकारका सदुपयोग
    • २५. सबके दाता राम
    • २६. मुक्तिका उपाय
    • २७. खरी कमाई
    • २८. पराया हक
    • २९. दुर्गतिका कारण
    • ३०. आदर्श माँ
    • ३१. राजाको उपदेश
    • ३२. गीताके प्रभावसे चुड़ैल भागी
    • ३३. बुद्धिमान् बनजारा
    • ३४. ठण्डी रोटी
    • ३५. सन्तोंकी शरण
    • ३६. मरकर आदमी कहाँ गया?
    • ३७. एक फूँककी दुनिया
    • ३८. चार साधु और चोर
    • ३९. सच्चा स्वाँग
    • ४०. महलमें कमी
    • ४१. हीरेका मूल्य
    • ४२. इन्द्रकी पोशाक
    • ४३. असली गहना
    • ४४. कंजूसीका परिणाम
    • ४५. जब साधु राजा बना
    • ४६. दूसरेका कल्याण कौन कर सकता है?
    • ४७. निन्यानबेका चक्कर
    • ४८. गधेसे मनुष्य बनाना
    • ४९. रात कैसी बीती?
    • ५०. ससुरालकी रीति
    • ५१. अब छाछको सोच कहा कर है!
    • ५२. वहम मिट गया
    • ५३. विलक्षण अतिथि-सत्कार
    • ५४. एक शहरमें चार साधु
    • ५५. चार आशीर्वाद
    • ५६. आज्ञापालनकी महिमा
    • ५७. विलक्षण साधना
    • ५८. हल्ला मत करो
    • ५९. जगत् की प्रीत
    • ६०. सौ रुपयेकी एक बात
    • ६१. बोला तो मरा!
    • ६२.त्यागके आदर्श
  • +
    प्रवचन-सार
    • ज्ञानके दीप जले
    • सत्संगके फूल
    • सागरके मोती
  • +
    प्रश्नोत्तर
    • प्रश्नोत्तरमणिमाला
    • तात्त्विक प्रश्नोत्तर
    • साधकोपयोगी प्रश्नोत्तर
    • कल्याणकारी प्रश्नोत्तर
  • +
    अमृत-बिन्दु
    • शिक्षासाहस्री
  • +
    वसीयत*
    • मेरे विचार
    • अन्तिम प्रवचन*
  • अन्तिम पृष्ठ

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