प्रस्तुत पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीताकी सुप्रसिद्ध टीका—‘तत्त्व-विवेचनी’ के टीकाकार एवं ‘तत्त्व-चिन्तामणि’-जैसे पारमार्थिक बृहद् ग्रन्थके रचयिता आध्यात्मिक विचारों एवं भगवद्भावोंके प्रचारक ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका के बहुमूल्य आध्यात्मिक चिन्तन और प्रवचनोंका सार है। यह सर्वहितकारी और साधनोपयोगी होनेसे जनहितार्थ प्रकाशित किया जा रहा है।
इसमें जीवन-सुधार, भजन-साधन, नाम-जप और सत्संग आदिकी उत्तम बातें उद्धरणोंके रूपमें दी गयी हैं। प्रस्तुत संकलन—भगवन्नाम, महात्मा, भक्त, सत्संग, समता, वैराग्य, चित्त-निरोध, सद्गुण-सदाचार, सत्य, अक्रोध (क्षमा), ब्रह्मचर्य, परोपकार आदि विभिन्न पारमार्थिक विन्दुओंपर अड़तीस प्रकरणोंमें मार्मिक और सर्वजनोपयोगी प्रकाश डालता है। इस प्रकार सत्य और श्रेष्ठ भावोंकी प्रसारिका तथा मार्गदर्शिका होनेसे ही प्रस्तुत पुस्तक—‘साधन-नवनीत’ है।
सभी प्रेमी पाठकों—विशेषत: परमार्थ-पथके पथिकों और सत्संग-जिज्ञासुओंसे हमारा विनम्र अनुरोध है कि वे इस पुस्तकको कृपया एक बार अवश्य पढ़ें और दूसरोंको भी पढ़नेके लिये प्रेरित करें। हम आशा करते हैं कि इसकी सर्वजनोपयोगी, साधनमें सहायक और उपादेय सामग्रीसे अधिकाधिक सज्जन विशेष लाभ उठायेंगे।