प्रस्तुत ग्रन्थ— साधन-कल्पतरु परमश्रद्धेय ब्रह्मलीन श्रीजयदयालजी गोयन्दका के अनुभूत उच्चकोटिके विचारपूर्ण लेखोंका बृहत् संग्रह है। साधनोपयोगी इस ग्रन्थमें श्रीगोयन्दकाजीके अनेक महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक तथा व्यावहारिक लेखोंका संग्रह है। जिनमें ज्ञान, वैराग्य, सेवा, सदाचार, त्याग, परोपकार और लोक-व्यवहार आदि लौकिक तथा ईश्वर-प्रेम, भगवद्भक्ति, आत्मोद्धारके उपाय, निष्काम-कर्मकी महत्ता, मनुष्य-जीवनका लक्ष्य आदि अनेक पारमार्थिक विषयोंका अति सरलरूपमें प्रतिपादन किया गया है। लेखोंकी भाषा सरल, सुबोध है, जो शीघ्र समझनेयोग्य (कथा-कहानीवाली) सुगम शैलीमें होनेसे हृदयग्राही प्रभाव छोड़ती है। अतएव इसकी मार्मिक और सर्वजनोपयोगी सामग्री विचारवान् साधकोंसहित सर्वसाधारणके लिये भी प्रेरक और मार्ग-दर्शक है।
सभी श्रद्धालुजनों तथा प्रेमी पाठकोंसे हमारा विनम्र अनुरोध है कि इस प्रस्तुत सत्साहित्यके अधिकाधिक अध्ययन-अनुशीलनद्वारा विशेष लाभ उठाना चाहिये। साथ ही, अपने प्रेमी-परिचितोंको भी इसे एक बार अवश्य पढ़नेके लिये प्रेरित करके आप आध्यात्मिक भावोंके प्रचार-प्रसारमें भी सहयोगी बन सकते हैं।