॥ श्रीहरि:॥

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प्रेम में विलक्षण एकता

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • प्रेममें विलक्षण एकता
  • भक्तोंकी महिमा
  • भगवत्प्राप्तिमें श्रद्धा और निष्कामभावकी महत्ता
  • सेवा, जप, ध्यान, प्रेम तथा व्याकुलता
  • रहस्यकी बात
  • महात्माके प्रति साधकका भाव एवं भगवत्प्रेम
  • एक क्षणमें भगवत्प्राप्तिका उपाय—सत्संगकी महिमा
  • हृदय द्रवीभूत होनेपर तुरंत लाभ
  • भगवान‍्की दयाका दिग्दर्शन
  • परमात्माको सब भूतोंका सुहृद् जाननेसे परम शान्तिकी प्राप्ति
  • भगवान‍्की दया और प्रेमका रहस्य
  • मनुष्य-शरीरकी उपयोगिता
  • भगवत्प्राप्ति करानेवाला अत्यन्त सरल सुगम साधन
  • अन्तिम पृष्ठ

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