॥ श्रीहरि:॥

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प्रार्थना

श्रद्धेय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार

हिन्दी/संस्कृत

प्रार्थनाका अर्थ है—जीवात्माका परमात्माके साथ सक्रिय, अनन्य भक्ति, प्रेममय सम्बन्ध। आदर्श प्रार्थना साधककी ईश्वर-प्राप्तिके लिये आर्तता या आकुलताकी भावनाकी अभिव्यक्ति है। सच्ची हृदयसे निकली हुई प्रार्थना तुरन्त फलदायिनी होती है।
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    प्रार्थना-षोडशी
    • मेरी निपट नीचता और तुम्हारी अपार दया
    • मेरी दुर्मति और तुम्हारी दया
    • परम उदार प्रभु! विश्वास दान करो
    • मेरे सब कुछ तुम्हीं बन जाओ
    • परहित ही मेरा हित हो
    • मेरा सब छीनकर तुमने बहुत भला किया
    • सब कुछ तुम्हीं हो
    • सभी इन्द्रियोंसे तुम्हारा स्पर्श प्राप्त हो
    • सभी परम सुख-शान्ति प्राप्त करें
    • पर-दु:ख हरण करके उसे मैं वरण करूँ
    • स्व-सुख-वासना कभी न जाग पाये
    • प्रेमरस-सागर—प्रेमभिखारी
    • शक्ति देकर अपने यन्त्ररूपमें स्वीकार करो
    • लीलामय! तुम्हारी लीलाका नित्य उपकरण बनूँ
    • कोई भी चाह कभी मेरे मनमें न उठे
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