॥ श्रीहरि:॥

gstlogo
हिन्दीarrowdown
पारमार्थिक पत्र

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • १. साधनके लिये आश्वासन और चेतावनी
  • २. संसारसे वैराग्य और आनन्दस्वरूपका ध्यान
  • ३. भगवद्भक्ति और निष्काम कर्म
  • ४. माता-पिताकी सेवाका महत्त्व
  • ५. मनुष्य-जन्मकी सार्थकता
  • ६. अध्यात्मविषयक एकादश प्रश्नोत्तर
  • ७. महापुरुषोंका रहस्य और विधवा स्त्रीके कर्तव्य
  • ८. भगवत्प्रेमके लिये चेतावनी
  • ९. साधन तेज करनेके लिये प्रेरणा
  • १०. निरन्तर भगवत्स्मृति
  • ११. धर्म, कलियुग और महात्माओंका प्रभाव
  • १२. भजन, सत्संग कभी न छोड़े
  • १३. भगवद‍्गीताका प्रचार
  • १४. विपत्तिमें भगवान‍्की स्मृति
  • १५. भजनसे ऋण और पापका नाश
  • १६. सच्चा रोजगार
  • १७. स्वाध्याय, ईश्वर और महापुरुषोंकी दयासे लाभ
  • १८. भगवद्भक्तिका रहस्य
  • १९. शरणागतिका रहस्य
  • २०. विज्ञानानन्दघनका ध्यान
  • २१. श्रद्धा-विश्वासपूर्वक भगवद्भक्ति
  • २२. मल, विक्षेप, आवरणके नाशका विषय
  • २३. मृत व्यक्तिके लिये शोक करना व्यर्थ है
  • २४. नाम-जपकी विधि
  • २५. योगक्षेमका रहस्य
  • २६. गीताका रहस्य और अन्त:करणकी शुद्धि
  • २७. निरन्तर भगवन्नामजपका प्रभाव
  • २८. भगवद्विधानमें दयाका दर्शन
  • २९. मन, वाणी, शरीरसे ईश्वरभक्ति
  • ३०. भजन, ध्यान, सत्संगके लिये प्रेरणा
  • ३१. उद्धार करनेवाले भगवान् हैं!
  • ३२. भगवान‍्में मन लगानेके उपाय
  • ३३. सृष्टि, भगवान् और योगविषयक सत्रह प्रश्नोत्तर
  • ३४. नवीन कर्म और कर्मफल-भोगका विवेचन
  • ३५. कर्म और पूजाका रहस्य
  • ३६. अमूल्य वस्तु और उसकी प्राप्तिका उपाय
  • ३७ देवोपासनाका फल
  • ३८. कर्म और फल-भोगका विषय
  • ३९. भगवान‍्के दिव्य देहका रहस्य
  • ४०. भेद और अभेद उपासना
  • ४१. भगवान् पर निर्भरता
  • ४२. भगवान‍्की दया और भगवत्प्रार्थना
  • ४३. शिव और द्रौपदीके सम्बन्धमें शंका-समाधान
  • ४४. सूरदासजीके एक पदका भाव
  • ४५. स्पृश्यास्पृश्य आदि पाँच प्रश्नोत्तर
  • ४६. श्रीकृष्णपरक दो मन्त्रोंका अर्थ
  • ४७. सन्ध्या-गायत्री, स्वाध्याय और पवित्रताका प्रसंग
  • ४८. व्रत, मूर्तिपूजा और पतिसेवाका विषय
  • ४९. भगवान‍्के चतुर्भुजरूपका और सत्संगका विषय
  • ५०. दैन्यभावकी आवश्यकता
  • ५१. भगवान‍्की प्राप्तिमें श्रद्धा-प्रेमकी आवश्यकता
  • ५२. जीव, ईश्वर और प्रकृति आदिके विषयमें ग्यारह प्रश्नोत्तर
  • ५३. अभ्यास, वैराग्य और पंचमहायज्ञका प्रसंग
  • ५४. नित्य-निरन्तर भगवत्स्मरणका उपाय
  • ५५. पूर्वजन्मकी स्मृति न रहनेका कारण
  • ५६. सात प्रश्नोत्तर
  • ५७. विभिन्न पाँच प्रश्नोत्तर
  • ५८. योगविषयक विवेचन
  • ५९. भगवान‍्की निष्काम भक्ति
  • ६०. ईश्वरकी अनन्यभक्ति
  • ६१. कर्मयोग, भक्तियोग आदि विषयक प्रश्नोत्तर
  • ६२. ब्रह्मचर्य-पालन, विवाहका उद्देश्य और मुक्ति-प्राप्तिका उपाय
  • ६३. पिताका आज्ञापालन, निरन्तर भगवत्स्मृति और निष्कामप्रेमका विषय
  • ६४. अन्तर्जातीय विवाहका निषेध
  • ६५. प्रेमपूर्वक जप-ध्यान
  • ६६. घरमें रहकर आत्मकल्याणके लिये प्रेरणा
  • ६७. व्यापार और कीर्तनका विषय
  • ६८. सट्टेका विरोध
  • ६९. वेदान्तविषयक प्रश्नोत्तर
  • ७०. भगवान‍्में मन लगानेका उपाय
  • ७१. श्रीविष्णु, श्रीशिव, श्रीराम, श्रीकृष्ण आदिकी एकता
  • ७२. साधनके लिये चेतावनी
  • ७३. बर्ताव-सुधार
  • ७४. समयकी अमोलकता
  • ७५. मैं-मेराका त्याग और गुप्त भजन-ध्यान
  • ७६. सदाचार और ईश्वरोपासना
  • ७७. हठपूर्वक प्राणत्यागका निषेध तथा कर्म और भक्तिका रहस्य
  • ७८. राग-द्वेषरहित कर्म और भजन-सत्संगके लिये प्रेरणा
  • ७९. एकान्तमें और काम करते हुए भजन करनेकी समानता
  • ८०. ईश्वर-साक्षात्कारके कई उपाय
  • ८१. ईश्वरभक्ति और दैवी सम्पदाका सेवन
  • ८२. सारा संसार भगवान‍्की लीला है
  • ८३. प्रह्लादकी तरह निष्काम भगवच्चिन्तन
  • ८४. तेज साधनके लिये प्रेरणा
  • ८५. निरन्तर भगवत्स्मरणका प्रभाव
  • ८६. उपासनाविषयक नौ प्रश्नोत्तर
  • ८७. शास्त्रविषयक शंका-समाधान
  • ८८. भजन-सत्संगकी महिमा
  • ८९. माता-पिताकी सेवा, आज्ञापालन और ईश्वरभक्ति
  • ९०. शोकनिवृत्तिका उपाय
  • ९१. एकान्तमें भजन-ध्यानका साधन
  • ९२. परमार्थ प्रधान, व्यापार गौण
  • ९३. जन्म-मृत्यु भगवान‍्की क्रीड़ा
  • ९४. आध्यात्मिक प्रश्नोत्तर
  • ९५. सगुणकी ध्यान विधि
  • अन्तिम पृष्ठ

सम्बंधित ई-पुस्तकें

ध्यानावस्था में प्रभु से वार्तालाप

ध्यानावस्था में प्रभु से वार्तालाप

मनुष्य का परम कर्तव्य

मनुष्य का परम कर्तव्य

गीता के परम प्रचारक

गीता के परम प्रचारक

स्त्रियों के लिये कर्तव्य शिक्षा

स्त्रियों के लिये कर्तव्य शिक्षा

नल दमयन्ती

नल दमयन्ती