गीताप्रेसके संस्थापक परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका ने लोगोंको जन्म-मरणके चक्रसे छुड़ानेके लिये बहुतसे प्रयास जीवनकालमें किये और उनकी प्रेरणासे अभी भी ऐसे कार्य हो रहे हैं। उन्होंने विभिन्न अवसरोंपर भगवन्नामकी महिमा और परम सेवाकी महत्ता पर विशेष रूपसे प्रवचन दिये। मृत्युके समय रोगीके साथ कैसे उपचार किया जाय— इन बातोंपर प्रकाश डाला। उनके उपरोक्त विषयोंपर सम्बन्धित प्रवचनोंको संकलित करके प्रस्तुत पुस्तकमें सम्मिलित किया गया है। भोग और शरीरका आराम ही मनुष्यको भगवत्प्राप्तिसे विमुख करानेवाले हैं। भोग और शरीरके आराम महान् दु:खदायी तथा भगवत्प्राप्तिमें महान् बाधक हैं। कलियुगमें नामजप ही सर्वश्रेष्ठ साधन है, इन विषयोंके प्रवचन भी इस पुस्तकमें दिये गये हैं।
पाठकगण इस पुस्तकको मन लगाकर पढ़ें एवं अपने प्रिय प्रेमी सज्जनों और बान्धवोंको इस पुस्तकको पढ़नेकी प्रेरणा करें। इस पुस्तकका पठन-पाठन हम सभीके जीवनको उन्नत बना देगा, ऐसी हमें आशा है।