॥ श्रीहरि:॥

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परम सेवा

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

गीताप्रेसके संस्थापक परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका ने लोगोंको जन्म-मरणके चक्रसे छुड़ानेके लिये बहुतसे प्रयास जीवनकालमें किये और उनकी प्रेरणासे अभी भी ऐसे कार्य हो रहे हैं। उन्होंने विभिन्न अवसरोंपर भगवन्नामकी महिमा और परम सेवाकी महत्ता पर विशेष रूपसे प्रवचन दिये। मृत्युके समय रोगीके साथ कैसे उपचार किया जाय— इन बातोंपर प्रकाश डाला। उनके उपरोक्त विषयोंपर सम्बन्धित प्रवचनोंको संकलित करके प्रस्तुत पुस्तकमें सम्मिलित किया गया है। भोग और शरीरका आराम ही मनुष्यको भगवत्प्राप्तिसे विमुख करानेवाले हैं। भोग और शरीरके आराम महान् दु:खदायी तथा भगवत्प्राप्तिमें महान् बाधक हैं। कलियुगमें नामजप ही सर्वश्रेष्ठ साधन है, इन विषयोंके प्रवचन भी इस पुस्तकमें दिये गये हैं।
पाठकगण इस पुस्तकको मन लगाकर पढ़ें एवं अपने प्रिय प्रेमी सज्जनों और बान्धवोंको इस पुस्तकको पढ़नेकी प्रेरणा करें। इस पुस्तकका पठन-पाठन हम सभीके जीवनको उन्नत बना देगा, ऐसी हमें आशा है।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • परम सेवा
  • यमराजके यहाँ चर्चा ही नहीं
  • सुननेवाले, सुनानेवाले दोनोंका कल्याण
  • दु:खका मूल है ममता
  • भगवान् के ध्यानरूपी रस्सेको न छोडे़ं
  • भगवान् की इच्छामें अपनी इच्छा मिला दें
  • भगवान् और महापुरुषोंके प्रभावकी बातें
  • अपने साधनका निरीक्षण करें
  • जप करनेवालेके आनन्द और शान्ति स्वत: रहती है
  • सारे तीर्थोंकी यात्रासे बढ़कर एक भगवन्नाम
  • अगर काममें ले तो नयी है
  • समयकी अमोलकता
  • निष्कामभावसे भजन करें
  • सर्वदा भगवत्स्मरणका उपाय
  • भगवान् की गारन्टी
  • बहुत-से जन्म तो हमारे हो चुके
  • कब चेतोगे
  • भगवान् के चिन्तनका महत्त्व
  • संसारसे वैराग्य और भगवान् में प्रेम
  • एक बार भगवान् को प्रणाम करनेका महत्त्व
  • भगवान् स्वयं आकर ले जाते हैं
  • भगवान् भक्तकी इच्छा पूर्ण करते हैं
  • व्यवहारसे भजनमें बाधा न आवे
  • भगवान् की प्राप्ति २४ घण्टेमें हो सकती है
  • भगवान् के ध्यानके लिये प्रेरणा
  • ध्यानावस्थामें प्रभुसे वार्तालाप
  • अन्तकालके स्मरणका महत्त्व
  • भगवान् को छोड़कर भोगोंको चाहना मूर्खता
  • पद्मपुराणके अनुसार पुत्रका कर्तव्य
  • नामजपसे विधाताके लेखका मिटना और भगवान् द्वारा रक्षा
  • भगवान् प्रसन्न हों वह काम करें
  • मरणासन्नको भगवन्नाम सुनाना अति महत्त्वपूर्ण
  • मरणासन्न व्यक्तिको भगवन्नाम सुनानेसे मुक्ति
  • भगवान् के ध्यानमें मृत्यु हो तो आनन्द-ही आनन्द है
  • सबका कल्याण हो यह भाव रखे
  • मृत्यु-समयके उपचार
  • सत्सङ्गके अमृत-कण
  • भगवान् का भजन करो
  • भगवन्नाम सुनाना सर्वश्रेष्ठ कार्य
  • भगवन्नामकी तुलना ही नहीं
  • श्रीमद्भागवतमहापुराणमें भगवन्नाम-महिमा
  • अन्तिम पृष्ठ

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