प्रस्तुत पुस्तकमें प्रात:काल जागरणके पश्चात् प्रात:कालीन भगवत्स्मरणसे लेकर शौचाचार, आभ्यन्तर-शौच, दन्तधावन-विधि, क्षौरकर्म, स्नान, संध्योपासन, जप, तर्पण, ब्रह्मयज्ञ, बलिवैश्वदेव आदि पञ्चमहायज्ञोंका विवेचन, देवपूजन, मानसपूजा, सूर्य-नमस्कार, नित्य-दान, संकल्प-विधि, अतिथि-सत्कार, भोजन-विधि, शयन-विधान आदि प्रकरणोंके साथ-साथ नित्य पाठ करनेके स्तोत्रोंका संग्रह भी किया गया है तथा विभिन्न देवोंकी दैनिक उपयोगमें आनेवाली स्तुति और आरतीका संकलन हुआ है। विशिष्ट पूजा-प्रकरणके अन्तर्गत स्वस्तिवाचन, गणेश-पूजन, वरुणकलश-पूजन, पुण्याहवाचन, नवग्रह-पूजन, षोडशमातृका, सप्तघृतमातृका, चतुष्षष्टियोगिनी तथा वास्तुपूजनका भी संग्रह हुआ है। इसके साथ ही पञ्चदेव, शिव, पार्थिवेश्वर, शालग्राम तथा महालक्ष्मी-दीपमालिका आदिके पूजन-विधान भी प्रस्तुत किये गये हैं।
प्रत्येक मनुष्यके चौबीस घंटेमें २१,६०० बार श्वास चलते हैं। अत: प्रति श्वासके अनुसार भगवन्नाम-स्मरण होना ही चाहिये। शास्त्रोंमें अजपाजपकी एक सरल प्रक्रिया है, उसे भी यहाँ दिया गया है। पुस्तकके अन्तमें विभिन्न देवोंकी पूजामें विहित एवं निषिद्ध पत्र-पुष्पोंका विवेचन भी हुआ है, जो अर्चकोंके लिये अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
आशा है, यह पुस्तक साधकोंके लिये अत्यधिक उपयोगी और लाभप्रद होगी।