॥ श्रीहरि:॥

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मनुष्य जीवन की सफलता

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका के लेखोंको संशोधन करके इस पुस्तकमें संगृहीत किया गया है। इनमें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक, व्यावहारिक, नैतिक, धार्मिक, पारमार्थिक आदि उन्नतिका विषय भी दिया गया है, जो मनुष्यमात्रके लिये लाभदायक है तथा स्त्रियोंको घरवालोंके साथ परस्पर किस प्रकार त्यागपूर्वक व्यवहार करना चाहिये, यह भी बताया गया है। ज्ञान, वैराग्य, भक्ति, सदाचार और मन-इन्द्रियोंके संयमकी बातें तो कल्याणकामी पुरुषके लिये इसमें पर्याप्त हैं। उत्तम गुण, उत्तम भाव, सत्पुरुषोंके संग, महिमा, गुण, प्रभाव एवं गीता-रामायण आदि अध्यात्मविषयक शास्त्रोंके स्वाध्याय आदिकी बातें भी लिखी हैं। दु:खी और अनाथोंकी निष्काम सेवा करनेसे मनुष्यकी शीघ्र उन्नति हो सकती है तथा गृहस्थाश्रममें रहकर किस प्रकार अपना जीवन बिताना चाहिये, यह भी बताया है। ईश्वर, महात्मा, शास्त्र और परलोकमें श्रद्धा-विश्वास करनेसे शीघ्र कल्याण होनेकी बात बतायी गयी है। ईश्वरभक्ति-विषयमें गीताका तात्त्विक विवेचन भी किया गया है एवं भाइयोंको परस्पर किस प्रकार प्रेम-व्यवहार करना चाहिये, यह भी दिखाया गया है। भाई या माता-बहिनें इसे पढ़कर लाभ उठावें।
  • प्रथम पृष्ठ
  • नम्र निवेदन
  • श्रीनारद और श्रीविष्णुपुराणके कुछ महत्त्वपूर्ण विषय
  • सब प्रकारकी उन्नति
  • देशवासियोंके हितकी कुछ बातें
  • दानका रहस्य
  • स्त्रियोंके लिये स्वार्थत्यागकी शिक्षा
  • मानव-जीवनका सर्वोत्तम उद्देश्य
  • +
    संत-महापुरुषोंके सिद्धान्त
    • परमात्माकी प्राप्तिके विभिन्न मार्ग
  • तीन प्रकारकी श्रद्धाका तत्त्व-रहस्य
  • श्रद्धा और अच्छी नीयत
  • महापुरुषोंके गुण-प्रभाव
  • भक्तिसहित निष्काम कर्मयोगसे भगवत्प्राप्ति
  • आत्मोन्नतिमें सहायक बातें
  • जप, ध्यान, सत्सङ्ग, स्वाध्यायसे उत्तरोत्तर उन्नतिका दिग्दर्शन
  • नामका माहात्म्य
  • अनन्य भक्ति और भरत आदिका प्रेम
  • परमात्माकी प्राप्तिके लिये निराश नहीं होना चाहिये
  • गीतामें ईश्वर-भक्ति
  • +
    श्रद्धा-विश्वास, मिलनकी तीव्र इच्छा और निर्भरता
    • आस्तिकभाव या भगवान् की सत्तामें विश्वास
    • शास्त्र और महात्माओंपर श्रद्धा
    • ईश्वरके मिलनेकी तीव्र इच्छा
    • भगवान् पर निर्भरता
  • अनन्य विशुद्ध भगवत्प्रेम और भगवान् की सुहृदता
  • सभी साधनोंमें वैराग्यकी आवश्यकता तथा प्रेमाभक्तिका निरूपण
  • श्रद्धा, प्रेम और तीव्र इच्छासे भगवत्प्राप्ति
  • भगवन्नाम-महिमा
  • ब्राह्मी स्थिति
  • परमात्माके आनन्दमय स्वरूपका ध्यान
  • अन्तिम पृष्ठ

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