इन लेखोंमें मानवमात्रके कल्याणके लिये गीतोक्त निष्काम कर्म, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, संयम, वर्णाश्रमधर्म, सत्य, श्रद्धा, समता, भगवत्प्रेम, भगवान् की दया, प्रारब्ध और पुरुषार्थ एवं यथार्थ सुख आदि अनेक आध्यात्मिक तत्त्वोंका विशद विवेचन किया गया है। साथ ही चतु:श्लोकी भागवत भी व्याख्यासहित दी गयी है। इससे यह संग्रह कर्मयोगी, भक्तियोगी और ज्ञानयोगी— सभी प्रकारके साधकोंके लिये परम उपयोगी है।