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॥ श्रीहरि:॥
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/ ई – पुस्तकें
/ मानव जीवन का लक्ष्य
मानव जीवन का लक्ष्य
लेखक
श्रद्धेय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार
भाषा
हिन्दी/संस्कृत
पुस्तक पढ़ें
विषय-सूची
•
प्रथम पृष्ठ
•
नम्र निवेदन
•
मानव-जीवनका लक्ष्य—भगवत्प्राप्ति
•
साधनाके दो प्रकार
•
मनुष्य-जीवनका परम कर्तव्य
•
साधकका स्वरूप
+
मनुष्य-जीवनका एकमात्र उद्देश्य—भगवत्प्राप्ति
•
(कर्मानुसार गतियोंके भेद)
•
रस (प्रेम)-साधनकी विलक्षणता
+
चरम और परम उपासनाका सुधा-मधुर फल—भगवत्प्रेम
•
सख्यरसके भक्तोंके भी दो भेद हैं—
+
रास-रहस्य
•
त्यागकी पराकाष्ठा
•
भक्तका एकांगी प्रेम
+
श्रीकृष्ण-महिमाका स्मरण
•
‘यह दिव्य प्राकट्य क्यों होता है?’
•
‘कब होता है?’
•
‘प्राकट्य किनका होता है?’
•
‘वे कैसे प्रकट होते हैं?’
•
‘दुष्कृत कौन है?’
•
श्रीभीष्मपितामह—
•
वनमें भगवान् श्रीकृष्णसे द्रौपदी कहने लगी—
•
वनमें मुनि मार्कण्डेयजी युधिष्ठिरसे कहते हैं—
•
श्रीकृष्ण-तत्त्वके ज्ञाता भक्त संजय राजा धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णकी महिमा बतलाते हुए कहते हैं—
•
राजा धृतराष्ट्रके पूछनेपर संजय श्रीकृष्णके कुछ नामोंका रहस्य बतला रहे हैं—
•
संजयके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा सुनकर उससे प्रभावित हो धृतराष्ट्र स्तवन करने लगे—
•
देवर्षि नारद श्रीयुधिष्ठिरसे श्रीमद्भागवत (७। १५) में कहते हैं—
•
भगवान् श्रीकृष्णने भगवद्गीतामें अर्जुनसे कहा है—
•
ऐश्वर्य-लीला
•
माधुर्य-लीला
•
परस्परविरोधी गुण
•
आदर्श मानवता तथा सर्वगुणसम्पन्नता
•
आदर्श राजनीतिज्ञता
+
श्रीराधा-माधवका मधुर रूप-गुण-तत्त्व
•
त्यागकी आवश्यकता
•
श्रीराधाके दिव्यगुण
•
श्रीराधा-गोपी-प्रेमका उच्च आदर्श
•
रसानन्दस्वरूप श्रीकृष्णकी रसास्वादन-समुत्सुकता
•
आनन्दके स्वरूपमें तारतम्य
•
रसानन्दकी उत्कर्षता
•
सेवानन्द सबसे बढ़कर
•
विशुद्ध सेवाके लिये ‘सेवानन्द’ का भी त्याग
•
विशुद्ध सेवा-रसास्वादनके लिये भगवान् के ज्ञान-ऐश्वर्यपर चिच्छक्तिके द्वारा आवरण
•
क्या भगवान् के ज्ञान-ऐश्वर्यका आवृत होना सम्भव है? और है तो क्या वह दोष नहीं है?
•
माधुर्यलीलाके समय भी ऐश्वर्यकी विद्यमानता
•
भगवान् प्रेमसेवाके ऋणी
•
प्रेमराज्यमें मधुररूपमें भगवान् की प्राप्ति
•
रसब्रह्म केवल भावग्राह्य
•
भावकी पराकाष्ठा श्रीराधारानीमें
•
रागात्मिका भक्ति
•
मादन-अवस्थामें प्रेमरसके विचित्र आस्वादन
•
महत्त्व और प्रार्थना
+
श्रीराधामाधव-युगलोपासना
•
गोविन्दका ध्यान
•
श्रीराधाका ध्यान
•
राधामाधव-युगलकी आरती
•
कातर-प्रार्थना
•
श्रीराधामाधव-युगलसे कृपाभिक्षा
•
अपराध-क्षमापन
•
श्रीकृष्ण-मन्त्र
•
सत्संग-वाटिकाके बिखरे सुमन
•
कल्याण-सूत्र
•
भगवान् मेरे सहायक हैं, मुझे कोई भय नहीं
•
संकटके समय विश्वासी भक्तकी भावना
•
प्रतिशोधकी भावनाका त्याग करके प्रेम कीजिये
•
भगवान् की वस्तु भगवान् को सौंप दो
•
भगवान् श्रीसीतारामजीका ध्यान
+
भगवान् का मंगल-विधान
•
(सत्य घटना)
•
मोचीमें मनुष्यत्व
•
विलक्षण भाव-जगत्
•
अधर्म तथा असत्कर्मका फल दैवी प्रकोप—जन-धनका नाश
•
क्रोधनाशका उपाय
•
सुख चाहते हैं तो
•
अन्तिम पृष्ठ
सम्बंधित ई-पुस्तकें
सुख-शान्ति का मार्ग
परमार्थ की मन्दाकिनी
दिव्य सुख की सरिता
समाज सुधार
दीन-दु:खियों के प्रति कर्तव्य
श्रीरामचरितमानस (सटीक)
सुन्दरकाण्ड (सटीक)
गीता चिन्तन
सुखी बननेके उपाय
पद रत्नाकर
प्रार्थना
श्रीराधा माधव चिन्तन
साधन पथ
अमृत कण
श्री भगवन्नाम-चिन्तन
दाम्पत्य जीवन का आदर्श
ब्रह्मचर्य
श्रीराधा माधव रस सुधा (षोडश गीत)
सत्संग के बिखरे मोती
महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
तुलसी दल
संत वाणी
मन को वश करने के कुछ उपाय
श्रीभगवन्नाम
श्री राम चिन्तन
दैनिक कल्याण सूत्र
गोपी प्रेम
भगवच्चर्चा (सभी छहों भाग एक साथ)
गो सेवा के चमत्कार
नैवेद्य
उपनिषदों के चौदह रत्न
प्रेम दर्शन (नारद भक्ति सूत्र की व्...
ईश्वर की सत्ता और महत्ता
स्त्री धर्म प्रश्नोत्तरी
सत्संग सुधा
पूर्ण समर्पण
नारी शिक्षा
साधकों का सहारा
भवरोग की रामबाण दवा
दु:ख क्यों होते हैं?
भगवान् सदा तुम्हारे साथ हैं
दु:ख में भगवत्कृपा
भगवच्चर्चा
कल्याण कुंज
भगवत्प्राप्ति एवं हिंदू संस्कृति
महाभाव कल्लोलिनी
कल्याणकारी आचरण
मधुर
विवाह में दहेज
शान्ति कैसे मिले?
सिनेमा – मनोरञ्जन या विनाश का साधन
व्यवहार और परमार्थ
मानव धर्म
लोक परलोक का सुधार
दिव्य सन्देश
सुखी बनो
गोवध भारत का कलंक
आनन्द की लहरें
मानव कल्याण के साधन
सफलता के शिखर की सीढ़ियाँ
आनन्द का स्वरूप
भगवान् की पूजा के पुष्प
वर्तमान शिक्षा
भगवच्चर्चा (भाग-५)
सुख-शान्ति का मार्ग
परमार्थ की मन्दाकिनी
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