॥ श्रीहरि:॥

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मनन माला

श्री ज्वालासिंह जी

हिन्दी/संस्कृत

मनन-माला के पिरोनेवाले श्रीज्वालासिंहजी सरल-हृदयके एक भावुक पुरुष हैं। इस पुस्तकमें इन्हींकी भावतरङ्गोंकी कुछ झांकियाँ हैं। झाँकियाँ सुन्दर हैं। ‘ज्वाला’ के सिवा अन्य सभी पद या दोहे संगृहित हैं परन्तु उन्हें अपने भावके अनुसार बना लेनेमें ज्वालासिंहजीने निरङ्कुशतासे काम लिया है। उनकी भावुकताके ख्यालसे पाठ शुद्ध न करके उन्हें ज्यों-का-त्यों छाप दिया गया है। यह उनका दोष नहीं है, भावुकता छोड़कर भावुक-हृदयसे ही इसे पढ़े, तभी विशेष आनन्द मिलेगा।
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