॥ श्रीहरि:॥

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महाभारत (स्वर्गारोहणपर्व)

हिन्दी/संस्कृत

महाभारत आर्य-संस्कृति तथा भारतीय सनातनधर्मका एक महान् ग्रन्थ तथा अमूल्य रत्नोंका अपार भण्डार है। महाभारत महाकाव्य है, गूढ़ार्थमय ज्ञान-विज्ञान-शास्त्र है, धर्मग्रन्थ है, राजनीतिक दर्शन है, कर्मयोग-दर्शन है, भक्ति-शास्त्र है, अध्यात्म-शास्त्र है, आर्यजातिका इतिहास है और सर्वार्थसाधक तथा सर्वशास्त्रसंग्रह है। इसकी महिमा अपार है।
इसके स्वर्गारोहणपर्व को पाठकों की सेवा में प्रस्तुत करते हुए हमें अत्यंत हर्ष हो रहा है। आशा है, पाठकगण इससे लाभ उठाकर अपने जीवनको सफल बनानेमें सक्षम होंगे।
  • प्रथम पृष्ठ
  • स्वर्गारोहणपर्व
  • प्रथमोऽध्याय:
  • स्वर्गमें नारद और युधिष्ठिरकी बातचीत
  • द्वितीयोऽध्याय:
  • देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना
  • तृतीयोऽध्याय:
  • इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना
  • चतुर्थोऽध्याय:
  • युधिष्ठिरका दिव्यलोकमें श्रीकृष्ण, अर्जुन आदिका दर्शन करना
  • पञ्चमोऽध्याय:
  • भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य
  • महाभारतश्रवणविधि:
  • माहात्म्य, कथा सुननेकी विधि और उसका फल
  • महाभारत-माहात्म्य
  • सम्पूर्ण महाभारतकी श्लोकसंख्या (अनुष्टुप् छन्दके अनुसार)
  • अन्तिम पृष्ठ

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