प्रस्तुत पुस्तक में परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन श्रीजयदयालजी गोयन्दका के प्रवचनों - तीर्थोंमें मनुष्योंको कौन-से नियम पालन करने चाहिये, भगवत्प्राप्तिमें कौन-सी बातें विशेष रूपसे सहायक हैं तथा उन्होंने अपनी छोटी आयुमें झूठ बोलना, काम, क्रोध, लोभादि दोषोंपर कैसे नियन्त्रण पाया, इन बातोंका विवेचन किया है तथा १५ वर्षकी आयुमें किन महापुरुषके दर्शनमात्रसे उन्हें विशेष आध्यात्मिक लाभ हुआ, यह भी बताया है। मनुष्य साधारण बातोंको काममें लानेसे कैसे अपना उद्धार कर सकते हैं, जैसे बड़ोंको प्रणाम, बलिवैश्वदेव एवं भगवान्की मानसिक पूजा आदि। इन बातोंको करनेके लिये विशेष रूपसे प्रेरणा भी दी गयी है। हमें आशा है, पाठकगण इनसे विशेष लाभ उठानेकी कृपा करेंगे।