॥ श्रीहरि:॥

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कर्णवास का सत्संग

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

प्रस्तुत पुस्तक में परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन श्रीजयदयालजी गोयन्दका के प्रवचनों - तीर्थोंमें मनुष्योंको कौन-से नियम पालन करने चाहिये, भगवत्प्राप्तिमें कौन-सी बातें विशेष रूपसे सहायक हैं तथा उन्होंने अपनी छोटी आयुमें झूठ बोलना, काम, क्रोध, लोभादि दोषोंपर कैसे नियन्त्रण पाया, इन बातोंका विवेचन किया है तथा १५ वर्षकी आयुमें किन महापुरुषके दर्शनमात्रसे उन्हें विशेष आध्यात्मिक लाभ हुआ, यह भी बताया है। मनुष्य साधारण बातोंको काममें लानेसे कैसे अपना उद्धार कर सकते हैं, जैसे बड़ोंको प्रणाम, बलिवैश्वदेव एवं भगवान‍्की मानसिक पूजा आदि। इन बातोंको करनेके लिये विशेष रूपसे प्रेरणा भी दी गयी है। हमें आशा है, पाठकगण इनसे विशेष लाभ उठानेकी कृपा करेंगे।
  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • सत्संग, संयम और साधन
  • प्रेम तथा श्रद्धाकी महिमा
  • चिन्ता-शोक कैसे मिटे?
  • दम्भसे महान् पतन, वैराग्यसे लाभ
  • बाल्यावस्थाकी चर्चा
  • सनातन धर्मकी विशेषता
  • महात्माओंमें अद्भुत शक्ति
  • हेतुरहित प्रेमका महत्त्व
  • शास्त्रविधि-पालनकी आवश्यकता
  • समताकी महिमा
  • महात्माके दर्शनसे लाभ
  • जीवनी और अपने चित्रके प्रचारका निषेध
  • वैराग्य और प्रेम
  • सेवा, प्रणाम, बलिवैश्वदेव एवं मानसिक पूजासे कल्याण
  • ईश्वरकी सत्ता एवं उनकी भक्ति
  • साधनमें तत्परता
  • उपरामता और ध्यानकी महिमा
  • पाप प्रारब्धके फल नहीं
  • अन्तिम पृष्ठ

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