॥ श्रीहरि:॥

gstlogo
हिन्दीarrowdown
कर्मयोग का तत्त्व

श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका

हिन्दी/संस्कृत

  • प्रथम पृष्ठ
  • निवेदन
  • काम करते हुए भगवत्-प्राप्तिकी साधना
  • +
    गीतोक्त निष्काम कर्मयोगका स्वरूप
    • सकाम कर्म—
    • निष्काम कर्म—
    • गीतामें निष्काम कर्मका आरम्भ—
    • मदर्पण और मदर्थका भेद—
    • भगवत्प्राप्तिके लिये किया जानेवाला कर्म ही निष्काम कर्मयोग है—
  • भगवान् के लिये काम कैसे किया जाय?
  • व्यापार सुधारकी आवश्यकता
  • व्यापारसे मुक्ति
  • +
    कर्मका रहस्य
    • संचित
    • प्रारब्ध
    • क्रियमाण
    • कर्मका फल कौन देता है?
    • ईश्वरभजनकी आवश्यकता क्यों है?
  • निष्काम कर्मसे परमात्माकी प्राप्ति
  • +
    कर्मयोगका रहस्य
    • (क) भगवत्-अर्थ कर्म
    • (ख) भगवत्-अर्पण कर्म
  • कर्मयोगकी सुगमता
  • +
    कर्मयोगके पाँच भेद
    • १-केवल कर्मयोग
    • २-भक्ति-गौण कर्मयोग
    • ३-भक्ति-सामान्य कर्मयोग
    • ४-भक्तिप्रधान कर्मयोग
    • ५-केवल भक्तियोग
  • +
    सांख्ययोग और कर्मयोग
    • उपसंहार
  • निष्कामभावकी महत्ता
  • समता अमृत और विषमता विष है
  • +
    कुछ उपयोगी साधन
    • अचिन्त्य ब्रह्मकी उपासना
    • चराचररूप ब्रह्मकी उपासना
    • संकल्पब्रह्मकी उपासना
    • शब्दब्रह्मकी उपासना
    • नि:स्वार्थ कर्म-साधन
    • सेवा-साधन
    • पंच महायज्ञ-साधन
    • विषय-हवनरूप साधन
    • महापुरुष-आज्ञा-पालनरूप साधन
  • सभी वर्णाश्रमोंमें मुक्ति
  • +
    त्रिविध कर्म
    • प्रारब्ध
    • संचित
    • क्रियमाण
  • भक्तिसहित निष्काम कर्मयोगसे भगवत्प्राप्ति
  • श्रद्धा और अच्छी नीयत
  • प्रतिग्रह और पापसे भी ऋण अधिक हानिकर है
  • दानका रहस्य
  • स्त्रियोंके लिये स्वार्थत्यागकी शिक्षा
  • परम सेवासे कल्याण
  • लोकसंग्रहरूप आदर्श कर्मका तत्त्व-रहस्य
  • प्रारब्ध और पुरुषार्थका रहस्य
  • निष्कामभावका तत्त्व-रहस्य
  • सत्यकी महिमा
  • साधनको साध्यसे भी अधिक आदर देना चाहिये
  • +
    सर्वधर्मपरित्यागका रहस्य
    • १. तू सम्पूर्ण धर्मोंका मुझमें त्याग कर दे
    • २. तू केवल एक मेरी ही शरणमें आ जा
    • ३. मैं तुम्हें सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर दूँगा
    • ४. तू शोक मत कर
  • भक्तों और ज्ञानियोंके लिये भी शास्त्र-विहित कर्मोंकी परम आवश्यकता
  • ब्राह्मी स्थिति
  • गीताके अनुसार स्थितप्रज्ञ, भक्त और गुणातीतके लक्षण तथा आचरण
  • अन्तिम पृष्ठ

सम्बंधित ई-पुस्तकें

ध्यानावस्था में प्रभु से वार्तालाप

ध्यानावस्था में प्रभु से वार्तालाप

मनुष्य का परम कर्तव्य

मनुष्य का परम कर्तव्य

गीता के परम प्रचारक

गीता के परम प्रचारक

स्त्रियों के लिये कर्तव्य शिक्षा

स्त्रियों के लिये कर्तव्य शिक्षा

नल दमयन्ती

नल दमयन्ती