यह पुस्तक कुछ लेखोंका संग्रह है। श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीभगवन्नामके प्रभावसे मैंने जो कुछ समझा है, उसीका कुछ भाव इन लेखोंमें दिखलानेकी चेष्टा की गयी है। इस पुस्तकसे यदि किसी पाठकके चित्तमें तनिक भी ज्ञान, वैराग्य और सदाचारका संचार होगा, तनिक-सी भी भगवद्भक्तिकी भावना उत्पन्न होगी और मनके गम्भीर प्रश्नोंमें दो-एकका भी समाधान होगा तो बड़े आनन्दकी बात है।
- श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका