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॥ श्रीहरि:॥
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ई – पुस्तकें
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/ ई – पुस्तकें
/ जैमिनीकृत महाभारत में भक्तों की गाथा
जैमिनीकृत महाभारत में भक्तों की गाथा
भाषा
हिन्दी/संस्कृत
पुस्तक पढ़ें
विषय-सूची
•
प्रथम पृष्ठ
•
भूमिका
•
प्रथम अध्याय
•
युधिष्ठिरकी चिन्ता, व्यासजीद्वारा द्रव्य-प्राप्तिका उपाय एवं अश्वमेघ-यज्ञकी विधि आदि बताया जाना
•
दूसरा अध्याय
•
भीमसेनद्वारा अश्व लानेकी प्रतिज्ञा, युधिष्ठिरका भाइयोंसे वार्तालाप, श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-वार्तालाप
•
तीसरा अध्याय
•
भीमसेनद्वारा श्रीकृष्णकी बातोंका उत्तर तथा उनके गुणोंका वर्णन, एवं अश्वके लिये पर्वतपर प्रतीक्षा
•
चौथा अध्याय
•
श्यामकर्ण अश्वका सरोवरतटपर आगमन, भीमसेन-नीलध्वज-युद्ध
•
पाँचवाँ अध्याय
•
वृषकेतु-यौवनाश्व-युद्ध, भीमसेन-सुवेग-युद्ध और दोनोंकी मूर्च्छा, पुन: वृषकेतु-यौवनाश्व-युद्ध तथा वृषकेतुद्वारा यौवनाश्वकी जीवन-रक्षा
•
छठा अध्याय
•
यौवनाश्वके द्वारा भीमसेन तथा उनके सहयोगियोंका स्वागत तथा भीमसेनका अश्वसहित हस्तिनापुरके लिये प्रस्थान
•
सातवाँ अध्याय
•
युधिष्ठिरद्वारा राजा यौवनाश्वका स्वागत, व्यासजीका युधिष्ठिरको राजा मरुत्तके यज्ञका वृत्तान्त सुनाना
•
आठवाँ अध्याय
•
व्यासजीद्वारा वर्णधर्म, विधवाओंके कर्तव्य और कुलटा स्त्रियोंके स्वरूप एवं लक्षणका निरुपण
•
नवाँ अध्याय
•
व्यासजीद्वारा युधिष्ठिरको लक्ष्मीके स्थिरता तथा भगवान् की प्रसन्नताका उपाय बतलाना
•
दसवाँ अध्याय
•
श्रीकृष्णका भीमसेनसे भोजनके लिये मनोविनोद करना
•
ग्यारहवाँ अध्याय
•
हस्तिनापुरकी यात्रा तथा विनोदपूर्ण वार्तालाप
•
बारहवाँ अध्याय
•
महर्षि जैमिनिद्वारा स्मार्तोंके भाषणका वर्णन, सत्यभामा आदि नारियोंके द्वारा घोड़ेका दर्शन
•
तेरहवाँ अध्याय
•
अनुशाल्वका पराक्रम तथा श्रीकृष्ण आदिकी पराजय
•
चौदहवाँ अध्याय
•
वृषकेतुका अनुशाल्वको पकड़कर श्रीकृष्णके हाथों सौंपना, युधिष्ठिरकी यज्ञ-दीक्षा, वृषकेतुके साथ अर्जुनका अश्वकी रक्षामें जाना, प्रवीरद्वारा अश्वका पकड़ा जाना
•
पन्द्रहवाँ अध्याय
•
घोड़ेके लिये भयंकर युद्ध तथा गंगाजीद्वारा अर्जुनको शाप
•
सोलहवाँ अध्याय
•
घोड़ेका विन्ध्यपर्वतपर एक शिलापर चिपकना, सौभरिमुनिद्वारा कथा-श्रवणके बाद अर्जुनके करस्पर्शसे चण्डीकी मुक्ति और घोड़ेका आगे बढ़ना
•
सत्रहवाँ अध्याय
•
भगवद्भक्तका प्रभाव—सुधन्वाका खौलते तैल-कड़ाहसे जीवित निकलना
•
अठारहवाँ अध्याय
•
सुधन्वाकी प्रशंसा
•
उन्नीसवाँ अध्याय
•
सुधन्वाका घोर पराक्रम तथा वीरगतिको प्राप्त होना
•
बीसवाँ अध्याय
•
सुधन्वाका अहोभाग्य
•
इक्कीसवाँ अध्याय
•
घोड़ेका आगे जाकर घोड़ी और व्याघ्री होना और जैमिनिद्वारा कारण बताना तथा स्त्री-राज्यमें पहुँचनेपर घोड़ेका पकड़ा जाना
•
बाईसवाँ अध्याय
•
अर्जुनद्वारा प्रमीलाका वरण, घूमते हुए घोड़ेका राक्षस भीषणके नगरमें जाना, अर्जुन-भीषण-युद्ध
•
तेईसवाँ अध्याय
•
अर्जुनके मुकुटपर गीधका बैठना तथा पाण्डव-सेनाके साथ बभ्रुवाहनका युद्ध
•
चौबीसवाँ अध्याय
•
बभ्रुवाहनद्वारा पाण्डव-सेनाकी पराजय
•
पचीसवाँ अध्याय
•
लंकाविजयके पश्चात् भगवान् रामका अयोध्यामें प्रवेश, तथा रामराज्यका वर्णन
•
छब्बीसवाँ अध्याय
•
सीतापर रजकद्वारा कलंक तथा श्रीरामका सीता-परित्यागके लिये भाइयोंको बुलवाना
•
सत्ताईसवाँ अध्याय
•
विचार-विमर्शके बाद लक्ष्मणका सीताको रथपर बैठाकर गंगा-तटके लिये प्रस्थान
•
अट्ठाईसवाँ अध्याय
•
गंगा-पार सीताका परित्याग, वाल्मीकिका सीताको देखना
•
उनतीसवाँ अध्याय
•
कुश-लव-जन्म एवं शिक्षा तथा लवद्वारा घोड़ेको पकड़ना
•
तीसवाँ अध्याय
•
लव-शत्रुघ्न-युद्ध, मूर्च्छित लवको लेकर शत्रुघ्नका प्रस्थान
•
इकतीसवाँ अध्याय
•
सीता-विलाप, कुशका युद्धके लिये जाना, शत्रुघ्नके सेनापतिका वध तथा सेनाका अयोेध्याकी ओर पलायन
•
बत्तीसवाँ अध्याय
•
शत्रुघ्नकी मूर्च्छा एवं अयोध्यासे लक्ष्मणका सेनासहित आना
•
तैंतीसवाँ अध्याय
•
कुश-लव-वार्तालाप, लवका सूर्यसे धनुष पाना तथा भयंकर पराक्रम दिखलाना
•
चौंतीसवाँ अध्याय
•
कुश-लक्ष्मण-युद्धमें लक्ष्मणकी मूर्च्छा
•
पैंतीसवाँ अध्याय
•
भरतका हनुमान् आदि वानरोंसहित युद्धस्थलमें पहुँचना
•
छत्तीसवाँ अध्याय
•
कुश-लवद्वारा युद्धमें वीरताका प्रदर्शन, श्रीसीताकारामसे मिलना, अश्वमेध-यज्ञकी समाप्ति
•
सैंतीसवाँ अध्याय
•
बभ्रुवाहन-हंसध्वज-युद्ध
•
अड़तीसवाँ अध्याय
•
बभ्रुवाहनद्वारा अर्जुनका वध
•
उनतालीसवाँ अध्याय
•
अर्जुनके मस्तकका धृतराष्ट्रपुत्र दुर्बुद्धिद्वारा चुराया जाना
•
चालीसवाँ अध्याय
•
श्रीकृष्णका मणि-स्पर्शसे अर्जुनको जीवित करना
•
एकतालीसवाँ अध्याय
•
घोड़ेका आगे बढ़ना, श्रीकृष्ण और ताम्रध्वजकी बातचीत
•
बयालीसवाँ अध्याय
•
अर्जुनकी सेनाके साथ ताम्रध्वजका युद्ध
•
तैंतालीसवाँ अध्याय
•
ताम्रध्वजका घोर पराक्रम
•
चौवालीसवाँ अध्याय
•
ताम्रध्वजकी विजय
•
पैंतालीसवाँ अध्याय
•
श्रीकृष्ण-मयूरध्वज-वार्तालाप, मयूरध्वजका अपना शरीर चिरवानेके लिये उद्यत होना
•
छियालीसवाँ अध्याय
•
मयूरध्वजके शरीरका आरेसे चीरा जाना
•
सैंतालीसवाँ अध्याय
•
श्रीकृष्णद्वारा यमराजका वीरवर्माके जामाता बननेकी कथाका वर्णन
•
अड़तालीसवाँ अध्याय
•
यमराजका नाना प्रकारके रोगोंकी उत्पत्तिका कारण बताते हुए उनसे छूटनेके उपायका निरूपण करना
•
उनचासवाँ अध्याय
•
यमराज-मालिनी-विवाह
•
पचासवाँ अध्याय
•
नारदजीद्वारा चन्द्रहासकी कथाका वर्णन
•
इक्यावनवाँ अध्याय
•
चन्द्रहासका जीवन-वृत्तान्त
•
बावनवाँ अध्याय
•
चन्द्रहासद्वारा एकादशी-माहात्म्य-वर्णन
•
तिरपनवाँ अध्याय
•
धृष्टबुद्धिका पत्र लेकर चन्द्रहासका कुन्तलपुरके लिये प्रस्थान
•
चौवनवाँ अध्याय
•
विषयाका चन्द्रहासको पतिरूपमें पानेके लिये पार्वतीजीसे प्रार्थना करना
•
पचपनवाँ अध्याय
•
अर्जुनके पूछनेपर नारदजीद्वारा चन्द्रहास और विषयाके विवाहका वर्णन
•
छप्पनवाँ अध्याय
•
चन्द्रहास-विषया-विवाहसे धृष्टबुद्धिका कुपित होना और चन्द्रहासके वधका उपाय सोचना
•
सत्तावनवाँ अध्याय
•
चन्द्रहासके बदले धृष्टबुद्धिके पुत्रका ही वध हो जाना
•
अट्ठावनवाँ अध्याय
•
धृष्टबुद्धिका प्राण-त्याग करना, चन्द्रहासके प्रयाससे धृष्टबुद्धि और उसके पुत्रका जीवित होना
•
उनसठवाँ अध्याय
•
श्रीकृष्णका चन्द्रहासको चतुर्भुजरूपमें दर्शन देना
•
साठवाँ अध्याय
•
अनेक मुखवाले ब्रह्माओंकी कथा तथा श्रीकृष्णका बकदाल्भ्य ऋषिको पालकीपर बैठाकर ले चलना
•
एकसठवाँ अध्याय
•
घोड़ोंका जयद्रथके नगरमें पहुँचना, अर्जुनके आगमनकी सूचना सुनकर जयद्रथ-पुत्रका प्राण-त्याग करना
•
बासठवाँ अध्याय
•
हस्तिनापुरमें अर्जुनका स्वागत-समारोह
•
तिरसठवाँ अध्याय
•
युधिष्ठिरका समाजसहित गंगातटपर जाकर जल ले आना और उससे यज्ञिय अश्वको पवित्र करना
•
चौसठवाँ अध्याय
•
अश्वमेध-यज्ञमें घोड़ेका वध, सिरका आकाशमें जाना तथा ज्योति निकलकर श्रीकृष्णमें समाना और शरीरका कपूर हो जाना
•
पैंसठवाँ अध्याय
•
यज्ञान्त-भोजन, दो ब्राह्मणोंमें झगड़ा, श्रीकृष्णका कलियुगमें होनेवाले दोषोंका वर्णन करना
•
छाछठवाँ अध्याय
•
युधिष्ठिरका नेवलेद्वारा गर्व-भंग
•
सरसठवाँ अध्याय
•
नेवलेका पूर्वचरित्र-वर्णन
•
अड़सठवाँ अध्याय
•
जैमिनीयाश्वमेधपर्वके श्रवणकी महिमा
•
अन्तिम पृष्ठ
सम्बंधित ई-पुस्तकें
भक्त सरोज
भक्त कुसुम
भक्त सौरभ
भक्त दिवाकर
सत्यप्रेमी हरिश्चन्द्र
श्रीभक्तमाल
श्रीश्रीचैतन्य चरितावली
विदुरनीति
भक्तराज हनुमान्
प्रेमी भक्त
भक्त नरसिंह मेहता
श्रीभीष्मपितामह
सती द्रौपदी
भक्त सुमन
महात्मा विदुर
भक्त नारी
श्रीजैमिनीयाश्वमेधपर्व
श्री एकनाथ चरित्र
प्राचीन भक्त
देवर्षि नारद
भागवतरत्न प्रह्लाद
भक्त पंचरत्न
प्रेमी भक्त उद्धव
भक्त बालक
भक्त सप्तरत्न
भक्त रत्नाकर
आदर्श भक्त
भक्त महिलारत्न
भक्त सुधाकर
भक्तराज ध्रुव
भक्त चन्द्रिका
भक्त सरोज
भक्त कुसुम
भक्त सौरभ
भक्त दिवाकर
सत्यप्रेमी हरिश्चन्द्र
श्रीभक्तमाल
श्रीश्रीचैतन्य चरितावली
विदुरनीति
भक्तराज हनुमान्
प्रेमी भक्त
भक्त नरसिंह मेहता
श्रीभीष्मपितामह
सती द्रौपदी
भक्त सुमन
महात्मा विदुर
भक्त नारी
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प्राचीन भक्त
देवर्षि नारद
भागवतरत्न प्रह्लाद
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भक्त बालक
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भक्तराज ध्रुव
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भक्त कुसुम
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भक्त दिवाकर
सत्यप्रेमी हरिश्चन्द्र