सभी रसायन हम करी, नहीं नाम सम कोय। रंचक घटमें संचरे, सब तन कंचन होय॥ जब ही नाम हृदय धर्यो, भयो पापको नास। मानौ चिनगी अग्निकी, परी पुराने घास॥ जागनसे सोवन भला, जो कोइ जाने सोय। अन्तर लव लागी रहै, सहजे सुमिरन होय॥ लेनेको हरि नाम है, देनेको अन्न दान। तरनेको आधीनता, डूबनको अभिमान॥ कबिरा सब जग निर्धना, धनवन्ता नहिं कोय। धनवन्ता सोइ जानिये, जाहि नाम धन होय॥